राजनीति
उत्तर प्रदेश को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिग में दूसरा स्थान
कोरोना वायरस संक्रमण के बीच उत्तर प्रदेश के व्यापार के तरीके में भी काफी सुधार हुआ है और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिग में उत्तर प्रदेश ने लंबी छलांग लगाई है। राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान मिला है। अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एस.पी. गोयल व अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने यहां संयुक्त रूप से बताया की प्रदेश की रैंकिग 12वें स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंच गई है। प्रदेश ने पिछले साढ़े तीन साल में सिगल विडो सिस्टम से आवेदन, अनापत्ति, क्लियरेंस व स्वीकृतियां ऑनलाइन देने की कार्यवाही की है। कई श्रम सुधार किए हैं। इस उपलब्धि से निवेशकों में बेहतर संदेश जाएगा और प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित होंगे।
केंद्र सरकार की ओर से जारी रैकिग में उत्तर प्रदेश ने लंबी छलांग लगाकर दूसरा स्थान प्राप्त कर लिया है। पहले स्थान आंध्र प्रदेश है। उत्तर प्रदेश ने तेलंगाना को पीछे छोड़ते हुए दूसरे नंबर पर जगह बना ली है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट के माध्यम से लिखा, “प्रधानमंत्री जी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना को साकार करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार सतत प्रयासरत है। उत्तर प्रदेश द्वारा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिग’ में गत वर्ष 12वें स्थान के सापेक्ष, इस वर्ष द्वितीय स्थान प्राप्त करना, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। सभी प्रदेशवासियों को बधाई।”
उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आर.के. तिवारी ने कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के कुशल निर्देशन में 12वें स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचने में कामयाबी मिली है। अब हम सभी को मिलकर प्रदेश को निवेशकों का सबसे पसंदीदा नंबर वन निवेश स्थल बनाना है।”
ज्ञात हो कि केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को वर्ष 2019 के लिए यह रैंकिग जारी की, जिसमें उत्तर प्रदेश को एक बड़ी सफलता मिली है। राज्य छलांग लगाने के कारण तेलंगाना तीसरे स्थान पर खिसक गया है। इस रैकिग से पता चलता है कि यूपी सरकार ने व्यापार में सुधार की दिशा में तेजी से काम किया है। इसके साथ ही यहां पर निवेशक आसानी से व्यापार को बढ़ा भी सकते हैं। प्रदेश ने पिछले साढ़े तीन साल में सिगल विडो सिस्टम से आवेदन, अनापत्ति, क्लियरेंस व स्वीकृतियां ऑनलाइन देने की कार्यवाही की है। कई श्रम सुधार किए हैं। इससे निवेशकों में अच्छा संदेश जाएगा, लोग आकर्षित होंगे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने क्यों उठाया पाकिस्तान के ‘डीप स्टेट’ का मुद्दा? नफरत की फैक्ट्री चलाने का आरोप

संयुक्त राष्ट्र, 9 जून: पाकिस्तान अपनी डीप स्टेट सत्ता और संसाधनों पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए अपने नागरिकों के मन में भारत के प्रति नफरत के बीज बो रहा है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद एक संगठित नफरत की फैक्ट्री चला रहा है, जो धार्मिक शब्दावली का इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह कर रहा है। साथ ही सुरक्षा परिषद में आतंकवादी संगठनों का नाम लेकर भारत ने वैश्विक समुदाय पर दबाव बनाने की कोशिश की कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंड न अपनाए जाएं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सोमवार को भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा, ”अपनी असफलताओं के लिए पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है और दुनिया को गुमराह करने की यह कोशिश असफल साबित होगी।”
पी. हरीश ने पाकिस्तान द्वारा अपने देश के भीतर सक्रिय कुछ समूहों को “फितना अल हिंदुस्तान” कहे जाने की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक शब्दावली की आड़ में फैलाया जा रहा सरकारी दुष्प्रचार बताया।
‘फितना’ एक अरबी धार्मिक शब्द है, जिसका अर्थ ‘विद्रोह’ या ‘मूर्तिपूजा’ भी हो सकता है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा, पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान देश के राजनीतिक और आर्थिक संकटों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए भारत विरोधी माहौल तैयार करते हैं। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान की “डीप स्टेट” अपने नागरिकों को लगातार भारत के खिलाफ उकसाकर सत्ता पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।
उन्होंने ‘डीप स्टेट’ का उल्लेख पाकिस्तान की सेना की ओर इशारा करते हुए किया, जिसने पिछले साल संवैधानिक संशोधनों के जरिए राजनीति पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।
उन्होंने कहा, ”27वें संवैधानिक संशोधन के जरिए सेना द्वारा किया गया वास्तविक तख्तापलट इसका सबसे हालिया उदाहरण है।”
यह संशोधन नवंबर में किया गया था, जिसके बाद सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को लगभग कानून से ऊपर की स्थिति मिल गई और सरकार पर उनका नियंत्रण और मजबूत हो गया।
अफगानिस्तान पर सुरक्षा परिषद की चर्चा के दौरान हरिश ने पाकिस्तान द्वारा सुविधायुक्त आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
अफगानिस्तान पर आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ समन्वित वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। भारत ने कहा कि आईएसआईएल (इस्लामिक स्टेट), अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और इनके सहयोगी संगठनों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए।
लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए उस हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें एक पर्यटन स्थल पर 24 हिंदू और एक ईसाई की मौत हुई थी।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा-पार गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र सरकार के अहम कैबिनेट फैसले में पहले से वंचित किसानों के लिए कर्ज माफी को मंजूरी दी गई

