अंतरराष्ट्रीय
पहला वनडे जीतने के बावजूद दक्षिण अफ्रीका 11वें स्थान पर
दक्षिण अफ्रीका भारत से गुरूवार को पहला वनडे नौ रन से जीतने के बावजूद आईसीसी पुरुष क्रिकेट विश्व कप लीग तालिका में 11वें स्थान पर है। इस स्थिति से वह अगले साल भारत में होने वाले 50 ओवर के विश्व कप के लिए सीधे क्वालीफाई नहीं कर सकता है।
यदि दक्षिण अफ्रीका तीन मैचों की सीरीज को क्लीन स्वीप भी कर ले और इंग्लैंड के खिलाफ घर में एकदिवसीय मैच भी जीत ले और हॉलैंड के खिलाफ निलंबित घरेलू सीरीज के बचे दोनों मैच भी जीत ले तो भी उसका विश्व कप के लिए सीधे क्वालीफाई करना मुश्किल है।
भारत सुपर लीग तालिका में छठे स्थान पर है। केवल जिम्बाब्वे (12वें) और हॉलैंड (13वें) तालिका में दक्षिण अफ्रीका से पीछे हैं।
दक्षिण अफ्रीका भारत के खिलाफ सीरीज शुरू होने से पहले 13 मैचों में मात्र चार जीत के साथ 11वें स्थान पर था। सुपर लीग तालिका में कुल 13 टीमों को रैंकिंग मिली है। निचले स्थान की पांच टीमें दो साल की सुपर लीग क्वालिफिकेशन अवधि के बाद एक क्वालिफाइंग टूर्नामेंट खेलेंगी।
दक्षिण अफ्रीका ने अगले साल घरेलू टी20 लीग के चलते ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज छोड़ दी थी जिससे उसे 30 सुपर लीग अंक गंवाने पड़े। दक्षिण अफ्रीका ने इंग्लैंड से इंग्लैंड में सीरीज 1-1 से बराबर खेली लेकिन इससे उसकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
अंतरराष्ट्रीय
मिडिल ईस्ट संकट और अफगानिस्तान युद्ध से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमराई, बचत उपायों की उम्मीद नहीं

नई दिल्ली, 16 मार्च : ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट में पैदा हुए संकट से पाकिस्तान को बहुत नुकसान हुआ है। सऊदी अरब के साथ समझौते की वजह से युद्ध में शामिल होने या न होने को लेकर पाकिस्तान के सामने कई मुश्किलें हैं, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर इस्लामाबाद की हालत बदतर होती जा रही है। मिडिल ईस्ट का संकट ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर है।
अफगानिस्तान से युद्ध और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के साथ लगातार लड़ाई ने इसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ये लड़ाइयां पाकिस्तान को न सिर्फ सैन्य मोर्चे पर, बल्कि आर्थिक रूप से भी बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। पाकिस्तान के लिए हालात इतने खराब हैं कि उसे अपनी बची-खुची अर्थव्यवस्था को भी बचाना होगा। इस्लामाबाद ने अब अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कई कदम उठाए हैं और कई मोर्चों पर कई कटौतियों की घोषणा की है।
केंद्रीय और प्रांतीय सरकारी विभागों में सरकारी गाड़ियों को 60 फीसदी तक सड़क से दूर रखने का फैसला किया गया है। सरकारी ऑफिस में ग्रेड-20 के अधिकारी जो 3,00,000 रुपए से ज्यादा कमाते हैं, उनसे अपनी मर्जी से दो दिन की सैलरी छोड़ने को कहा गया है। हालांकि, यह स्वास्थ्य और शिक्षा सेक्टर के लोगों पर लागू नहीं होता है।
सरकार ने प्रांतीय और केंद्रीय सदन के सदस्यों को दो महीने के लिए सैलरी और अलाउंस में 25 फीसदी की कटौती करने का भी निर्देश दिया है। पाकिस्तान सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है, वह है सरकारी गाड़ियों के लिए पेट्रोलियम प्रोविजन को 50 फीसदी कम करना।
कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों, प्रधानमंत्री के स्पेशल असिस्टेंट और सलाहकारों को दो महीने तक अपनी पूरी सैलरी नहीं लेनी होगी। केंद्र और राज्य सरकार के विभागों के गैर-जरूरी खर्च में 20 फीसदी की कटौती की जाएगी। अधिकारियों को अब बिजनेस क्लास में यात्रा नहीं करनी होगी।
विदेश यात्रा के दौरान सभी अधिकारियों को सिर्फ इकॉनमी क्लास में यात्रा करनी होगी। मंत्री, सांसद और अधिकारी सिर्फ जरूरी विदेश यात्राएं ही कर सकते हैं। सरकारी ऑफिसों के लिए नए टिकाऊ सामान की खरीद पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। आईटी खरीद के लिए जांच के बाद सीमित खरीद को छूट दी गई है। सरकारी डिपार्टमेंट में अब सभी मीटिंग वर्चुअल होंगी।
यह फैसला यात्रा और रहने की लागत दोनों को कम करने के लिए लिया गया है। नई सरकारी गाड़ियों की खरीद पर मौजूदा रोक जून 2026 तक जारी रहेगी। बैंकिंग सेक्टर और जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को छोड़कर, सभी सरकारी ऑफिस हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही खुलेंगे।
