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Thursday,16-July-2026
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अमेरिका ने पेटेंट वाली दवाओं पर लगाया 100 प्रतिशत टैरिफ

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TRUMP

वॉशिंगटन, 3 अप्रैल : संयुक्त राज्य अमेरिका आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों और विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर भारी निर्भरता को कारण बताया है।

जारी घोषणा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दवाइयां और उनसे जुड़े घटक “इतनी मात्रा में और ऐसी परिस्थितियों में अमेरिका में आयात किए जा रहे हैं कि वे संयुक्त राज्य की राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचा सकते हैं।”

यह घोषणा पेटेंट दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों (एपीआई) को निशाना बनाती है। ये नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं और सैन्य तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी कि विदेशी उत्पादन पर निर्भरता भू-राजनीतिक या आर्थिक संकट के दौरान “जीवन रक्षक दवाओं” की उपलब्धता को बाधित कर सकती है।

आदेश के तहत, अधिकांश आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत का मूल्य-आधारित (एड वैलोरेम) शुल्क लगाया जाएगा। जो कंपनियां उत्पादन को अमेरिका में स्थानांतरित करने का वादा करेंगी, उन्हें 20 प्रतिशत का कम शुल्क देना होगा, जो चार साल बाद बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा।

घोषणा में प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के लिए अलग-अलग शुल्क दरों का भी उल्लेख है। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्ज़रलैंड से आयात पर लगभग 15 प्रतिशत का कम शुल्क लगेगा, जबकि अनाथ दवाएँ, परमाणु दवाएँ और जीन थेरेपी जैसी कुछ विशेष श्रेणियाँ इस शुल्क से मुक्त रहेंगी।

फिलहाल जेनेरिक दवाओं और बायोसिमिलर्स को इस शुल्क व्यवस्था से बाहर रखा गया है। घोषणा में कहा गया, “जेनेरिक दवाएँ और उनसे जुड़े घटक… इस समय शुल्क के अधीन नहीं होंगे।”

अधिकारियों ने बताया कि यह नीति घरेलू दवा निर्माण को मजबूत करने और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। व्हाइट हाउस में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि ध्यान केवल शुल्क पर नहीं बल्कि उत्पादन के दीर्घकालिक पुनर्गठन पर भी है।

उन्होंने कहा, “मुद्दा सिर्फ शुल्क दर का नहीं है बल्कि उन समझौतों का है जो हम देशों और कंपनियों के साथ कर रहे हैं ताकि आपूर्ति शृंखलाएँ सुरक्षित रहें और उत्पादन अमेरिका में हो।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि कंपनियां पहले से ही इस नीति पर प्रतिक्रिया दे रही हैं। उन्होंने अमेरिका में हो रहे निवेश की ओर इशारा करते हुए कहा, “हम नए फार्मास्युटिकल संयंत्रों के निर्माण में ठोस प्रगति देख रहे हैं।”

ये शुल्क 31 जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे और कुछ कंपनियों को मौजूदा समझौतों के आधार पर समयसीमा में छूट दी जाएगी।

इस फैसले का वैश्विक दवा व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है, खासकर उन देशों पर जो तैयार दवाओं और कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं।

भारत और चीन दुनिया में जेनेरिक दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों के सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल हैं, जो अमेरिकी बाजार का बड़ा हिस्सा आपूर्ति करते हैं। हालांकि फिलहाल जेनेरिक दवाएं छूट में हैं लेकिन भविष्य में शुल्क बढ़ने पर वैश्विक दवा कीमतों और आपूर्ति शृंखलाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।

इस मामले में लागू किया गया ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 अमेरिकी राष्ट्रपति को उन आयातों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देती है जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है। इस प्रावधान का पहले स्टील और एल्यूमिनियम पर शुल्क लगाने के लिए उपयोग किया गया था और अब इसे दवाओं तक बढ़ाना व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

राष्ट्रीय समाचार

भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 561 अंक फिसला, निफ्टी 0.6 प्रतिशत लुढ़का

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के चलते हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार के सत्र में भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्कों निफ्टी और सेंसेक्स में 0.72 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 561.46 अंक यानी 0.72 प्रतिशत गिरकर 77,054.94 पर पहुंच गया, तो वहीं निफ्टी50 158.95 अंक यानी 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 पर था। इस तरह घरेलू बाजार में लगातार तीन दिनों की बढ़त का सिलसिला टूट गया।

इस दौरान करीब 1,422 शेयरों में बढ़त, 2,632 शेयरों में गिरावट और 190 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.44 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

वहीं सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला क्षेत्र बनकर उभरा, जिसमें करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा, निफ्टी पीएसयू बैंक (-1.8 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (-1.6 प्रतिशत), निफ्टी बैंक (-1.1 प्रतिशत) और निफ्टी आईटी (-1 प्रतिशत) भी गिरावट के साथ बंद हुए।

इसके बाद, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.8 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.6 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 0.6 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 0.3 प्रतिशत और निफ्टी इंफ्रा में 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

वहीं इसके विपरीत, निफ्टी फार्मा ने 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ बेहतर प्रदर्शन किया, इसके बाद निफ्टी मेटल का स्थान रहा, जिसमें 0.60 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

निफ्टी 50 इंडेक्स में कुल 39 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिनमें एचसीएल टेक्नोलॉजीज, श्रीराम फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, टाटा मोटर्स और इंटरग्लोब एविएशन सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे, जबकि भारती एयरटेल, अपोलो हॉस्पिटल्स, सन फार्मा, टीसीएस और डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे।

