Connect with us
Tuesday,15-September-2026
ताज़ा खबर

राष्ट्रीय समाचार

अधिक सोडियम वाले नमक का उपयोग करना घातक, डब्ल्यूएचओ ने चेताया और विकल्प भी बताया

Published

on

नई दिल्ली, 6 फरवरी। अधिक सोडियम वाले नमक का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे लेकर चेताया है। इससे पहले भी संगठन ने गाइडलाइन जारी करके बताया था कि एक दिन में औसतन पांच ग्राम नमक ही खाना चाहिए।

सोडियम युक्त नमक के लिए डब्ल्यूएचओ ने नई गाइडलाइन जारी की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह सुझाव भारतीयों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डब्ल्यूएचओ ने लोगों से कम सोडियम वाले नमक को खाने की अपील की है। गाइडलाइन में खाने में सामान्य टेबल साल्ट की जगह पर पोटेशियम युक्त कम सोडियम वाले नमक के उपयोग की बात कही गई है। यह सिर्फ वयस्कों और स्वस्थ व्यक्तियों के लिए कहा गया है। वहीं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किडनी से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को सामान्य नमक खाने की सलाह दी गई है।

नमक का इस्तेमाल न ज्यादा करना चाहिए और न ही कम करना चाहिए, इसका संतुलित इस्तेमाल करना चाहिए। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक एक दिन में व्यक्ति को मात्र पांच ग्राम नमक खाना चाहिए, वहीं दो ग्राम प्रतिदिन सोडियम की खपत सही होती है। लेकिन भारत में लोग औसतन 10 ग्राम तक नमक को हर दिन खाते हैं। नमक का इस्तेमाल अधिक करने से कई सारी शारीरिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी डब्ल्यूएचओ की इस सिफारिश की तारीफ की है। उनका कहना है कि कम सोडियम युक्त नमक खाना भारतीय लोगों के लिए काफी उपयोगी है क्योंकि भारतीय स्वाद के मामले में समझौता करने से अमूमन बचते हैं और इस चक्कर में अधिक नमक का सेवन करते हैं।

बता दें कि अधिक नमक खाना कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता है। इससे ब्लड प्रेशर में बढ़ोतरी, हार्ट अटैक, दिल से जुड़ी कई अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अधिक नमक खाना किडनी, लिवर और खून पर भी असर डालता है। पेट और त्वचा की समस्या, डिहाइड्रेशन और हड्डियों के कमजोर होने की समस्याएं भी होने लगती हैं।

27 जनवरी 2025 को जारी किए गए दिशानिर्देश के मुताबिक लो सोडियम सॉल्ट सब्सटिट्यूट (एलएसएसएस) नियमित नमक का अच्छा विकल्प है। इनमें सामान्य नमक की तुलना में कम सोडियम होता है और अक्सर इसमें पोटेशियम क्लोराइड भी होता है ताकि सामान्य नमक जैसा स्वाद प्राप्त हो सके।

राष्ट्रीय समाचार

ब्रिक्स 2026 की सफलता भारत की वैश्विक कूटनीतिक ताकत का प्रमाण : एस जयशंकर

Published

on

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रिक्स शिखर सम्मलेन के सफल आयोजन पर कहा कि पूरे देश और दुनिया ने ब्रिक्स सम्मेलन 2026 की सफलता देखी। इस सम्मेलन में कुल 32 प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया, जिनमें 11 सदस्य देशों, 10 साझेदार देशों, 4 क्षेत्रीय संगठनों और 7 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की मजबूत वैश्विक भूमिका रही। सम्मेलन में अधिकांश देशों का प्रतिनिधित्व राष्ट्राध्यक्षों या सरकार प्रमुखों के स्तर पर हुआ। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद, यूएई के क्राउन प्रिंस और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी समेत कई बड़े नेता इसमें शामिल हुए।

इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ-साथ विश्व व्यापार संगठन, विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रमुखों ने भी भाग लिया। सम्मेलन के दौरान इन नेताओं और प्रधानमंत्री मोदी के बीच बेहतर तालमेल और आत्मीय संबंध भी देखने को मिले।

विदेश मंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ, जब दुनिया कई राजनीतिक और भू-राजनीतिक मतभेदों तथा बड़े संघर्षों का सामना कर रही है। इसके बावजूद ब्रिक्स देशों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाने में सफलता हासिल की। विशेष रूप से पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के संघर्ष को लेकर सदस्य देशों ने शांति, सुरक्षा, स्थिरता और दीर्घकालिक समाधान का समर्थन किया। साथ ही वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखला और ऊर्जा आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने तथा आम नागरिकों और नागरिक ढांचे की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया।

