अंतरराष्ट्रीय समाचार
विवेक मूर्ति बाइडेन प्रशासन की हेल्थकेयर टीम में होंगे शामिल
भारतीय मूल के पूर्व अमेरिकी सर्जन जनरल विवेक मूर्ति के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन की हेल्थकेयर टीम में बड़ी और अहम भूमिका के लिए चुने जाने की प्रबल संभावना है।
मूर्ति वर्तमान में बाइडेन-हैरिस ट्रांजिशन कोविड-19 टास्क फोर्स के सह-अध्यक्ष हैं।
विलमिंगटन (डेलावेयर) में बाइडेन ट्रांजिशन हेडक्वार्टर से आ रही खबरों के मुताबिक, बाइडेन द्वारा अगले सप्ताह स्वास्थ्य और मानव सेवा सचिव के लिए अपनी पसंद की घोषणा करने की उम्मीद है और मूर्ति कथित तौर पर इस पद के लिए दौड़ में आगे हैं और साथ ही सर्जन जनरल की अपनी पूर्व भूमिका के लिए एक शीर्ष पसंद हैं।
मूर्ति 15 दिसंबर, 2014 से 21 अप्रैल, 2017 तक अमेरिका के 19 वें सर्जन जनरल के रूप में काम कर चुके हैं।
अपने मृदुभाषी स्वभाव के लिए पहजाने जाने वाले, मूर्ति बेस्टसेलर ‘टुगेदर : हीलिंग पॉवर ऑफ ह्यूमन कनेक्शन इन ए समटाइम्स लोनली वल्र्ड’ के लेखक भी हैं।
मूर्ति को 2017 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस्तीफा देने के लिए कहा गया था, हालांकि उन्हें 2014 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा चार साल के कार्यकाल के लिए नामित किया गया था।
सर्जन जनरल के रूप में सेवा करते हुए, मूर्ति ने अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच इबोला और जीका वायरस के प्रसार का मुकाबला किया।
बाइडेन ने गुरुवार को एंथनी फौची के साथ भी बात की, जो नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शस डिजीज का नेतृत्व करते हैं।
बाइडेन ने ‘सीएनएन’ को बताया कि वह फौची को एक मुख्य चिकित्सा सलाहकार और अपनी कोविड-19 सलाहकार टीम का सदस्य बना रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
कनाडा और अमेरिका दौरे पर जाएंगी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आर्थिक और वित्तीय साझेदारी मजबूत करने पर रहेगा फोकस

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगी, जिसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के साथ भारत की आर्थिक और वित्तीय साझेदारी को मजबूत करना, निवेश संबंधों को गहरा करना और वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर सहयोग को आगे बढ़ाना है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, यात्रा के पहले चरण में सीतारमण कनाडा के टोरंटो पहुंचेंगी, जहां वह कनाडा के वित्त एवं राष्ट्रीय राजस्व मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन के साथ आयोजित होने वाले पहले आर्थिक एवं वित्तीय संवाद में भाग लेंगी। यह मंच दोनों देशों को व्यापक आर्थिक परिस्थितियों, वित्तीय क्षेत्र सहयोग, द्विपक्षीय निवेश अवसरों और साझा वैश्विक प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श का अवसर प्रदान करेगा। इसके साथ ही भारत-कनाडा संबंधों के आर्थिक और वित्तीय स्तंभ को और मजबूत करने पर भी चर्चा होगी।
टोरंटो में वित्त मंत्री एक विशेष निवेश गोलमेज बैठक में भी शामिल होंगी, जिसमें ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, उद्योग प्रमुखों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी। इस बैठक का उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच कारोबारी संपर्क बढ़ाना, नए निवेश अवसरों की पहचान करना और दीर्घकालिक व्यावसायिक साझेदारियों को प्रोत्साहित करना है। इस दौरान गिफ्ट सिटी-आईएफएससी में उपलब्ध अवसरों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
सीतारमण कनाडा स्थित विभिन्न कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ अलग-अलग बैठकें भी करेंगी। इन चर्चाओं में भारत की विकास संभावनाओं, निवेश वातावरण और भारतीय बाजार में कनाडाई कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के अवसरों पर विशेष ध्यान रहेगा।
कनाडा के बाद वित्त मंत्री अमेरिका जाएंगी, जहां उनका कार्यक्रम शिकागो, एशविल (नॉर्थ कैरोलिना) और न्यूयॉर्क में आयोजित होगा। शिकागो में वह प्रमुख निवेशकों के साथ एक गोलमेज सम्मेलन में भाग लेंगी और निजी क्षेत्र के अग्रणी उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगी। इन चर्चाओं का केंद्र भारत में निवेश अवसर, आर्थिक परिदृश्य तथा भारत-अमेरिका व्यापार एवं निवेश संबंधों को मजबूत करना होगा।
इस दौरान वह यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के पोल्स्की सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड इनोवेशन का भी दौरा करेंगी, जहां नवाचार, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी आधारित विकास के क्षेत्रों में संभावित सहयोग पर चर्चा हो सकती है।
यात्रा के अगले चरण में एशविल में वित्त मंत्री जी-20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगी। अमेरिका की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में वैश्विक आर्थिक विकास, वित्तीय स्थिरता, निवेश और अन्य प्रमुख आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होगी।
न्यूयॉर्क में सीतारमण अग्रणी कंपनियों के मुख्य अधिकारियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ निवेशक गोलमेज बैठक में हिस्सा लेंगी। इसके अलावा, उन्हें नैस्डैक द्वारा विशेष बेल-रिंगिंग समारोह में भी आमंत्रित किया गया है।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह यात्रा वित्तीय बाजारों में तेजी से बढ़ती तकनीकी भूमिका, प्रौद्योगिकी और पूंजी बाजारों के बदलते संबंधों तथा वैश्विक निवेश रुझानों को समझने का भी अवसर प्रदान करेगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान का दावा: दक्षिणी फार्स प्रांत में मिला 212 अरब क्यूबिक मीटर से ज्यादा प्राकृतिक गैस भंडार

