अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका के सामने एक ही समय में परमाणु शक्ति संपन्न देशों रूस और चीन को रोकने की चुनौती : पेंटागन
वॉशिंगटन, 19 मार्च : वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने विधायकों को बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका को एक ही समय में दो परमाणु शक्तियों को रोकने की “अभूतपूर्व चुनौती” का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, सैन्य नेताओं ने चीन और रूस से परमाणु, मिसाइल और अंतरिक्ष क्षेत्रों में बढ़ते खतरों के बारे में चेतावनी दी।
हाउस आर्म्ड सर्विसेज की स्ट्रैटेजिक फोर्सेज की सुनवाई में परमाणु निरोधक और रासायनिक व जैविक रक्षा के लिए रक्षा विभाग के सहायक सचिव रॉबर्ट कैडलेक ने कहा कि अमेरिकी रणनीति “एक महत्वपूर्ण मोड़” पर पहुंच गई है।
कैडलेक ने कहा, “चीन के रणनीतिक परमाणु विस्तार का मतलब है कि अब हमें एक साथ दो परमाणु शक्तियों को रोकने की अभूतपूर्व चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यह कोई दूर की समस्या नहीं है। यह आज हमारी रक्षा रणनीति की केंद्रीय चुनौती है।”
उन्होंने कहा कि चीन “अपने इतिहास के सबसे तेज और अस्पष्ट परमाणु विस्तार” में लगा हुआ है जबकि रूस के पास अब भी “दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु भंडार” है और वह दबाव बनाने के लिए परमाणु बलों पर निर्भर बना हुआ है।
कैडलेक ने कहा कि अमेरिका को “कई क्षेत्रों में समन्वित या अवसरवादी आक्रामकता की वास्तविक संभावना” के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि वॉशिंगटन को अपने प्रतिद्वंद्वियों के बराबर “हर वारहेड के बदले वारहेड” रखने की जरूरत नहीं है लेकिन ऐसी क्षमता जरूर होनी चाहिए जो किसी भी स्थिति में “दोनों विरोधियों पर अस्वीकार्य लागत थोप सके।
उन्होंने सेंटिनल अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल, कोलंबिया-श्रेणी की पनडुब्बी, बी-21 बॉम्बर और लॉन्ग रेंज स्टैंड-ऑफ क्रूज मिसाइल के लिए पूर्ण फंडिंग और जहां संभव हो, तेजी लाने की मांग की।
कैडलेक ने थिएटर-रेंज परमाणु विकल्पों की भी वकालत की। उन्होंने कहा, “एसएलसीएम-एन इसका एक उदाहरण है। यह अत्यंत आवश्यक है और किसी समान शक्ति वाले प्रतिद्वंद्वी के साथ संघर्ष में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।”
सुनवाई में अंतरिक्ष को लेकर बढ़ती चिंता भी उजागर हुई। यूएस स्पेस कमांड के कमांडर जनरल स्टीफन व्हाइटिंग ने कहा कि अमेरिकी सैन्य अभियान अब काफी हद तक अंतरिक्ष प्रणालियों पर निर्भर हैं और चेतावनी दी कि प्रतिद्वंद्वी उन्हें चुनौती देने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
व्हाइटिंग ने कहा, “कोई गलती न करें, हमारे विरोधी खतरनाक गति से आगे बढ़ रहे हैं और हमें अंतरिक्ष के उपयोग से वंचित करने की क्षमताएं विकसित और तैनात कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चीन ने अपनी सेनाओं में अंतरिक्ष-आधारित प्रभावों को एकीकृत कर लिया है और ऐसे हथियार विकसित कर रहा है जो “हमारे उपग्रहों को मात देने और नष्ट करने के लिए विशेष रूप से बनाए गए हैं।
रूस के बारे में उन्होंने कहा कि वह अमेरिकी संपत्तियों को बाधित करने वाली क्षमताओं का प्रदर्शन करता रहा है, जिसमें “कक्षा में परमाणु हथियार तैनात करने की संभावित योजना” भी शामिल है।
अंतरिक्ष नीति के लिए रक्षा विभाग के सहायक सचिव मार्क बर्कोविट्ज़ ने अपने बयान में राष्ट्रपति ट्रंप की प्रस्तावित “गोल्डन डोम फॉर अमेरिका” योजना का समर्थन किया और इसे “संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने मौजूद सबसे विनाशकारी खतरों के खिलाफ एक व्यापक अगली पीढ़ी की रक्षा प्रणाली” बताया।
बर्कोविट्ज़ ने कहा, “गोल्डन डोम हमारे देश, नागरिकों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और जवाबी हमले की क्षमता की रक्षा करेगा।” उन्होंने इसे बैलिस्टिक मिसाइलों, हाइपरसोनिक हथियारों और उन्नत क्रूज मिसाइलों से बढ़ते खतरों के प्रति “आवश्यक और व्यावहारिक प्रतिक्रिया” बताया।
डेमोक्रेट्स ने इस कार्यक्रम और व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण दोनों पर तीखी आपत्ति जताई। रैंकिंग सदस्य सेठ मौल्टन ने कहा कि अमेरिका को “ताकत चाहिए, अराजकता नहीं” और “हथियारों की दौड़ को और बढ़ावा देने” के खिलाफ चेतावनी दी।
