खेल
वानखेड़े ने पहले वनडे के लिए दर्शकों को आकर्षित किया
मुम्बई, 17 मार्च : फिर से तैयार किए गए वानखेड़े स्टेडियम ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शुक्रवार को पहले वनडे के लिए भारी संख्या में दर्शकों को आकर्षित किया। हालांकि यह कामकाजी दिन था। मुम्बई क्रिकेट संघ के पुनरुद्धार कार्य का पहला चरण पूरा होने के बाद यह पहला मैच था।
लगभग 20 हजार लोग मैच देखने पहुंचे, हालांकि यह 33 हजार दर्शकों की पूर्ण क्षमता से काफी कम था। वानखेड़े स्टेडियम तीन वर्षों के बाद पहला वनडे आयोजित कर रहा था।
मुम्बई क्रिकेट संघ (एमसीए) ने चरणबद्ध तरीके से पुनरुद्धार कार्य शुरू किया था जब कुछ प्रशंसकों ने स्टेडियम में सुविधाओं की शिकायत की थी। मंगलवार को एमसीए ने सोशल मीडिया के जरिये पुनरुद्धार का पहला चरण पूरा होने की घोषणा की थी। वानखेड़े स्टेडियम ने 2011 विश्व कप का फाइनल आयोजित किया था।
यह जनवरी 2020 के बाद से स्टेडियम में पहला वनडे था। इन दोनों टीमों ने 14 जनवरी को वानखेड़े में आखिरी मैच खेला था जिसे ऑस्ट्रेलिया ने 10 विकेट से जीता था।
मैच ने नामी हस्तियों को आकर्षित किया है जिसमें सुपरस्टार रजनीकांत, महाराष्ट्र के राज्यपाल रमेश बैस और बॉलीवुड स्टार अजय देवगन शामिल हैं। मैच में टिकट भी सस्ती नहीं हैं और इनकी कीमत 2000 और 2500 रुपये रखी गयी है।
हालांकि एमसीए ने स्टेडियम के पुनरुद्धार का दावा किया है लेकिन कुछ प्रशंसकों ने स्टैंड में गन्दी कुर्सियों की फोटो लगा रखी हैं।
राष्ट्रीय
एलपीजी लेकर गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंचा जहाज ‘नंदा देवी’

भुज, 17 मार्च : भारतीय जहाज नंदा देवी मंगलवार को एलपीजी लेकर गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंच गया है। अधिकारियों ने इसी पुष्टि करते हुए कहा कि भारतीय जहाज नंदा देवी एलपीजी लेकर मंगलवार को सुबह लगभग 11.25 बजे गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर पहुंचा। इस हफ्ते एलपीजी लेकर पश्चिमी तट पर पहुंचने वाला ‘नंदा देवी’ दूसरा जहाज है। इससे एक दिन पहले ‘शिवालिक’ मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था।
दोनों जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर भारत पहुंचे हैं। जलडमरूमध्य ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष के कारण बाधित है। ईरान की ओर से अनुमति मिलने के बाद ये जहाज भारत पहुंचे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से ईरान की बढ़ती सैन्य कार्रवाई और चेतावनियों के चलते फरवरी के अंत से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है।
सोमवार को कांडला बंदरगाह के अधिकारियों ने निर्देश जारी किया था कि एलपीजी ले जाने वाले सभी जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर लंगर डालने की अनुमति दी जाए ताकि माल की अनलोडिंग में तेजी लाई जा सके और देरी को कम किया जा सके।
दीनदयाल बंदरगाह प्राधिकरण ने जहाज एजेंटों को भेजे गए एक परिपत्र में कहा कि बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने बंदरगाहों को एलपीजी से लदे जहाजों को प्राथमिकता के आधार पर लंगर डालने का निर्देश दिया है ताकि देश भर में खाना पकाने की गैस का निर्बाध वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
कतर से लगभग 46,000 टन एलपीजी लेकर आने वाले शिवालिक जहाज ने अपनी नौ दिवसीय यात्रा पूरी की और सोमवार शाम को मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचा था। बंदरगाह अधिकारियों ने पहले से ही डॉक्यूमेंटेशन और डॉकिंग की व्यवस्था कर ली थी ताकि बिना किसी देरी के माल उतारने का काम शुरू किया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि ये दोनों जहाज घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए एलपीजी की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा हैं, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक महत्वपूर्ण हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है।
नंदा देवी के पहुंचने के साथ ही, संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 81,000 टन कच्चा तेल लेकर आ रहा एक अन्य जहाज ‘जग लाडकी’ रास्ते में है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज मौजूद थे, जिनमें कुल 611 नाविक सवार थे।
राजनीति
204 पूर्व अधिकारियों ने लिखा खुला पत्र; संसद में राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाए, माफी की मांग

