अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव : जो बाइडन डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार घोषित
अमेरिका में नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की जंग में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपने उम्मीदवार के रूप में जो बाइडन के नाम का औपचारिक ऐलान कर दिया है। पूर्व अमेरिकी उप राष्ट्रपति बाइडन का सीधा मुकाबला रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होगा।
उन्होंने राज्यों के एक रोल कॉल में बहुमत हासिल किया है, जिसमें एक युवा भारतीय अमेरिकी विद्यार्थी बियांका शाह ने मैरीलैंड के वोटों को हासिल करने में बाइडन की मदद की।
तीन नवंबर को होने वाले चुनाव में मंगलवार को 76 दिन शेष बचे थे, जब पार्टी ने आधिकारिक रूप से बिडेन को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया।
इसके अलावा डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से भारतीय मूल की कमला हैरिस को उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है। वह पहली गैर श्वेत महिला होने के साथ ही भारतीय मूल की भी पहली महिला हैं, जो इस बड़े मुकाम तक पहुंची हैं।
कोरोनावायरस महामारी के कारण पूरी तरह से ऑनलाइन हुए अद्वितीय रोल कॉल वोट में विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों से बाइडन को समर्थन मिला।
बाइडन को बर्नी सैंडर्स का भी समर्थन हासिल हुआ। अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने अप्रैल में ही घोषणा की थी कि वह राष्ट्रपति पद के लिए जो बाइडन की दावेदारी का समर्थन करते हैं। सैंडर्स ने सभी अमेरिकी लोगों से अपील की थी कि पूर्व उप-राष्ट्रपति बाइडन का समर्थन करें।
बाइडन ने अपने परिवार के साथ डेलावेयर में अपने घर पर इसकी घोषणा की। उम्मीदवारी की घोषणा के साथ उत्साह और जश्न मनाने के लिए प्रतिनिधियों और समर्थकों का जमावड़ा तो नहीं रहा, मगर देश भर के समारोहों के पहले के दृश्यों को सम्मेलन के लाइव टेलीकास्ट में स्क्रीन पर दिखाया गया।
गवर्नर, सीनेटर और अन्य नेताओं ने रोल कॉल में अपने राज्यों का प्रतिनिधित्व किया, जहां उन्होंने अपने राज्यों से वोटों की घोषणा की। जबकि भारतीय मूल की शाह को मैरीलैंड राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया था।
20 वर्षीय शाह दक्षिण एशियाई लोगों के लिए बाइडन अभियान की युवा आउटरीच नेता हैं और उन्हें पार्टी के उम्मीदवार का चयन करने के लिए प्राथमिक, इंट्रा-पार्टी चुनाव में बाइडन का समर्थन करने के लिए प्रतिनिधि चुना गया था।
पूर्व राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन, बिली कार्टर के साथ ही जॉन केनेडी के बेटे और बेटी के समर्थन के बाद रोल कॉल आया।
कार्टर ने बाइडन को एक ईमानदार और निष्ठावान व्यक्ति बताया। वहीं क्लिंटन ने ट्रंप पर कटाक्ष करते हुए उन्हें ऐसा राष्ट्रपति कहा जो अपना समय टेलीविजन देखने और सोशल मीडिया पर बिताते हैं। उन्होंने कहा कि बाइडन एक ऐसे राष्ट्रपति होंगे, जो वास्तव में काम करते हैं और नेतृत्व करते हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी ने मंगलवार रात को वर्चुअल मीटिंग के दौरान बाइडन के नाम का ऐलान किया। पार्टी के इस ऐलान के बाद बाइडन ने ट्वीट करके कहा, डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से अमेरिका के राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन को स्वीकार करना मेरे जीवन के लिए सम्मान की बात है।
इससे पहले अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन (डीएनसी) की सोमवार रात में शुरुआत हुई। सम्मेलन की शुरुआत राष्ट्रपति पद के चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हराने के लिए देश को एकजुट करने के आह्वान के साथ की गई।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो तेल टैंकरों में आग, नियमों के उल्लंघन पर बारूदी सुरंगों से टकराए

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने शुक्रवार को कहा कि नियमों का उल्लंघन कर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकर नौसैनिक बारूदी सुरंगों (नेवल माइंस) से टकरा गए, जिसके बाद उनमें आग लग गई।
आईआरजीसी के आधिकारिक समाचार एजेंसी सेपाह न्यूज के बयान के अनुसार, उसकी नौसेना ने कहा कि दोनों जहाजों ने अपने नेविगेशन और पहचान संबंधी सिस्टम बंद कर दिए थे। वे जलडमरूमध्य से एक ‘अनधिकृत’ रास्ते के जरिए बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे और उन्हें अमेरिकी सेना का समर्थन प्राप्त था लेकिन रास्ते में बारूदी सुरंगों से टकराने के कारण उनकी कोशिश नाकाम हो गई।
नौसेना ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अभी बंद है और जब तक अमेरिका ईरान द्वारा रखी गई सात शर्तों को नहीं मानता, तब तक वहां की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।