एस. जयशंकर ने कहा कि सम्मेलन केवल मतभेदों को दूर करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने विभिन्न देशों के नेताओं को खुलकर बातचीत करने का अवसर भी दिया। कई ऐसे नेता, जो सामान्य परिस्थितियों में शायद एक-दूसरे से मुलाकात नहीं कर पाते, वे इस मंच पर साथ आए और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। इससे दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों पर सकारात्मक संवाद को बढ़ावा मिला।

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख फोकस वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, तकनीक और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत बनाना था। सम्मेलन से यह स्पष्ट संदेश गया कि विकासशील देशों की चिंताओं और जरूरतों को वैश्विक मंचों पर अधिक महत्व मिलना चाहिए। सम्मेलन के दो प्रमुख विषय “सुधार” और “लचीलापन” रहे। इन्हीं विषयों ने सदस्य देशों को एकजुट करने और विभिन्न मुद्दों पर सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर भी ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत सहमति देखने को मिली। सदस्य देशों ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य अपराध है। उन्होंने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को अस्वीकार्य बताते हुए उसकी निंदा की। साथ ही आतंकवाद के सभी रूपों, विशेषकर सीमा पार आतंकवाद, के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने और दोहरे मापदंडों को खारिज करने पर जोर दिया।

विदेश मंत्री ने कहा कि यह पूरा सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “संवाद, कूटनीति और विकास” के संदेश को प्रतिबिंबित करता है। दुनियाभर के नेताओं की सक्रिय भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि यह संदेश वैश्विक स्तर पर प्रभावी रहा। उन्होंने कहा कि कई लोगों को संदेह था कि ऐसा सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित हो पाएगा या नहीं, लेकिन यह नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक बार फिर अपनी वैश्विक कूटनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया।

Continue Reading

राष्ट्रीय समाचार

उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार पर कसा तंज, कहा-परीक्षा लीक, महंगाई और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से जूझ रहा है महाराष्ट्र

Published

on

गणेश चतुर्थी की पूर्व संध्या पर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए, शिवसेना नेता उद्धव बालासाहेब ठाकरे ने सोमवार को महाराष्ट्र के बढ़ते सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक संकट के लिए सत्तारूढ़ महायुति सरकार की कड़ी आलोचना की।

ठाकरे खेमे ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय में राज्य की भयावह तस्वीर पेश की, जो “मुद्रास्फीति, व्यवस्थागत भ्रष्टाचार, कृषि संकट और बढ़ते सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से ग्रस्त” है – यह तर्क देते हुए कि वर्तमान शासक स्वयं महाराष्ट्र और राष्ट्र के सामने सबसे बड़ा “विघ्न” (बाधा) बन गए हैं।

संपादकीय में त्योहारों के मौसम से पहले जनता की परेशानी बढ़ाने के लिए सरकार की कड़ी आलोचना की गई। चीनी, दूध, सीएनजी, घरेलू एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि का हवाला देते हुए अखबार ने कहा कि आम आदमी के त्योहारी बजट पर भले ही बुरा असर पड़ा हो, लेकिन भक्त भगवान गणेश का श्रद्धापूर्वक स्वागत करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

संपादकीय में पुणे के कार्यकर्ता विद्यानंद बापट पर हुए हालिया हमले पर जानकारी दिया, जिन्होंने सार्वजनिक समारोहों के दौरान उच्च ध्वनि वाले डीजे सिस्टम का कड़ा विरोध किया था। संपादकीय में दावा किया गया कि ध्वनि प्रदूषण को दूर करने के बजाय, सत्ताधारी दल ने कार्यकर्ता को “शहरी नक्सल” और “बाहरी” करार दिया, जबकि मुख्यमंत्री ने निर्णायक कार्रवाई के बजाय टालमटोल का रुख अपनाया।

अल नीनो के गंभीर प्रभाव का हवाला देते हुए, ठाकरे खेमे ने महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति और बिगड़ने की चेतावनी दी है। झुलसे हुए खेतों में खरीफ की फसलें सूख रही हैं और अपर्याप्त वर्षा आगामी रबी मौसम पर संकट का साया डाल रही है, जिससे ग्रामीण आजीविका गंभीर खतरे में है और किसानों की आत्महत्याएं लगातार जारी हैं।