नई दिल्ली, 17 मार्च : देश के 204 पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों ने संसद की गरिमा को लेकर चिंता जताते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। इन हस्ताक्षरकर्ताओं में 116 सेवानिवृत्त सशस्त्र बल अधिकारी, 84 सेवानिवृत्त नौकरशाह (जिनमें 4 राजदूत शामिल हैं) और 4 वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं।
जारी पत्र में कहा गया है कि भारत की संसद देश की संवैधानिक व्यवस्था का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है, जहां जनता की आवाज को अभिव्यक्ति मिलती है, कानून बनाए जाते हैं और गणराज्य की बुनियाद मजबूत होती है। ऐसे में संसद की गरिमा केवल परंपरा का विषय नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा का अहम हिस्सा है।
संसद भवन के भीतर सांसदों का आचरण उच्चतम मानकों के अनुरूप होना चाहिए। लोकसभा और राज्यसभा के कक्षों के साथ-साथ संसद परिसर के अन्य हिस्से (जैसे सीढ़ियां, गलियारे और लॉबी) भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं और वहां भी उसी गरिमा का पालन किया जाना चाहिए।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने 12 मार्च की घटना पर विशेष चिंता जताई। उनके अनुसार, उस दिन माननीय स्पीकर द्वारा संसद परिसर में किसी भी तरह के प्रदर्शन या विरोध पर स्पष्ट रोक लगाने के बावजूद विपक्ष ने इस निर्देश की अनदेखी की। खुले पत्र में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने जानबूझकर इस आदेश का उल्लंघन किया, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि संसदीय परंपराओं के प्रति अनादर भी दर्शाता है।
पत्र में यह भी कहा गया कि राहुल गांधी और कुछ अन्य सांसद संसद की सीढ़ियों पर बैठकर चाय और बिस्कुट लेते हुए दिखाई दिए, जो देश की सर्वोच्च विधायी संस्था के सदस्यों के अनुरूप आचरण नहीं है। संसद की सीढ़ियां किसी प्रदर्शन या राजनीतिक मंचन का स्थान नहीं हैं।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह व्यवहार अहंकार और विशेषाधिकार की भावना को दर्शाता है और संसद जैसी संस्था के प्रति सम्मान की कमी को उजागर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद को लोकतंत्र का मंदिर माना जाता है, जहां जनप्रतिनिधि गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए आते हैं, लेकिन इस तरह के व्यवहार से उसकी गरिमा को ठेस पहुंचती है।
पत्र में आगे कहा गया कि राहुल गांधी पहले भी संसद के भीतर और बाहर इस तरह के ‘नाटकीय’ व्यवहार के जरिए सार्वजनिक संवाद के स्तर को गिराते रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि वे संसद को गंभीर बहस के मंच के बजाय एक राजनीतिक मंच के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने यह भी कहा कि ऐसे आचरण से न केवल संसद की कार्यवाही बाधित होती है, बल्कि जनता का समय और संसाधन भी व्यर्थ होते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार की आलोचना करने के प्रयास में राहुल गांधी देश और उसके लोकतंत्र की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि सांसदों को यह समझना चाहिए कि उनके हर कदम का प्रतीकात्मक और संस्थागत महत्व होता है। उन्होंने राहुल गांधी और उनके सहयोगियों के इस व्यवहार को लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने वाला बताया।
पत्र में राहुल गांधी से देश से माफी मांगने और आत्ममंथन करने की अपील की गई है। इस पत्र के समन्वयक जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य हैं, जिन्होंने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर दिया है।
राजनीति
कांग्रेस के काले कारनामों ने भारत के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को किया प्रभावितः निशिकांत दुबे

नई दिल्ली, 17 मार्च : झारखंड के गोड्डा से चौथी बार भाजपा से सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया एक्स पर एक के बाद एक पोस्ट कर कांग्रेस पार्टी को घेरा है।
निशिकांत दुबे ने एक्स पर लिखा है, “आज से एक नया दैनिक दिनचर्या का कार्य आरंभ कर रहा हूं। आजादी के बाद, कांग्रेस के काले कारनामे जिसने भारत के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को प्रभावित किया।” 17 मार्च 1959 को, आज ही के दिन, तिब्बत से दलाई लामा जी भारत आए थे, इसी घटना के विरोध में चीन ने भारत पर 1962 का आक्रमण किया। आज भी हमारी लगभग 78 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन चीन ने इस युद्ध के बाद अपने कब्जे में जबरदस्ती रखी है। चीन हमारा पड़ोसी इसी घटना के बाद बना।”
वहीं, दूसरे पोस्ट में संसद में जारी गतिरोध के बीच सांसद निशिकांत ने विपक्ष के व्यवहार और निलंबन को लेकर लिखा है। उन्होंने पोस्ट में कहा, “आज सभी कांग्रेस पार्टी के सांसदों का निलंबन शायद वापस होगा। पहला समझौता हुआ कि विपक्ष के नेता अनर्गल, बेबुनियाद, तथ्यहीन, बकवास बातें सदन में नहीं करेंगे, उसके बदले मैं शांतिपूर्ण व्यवहार करूंगा। दूसरा, वेल में विपक्ष के सांसद सत्ता पक्ष की तरफ नहीं जाएंगे और कागज नहीं फेंकेंगे। लोकसभा के मेज पर चढ़कर उत्पात नहीं मचाएंगे और लोकसभा के अधिकारियों के साथ अभद्रता नहीं करेंगे। लोकतंत्र की मर्यादा बनी रहे, जनता ने हमें वाद-विवाद के लिए संसद बनाया है, ना कि उत्पात मचाने के लिए।”
इसके अलावा, विदेशी रिपोर्ट और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए निशिकांत ने एक और तीखा हमला बोला है। उन्होंने तीसरे एक्स पोस्ट में लिखा, “विदेशी सोरोस रिपोर्ट से देश को बर्बाद करने की सुपारी लेने वाली कांग्रेस। भाजपा ने कभी भी अपने आंतरिक मामलों में विदेशी रिपोर्ट का सहारा नहीं लिया। 2005 से 2013 तक की सभी विदेशी रिपोर्ट कांग्रेस पार्टी तथा भारत सरकार को बायकॉट करने की बात करती थी। हमने संसद में भी इसकी चर्चा नहीं कराई।”
इसके पहले 13 मार्च को निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को ‘वोकेशनल लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा’ बताया था। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी का मुख्य उद्देश्य पिकनिक मनाना है। इसलिए पिकनिक मनाने वाले को पूरा देश पहचानता है। उन्हें न तो गरीबों की चिंता है और न ही देश की चिंता है, देश उन्हें अच्छी तरह से जानता है।”
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