यूएस नॉर्दर्न कमांड और नोराड के प्रमुख जनरल ग्रेगरी गुइलो ने कहा कि मातृभूमि की रक्षा के लिए कमांडर बदलते खतरे के माहौल के अनुसार खुद को ढाल रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में यूएस नॉर्थ कॉम ने जॉइंट टास्क फोर्स गोल्ड को सक्रिय किया, जो “गोल्डन डोम फॉर अमेरिका के तहत भविष्य की बहु-स्तरीय रक्षा प्रणाली के संचालन के लिए काम करेगा।”
यूएस स्ट्रैटेजिक कमांड के कमांडर एडमिरल रिचर्ड कोरेल ने कहा कि अमेरिका “आधुनिकीकरण और पुनर्निर्माण के इस महत्वपूर्ण दो पीढ़ी वाले दौर” से गुजर रहा है।
उन्होंने कहा कि रणनीतिक चुनौती है “कई परमाणु प्रतिद्वंद्वियों को रोकना, साथ ही तेज तकनीकी बदलाव के साथ तालमेल बिठाना।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
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ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
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ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट को इजरायली हमले से नुकसान, नेतन्याहू ने बुलाई सुरक्षा कैबिनेट बैठक

तेल अवीव/तेहरान, 8 जून: लेबनान में हिज्बुल्लाह पर हमले के जवाब में ईरान ने रविवार रात से इजरायल के कई इलाकों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान के खुजेस्तान प्रांत के माहशहर स्थित कारून पेट्रोकेमिकल कंपनी को निशाना बनाया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इससे प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा है। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई।
फार्स समाचार एजेंसी ने खुजेस्तान प्रांत के एक सुरक्षा अधिकारी के हवाले से बताया कि हमले में संयंत्र का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। अधिकारी के पास नुकसान और हताहतों का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं था।
ईरानी शहर माहशहर प्रमुख पेट्रोकेमिकल और औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां मौजूद ऊर्जा और रासायनिक उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
वहीं, इजरायली सेना ने पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पर हमले की पुष्टि की है। सैन्य बयान में कहा गया कि इजरायली वायुसेना ने परिसर के कई लक्ष्यों को निशाना बनाया। सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि अभियान से जुड़ी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी। फिलहाल हमले के दायरे और उसके प्रभाव को लेकर अधिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
इस तरह 7 जून को ईरान-इजरायल के अप्रैल में हुए सीजफायर के 2 महीने बाद ही दोबारा सैन्य अभियान शुरू कर दिया गया। ईरान की रेवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) ने कहा कि यह कार्रवाई लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों के जवाब में की गई है। हमलों के बाद इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया।
इसके जवाब में कुछ घंटों बाद इजरायल ने ईरान में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। आईडीएफ के अनुसार उसने पश्चिमी और मध्य ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, तेहरान, तबरीज और इस्फहान में कई धमाके हुए। आईआरजीसी ने दावा किया कि इजराइल ने हमलों में एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया।
ईरान का दावा है कि उसने इजरायल के नेवातिम और तेल नोफ एयर बेस पर हमला किया। आईआरजीसी ने एक बयान में कहा, “यह ऑपरेशन इजरायली शासन के ईरान में तीन अलग-अलग जगहों पर कई रडार साइटों पर किए मिसाइल हमले के जवाब में किया गया था।”
आईडीएफ का कहना है कि उसने सोमवार सुबह ईरान की ओर से छोड़ी गई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया।
वर्तमान हालात के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को सुरक्षा कैबिनेट की अहम बैठक बुलाई। यह बैठक भारतीय समयानुसार दोपहर 1:30 बजे होनी तय की गई।
इजरायली मीडिया के अनुसार, बैठक में केवल चुनिंदा वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा मामलों से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में ईरान के हमलों, इजरायल की जवाबी कार्रवाई और आगे की सैन्य रणनीति पर चर्चा की संभावना जताई गई।
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