आईआरजीसी ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से तेल टैंकरों को इस बारूदी सुरंगों वाले रास्ते से गुजरने के लिए मजबूर करने की कोशिशों से केवल लगातार और शर्मनाक हार ही मिलेगी।
गुरुवार को भी आईआरजीसी ने बताया था कि पिछली रात दो अलग-अलग घटनाओं में तीन जहाजों, जिनमें दो सुपरटैंकर शामिल थे, में आग लग गई थी। ये सभी जहाज होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में स्थित एक गैरकानूनी और अनधिकृत मार्ग से गुजर रहे थे।
एक घटना में एक तेल टैंकर उस गैरकानूनी रास्ते से गुजरते समय नौसैनिक बारूदी सुरंग से टकरा गया और उसमें आग लग गई। दूसरी घटना में एक अन्य तेल टैंकर, जो उसी रास्ते से जलडमरूमध्य छोड़ रहा था, आग लगने के बाद रुक गया। उसकी मदद के लिए पहुंचे एक टगबोट (खींचने वाली नाव) में भी आग लग गई।
आईआरजीसी ने एक अलग अभियान का भी जिक्र किया। उसके अनुसार, उसकी नौसैनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध इकाई ने घुसपैठ करने वाले दो मानव रहित लड़ाकू ड्रोन पर नियंत्रण हासिल कर लिया और उन्हें बिना नुकसान के सुरक्षित उतार लिया।
आईआरजीसी ने अमेरिकी सरकार पर आरोप लगाया कि वह जहाजों को नियमों का उल्लंघन करने और बारूदी सुरंगों वाले रास्ते से गुजरने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके कारण अमेरिका और उसके पश्चिम एशियाई सहयोगियों पर बीमा की भारी लागत पड़ रही है, जिसका बोझ अंततः अमेरिकी करदाताओं को उठाना पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बस और ट्रक की टक्कर में 11 लोगों की मौत

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पाकपट्टन के पास एक यात्री बस और ट्रक की टक्कर में 11 लोगों की मौत हो गई और 33 अन्य घायल हो गए। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पाकिस्तान के अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, ‘रेस्क्यू 1122’ ने बताया कि ट्रक और यात्री बस की टक्कर में 11 लोगों की जान चली गई। इसमें यह भी बताया गया कि आठ लोगों को मामूली चोटें आईं, जबकि 25 अन्य लोगों को पाकपट्टन के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जिला प्रशासन की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह हादसा दीपालपुर रोड पर हुआ। उस समय एक यात्री बस मुल्तान से कसूर की ओर जा रही थी, जबकि एक ट्रक विपरीत दिशा से आ रहा था। बस और ट्रक की टक्कर के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई। पुलिस को इसकी सूचना दी गई। वाहनों में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए क्रेन और अन्य भारी मशीनों का इस्तेमाल किया गया। लगभग तीन घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा।
स्थानीय मीडिया ने रेस्क्यू टीम के हवाले से बताया कि अक्टूबर में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 44,797 सड़क हादसे हुए, जिनमें 464 लोगों की मौत हो गई और 23,543 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें से लगभग तीन-चौथाई सड़क हादसों में मोटरसाइकिलें शामिल थीं।
ये आंकड़े पंजाब में ‘रेस्क्यू 1122’ के जिलों के आपातकालीन कामकाज की मासिक समीक्षा के दौरान सामने आए। पाकिस्तान के एक अन्य अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने बताया कि अक्टूबर के दौरान बचाव टीमों ने 231,056 आपातकालीन मामलों में कार्रवाई की और 233,210 लोगों की जान बचाई।
इन घटनाओं में सड़क हादसे, आग लगने के मामले, मेडिकल इमरजेंसी, डूबने की घटनाएं और अन्य बचाव कार्य शामिल थे। विभाग के अनुसार, अक्टूबर में पंजाब में आग लगने की 1,726 घटनाएं और डूबने की 94 घटनाएं दर्ज की गईं।
पंजाब में सड़क हादसों की सबसे अधिक संख्या लाहौर में दर्ज की गई, जहां 7,874 घटनाओं में मोटरसाइकिलें शामिल थीं। मुल्तान में 3,312 मोटरसाइकिलों से जुड़े 2,838 हादसे हुए, जबकि फैसलाबाद में 2,896 मोटरसाइकिलों से जुड़े 2,615 हादसे दर्ज किए गए। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरांवाला में 2,250 मोटरसाइकिलों से जुड़े 2,092 हादसे दर्ज किए गए। इसके बाद शेखूपुरा का नंबर आता है, जहां 1,706 मोटरसाइकिलों से जुड़े 1,714 सड़क हादसे हुए। वहीं, तौंसा शरीफ में 160 मोटरसाइकिलों से जुड़े 142 हादसे सामने आए।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अफगानिस्तान से तनातनी पाकिस्तान की क्षेत्रीय व्यापार महत्वाकांक्षा पर भारी

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है। इस टकराव का असर अब केवल दोनों देशों के राजनीतिक और सुरक्षा संबंधों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका असर पड़ा है।