इस बीच, भारतीय रुपया 57 पैसे गिरकर 96.25 अमेरिकी डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुआ। पिछले सत्र में रुपया 95.68 डॉलर प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

कच्चे तेल के बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत में 4 प्रतिशत से अधिक की उछाल आई और यह 87 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए बड़े आर्थिक संकट पैदा कर रही हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और तेज हो गया है, ऐसी खबरें आ रही हैं कि अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान पर हमले किए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी व्यापार पर एक नई नाकाबंदी की घोषणा की है। इससे आगामी कारोबारी सत्रों में भी बाजार पर दबाव बने रहने की संभावना है।

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व्यापार

सोने और चांदी में रिकवरी, दाम आधा प्रतिशत से अधिक बढ़े

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सोने और चांदी में मंगलवार को रिकवरी देखने को मिली। इससे दोनों कीमती धातुओं का दाम आधा प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,40,309 रुपए के मुकाबले 640 रुपए की तेजी के साथ 1,40,949 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

शुरुआती कारोबार में इसमें और तेजी देखने को मिली। सुबह 9:47 पर यह 742 रुपए या 0.53 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,41,051 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।

अब तक के कारोबार में सोने ने 1,40,796 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,41,294 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ है।

सोने के साथ चांदी में तेजी देखी जा रही है।

चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,17,718 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 615 रुपए की तेजी के साथ 2,18,333 रुपए प्रति किलो पर खुला।

खबर लिखे जाने तक, यह 1,231 रुपए या 0.57 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,18,949 रुपए प्रति किलो पर था।

अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,17,923 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,19,289 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार देखा जा रहा है। कॉमेक्स पर सोना 0.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,023 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 57.87 डॉलर प्रति औंस पर थी।

जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी में आने वाले समय में दबाव देखने को मिल सकता है। इसका बड़ा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ना है।

अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 4.62 प्रतिशत, अमेरिका के 30 साल के बॉन्ड की यील्ड 5.104 प्रतिशत और अमेरिका के 5 साल के बॉन्ड की यील्ड 4.378 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

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अंतरराष्ट्रीय

इजरायल में इस साल 27 अक्टूबर को होगा चुनाव, जनता करेगी नेतन्याहू की किस्मत का फैसला

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तेल अवीव, 13 जुलाई: इजरायल में आम चुनाव की तारीख का ऐलान हो गया है। नेसेट के कानूनी सलाहकार सागिट अफिक ने रविवार को घोषणा की कि नेसेट 17 जुलाई को भंग हो जाएगा। इसके साथ ही इजरायल में चुनाव अपनी तय तारीख 27 अक्टूबर को होंगे। यह इजरायली कानून के तहत सबसे आखिरी तारीख है। 27 अक्टूबर को इजरायल के वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की किस्मत का फैसला होगा।

इजरायली मीडिया टाइम्स ऑफ इजरायल की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, अफिक ने नेसेट हाउस कमेटी की चर्चा के दौरान कहा, “मौजूदा नेसेट अपना कार्यकाल पूरा करेगी और इसे जल्दी भंग नहीं किया जाएगा। चुनाव की तारीख कानून के अनुसार तय की गई है और यह 27 अक्टूबर ही रहेगी।”

बता दें, इससे 1988 के बाद पहली बार इजरायल में तय समय पर आम चुनाव होंगे। इसके साथ ही, यदि ऐसा होता है तो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौजूदा सरकार 1973 के बाद पहली ऐसी इजरायली सरकार बन जाएगी, जिसने अपना पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा किया हो।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब गठबंधन ने संसद भंग होने से पहले अपनी सबसे विवादित बिल पास कराने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। संसद भंग होने पर आम तौर पर कानून तब तक नहीं बनते जब तक गठबंधन और विपक्ष दोनों सहमत न हों। इजरायल की 37वीं मौजूदा सरकार 29 दिसंबर, 2022 को नफ्ताली बेनेट-यायर लैपिड सरकार के गिरने के बाद बनी थी।

बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाली मौजूदा गठबंधन सरकार, जिसमें लिकुड, कई अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स और दक्षिणपंथी दल शामिल हैं, को व्यापक रूप से इजरायल के इतिहास की सबसे कट्टरपंथी सरकारों में से एक माना जाता है।

नेतन्याहू की सरकार के लिए हाल का समय काफी मुश्किल भरा रहा। कई बार ऐसे हालात बने, जब लगा कि इजरायली सरकार में टकराव होगा। हमास के साथ बंधक-सीजफायर डील के विरोध में, गाजा में युद्ध के दौरान कट्टर दक्षिणपंथी पार्टियों ने कई मौकों पर सरकार गिराने की धमकी दी। हालांकि, अब तक इजरायली सरकार एक साथ आगे बढ़ रही है।

इजरायली मीडिया ने बताया कि पोल के मुताबिक, अगर आज चुनाव हुए तो नेतन्याहू और उनके साथी 120 सीटों वाली नेसेट में बहुमत से काफी पीछे रह जाएंगे। वहीं, विपक्षी गुट खुद बहुमत के किनारे पर डगमगा रहा है। नेतन्याहू के खिलाफ इस गठबंधन में अरब-बहुमत वाली और अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पार्टियां शामिल नहीं हैं।

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