सरकारी सेमिनार, ट्रेनिंग सेशन और कॉन्फ्रेंस आयोजित करने से पहले उनकी पहले से जांच और मंजूरी लेनी होगी। पाकिस्तान सरकार ने प्राइवेट सेक्टर के लिए भी ऐसी ही गाइडलाइंस जारी करने की सलाह दी है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है।
पाकिस्तान पर नजर रखने वालों का कहना है कि देश गले तक कर्ज में डूबा हुआ है। अगर मिडिल-ईस्ट में संकट लंबा खिंचता है, तो पाकिस्तान ने खर्च कम करने के लिए जो भी कदम उठाए हैं, उनसे कोई मदद नहीं मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक संकट रहने से न सिर्फ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा, बल्कि यह पूरी तरह से गिर जाएगी। आम तौर पर ईद के दौरान बिजनेस में कुछ बढ़ोतरी होती है।
इन सभी रुकावटों ने रिटेल एक्टिविटी को धीमा कर दिया है और लोग सिर्फ जरूरी चीजें ही खरीद रहे हैं, और पहले की तरह इसी समय में ज्यादा खर्च नहीं कर रहे हैं। पाकिस्तान में कई लोग 6 मार्च को तेल की कीमतें 20 फीसदी बढ़ाने की जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं। तेल की जमाखोरी रोकने के लिए लिया गया यह फैसला उल्टा पड़ गया है क्योंकि इससे लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
इससे कृषि क्षेत्र को नुकसान हुआ है, जो देश की अर्थव्यवस्था का 23 फीसदी हिस्सा है। लोगों को आने-जाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ने से टैक्सी और रिक्शा से सफर करना बहुत महंगा हो गया है। इस फैसले का फूड डिलीवरी राइडर्स पर भी बड़ा असर पड़ा है।
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ईरान में मानवीय मदद के लिए डिजिटल डोनेशन में हो रही परेशानी, दूतावास ने भारत में कैश डोनेट की अपील की

नई दिल्ली, 16 मार्च : ईरान और अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बीच बीते दिन भारत में ईरानी दूतावास ने मानवीय मदद के लिए एक बैंक डिटेल साझा किया था। इस संबंध में ईरानी दूतावास की ओर से अब एक नया अपडेट सामने आया है।
भारत में ईरानी दूतावास ने उन भारतीय नागरिकों का शुक्रिया अदा किया है जिन्होंने चल रहे संघर्ष से प्रभावित ईरानियों को मानवीय मदद देने में दिलचस्पी दिखाई है।
इसके साथ ही ईरानी दूतावास ने यह भी कहा है कि तकनीकी दिक्कतों की वजह से ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए मदद लेना मुश्किल हो गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में ईरानी दूतावास ने डिजिटल डोनेशन में आ रही तकनीकी परेशानी की बात स्वीकार की। ईरानी दूतावास ने कहा, “हमारे प्यारे भारतीय भाइयों और बहनों को उनके लगातार सपोर्ट के लिए धन्यवाद दिया।”
तकनीकी समस्याओं और डोनेशन को लेकर उन्होंने एक्स पर लिखा, “दूतावास के अकाउंट में फंड ट्रांसफर करने में कुछ बताई गई दिक्कतों की वजह से, हम अपने प्यारे भारतीय भाइयों और बहनों को उनके लगातार समर्थन के लिए दिल से शुक्रिया कहना चाहते हैं।”
इसके साथ ही ईरानी दूतावास ने मानवीय मदद के लिए आगे आने वाले लोगों से अभी जीपे (गूगल पे) इस्तेमाल करने से बचने की सलाह दी। एंबेसी ने सुझाव दिया है कि अगर उन्हें ईरान की मदद करनी है तो सीधे नकद के तौर पर मदद करें।
इसमें कहा गया, “कैश डोनेशन सीधे दूतावास में किया जा सकता है।” दूतावास के अधिकारियों ने यह भी कहा कि वे ऑनलाइन ट्रांसफर की दिक्कतों को ठीक करने के लिए काम कर रहे हैं।
इससे पहले ईरानी दूतावास ने लिखा था, “हमारे भारतीय भाई-बहनों में से दान देने वाले और भलाई करने वाले सदस्यों की बार-बार की अपील के बाद चल रहे युद्ध से प्रभावित ईरानी देशवासियों को मानवीय मदद देने के लिए, नई दिल्ली में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का दूतावास कैश डोनेशन जमा करने के लिए बैंक अकाउंट नंबर की घोषणा करता है। बैंक अकाउंट का नाम: एम्बेसी ऑफ ईरान, बैंक अकाउंट नंबर: 11084232535 और आईएफएससी कोड: एसबीआईएन0000691 है। दूतावास ने आगे लिखा कि अगर आप चाहें तो स्क्रीनशॉट या पेमेंट रसीद व्हाट्सएप से +91 9899812318 पर भी भेज सकते हैं।”
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ट्रंप के दावों के बीच मोजतबा खामेनेई ने दिखाई आंख, बोले-मुआवजा दो या अंजाम भुगतो

