अंतरराष्ट्रीय
अमेरिकी सांसदों ने अंतरिक्ष और परमाणु खतरों के बढ़ने की चेतावनी दी
वॉशिंगटन, 27 मार्च : अमेरिकी सांसदों और सैन्य कमांडरों ने चेतावनी दी कि चीन, रूस और अन्य विरोधियों से बढ़ते खतरे रणनीतिक परिदृश्य को तेजी से बदल रहे हैं। भविष्य के किसी भी संघर्ष में अंतरिक्ष एक अग्रिम मोर्चे के क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।
सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी की सुनवाई की शुरुआत करते हुए सीनेटर रोजर विकर ने कहा कि प्रतिद्वंद्वियों की प्रगति का मुकाबला करने के लिए अमेरिका को “अपनी रणनीतिक क्षमताओं को मूल रूप से अद्यतन करना” होगा। उन्होंने कहा कि रूस और चीन ने परमाणु और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में “तेजी से बड़ी प्रगति” की है, जबकि उत्तर कोरिया अपने मिसाइल भंडार का विस्तार जारी रखे हुए है।
अमेरिकी स्पेस कमांड के कमांडर जनरल स्टीफन व्हाइटिंग ने कहा कि विरोधी ऐसी क्षमताएँ विकसित कर रहे हैं जो “हमें अंतरिक्ष के उपयोग से वंचित कर सकती हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि चीन का उपग्रह बेड़ा तेजी से बढ़ा है।
उन्होंने विधायकों से कहा, “चीन की कक्षा में उपस्थिति तेजी से बढ़ी है और अब वह 1300 से अधिक सक्रिय उपग्रह संचालित कर रहा है…जिनमें 510 से अधिक खुफिया, निगरानी और टोही उपग्रह शामिल हैं।”
उन्होंने कहा कि बीजिंग अपनी सेनाओं में अंतरिक्ष-आधारित क्षमताओं को एकीकृत कर रहा है, जिससे वे “अधिक घातक, सटीक और दूरगामी” बन रही हैं। साथ ही, वह ऐसे हथियार भी तैनात कर रहा है जो अमेरिकी उपग्रहों को नष्ट कर सकते हैं।
इस बीच, रूस भी विघटनकारी अंतरिक्ष क्षमताओं पर काम कर रहा है, जिसमें परमाणु एंटी-सैटेलाइट हथियार की संभावित तैनाती शामिल है। व्हाइटिंग ने चेतावनी दी कि ऐसा सिस्टम “अंधाधुंध” होगा और निम्न पृथ्वी कक्षा में सभी उपग्रहों को खतरे में डाल सकता है।
उन्होंने कहा, “यदि इसे कक्षा में विस्फोट किया गया, तो यह तुरंत हर देश की अंतरिक्ष क्षमताओं को जोखिम में डाल देगा।”
अमेरिकी स्ट्रैटेजिक कमांड के प्रमुख एडमिरल रिचर्ड कैरोल ने व्यापक चुनौती को तेज तकनीकी बदलाव के बीच “एक साथ कई परमाणु प्रतिद्वंद्वियों को रोकने” के रूप में बताया। उन्होंने साइबर खतरे, काउंटर-स्पेस क्षमताओं और उन्नत मिसाइल प्रणालियों को प्रमुख जोखिम क्षेत्र बताया।
उन्होंने कहा, “हमारे देश की परमाणु सेनाएँ… सुरक्षित, संरक्षित, प्रभावी और विश्वसनीय हैं,” लेकिन उन्होंने नए बमवर्षकों, पनडुब्बियों और अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलों सहित परमाणु त्रयी के निरंतर आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
सीनेटर जैक रीड ने चेतावनी दी कि दशकों में पहली बार अमेरिका और रूस के बीच परमाणु बलों को नियंत्रित करने के लिए कोई औपचारिक ढांचा नहीं है, जिससे अनियंत्रित हथियारों की दौड़ का खतरा बढ़ रहा है।
रीड ने कहा कि चीन का तेजी से विस्तार 2030 तक उसे अमेरिका और रूस के “लगभग बराबरी” पर ला सकता है, जिससे निरोधक रणनीतियों और गठबंधन की गतिशीलता जटिल हो जाएगी।
सुनवाई ने यह भी उजागर किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान अब अंतरिक्ष पर कितने निर्भर हैं। व्हाइटिंग ने कहा कि पूरी संयुक्त सेना यह मानकर काम करती है कि उसे अंतरिक्ष आधारित प्रणालियों जैसे नेविगेशन, संचार और मिसाइल चेतावनी तक लगातार पहुंच मिलेगी।
उन्होंने कहा, “यदि ये क्षमताएँ कमज़ोर होती हैं, तो संयुक्त बल की लड़ने की क्षमता तुरंत और गंभीर रूप से प्रभावित होगी।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य के किसी भी संघर्ष में “पहली गोली साइबर और अंतरिक्ष में चलेगी,” जो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की कमजोरी को दर्शाता है।
विधायकों ने कक्षीय मलबे की बढ़ती समस्या पर भी प्रकाश डाला, यह बताते हुए कि चीन और रूस द्वारा किए गए पूर्व एंटी-सैटेलाइट परीक्षणों से हजारों टुकड़े बने जो अभी भी कक्षा में मौजूद हैं। वर्तमान में अमेरिका के पास ऐसे मलबे को हटाने की क्षमता नहीं है और उसे केवल ट्रैकिंग और बचाव पर निर्भर रहना पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय
हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता से कच्चे तेल में तेजी जारी, ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल के पार

हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता के बीच कच्चे तेल में तेजी जारी है और गुरुवार को कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई है।
इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट सुबह के कारोबार में 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से लगभग 4 प्रतिशत अधिक था। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड का जून फ्यूचर्स का कॉन्ट्रैक्ट 1.62 प्रतिशत बढ़कर 94.47 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी की वजह हॉर्मुज स्ट्रेट के खुलने पर अनिश्चितता को माना जा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी नेताओं द्वारा “यूनिफाइड प्रस्ताव” दिए जाने तक युद्धविराम को बढ़ा दिया, लेकिन उन्होंने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाई।
अमेरिका की सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया पर कहा, “ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकाबंदी के तहत अमेरिकी सेना ने 31 जहाजों को वापस मुड़ने या बंदरगाह पर लौटने का निर्देश दिया है।”
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने कहा कि मौजूदा हालात में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह सीजफायर का उल्लंघन है। इससे ईरानी बंदरगाहों को निशाना बनाया जा रहा है। आगे कहा कि पूर्ण सीजफायर तभी संभव है, जब अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ब्लॉक को समाप्त कर देता है।
विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट 50 दिनों से अधिक समय से बंद है, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा बाधित हो गया है। कीमतों में लगातार वृद्धि से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है और इसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है।
सरकार का कहना है कि देश भर में खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय
चीनी राज्य परिषद ने ‘भीतरी मंगोलिया पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए समग्र योजना’ की जारी

बीजिंग, 10 अप्रैल : चीनी राज्य परिषद द्वारा जारी ‘चीन (भीतरी मंगोलिया) पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र के लिए समग्र योजना’ 9 अप्रैल को सार्वजनिक की गई। इसके साथ ही चीन में पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्रों की कुल संख्या 23 हो गई है।
समग्र योजना भीतरी मंगोलिया पायलट मुक्त व्यापार क्षेत्र को सुधारों में अधिक स्वायत्तता प्रदान करती है, जिससे इसे प्रायोगिक परियोजनाएं संचालित करने और व्यापक क्षेत्रों में गहन स्तर पर मौलिक, एकीकृत और विशिष्ट अन्वेषण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इसमें 19 सुधार और नवाचार उपायों की रूपरेखा दी गई है, जिनमें सीमा व्यापार में नवाचार और विकास, अंतरराष्ट्रीय रसद सेवाओं को मजबूत करना, वैज्ञानिक और तकनीकी उपलब्धियों के रूपांतरण और अनुप्रयोग की दक्षता में सुधार करना और विभिन्न क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान का विस्तार करना शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय
वेंस की पाकिस्तान यात्रा से पहले सुरक्षा को लेकर चिंता, सालों बाद यूएस के किसी शीर्ष अधिकारी का पाक दौरा

नई दिल्ली, 10 अप्रैल : अमेरिका और ईरान के बीच इस हफ्ते के अंत में पाकिस्तान में बातचीत होने वाली है। अमेरिका की तरफ से इस बैठक में शामिल होने के लिए उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपने डेलिगेशन के साथ इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति के इस दौरे से संबंधित सुरक्षा को लेकर काफी चिंताएं हैं। सालों के बाद अमेरिका का कोई आला अधिकारी पाकिस्तान का दौरा कर सकता है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान के दौरे को लेकर गहरी चिंता है। व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सुरक्षा चिंता की वजह से वेंस को पाकिस्तान ना जाने की सलाह दी है।