ईरान ने घोषणा की है कि उसके दक्षिणी फार्स प्रांत में 212 अरब क्यूबिक मीटर से ज्यादा प्राकृतिक गैस का भंडार मिला है।
ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने रविवार को सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा कि इस भंडार से 160 अरब क्यूबिक मीटर से अधिक गैस निकाली जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस गैस क्षेत्र का विकास जल्द से जल्द शुरू करने के लिए अधिकारी तेजी से जरूरी कदम उठा रहे हैं।
उन्होंने इस गैस को ‘स्वीट’ प्राकृतिक गैस बताया। इसका मतलब है कि इसमें हाइड्रोजन सल्फाइड की मात्रा बहुत कम है, जिससे गैस के उत्पादन और विकास की लागत कम हो सकती है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब ईरान का ऊर्जा क्षेत्र कई महीनों से उसके बुनियादी ढांचे पर हुए अमेरिका-इजरायल के हमलों और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के असर का सामना कर रहा है।
पाकनेजाद ने कहा कि यह खोज ‘देश के ऊर्जा भविष्य के लिए एक बेहद मजबूत आधार साबित होगी।’
इस बीच, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है, तो एक भी बूंद तेल का निर्यात नहीं होगा, न होर्मुज स्ट्रेट के जरिए और न ही पर्शियन गल्फ के किसी अन्य हिस्से से। ईरान, ईरानी जनता के खिलाफ अमेरिका के आर्थिक युद्ध में किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई मानेगा।”
उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों के जवाब में आई।
ट्रंप ने बुधवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा था कि ईरान को समर्थन देने वाले किसी भी देश के खिलाफ ‘अब तक की सबसे कड़ी आर्थिक कार्रवाई’ की जाएगी।
उन्होंने कहा, “यह अभूतपूर्व स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा।” ट्रंप ने इस कदम को ‘आर्थिक डी-डे” बताया।
18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में चल रहे संघर्षों को समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तनाव खत्म करने की बात शामिल थी।
इस समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर बातचीत करके एक अंतिम समझौते तक पहुंचना था। यह समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई, लेकिन पिछले महीने दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के बाद इन वार्ताओं का भविष्य फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
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अमेरिका ने इजरायल के लिए खाड़ी देशों की सुरक्षा दांव पर लगाई: बाकर कालीबाफ

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहा है कि ईरान को पड़ोसी देशों से क्षेत्र में नई सुरक्षा व्यवस्थाओं और आर्थिक सहयोग को लेकर कई संदेश मिले हैं।
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में कालीबाफ ने लिखा, “अमेरिका ने इजरायल के हितों के लिए दबाव बनाने और अपने सहयोगी देशों के हितों की पूरी तरह अनदेखी करके उनके सुरक्षा हितों को खतरे में डाल दिया है।”
उन्होंने कहा, “वास्तविक शांति और सुरक्षा तभी आ सकती है जब क्षेत्र के देश अपनी खुद की स्वतंत्र और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था विकसित करें।”
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में तेहरान ने इजरायल और क्षेत्र के विभिन्न देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागे थे।
मीडिया रिपोर्टों में क्षेत्रीय अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि खाड़ी अरब देश वॉशिंगटन से नाराज हैं। उनका मानना है कि अमेरिका ने युद्ध की शुरुआत तो की, लेकिन उन्हें उसके असर से पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी।
इस बीच, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रेजाई ने चेतावनी दी है कि जो भी देश ईरान के खिलाफ अमेरिका की आर्थिक कार्रवाई में शामिल होगा, उसे तेहरान अपना ‘दुश्मन’ मानेगा।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को घोषणा की थी कि ईरान को सहारा देने वाले किसी भी देश के खिलाफ ‘अब तक का सबसे कड़ा आर्थिक अभियान’ चलाया जाएगा। उन्होंने इसे ‘अभूतपूर्व स्तर की आर्थिक लड़ाई और अलगाव’ बताया था।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव रेजाई ने शनिवार को सरकारी टीवी चैनल आईआरआईबी को दिए एक इंटरव्यू में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि ईरान पहले ऐसे देशों से बातचीत करेगा और उनसे इस विवाद से दूर रहने की अपील करेगा, लेकिन अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो तेहरान उनके हितों को निशाना बनाएगा। रेजाई ने चेतावनी दी कि यदि आसपास के देश अमेरिका के आर्थिक दबाव अभियान में शामिल होते हैं, तो ईरान ‘होर्मुज स्ट्रेट से एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होने देगा।’
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