राजनीति
उत्तर प्रदेश सरकार अब दाल से देगा पोषण का डोज
उत्तर प्रदेश सरकार ने अब शाकाहरी लोगों के पोषण की चिंता करनी शुरू की है। जिसमें दलहनी फसलों के माध्यम से उनके आहार को पौष्टिक बनाया जाएगा। दाल से पोषण का डोज देने की तैयारी हो रही है। इसके पीछे वजह है कि आम आदमी खासकर शाकाहारी लोंगों के लिए प्रोटीन का एक प्रमुख स्त्रोत दाल ही है।
खपत की तुलना में पैदावार कम होने पर इसका असर लोगों की थाली पर भी पड़ता है। कम दाल होने से पतली भी हो जाती है। ऐसा न हो, इसके लिए योगी सरकार ने मुकम्मल कार्ययोजना तैयार की है। राज्य सरकार ने इसे एक जिला एक उत्पाद योजना में भी इसे शामिल किया है। दरअसल इस योजना पर काम तो योगी सरकार के पहले कार्यकाल में ही शुरू हो गया था।
सरकार के आकंड़ो के अनुसार, 2016-17 से 2020-21 के दौरान दलहन का उत्पादन 23.94 मीट्रिक टन से बढ़कर 25.34 लाख मीट्रिक टन हो गया। इस दौरान प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 9.5 कुंतल से बढ़कर 10.65 कुंतल हो गई। यह प्रदेश की खपत का महज 45 फीसद है। योगी सरकार 2 ने इसके लिए पांच साल का जो लक्ष्य रखा है उसके अनुसार दलहन का रकबा बढ़ाकर 28.84 लाख हेक्टेयर करने का है। प्रति हेक्टेयर उत्पादकता 12.41 कुंतल और उत्पादन 35.79 मीट्रिक टन करने का है।
उत्पादन में गुणवत्ता बीज की महत्ता को देखते हुए दलहन की विभिन्न फसलों की नयी प्रजातियों के प्रमाणित (सर्टिफाइड) एवं आधारीय (फाउंडेशन) बीज का वितरण 28,751 कुंतल से बढ़कर 82,000 कुंतल किया जाएगा। ये बीज किसानों को अनुदानित दर पर दिए जाएंगे। दलहनी फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए अंत:फसली एवं जायद की फसलों में दलहनी (उर्द, मूंग) फसलों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। असमतल भूमि पर स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली का प्रयोग करते हुये उत्पादन में वृद्धि, फरो एंड रिज तकनीक से खेती कर उत्पादन में वृद्धि और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की गारंटी दी जाएगी।
आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के कुलपति डॉ बिजेंद्र सिंह कहते हैं कि दलहन के मामले में सरकार ने कई कदम बढ़ाए हैं। लोगों को और जागरूक होना चाहिए। वैल्यू एडिशन करना बहुत जरूरी है। बाजार का सर्पोट होना चाहिए। अच्छी प्रजातियों के बीज पर ध्यान देने की जरूरत है। स्टोरेज की व्यवस्था होनी चाहिए।
अपर कृषि निदेषक तिलहन-दलहन अखिलेश शर्मा का कहना है कि दलहन की फसल को सुरक्षित करने की जरूरत है। इस बार किसानों की सुरक्षा के लिए वायर लगाने की योजना के लिए केन्द्र से सहयोग मांगा गया है, जिससे इसकी पैदावार बढ़े। नई प्रजाति के बीजों के लिए भी अनुसंधान केन्द्र से मांग की गयी है। इसके अलावा किसानों को मिनी किट भी दी जा रही है।
विषेषाज्ञों की मानें तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल का उत्पादक, उपभोक्ता और आयातक है। सर्वाधिक आबादी के नाते इस उपभोग का सर्वाधिक हिस्सा यूपी का ही है। ऐसे में पूरी दुनिया के दाल उत्पादक देशों (कनाडा, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, टर्की,और म्यांमार) की नजर न केवल भारत और यहां की पैदावार बल्कि छह महीने के भंडारण पर भी रहती है। ऐसे में अगर पैदावार कम है तो यहां की भारी मांग के मद्देनजर अतंराष्ट्रीय बाजार में दाल यूं ही तेज हो जाती है। इस पर रुपये के मुकाबले डालर की क्या स्थिति है इसका भी बहुत असर पड़ता है। रुपये के मुकाबले अगर डॉलर के दाम अधिक हैं तो आयात भी महंगा पड़ता है। इस तरह दाल के आयात में देश को बहुमूल्य विदेशी मुद्रा भी खर्च करना होता है। अगर यूपी दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाय तो विदेशी मुद्रा भी बचेगी।