फिलहाल यह कन्फर्म नहीं है कि जेडी वेंस इस बैठक में शामिल होने जाएंगे या नहीं, लेकिन व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा है कि विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद जाएंगे।
किसी भी अमेरिकी अधिकारी के लिए पाकिस्तान के दौरे पर जाने से पहले उनके लिए सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद है। पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों की सक्रियता की वजह से वहां पर किसी भी दूसरे देश के नेता की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगता है।
वेंस ऐसे समय में पाकिस्तान की यात्रा कर सकते हैं, जब अमेरिका ने खुद इस देश के लिए ‘लेवल 3: यात्रा पर पुनर्विचार करें’ की एडवाइजरी जारी की हुई है। इसकी मुख्य वजह आतंकवाद, अपराध और अशांति का खतरा है।
इसके अलावा अमेरिका ने हाल ही में लाहौर और कराची के वाणिज्य दूतावास से गैर-जरूरी अमेरिकी कर्मचारियों को सुरक्षा कारणों से हटा लिया गया था। यही सब कारण हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी के कोई भी नेता या अधिकारी पाकिस्तान जाने से बचते हैं।
पाकिस्तान में अमेरिकी अधिकारियों और दूतावास पर हमले की कई घटनाएं इतिहास में सामने आई हैं। ताजा मामला, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देखने को मिला था, जब उग्र भीड़ ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को घेरा और उसमें तोड़फोड़ की। इसके बाद पेशावर में अमेरिकी कांसुलेट बंद कर दिया गया और कराची और लाहौर में वीजा सेवाएं निलंबित हुईं।
आतंकवाद और सुरक्षा कारणों की वजह से अब तक केवल पांच अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ही पाकिस्तान का दौरा किया, जिनमें ड्वाइट डी. आइजनहावर, लिंडन बी. जॉनसन, रिचर्ड निक्सन, बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश शामिल हैं। 2006 के बाद किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया।
हालांकि, इसके पीछे एक कारण अमेरिका में हुए 26/11 का वो हमला भी है। अमेरिका को संदेह था कि इस हमले के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने पनाह दी है। हालांकि, पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा। फिर अमेरिका ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा, जिसके बाद से दोनों देशों के संबंधों में काफी दूरी आई।
इसके अलावा, पाकिस्तान में चीन का दबदबा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यह भी एक कारण हो सकता है कि अमेरिका इस देश से दूरी बनाकर रखे हुए है। वहीं 2011 के बाद पहली बार अमेरिकी के किसी शीर्ष अधिकारी का पाकिस्तान का दौरा होने वाला है।
द संडे गार्जियन के अनुसार, सिक्योरिटी प्लानर्स ने आने वाले डेलिगेशन की सुरक्षा के लिए एक बड़ा मोटरकेड सिस्टम तैयार करना शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने कन्फर्म किया कि अमेरिकी मिलिट्री एयरक्राफ्ट के लॉजिस्टिक्स टीम और इक्विपमेंट लेकर आने के बाद तैयारियां और तेज हो गईं। इस तरह के बड़े इंतजाम इस दौरे की सांकेतिक अहमियत और युद्ध के समय की डिप्लोमेसी से जुड़े असली सुरक्षा खतरों, दोनों को दिखाते हैं।
बीते दिन पाकिस्तान में ईरानी राजदूत रेजा अमीरी मोगादम ने ईरानी डेलिगेशन के पाकिस्तान पहुंचने को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी दी। हालांकि, बाद में उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया।
ईरानी राजदूत ने अपने पोस्ट में अमेरिकी वार्ताकारों के साथ सीजफायर के मुद्दे पर बातचीत के लिए ईरान के एक डेलिगेशन के पाकिस्तान आने की घोषणा की थी। यह पोस्ट पहले रेजा अमीरी मोगादम के सोशल मीडिया हैंडल पर थी, जो अब नजर नहीं आ रही है। इसकी पीछे की वजह सुरक्षा से संबंधित हो सकती है।
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