राजनीति
नीतीश कुमार के अधूरे सपनों को पूरा करेंगे: निशांत कुमार
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र और जदयू नेता निशांत कुमार गुरुवार को पटना स्थित पार्टी कार्यालय पहुंचे, जहां कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे अपने पिता के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और जनता का आशीर्वाद उनके साथ बना रहे।
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद यह माना जा रहा था कि जदयू कोटे से निशांत कुमार प्रदेश में डिप्टी सीएम बन सकते हैं, लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया।
निशांत कुमार से जब मीडिया ने डिप्टी सीएम बनने को लेकर सवाल किया तो वह टाल गए। उन्होंने कहा कि उनका फोकस बिहार को आगे बढ़ाना है। पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती देना है।
जदयू नेता ने बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हम सम्राट भैया को ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं। उनके नेतृत्व में राज्य विकास की नई दिशा में आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार काम कर रही है और हम सभी उनके साथ मिलकर काम करेंगे। मेरे पिता का मार्गदर्शन हमेशा मिलता रहेगा।
मीडिया से बातचीत के दौरान निशांत कुमार ने कहा कि नीतीश कुमार ने 20 साल में बहुत विकास कार्य किए हैं। हम पिताजी के कार्यों को जन-जन तक ले जाएंगे। पिताजी के अधूरे सपने को पूरा करेंगे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई में बिहार में नई सरकार का गठन हो गया है और मंत्रियों के बीच विभागों का भी बंटवारा कर दिया गया है।
सीएम सम्राट चौधरी ने अपने पास सामान्य प्रशासन, गृह, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी और निर्वाचन समेत कुल 29 विभाग रखे हैं। इसके साथ ही डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी को जल संसाधन, संसदीय कार्य, सूचना एवं जनसंपर्क, भवन निर्माण, अल्पसंख्यक कल्याण समेत 10 विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही डिप्टी सीएम बिजेन्द्र प्रसाद यादव ऊर्जा, योजना एवं विकास, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन समेत कुल 8 विभागों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
राजनीति
लोकसभा और राज्यसभा में फिर हंगामा, दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित

राज्यसभा और लोकसभा में मंगलवार को एक बार फिर हंगामा व नारेबाजी हुई। संसद में जारी गतिरोध और हंगामे के कारण राज्यसभा व लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई, वहीं राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। कार्यवाही स्थगित किए जाने से पहले, राज्यसभा में हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बोलने के लिए सदन में खड़े हुए। हालांकि राज्यसभा में जारी हंगामे के कारण वह अपनी बात नहीं रख सके।
दरअसल राज्यसभा में सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर तक शांति बनी रही। इस दौरान संसद की विभिन्न समितियों से जुड़ी कई रिपोर्टों व पेपर सदन में रखे गए। कई सदस्यों ने यहां अपनी अपनी समितियों से जुड़ी रिपोर्ट व पेपर सदन में प्रस्तुत किए। इस कार्यवाही के बाद राज्यसभा में शून्यकाल की कार्यवाही शुरू की जानी थी। लेकिन तभी विपक्षी सांसदों ने जमकर नारेबाजी शुरू कर दी।
विपक्ष के कई सांसद दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस बल के उपयोग का मुद्दा सदन में उठाना चाहते है। वहीं कई सांसद राम मंदिर चढ़ावे का मुद्दा उठा रहे हैं। इसको लेकर सदन में लगातार हंगामा व नारेबाजी होती रही। राज्यसभा व लोकसभा दोनों ही सदनों में मंगलवार को यह हंगामा जारी रहा।
लोकसभा में सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही प्रारंभ होने के साथ ही सदन में हंगामा शुरू हो गया। लोकसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी को देखते हुए कार्यवाही शुरू होने के कुछ देर बाद ही सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
वहीं राज्यसभा में भारी हंगामे व नारेबाजी के बीच कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही संचालित की गई। लेकिन कुछ ही देर बाद कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
गौरतलब है कि संसद में लगातार हंगामा व गतिरोध बना हुआ है जिससे विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। दोनों सदनों में विशेष उल्लेख शून्यकाल व प्रश्न काल जैसी महत्वपूर्ण कार्यवाही प्रभावित हुई हैं। मानसून सत्र के दौरान लगातार यह स्थिति बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान को साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत: उपराष्ट्रपति रजा आरिफ

ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि हमारे दुश्मन साजिशें रचेंगे और देश को नुकसान पहुंचाने का मौका तलाशते रहेंगे। इसलिए देश की साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि विरोधियों की साजिशों से निपटने के लिए ईरान को पूरी तरह तैयार रहना होगा।
इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (आईआरएनए) की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास मुख्यालय की बैठक में आरिफ ने दुश्मनों की साजिशों को नाकाम करने के लिए देश को साइबर सुरक्षा और निष्क्रिय रक्षा के क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत करनी होगी।
उन्होंने कहा कि शहीद इस्लामी क्रांति के नेता की ओर से तय किए गए विकास दृष्टि कार्यक्रम के तहत ईरान को उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में क्षेत्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान हासिल करना चाहिए और वैश्विक स्तर पर भी एक प्रभावशाली भूमिका निभानी चाहिए।
आईआरएनए के अनुसार, उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा को मजबूत करना एक जरूरी रणनीति है, क्योंकि दुश्मन ईरानी जनता के सामने हाल की अपनी हार के बावजूद साजिशें रचना बंद नहीं करेगा और हमारे देश को नुकसान पहुंचाने का मौका तलाशता रहेगा। हमें पूरी तरह तैयार रहते हुए विरोधियों की साजिशों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए और निष्क्रिय रक्षा पर भी ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि अमेरिका और इजराइल ने जून 2025 में ईरान के खिलाफ अपना पहला युद्ध शुरू किया था, जो 12 दिन तक चला। इसके बाद उनका दूसरा सैन्य हमला इस वर्ष 2026 में 28 फरवरी को शुरू हुआ और 40 दिन के बाद अप्रैल की शुरुआत में रुक गया।
मोहम्मद रजा आरिफ ने दावा किया कि दोनों युद्धों में ईरान के मजबूत प्रतिरोध और जवाबी सैन्य अभियानों ने विरोधियों को युद्धविराम स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया।
महाराष्ट्र
ममता बनर्जी पर हमला लोकतंत्र पर सीधा आघात: ‘सामना’ शिवसेना (यूबीटी)

शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) ने मंगलवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी पर हुआ हमला केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक हस्ती पर हमला नहीं है, यह हमारे गणतंत्र के लोकतांत्रिक ताने-बाने पर सीधा प्रहार है।
पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में कहा, “पत्थरों, लाठियों और लोहे की छड़ों से लैस एक भीड़ ने उनके वाहन को घेर लिया, जिसका स्पष्ट उद्देश्य एक सशक्त विपक्षी आवाज को खत्म करना प्रतीत होता था। उनका बच जाना महज संयोग की बात है, लेकिन इस घटना से एक भयावह सच्चाई सामने आती है, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की स्थिति सभी स्वीकार्य सीमाओं को पार कर चुकी है।”
‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया है कि राज्य में हाल ही में हुए राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। जिनमें अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी जैसे सांसद और विधायक शामिल हैं, सत्ताधारी दल के रवैये में यह विरोधाभास साफ तौर पर दिखाई देता है।
उन्होंने आगे लिखा कि जहां केंद्रीय नेतृत्व दलबदलुओं का गर्मजोशी से स्वागत करता है, वहीं राज्य में राजनीतिक आधार तैयार करने वाले नेता जानलेवा हमलों के शिकार हो रहे हैं। जब केंद्र सरकार ने पहले पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था के पतन का हवाला देकर अपने हस्तक्षेपों को उचित ठहराया था, तो यह सवाल उठता है, क्या अनियंत्रित शत्रुता और राज्य द्वारा स्वीकृत मनमानी का यह मौजूदा माहौल ही उनके लिए कानून व्यवस्था की परिभाषा है?
संपादकीय में आगे कहा गया कि विधानसभा चुनावों के दौरान, केंद्र प्रशासन ने निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित करने और व्यवस्था बनाए रखने के बहाने लाखों केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया था। आज, जब लक्षित राजनीतिक हिंसा बढ़ रही है, तो वह तत्परता स्पष्ट रूप से गायब हो गई है। शांति बहाल करने के लिए आवश्यक केंद्रीय बलों को तैनात करने में अनिच्छा एक चिंताजनक दोहरे मापदंड को उजागर करती है। जब पूर्व मुख्यमंत्री, मौजूदा सांसद और निर्वाचित प्रतिनिधि बार-बार सड़क हिंसा का शिकार होते हैं, तो यह संस्थागत शासन के पूर्ण पतन को दर्शाता है।”
संपादकीय में आगे कहा कि राज्य में विपक्षी नेतृत्व की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी उतनी ही चिंताजनक है। एक वरिष्ठ राजनीतिक हस्ती पर हुए हिंसक हमले को महज ‘जनता और एक राजनीतिक दल के बीच की लड़ाई’ बताकर पेश करना गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक दोनों है। इस तरह की बयानबाजी भीड़ हिंसा को तर्कसंगत ठहराती है और राज्य की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का संकेत देती है। इस गलत तर्क के आधार पर, जंतर-मंतर पर युवाओं के विरोध प्रदर्शन सहित किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन या शिकायत को नागरिकों और प्रधानमंत्री के बीच व्यक्तिगत संघर्ष के रूप में गलत तरीके से पेश किया जा सकता है, जिससे राज्य अपने व्यवस्था बनाए रखने के मूलभूत कर्तव्य से विमुख हो जाता है।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने तर्क दिया कि एक कार्यशील लोकतंत्र में चुनावी जीत-हार मतपेटी में तय होती है। राजनीतिक सत्ता के लिए संयम, जवाबदेही और संवैधानिक मानदंडों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है। शिवसेना ने कहा कि वर्तमान स्थिति जहां असहमति को अत्यधिक बल प्रयोग से दबाया जाता है, छात्र आंदोलनों को कुचला जाता है और विपक्षी नेताओं को लगातार शारीरिक धमकियों का सामना करना पड़ता है। एक ऐसे वातावरण की ओर इशारा करती है जहां गैर-सरकारी संगठन राजनीतिक इच्छाशक्ति को लागू करने के लिए बेखौफ महसूस करते हैं।
ठाकरे खेमे का दावा था कि यदि विपक्ष को शासन का एक अनिवार्य स्तंभ मानने के बजाय शारीरिक रूप से समाप्त किए जाने वाले शत्रु के रूप में देखा जाए तो लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता। हिंसक तत्वों को बिना किसी दंड के सक्रिय रहने देना शक्ति का प्रदर्शन नहीं है; यह अराजकता की ओर ले जाने वाला संकेत है जो अंततः राष्ट्र को बनाए रखने के लिए गठित संस्थाओं को ही कमजोर कर देगा।
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