महाराष्ट्र
बॉम्बे हाई कोर्ट: वानखेड़े के खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच पर रोक, एनसीबी ने जवाब मांगा, आरोपी की शिकायत पर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई गलत

मुंबई; बॉम्बे हाई कोर्ट ने आईआरएस ऑफिसर समीर वानखेड़े के खिलाफ डिपार्टमेंटल और इंटर-डिपार्टमेंटल पूछताछ और हैरेसमेंट पर रोक लगाने का आदेश दिया है। समीर वानखेड़े ने एनसीबी की जांच को चुनौती दी थी, जिस पर कोर्ट ने चिंता जताई कि एक गुमनाम लेटर के आधार पर एक ऑफिसर के खिलाफ कई जांच शुरू की गई हैं, जिससे ऑफिसर का हौसला टूटेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने वानखेड़े को राहत दी है और जांच पर रोक लगाकर प्रोटेक्शन भी दिया है। एक अहम डेवलपमेंट में, बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस ए.एस. गडकरी और कमल खता ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने अपने ही पूर्व जोनल डायरेक्टर समीर दुनियादेव वानखेड़े के खिलाफ गुमनाम शिकायतों के आधार पर कई जांच शुरू की हैं। सुनवाई के दौरान, बेंच ने वानखेड़े के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई के आधार पर एनसीबी से काफी सवाल किए। कोर्ट ने सवाल किया कि एक इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर पर सिर्फ़ एक आरोपी के लगाए गए आरोपों और गुमनाम शिकायतों के आधार पर केस कैसे चलाया जा सकता है, खासकर तब जब ऐसी कार्रवाइयों से लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों के काम करने के तरीके पर असर पड़ता है और इंस्टीट्यूशन पर भी असर पड़ सकता है। रिट पिटीशन में वानखेड़े के खिलाफ गुमनाम शिकायतों के आधार पर जारी कई शुरुआती इन्वेस्टिगेशन नोटिस को चुनौती दी गई है। बेंच ने एनसीबी से यह भी ज़रूरी सवाल पूछा कि क्या आरोपी ने ये आरोप अपनी शुरुआती गिरफ्तारी के समय या इन्वेस्टिगेशन के दौरान लगाए थे। कोर्ट ने सवाल किया कि ऐसे आरोप बाद में क्यों सामने आए और यह भी पूछा कि उन पर आखिरी मिनट में क्यों विचार किया गया। कोर्ट ने आगे कहा कि अगर आरोपी को इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर के खिलाफ आरोप लगाने दिए जाते हैं और डिपार्टमेंट ऐसे आरोपों पर आसानी से कार्रवाई करता है, तो इससे क्रिमिनल जस्टिस के एडमिनिस्ट्रेशन में गड़बड़ी पैदा होगी। बेंच ने कहा कि ऐसा करने से ईमानदार ऑफिसर अपने ऑफिशियल कामों को करने में डिमोरलाइज़ होंगे और एक खतरनाक और पूरी तरह से अनचाही मिसाल कायम होगी, जिससे आरोपी सिर्फ़ इसलिए इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर को टारगेट कर पाएंगे क्योंकि उन्होंने अपने कानूनी काम किए थे। बेंच ने एनसीबी के वानखेड़े के खिलाफ बार-बार कार्रवाई शुरू करने पर भी सवाल उठाया, जबकि गुमनाम शिकायतों पर नियम मौजूद थे और एजेंसी अपने ही एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई कैसे कर सकती थी। कोर्ट ने ऐसे आरोपों पर अफसोस जताया और कार्रवाई करने में प्रतिवादी एजेंसी के व्यवहार से नाखुशी जताई। सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने देखा कि समीर वानखेड़े के खिलाफ बार-बार की गई कार्रवाई याचिकाकर्ता को सीधे तौर पर परेशान करने के बराबर है और ऐसी शिकायतों के आधार पर उनसे लगातार पूछताछ करने के सही होने पर सवाल उठाया। पार्टियों को विस्तार से सुनने के बाद, बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि रिट याचिका को आखिरी सुनवाई के लिए स्वीकार किया जाता है और याचिका पर आखिरी फैसला होने तक वानखेड़े को अंतरिम राहत और सुरक्षा दी जाती है।