मध्य एशिया और दक्षिण एशिया को जोड़ने वाली व्यापारिक और परिवहन योजनाओं के सामने भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। पाकिस्तान के रास्ते मध्य एशियाई देशों को समुद्री बंदरगाहों तक पहुंच उपलब्ध कराने की इस्लामाबाद की महत्वाकांक्षा को झटका लगा है। इसका ताजा संकेत कजाखस्तान के साथ व्यापार बढ़ाने के लक्ष्य में आई कमी से मिला है।
क्षेत्रीय मामलों पर नजर रखने वाली वेबसाइट ‘यूरेशियानेट’ ने हाल ही में एक रिपोर्ट प्रकाशित की। जिसके अनुसार, कजाखस्तान और पाकिस्तान के बीच सालाना व्यापार एक अरब डॉलर से अधिक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन अब दोनों देशों ने व्यापार की संभावित क्षमता करीब 645 मिलियन डॉलर आंकी है। यह आकलन एक नवंबर को अस्ताना में कजाखस्तान के उप प्रधानमंत्री सेरिक झुमांगारिन और पाकिस्तान के निवेश मंत्री कासिम अहमद शेख के बीच हुई बातचीत के दौरान सामने आया।
पाकिस्तान मध्य एशियाई देशों के साथ अपने व्यापारिक संबंध मजबूत करने और कराची, ग्वादर तथा अन्य बंदरगाहों के जरिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है। उसकी ख्वाहिश और उम्मीदों को डेंट अफगानिस्तान ने लगाया है। अफगानिस्तान के साथ बिगड़ते रिश्ते और सीमा पार व्यापार में बाधाएं इन योजनाओं की रफ्तार में ब्रेक लगा रही हैं।
पाकिस्तान के सामने उज्बेकिस्तान के साथ व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य भी चुनौतीपूर्ण होता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में सालाना द्विपक्षीय व्यापार को दो अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, उपलब्ध आंकड़े इस लक्ष्य की राह आसान नहीं बताते।
वर्ष 2024 में पाकिस्तान ने उज्बेकिस्तान को करीब 129 मिलियन डॉलर का सामान निर्यात किया था, जबकि उज्बेकिस्तान से पाकिस्तान का आयात लगभग 257 मिलियन डॉलर रहा। वर्ष 2025 के व्यापार आंकड़ों में भी खास बढ़ोतरी दर्ज नहीं हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और मध्य एशियाई देशों के बीच व्यापार बढ़ाने की संभावनाओं को अफगानिस्तान के साथ जारी संघर्ष से बड़ा झटका लगा है। अफगानिस्तान भौगोलिक रूप से पाकिस्तान और मध्य एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसके रास्ते मध्य एशियाई देशों का सामान पाकिस्तान के बंदरगाहों तक पहुंच सकता है और वहां से समुद्री रास्तों के जरिए दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जा सकता है। लेकिन दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव ने इस पूरे परिवहन नेटवर्क की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव का असर पहले से ही सीमा पार कारोबार पर दिखाई दे रहा है। दोनों देशों के बीच प्रमुख सीमा चौकियों के बंद रहने से माल की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे पाकिस्तान के उन व्यापारियों और निर्यातकों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जो अफगानिस्तान को बाजार के रूप में इस्तेमाल करने के साथ-साथ मध्य एशियाई देशों तक सामान पहुंचाने के लिए इस मार्ग पर निर्भर थे।
पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान में सक्रिय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ कार्रवाई की मांग और काबुल की ओर से इन आरोपों को खारिज किए जाने के बीच दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस विवाद ने क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक सहयोग की संभावनाओं को भी प्रभावित किया है।
इसका एक संकेत अक्टूबर में मास्को फॉर्मेट के तहत हुई क्षेत्रीय बैठक में भी देखने को मिला था। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर मतभेद के कारण बैठक में संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका। इस बैठक में मध्य एशियाई देशों के अलावा भारत, चीन, ईरान और रूस समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
पाकिस्तान के निवेश मंत्री कासिम अहमद शेख ने अस्ताना में निवेश मंच पर अपने संबोधन में देश के बंदरगाहों को मध्य एशिया के लिए रणनीतिक प्रवेश द्वार बताया था। उनका कहना था कि पाकिस्तान के बंदरगाह क्षेत्रीय व्यापार और परिवहन संपर्क मजबूत करने के साथ सामान की आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध करा सकते हैं। फिलहाल जो हालात हैं, उसके मद्देनजर इन दावों को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा।
इस पूरे घटनाक्रम का असर भारत के क्षेत्रीय हितों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। भारत लंबे समय से अफगानिस्तान और ईरान के रास्ते मध्य एशिया तक व्यापारिक एवं परिवहन संपर्क मजबूत करने की पैरवी करता रहा है। चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) इसी व्यापक क्षेत्रीय संपर्क रणनीति का हिस्सा हैं।
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