तेहरान, 16 मार्च : एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह बार-बार दावा कर रहे हैं कि ईरान के खिलाफ 28 फरवरी से शुरू हुई जंग अपने अंतिम चरण में है। और अब उसके पास जवाबी कार्रवाई की ताकत नहीं बची है। वहीं दूसरी ओर ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के तल्ख तेवरों से यह बिलकुल महसूस नहीं हो रहा कि वह इजरायल-अमेरिका के आगे घुटने टेकने को तैयार है।
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश में हुए नुकसान के लिए दुश्मन देश से मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कहा है कि हम दुश्मन से मुआवजा लेंगे। यदि वह इनकार करता है तो हम उसकी उतनी संपत्ति ले लेंगे जितनी हम तय करेंगे और अगर यह भी संभव नहीं हुआ तो हम उसकी उतनी ही संपत्ति तबाह कर देंगे।
यह जानकारी सिन्हुआ समाचार एजेंसी ने मोजतबा खामेनेई के टेलीग्राम अकाउंट पर किए एक पोस्ट के हवाले से दी। इससे पहले गुरुवार को मोजतबा खामेनेई ने देश के नाम अपने पहले संदेश में निरंतर प्रतिरोध का आह्वान किया।
एक लिखित संदेश में मोजतबा खामेनेई ने संघर्ष में मारे गए लोगों का बदला लेने की कसम खाई और जोर देकर कहा कि तेहरान अपने शहीदों के खून का बदला लेने से पीछे नहीं हटेगा।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह संदेश ईरानी सरकारी टेलीविजन पर एक महिला एंकर ने पढ़ा। इसके मुताबिक ईरान आवश्यकता पड़ने पर अन्य मोर्चे भी खोल सकता है। ईरान पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है और केवल उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाएगा, जहां से उस पर हमले किए जाते हैं।
इस बीच, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को दावा किया था कि ईरान के नव नियुक्त सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई घायल हो गए हैं और उन्हें छिपने के लिए मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि देश का सैन्य नेतृत्व तीव्र अमेरिकी हमलों के बीच संघर्ष कर रहा है। हेगसेथ ने कहा कि सैन्य अभियान जारी रहने के कारण ईरान के नेतृत्व पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
28 फरवरी को इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए, जिनमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई, वरिष्ठ सैन्य कमांडर और नागरिक मारे गए। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मध्य पूर्व में इजराल और अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाकर मिसाइलों और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी थी।
इधर विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान अमेरिका के साथ युद्धविराम या वार्ता की मांग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा है कि तेहरान जब तक जरूरी हो, खुद का बचाव करने के लिए तैयार है।
सिन्हुआ के अनुसार, रविवार को प्रसारित सीबीएस न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में अराघची ने उन दावों को खारिज कर दिया कि ईरान ने युद्ध को समाप्त करने की कोशिश की है। उन्होंने साफ कहा कि ईरान ने कभी युद्धविराम की मांग नहीं की, और न ही हमने इस बारे में कभी बातचीत की। हम तब तक अपनी रक्षा करते रहेंगे, जब तक यह जरूरी होगा।
उन्होंने कहा कि ईरान तब तक सैन्य अभियान जारी रखेगा, जब तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच जाते कि यह एक अवैध युद्ध है।
अराघची ने कहा, “हमें अमेरिका से बात करने का कोई कारण नजर नहीं आता, क्योंकि जब उन्होंने हम पर हमला करने का फैसला किया था, तब हम उनसे बात कर रहे थे।”
होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में मंत्री अराघची ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान ने इस जलमार्ग को बंद नहीं किया है। यह हमारे सैन्य बलों को तय करना है और उन्होंने पहले ही विभिन्न देशों के कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति देने का निर्णय लिया है। इसी के साथ अराघची ने दोहराया कि तेहरान ने कभी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं की।
मंत्री ने खुलासा किया कि ईरान ने अमेरिका के साथ हमले से पहले हुई वार्ता में अपने संवर्धित यूरेनियम को कम करने पर सहमति जताई थी, लेकिन परमाणु संयंत्रों पर हुए हमलों के बाद अब वह संवर्धित सामग्री मलबे के नीचे दब गई है। उन्होंने बताया कि ईरान की फिलहाल क्षतिग्रस्त स्थलों से संवर्धित यूरेनियम के भंडार को पुनः प्राप्त करने की कोई योजना नहीं है।
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