व्यापार
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने चौथी तिमाही में शुद्ध लाभ में 74.7 प्रतिशत की गिरावट की दर्ज
मुंबई, 30 अप्रैल। उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक (एसएफबी) ने बुधवार को वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में 83.4 करोड़ रुपए के शुद्ध लाभ में 74.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 329.6 करोड़ रुपए था।
उज्जीवन एसएफबी की आय में यह गिरावट मुख्य रूप से बैंक के बढ़ते प्रावधानों और बिजनेस मिक्स में बदलाव के कारण ब्याज आय में कमी के कारण दर्ज की गई।
वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में उज्जीवन एसएफबी की शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) 864.4 करोड़ रुपए रही, जो एक साल पहले इसी अवधि के 933.5 करोड़ रुपए से 7.4 प्रतिशत कम है।
स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, बैंक की एसेट क्वालिटी ने तिमाही आधार पर सुधार दर्ज करवाया।
ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (जीएनपीए) पिछली तिमाही के 2.68 प्रतिशत से घटकर 2.18 प्रतिशत हो गए और नेट एनपीए में भी सुधार दर्ज किया गया, जो 0.56 प्रतिशत से घटकर 0.49 प्रतिशत हो गया।
बैंक का प्रोविजन कवरेज रेश्यो (पीसीआर) 78 प्रतिशत पर मजबूत बना रहा, जिसे तिमाही के दौरान 46 करोड़ रुपए के त्वरित प्रावधान का समर्थन मिला। इसका मतलब है कि बैंक ने संभावित नुकसान को कवर करने के लिए पर्याप्त प्रावधान किया है।
पीसीआर बैंकों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय संकेतक है, जो नॉन-परफॉर्मिंग लोन से संभावित घाटे को कवर करने की उसकी क्षमता को दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त, उज्जीवन एसएफबी ने अपने डिपॉजिट में शानदार वृद्धि दर्ज की, जहां कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़कर 37,630 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
बैंक ने अपने करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट रेश्यो में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की, जो पिछली तिमाही से 43 आधार अंकों की वृद्धि के साथ 25.5 प्रतिशत हो गया।
उज्जीवन की ग्रॉस लोन बुक बढ़कर 32,122 करोड़ रुपए हो गई, जो पिछली तिमाही से 5 प्रतिशत और पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि से 8 प्रतिशत अधिक है।
बैंक के लिए एक प्रमुख आकर्षण इसके सिक्योर्ड लोन पोर्टफोलियो में वृद्धि थी, जो अब कुल लोन बुक का 44 प्रतिशत है, जो एक साल पहले की अवधि के दौरान 30 प्रतिशत था।
उज्जीवन एसएफबी ने लोन वितरण में भी रिकॉर्ड बनाया, जिसमें बैंक ने चौथी तिमाही में 7,440 करोड़ रुपए वितरित किए, जो तिमाही आधार पर 39 प्रतिशत की वृद्धि है।
यह माइक्रो-बैंकिंग और इंडिविजुअल लोन सेगमेंट में मजबूत प्रदर्शन से प्रेरित था।
परिणामों की घोषणा के बाद, बुधवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयर 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ 42.56 रुपए पर आ गए।
राष्ट्रीय समाचार
इक्विटी म्यूचुअल फंड इनफ्लो जून में 26 प्रतिशत बढ़ा, मिडकैप फंड्स में आया सबसे अधिक निवेश

इक्विटी म्यूचुअल फंड इनफ्लो जून में मासिक आधार पर 26 प्रतिशत बढ़कर 28,973 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि मई में 22,907 करोड़ रुपए था। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) की ओर से शुक्रवार को जारी डेटा में दी गई।
एम्फी द्वारा जारी डेटा में बताया गया कि 11 इक्विटी म्यूचुअल फंड सब-कैटेगरी में से सबसे अधिक 6,090 करोड़ रुपए का निवेश मिडकैप फंड कैटेगरी में आया है।
इसके बाद स्मॉलकैप फंड्स में 5,602 करोड़ रुपए का और फ्लेक्सी कैप फंड्स में 5,231 करोड़ रुपए का निवेश आया है।
वहीं, जून में मल्टीकैप फंड्स में 3,070 करोड़ रुपए, लार्जकैप फंड्स में 2,067 करोड़ रुपए, लार्ज एवं मिडकैप फंड्स में 4,321 करोड़ रुपए, वैल्यू फंड्स/कॉन्ट्रा फंड्स में 686 करोड़ रुपए, फोकस्ड फंड्स में 1,118 करोड़ रुपए और सेक्टोरल/थीमेटिक फंड्स में 1,469 करोड़ रुपए का निवेश आया है।
इसके अलावा, समीक्षा अवधि में ईएलएसएस फंड्स से 634 करोड़ रुपए और डिविडेंड यील्ड फंड्स से 49 करोड़ रुपए की निकासी हुई है।
डेट म्यूचुअल फंड्स से निकासी का सिलसिला जारी है। जून में आउटफ्लो करीब 1.09 लाख करोड़ रुपए रहा है, जबकि मई में यह राशि 96,948 करोड़ रुपए थी।
डेट म्यूचुअल फंड्स की 16 कैटेगरी में से सबसे अधिक 42,293 करोड़ रुपए की निकासी लिक्विड फंड्स में देखी गई है। इसमें 16,484.01 करोड़ रुपए की निकासी के साथ लो ड्यूरेशन फंड्स दूसरे और 10,595 करोड़ रुपए की निकासी के साथ मनी मार्केट्स फंड्स तीसरे स्थान पर थे।
जून में गोल्ड ईटीएफ में 3,443.23 करोड़ रुपए का निवेश आया है। इस दौरान अन्य ईटीएफ में 13,237 करोड़ रुपए का निवेश आया। वहीं, इंडेक्स फंड्स में 58 करोड़ की निकासी देखी गई।
इस निवेश से भारत की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 30 जून तक बढ़कर 82,22,480.04 करोड़ रुपए हो गया है। पूरी जून माह में औसत एयूएएम का आकार 84,18,485.5 करोड़ रुपए रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, घबराने की जरूरत नहीं: डब्ल्यूटीसी चेयरमैन विजय कलंत्री

वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (डब्ल्यूटीसी) के चेयरमैन विजय कलंत्री ने गुरुवार को कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था इस चुनौती का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
न्यूज एजेंसी से बातचीत में विजय कलंत्री ने कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 78 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं और भारतीय रुपए पर भी दबाव बना है।
उन्होंने कहा कि इस अनिश्चित माहौल का असर निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा है, जिसके कारण शेयर बाजारों में कमजोरी देखने को मिली है।
विजय कलंत्री ने कहा, “कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर भी दबाव आ सकता है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है।”
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति को लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा, “भारत पहले भी ऐसे दौर का सफलतापूर्वक सामना कर चुका है, जब कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई थीं। हमारी अर्थव्यवस्था ने पहले भी कई वैश्विक संकटों के दौरान मजबूती दिखाई है और मौजूदा परिस्थितियों से निपटने में भी सक्षम है।”
कलंत्री ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति अभी लगातार बदल रही है और आगे क्या होगा, यह अमेरिका, ईरान और अन्य वैश्विक पक्षों के अगले कदमों पर निर्भर करेगा। ऐसे में भारत को घबराने के बजाय अपनी आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा, “स्थिति लगातार बदल रही है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम पर करीबी नजर रखने की जरूरत है। लेकिन भारत पहले भी ऐसी चुनौतियों का सामना कर चुका है और मुझे विश्वास है कि देश मौजूदा अनिश्चितताओं से भी मजबूती के साथ निपटेगा।”
डब्ल्यूटीसी के चेयरमैन ने दोहराया, “घबराने की जरूरत नहीं है। फिलहाल वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता जरूर है, लेकिन भारत पहले भी ऊंची तेल कीमतों के दौर से सफलतापूर्वक निकल चुका है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, इस पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।”
व्यापार
मध्यपूर्व तनाव के बीच सोने और चांदी का दाम करीब आधा प्रतिशत फिसला

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच सोने और चांदी की शुरुआत शुक्रवार को लाल निशान में हुई और इससे दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब आधा प्रतिशत कम हो गया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,45,300 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 410 रुपए प्रति 10 ग्राम या 0.28 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,44,890 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।
शुरुआती कारोबार के दौरान इसमें और गिरावट देखी गई। यह सुबह 10 बजे 696 रुपए प्रति 10 ग्राम या 0.48 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,44,603 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
सोने के साथ चांदी में भी गिरावट देखने को मिली, हालांकि, यह काफी सीमित थी।
चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,26,377 रुपए प्रति किलो के मुकाबले करीब सपाट 2,26,368 रुपए प्रति किलो पर खुला।
खबर लिखे जाने तक यह 244 रुपए प्रति किलो या 0.11 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,26,133 रुपए प्रति किलो पर था।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। कॉमेक्स पर सोना 0.30 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,128 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.18 प्रतिशत की तेजी के साथ 60.86 डॉलर प्रति औंस पर था।
विदेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा हुआ है और अमेरिका की ओर से हवाई हमले करने के बाद ईरान ने भी करार जवाब दिया है और मध्य पूर्व में अमेरिका के कई ठिकानों को निशाना बनाया है।
रिपोर्ट्स में बताया गया कि गुरुवार को ईरान के दक्षिणी तटीय और पूर्वी प्रांतों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में, ईरानी सेना ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए।
बाद में ईरानी मीडिया ने दक्षिणी ईरान में कई धमाकों की खबर दी, जिनमें बुशहर (जहां देश का एक परमाणु संयंत्र है), कोनारक, चोघादक और बंदर अब्बास शामिल हैं।
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