आज की कार्रवाई ईमानदार सरकारी कर्मचारियों को मनमानी और परेशान करने वाली कार्रवाइयों से बचाने की दिशा में एक अहम कदम है। कोर्ट की टिप्पणियां इस बात को बड़े पैमाने पर सार्वजनिक महत्व देती हैं कि यह पक्का किया जाए कि जांच अधिकारी बिना किसी डर या पक्षपात के, गुमनाम आरोपों के आधार पर शुरू की गई देरी या बदले की कार्रवाई के जोखिम के बिना अपने कानूनी काम कर सकें। समीर वानखेड़े लगातार कहते रहे हैं कि उनके खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई मनमानी, गलत, कानूनी तौर पर टिकने लायक नहीं और एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस का गलत इस्तेमाल है। याचिका में गुमनाम शिकायतों के आधार पर उनके खिलाफ जारी शुरुआती जांच नोटिस को रद्द करने की मांग की गई है।
राष्ट्रीय समाचार
आईबीएम और सर्वम ने किया साझेदारी का ऐलान, भारत में एआई इकोसिस्टम को मिलेगी मजबूती

दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनी आईबीएम और भारतीय एआई स्टार्टअप सर्वम ने भारत में सॉवरेन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीकों के विकास और अपनाने में तेजी लाने के लिए शुक्रवार को साझेदारी का ऐलान किया। यह विशेष रूप से सरकारी एजेंसियों, सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों और विनियमित उद्यमों पर केंद्रित होगी।
इस साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां नागरिक सेवाओं, शिकायत निवारण, दस्तावेज प्रसंस्करण और प्रशासनिक कार्यप्रवाह (वर्कफ्लो) जैसे उपयोग मामलों के लिए सॉवरेन एआई तकनीकों को संयुक्त रूप से पेश करेंगी और पायलट परियोजनाएं संचालित करेंगी।
यह सहयोग आईबीएम के विशेष रूप से सॉवरेन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किए गए एआई सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म ‘आईबीएम सॉवरेन कोर’ को सर्वम के ‘इंडिया-फर्स्ट’ सॉवरेन एआई स्टैक के साथ जोड़ेगा। सर्वम के इस एआई स्टैक में भारत में विकसित और प्रशिक्षित रीजनिंग मॉडल, बहुभाषी भाषा मॉडल और वॉयस एआई तकनीक शामिल हैं।
दोनों कंपनियों का संयुक्त समाधान संगठनों को डेटा, गवर्नेंस, सुरक्षा और अनुपालन पर अधिक नियंत्रण बनाए रखते हुए भारत की नियामकीय और परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप एआई लागू करने में मदद करेगा।
इसके अलावा, इस पहल का उद्देश्य इनोवेशन पायलट, सॉल्यूशन एक्सेलरेटर, तकनीकी सलाहकार सेवाओं और ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रमों के माध्यम से सॉवरेन एआई को तेजी से अपनाने को बढ़ावा देना है।
लखनऊ स्थित आईबीएम गॉवटेक एआई इनोवेशन सेंटर संयुक्त इनक्यूबेशन और डेमोंस्ट्रेशन हब के रूप में कार्य करेगा। यहां सरकारी विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के संगठन और उद्यम बड़े पैमाने पर तैनाती से पहले सॉवरेन एआई के व्यावहारिक उपयोग, तकनीकी, परिचालन और गवर्नेंस संबंधी आवश्यकताओं का मूल्यांकन कर सकेंगे।
आईबीएम सॉफ्टवेयर इंडिया और सॉफ्टवेयर इनोवेशन लैब के जनरल मैनेजर श्रीराम राघवन ने कहा, “सॉवरेन एआई केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि एआई कहां संचालित होता है। इसका उद्देश्य संगठनों को यह नियंत्रण देना है कि एआई का संचालन, प्रबंधन और तैनाती कैसे की जाए।”