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार कैबिनेट का फैसला राज्य सरकार की कैबिनेट मीटिंग आज (9 जून) मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई। इस कैबिनेट मीटिंग में अहम फैसले लिए गए। (महाराष्ट्र सरकार) कैबिनेट मीटिंग में किसानों के लिए एक अहम फैसला लिया गया है। जो किसान पिछली लोन माफी स्कीम से वंचित रह गए थे, उन्हें भी अब लोन माफी में शामिल कर लिया गया है। इसके लिए करीब 14,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं। 2017 और 2019 की लोन माफी में कई किसान शामिल नहीं थे। इन किसानों को लोन माफी का फायदा देने की बार-बार मांग हो रही थी। इसलिए, आज राज्य सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में 2017 और 2019 की लोन माफी से वंचित रह गए 5 लाख से ज़्यादा किसानों के लिए एक अहम फैसला लिया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
पीएम मोदी के 12 साल के कार्यकाल में देश में क्या-क्या बदल गया, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गिनाईं उपलब्धियां

नई दिल्ली, 9 जून: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए मंगलवार को कहा कि विदेश मंत्रालय और भारत की विदेश नीति में पिछले 12 वर्षों में बदलाव आया है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पहलों पर प्रकाश डाला।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “12 साल पहले नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। पिछले ‘सेवा के 12 साल’ में, विदेश मंत्रालय और भारत की विदेश नीति में बदलाव आया है। पासपोर्ट जारी करने और दस्तावेज के अटेस्टेशन को आम नागरिक के लिए एक आसान अनुभव बनाया गया है। विदेश में खुले दूतावासों और भारतीय समुदाय के लिए वेलफेयर फंड के ज्यादा इस्तेमाल के जरिए भारतीयों को पूरी मदद दी।”
उन्होंने कहा कि शिकायत सुलझाने और फीडबैक के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाए। मुश्किल हालात में लोगों को निकालने के जरिए असरदार तरीके से जवाब दिया। यूक्रेन, इजरायल, अफगानिस्तान और सूडान इसके कुछ उदाहरण हैं। भारतीयों को ग्लोबल वर्कप्लेस तक पहुंचने और ग्लोबल वर्कफोर्स का हिस्सा बनने में मदद की। अब तक 21 मोबिलिटी पार्टनरशिप की हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय व्यवसाय को विदेश में मार्केट एक्सेस दिलाने और एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद की। विकास परियोजनाओं के जरिए भारतीय प्रोडक्ट्स और सर्विसेज को नए मार्केट में एंट्री दिलाने में मदद की।
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, “विदेश में रहने वाले भारतीय स्टूडेंट्स के लिए कल्याणकारी उपाय शुरू किए। भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया और अन्य देशों में हमारी विरासत और परंपराओं के प्रति सम्मान और समझ को बढ़ावा दिया। विदेश में रहने और जाने वाले भारतीयों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 44 दूतावास और कॉन्सुलेट खोले। भारतीय डिप्लोमेसी देश के लिए 24/7 काम करती है। आज भारतीय ज्यादा विश्वास और गर्व के साथ विदेश यात्रा करते हैं।”
सोमवार को विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर का एक इंटरव्यू आने वाला है, जिसमें वह पीएम मोदी के नेतृत्व में विश्व कल्याण के 12 साल पर बात करेंगे। इस बातचीत में अंतरिक्ष अन्वेषण और ऊर्जा सुरक्षा से लेकर व्यापार, साइबर कैपेबिलिटी, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति तक भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए बदलाव के बारे में गहरी चर्चा करेंगे।
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