संपादकीय में बार-बार हो रहे परीक्षा प्रश्नपत्र लीक की भी आलोचना की गई। नेट और टीईटी में हुए घोटालों के बाद, महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के प्रश्नपत्र लीक होने के कारण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं।

सरकार द्वारा घोषित एसआईटी जांच और प्रशासनिक सुधार के दावों को खोखला बताते हुए संपादकीय में सवाल उठाया गया कि हजारों महत्वाकांक्षी युवाओं के चकनाचूर सपनों के लिए कौन जवाबदेह होगा।

लोकमान्य तिलक के सार्वजनिक गणेश उत्सव की जड़ों का पता लगाते हुए, संपादकीय में इस बात पर खेद व्यक्त किया गया कि इसकी संस्थापक सामाजिक-राजनीतिक दृष्टि कॉरपोरेट अधिग्रहण और घटिया राजनीतिक दिखावे से नष्ट हो रही है।

संपादकीय में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों, प्रतिदिन निर्दोष लोगों की जान लेने वाली खराब सड़कों और गैर-स्थानीय ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए स्थानीय मराठी भाषा के मानदंडों को लागू करने में सरकार की विफलता पर भी प्रकाश डाला गया।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने एक कड़ी चेतावनी के साथ अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि महाराष्ट्र- जो कभी देश के लिए प्रगतिशील विचारों का प्रतीक था – सत्ता के नशे में चूर और कट्टरपंथी शासकों द्वारा दिशाहीन कर दिया गया है और धार्मिक चरमपंथ की छाया में धकेल दिया गया है।

जनता से उनकी कठिनाइयों के वास्तविक मूल कारण को पहचानने का आह्वान करते हुए, संपादकीय का समापन भगवान गणेश से जनता को ज्ञान प्रदान करने और राज्य को बचाने की सीधी प्रार्थना के साथ हुआ।

Continue Reading

राष्ट्रीय समाचार

ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाना और आसान पेमेंट सिस्टम जरूरी: ईईपीसी इंडिया

Published

on

देश की इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने वाली मुख्य संस्था ईईपीसी इंडिया ने ब्रिक्स देशों के बीच गैर-शुल्क बाधाओं (नॉन-टैरिफ बैरियर्स) को खत्म करने और आसान पेमेंट सिस्टम बनाने की मांग की है। उसने कहा है कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को नई गति देने के लिए नॉन-टैरिफ बैरियर्स को समाप्त करना और स्थानीय मुद्राओं में आसान पेमेंट सिस्टम विकसित करना बेहद आवश्यक है।

ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली लगभग 75 प्रतिशत समस्याओं का समाधान गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने और राष्ट्रीय मुद्राओं में तेज एवं प्रभावी भुगतान व्यवस्था लागू करने से हो सकता है।

उन्होंने कहा, “एक्सपोर्टर्स को होने वाली लगभग 75 प्रतिशत समस्याओं को नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाकर और अलग-अलग देशों की अपनी करेंसी में आसान और कुशल पेमेंट सिस्टम अपनाकर हल किया जा सकता है।”

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच नॉन-टैरिफ बाधाओं पर समझौता करना समय की जरूरत है।

उन्होंने आगे कहा, “हम ब्रिक्स देशों के बीच नॉन-टैरिफ बाधाओं पर एक आम समझौता कर सकते हैं और कुछ स्टैंडर्ड्स पर सहमत हो सकते हैं। हालांकि हम इस पर कुछ समय से चर्चा कर रहे हैं, लेकिन अब इसे लागू करने का समय आ गया है।”

उन्होंने बताया कि यह एक आम बात है कि ज्यादातर देशों में नॉन-टैरिफ उपायों से एक्सपोर्ट की लागत टैरिफ की तुलना में ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए व्यापार करने वाले देशों के बीच रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।

ब्रिक्स समूह वर्तमान में वैश्विक व्यापार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में यदि सदस्य देश गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने और भुगतान प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सफल होते हैं, तो समूह की वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी और बढ़ सकती है।

भारत के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इंजीनियरिंग उत्पाद देश के सबसे बड़े निर्यात क्षेत्रों में से एक हैं। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) में इंजीनियरिंग निर्यात की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत है।