उन्होंने कहा कि आईबीएम सॉवरेन कोर एक एंटरप्राइज-ग्रेड प्लेटफॉर्म है, जिसे सरकारों और विनियमित उद्यमों को गवर्नेंस, सुरक्षा और अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करते हुए बड़े पैमाने पर एआई लागू करने में सहायता के लिए तैयार किया गया है।
सर्वम के सह-संस्थापक प्रत्युष कुमार ने कहा कि सॉवरेन एआई को उन प्रणालियों के भीतर काम करना चाहिए, जिन पर सरकारें और उद्यम पहले से निर्भर हैं, साथ ही बड़े पैमाने पर संचालन का भी समर्थन करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमारा एआई स्टैक इन प्रणालियों के ऊपर मॉडल, वॉयस और भाषा तकनीक उपलब्ध कराता है, ताकि कोई भी नागरिक अपनी मातृभाषा में फोन कॉल के जरिए सरकारी लाभ प्राप्त कर सके या अपनी शिकायत का समाधान कर सके।”
राष्ट्रीय समाचार
भारत में एप्पल ने फिर तोड़ा रिकॉर्ड, तिमाही में सबसे ज्यादा कमाई: टिम कुक

एप्पल के सीईओ टिम कुक ने कहा कि कंपनी ने भारत समेत हर भौगोलिक क्षेत्र में जून-क्वार्टर के रेवेन्यू रिकॉर्ड बनाए। ये नतीजे सप्लाई चेन में बहुत बड़ी रुकावटों और विदेशी मुद्रा से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद आए।
एप्पल कंपनी ने 109.4 बिलियन डॉलर का तिमाही रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल के मुकाबले 16 प्रतिशत ज्यादा है। कंपनी का ग्रॉस मार्जिन 50.1 प्रतिशत रहा, जिसमें टैरिफ रिफंड से लगभग 2 प्रतिशत अंक का फायदा शामिल है।
प्रति शेयर डाइल्यूटेड अर्निंग 2.02 डॉलर रही, जो पिछले साल के मुकाबले 29 प्रतिशत ज्यादा है। इसमें टैरिफ रिफंड से 0.11 डॉलर का फायदा भी शामिल है।
टिम कुक ने कहा, “हमने हर भौगोलिक क्षेत्र में जून-क्वार्टर के रेवेन्यू रिकॉर्ड बनाए। हमें अमेरिका, लैटिन अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, भारत, चीन, जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया में जून-क्वार्टर के रिकॉर्ड के साथ हर जगह मजबूती देखकर खुशी हुई।”
दुनिया भर में मैक का रेवेन्यू 10.4 बिलियन डॉलर रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 29 प्रतिशत ज्यादा है। यह जून-क्वार्टर का नया रिकॉर्ड है, जिसकी वजह मैकबुक नियो और मैकबुक प्रो की मजबूत बिक्री रही।
एप्पल ने भारत में एक और रिकॉर्ड रेवेन्यू वाला क्वार्टर दर्ज किया, जिसमें मैक का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा। इसकी वजह मैकबुक नियो को जबरदस्त बढ़ोतरी और आईफोन 17 सीरीज की लगातार मजबूत मांग थी, जबकि देश में आईफोन की सप्लाई सीमित रही।
एप्पल के सीएफओ केवन पारेख ने कहा, “जैसा कि टिम ने बताया, इस बार मैक का सबसे शानदार तिमाही रहा। दुनिया भर में बहुत सारे नए लोगों ने मैक खरीदा और पुराने यूजर्स ने भी अपग्रेड किया। इसमें अमेरिका, चीन और भारत के ग्राहक भी शामिल हैं।”
इंडस्ट्री के जानकारों के अनुसार, एप्पल ने कीमतें ज्यादातर स्थिर रखी हैं, जो मेमोरी की बढ़ती लागत को संभालने की उसकी क्षमता को दिखाता है।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के डायरेक्टर तरुण पाठक ने कहा, “हमें उम्मीद है कि कैलेंडर वर्ष 2026 के दौरान भारत में वॉल्यूम में सिंगल-डिजिट लेकिन वैल्यू में डबल-डिजिट ग्रोथ होगी, और आईफोन की कीमत बढ़ने की बहुत ज्यादा संभावना है। इसके बावजूद, ब्रांड का आकर्षण नए यूजर्स को इकोसिस्टम में लाता रहेगा।”
उन्होंने कहा कि कंपोनेंट की बढ़ती लागत एंड्रॉयड इकोसिस्टम में कीमतें बढ़ाने के लिए मजबूर कर रही है। हालांकि, उम्मीद है कि एप्पल अपने मुख्य हार्डवेयर कैटेगरी में इंडस्ट्री से बेहतर प्रदर्शन करेगा।
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