ब्रिक्स देशों में ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के प्रमुख बाजार हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि ईईपीसी इंडिया भारत का प्रमुख व्यापार एवं निवेश प्रोत्साहन संगठन है। यह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रायोजित (स्पॉन्सर्ड) है और भारतीय इंजीनियरिंग क्षेत्र को सेवाएं प्रदान करता है। मंत्रालय द्वारा इसे भारत में आदर्श ईपीसी के रूप में मान्यता प्राप्त है।

ईपीसी इंडिया पिछले 70 से अधिक वर्षों में भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात का प्रतीक रहा है। इस दौरान भारत 1950 के दशक में मात्र 10 मिलियन डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यातक देश से बढ़कर 122.43 अरब डॉलर (अप्रैल 2025-मार्च 2026) का देश बन गया।

Continue Reading
Advertisement
मनोरंजन13 hours ago

‘बिग बॉस 20’ में एक तरफ अरिश्फा का गुस्सा, दूसरी तरफ रीति तिवारी के आंसू, बोलीं- ‘मेरे खिलाफ गए तो लड़ूंगी’

राष्ट्रीय समाचार13 hours ago

ब्रिक्स 2026 की सफलता भारत की वैश्विक कूटनीतिक ताकत का प्रमाण : एस जयशंकर

व्यापार14 hours ago

बोफा ने भारतीय शेयर बाजार पर बढ़ाया भरोसा, दिसंबर 2026 तक निफ्टी के 26,200 तक पहुंचने का लगाया अनुमान

मनोरंजन15 hours ago

राखी सावंत के बयान पर भड़कीं कंगना रनौत, बोलीं-‘फेवर के बावजूद तुम्हें स्वीपर की नौकरी भी नहीं मिली’

अंतरराष्ट्रीय समाचार15 hours ago

अमेरिकी महंगाई बढ़ने से फेड की ब्याज दर बढ़ाने की आशंका तेज होने से सोने की कीमतों में आई गिरावट

मनोरंजन16 hours ago

बप्पा के रंग में रंगा करीना का परिवार, जेह और सैफ अली खान ने बनाए इको-फ्रेंडली गणपति

अंतरराष्ट्रीय समाचार16 hours ago

ईरान की चेतावनी के बाद भी होर्मुज में तैनाती पर व‍िचार कर रहा दक्षिण कोरिया, अमेर‍िका के साथ करेगा रक्षा वार्ता

व्यापार19 hours ago

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को दी बधाई

राष्ट्रीय समाचार19 hours ago

उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार पर कसा तंज, कहा-परीक्षा लीक, महंगाई और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से जूझ रहा है महाराष्ट्र

मनोरंजन20 hours ago

ओटीटी पर काम करना चाहते हैं अरहान खान, बोले-खुद को दिखाने का शानदार प्लेटफॉर्म है

महाराष्ट्र2 weeks ago

आगरीपाड़ा पुलिस में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट को लेकर हंगामा, बिल्डर के खिलाफ धरना

खेल2 weeks ago

प्रीमियर लीग: फर्नांडीस की हैट्रिक, मैनचेस्टर यूनाइटेड ने इप्सविच को 5-2 से हराया

अंतरराष्ट्रीय समाचार2 weeks ago

जापान: 11 साल बाद जन्मदर में मामूली सुधार, इस साल छह महीने में 3.42 लाख बच्चों का जन्म

अपराध2 weeks ago

अग्रीपाड़ा में घरेलू विवाद के बाद 19 वर्षीय युवक ने पत्नी की हत्या कर की खुदकुशी

खेल2 weeks ago

पहली बार भारत और जापान के बीच खेला जाएगा टी20 इंटरनेशनल मुकाबला, बीसीसीआई ने किया ऐलान

राष्ट्रीय समाचार2 weeks ago

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11.475 बिलियन डॉलर बढ़कर ऑल-टाइम हाई 740.803 बिलियन डॉलर पर पहुंचा

राष्ट्रीय समाचार4 weeks ago

सरकारी योजनाओं के दम पर भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार मजबूत, 10.88 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ रहा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर

राजनीति3 weeks ago

तमिलनाडु: दो दिन अवकाश के बाद फिर शुरू होगी विधानसभा की कार्यवाही, छह विभागों के अनुदान पर होगी चर्चा

खेल3 weeks ago

दूसरा टेस्ट: बल्लेबाजी के दौरान पंत की कलाई पर लगी चोट, छोड़ना पड़ा मैदान

व्यापार2 weeks ago

सोने में बड़ी तेजी की संभावना, बुल केस में साल के अंत तक 5,600 डॉलर और चांदी 120 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है: रिपोर्ट

रुझान