राष्ट्रीय
हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वाले नेपाल के इतिहास से लें सीख : अरशद मदनी
नई दिल्ली, 7 फरवरी : जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने शनिवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सांप्रदायिक शक्तियां और कुछ संगठन हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना देख रहे हैं। जबकि उन्हें अपने पड़ोसी देश नेपाल के इतिहास से सीख लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि नफरत के सौदागर और हिंदू राष्ट्र का सपना देखने वालों को नेपाल से सबक लेना चाहिए। एक दिन ऐसा भी अवश्य आएगा जब जालिमों के गले में जंजीरें होंगी और देश एक बार फिर प्यार, मोहब्बत और इंसाफ के साये (रास्ते) में तरक्की करेगा।
अरशद मदनी ने कहा कि सांप्रदायिक शक्तियां और कुछ संगठन हिंदू राष्ट्र बनाने का सपना देख रहे हैं, जबकि उन्हें अपने पड़ोसी देश नेपाल के इतिहास से सीख लेनी चाहिए। हाल के समय में नेपाल में भी इसी तरह की विचारधारा रखने वालों ने हिंदू राष्ट्र स्थापित किया था, लेकिन अंततः वह व्यवस्था समाप्त हो गई और वहां लोकतांत्रिक संविधान के तहत एक नई व्यवस्था अस्तित्व में आई।
उन्होंने कहा कि इस तथ्य से स्पष्ट होता है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में किसी भी देश की वास्तविक प्रगति, स्थिरता और जनकल्याण तभी संभव है, जब वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हो, न कि किसी एक धर्म या विचारधारा को राष्ट्र पर थोपकर।
मदनी ने कहा कि सांप्रदायिक तत्वों की देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोई भी साजिश सफल नहीं हो पाएगी। सेक्युलरिज्म और भारतीय संविधान की रक्षा के लिए जमीयत उलेमा-ए-हिंद अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि इतिहास बताता है कि जो कौम अपनी पहचान, संस्कृति और धर्म के साथ जीना चाहती है, उसे कुर्बानियां देनी पड़ती हैं।
मदनी का कहना है कि सांप्रदायिक ताकतें इस्लाम और मुसलमान दोनों को मिटाने के प्रयास में हैं, लेकिन शायद उन्हें यह नहीं मालूम कि इस्लाम का यह चिराग कभी बुझ नहीं सकता और जिन्होंने इसे बुझाने की कोशिश की, वे स्वयं मिट गए। उन्होंने आगे कहा, “हम एक जीवित कौम हैं, और जीवित कौमें निराश होने के बजाय अपनी समझ, दूरदर्शिता और रणनीति से सफलता की नई कहानी लिखती हैं।”
उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात से निराश होने की आवश्यकता नहीं है। एक दिन ऐसा अवश्य आएगा, जब अत्याचार का अंत होगा और यह देश फिर से प्रेम, सद्भाव और न्याय के रास्ते में आगे बढ़ेगा।
राष्ट्रीय
मुंबई कोस्टल रोड नॉर्थ परियोजना: वर्सोवा में 348 पेड़ काटे जाएंगे, जिनमें नाना नानी पार्क के अंदर 80 पेड़ शामिल हैं, जिससे निवासियों में आक्रोश फैल गया है।

मुंबई, 13 फरवरी: मुंबई कोस्टल रोड (एमसीआरपी) नॉर्थ प्रोजेक्ट के तहत वर्सोवा में 348 पेड़ प्रभावित होने वाले हैं। जिनमें नाना नानी पार्क के अंदर स्थित 80 पेड़ भी शामिल हैं। बीएमसी ने पार्क के अंदर नोटिस लगा दिए हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में गुस्सा है, जो कहते हैं कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ पेड़ों का मामला नहीं है। यह एक ऐसे उपनगर में बची हुई कुछ गिनी-चुनी खुली जगहों में से एक के खो जाने का मामला है, जो पहले से ही घुटन से जूझ रहा है।
20 किलोमीटर लंबी तटीय सड़क वर्सोवा को दहिसर से 20,000 करोड़ रुपये की लागत से जोड़ेगी। बांद्रा-वर्ली सी लिंक के मरीन ड्राइव से वर्ली छोर तक का पहला चरण पहले ही खुल चुका है। दूसरे चरण का उद्देश्य द्वीप शहर को पश्चिमी उपनगरों से जोड़ना है, लेकिन इसकी पर्यावरणीय लागत काफी अधिक होगी।
हालांकि, वर्सोवा इंटरचेंज से बांगुर नगर तक के ऊंचे हिस्से से 348 पेड़ प्रभावित होने वाले हैं, जबकि इंटरचेंज पर पैकेज ए संरेखण के साथ 1,113 पेड़ों की पहचान की गई है।
तटीय सड़क चरण II परियोजना के पैकेज ए के तहत काटे जाने वाले नाना नानी पार्क के 80 पेड़ों में से कई पर बीएमसी ने नोटिस चिपका दिए हैं। ये नोटिस पार्क के पश्चिमी किनारे पर लगे पेड़ों पर लगाए गए हैं, जो उस क्षेत्र को इंगित करते हैं जहां पेड़ों की कटाई होने की सबसे अधिक संभावना है।
महाराष्ट्र (शहरी क्षेत्र) वृक्ष संरक्षण और परिरक्षण अधिनियम, 1975 की धारा 8(3) का हवाला देते हुए, नोटिस में कहा गया है कि वर्सोवा इंटरचेंज से बांगुर नगर तक के के/पश्चिम वार्ड में पेड़ों को हटाने की अनुमति मांगी गई है – एक प्रक्रियात्मक कदम जो इन पार्क के पेड़ों के संभावित नुकसान का संकेत देता है।
तटीय सड़क के दूसरे चरण के लिए, दहिसर तक की पूरी लंबाई में कुल 1,244 पेड़ों के प्रभावित होने की आशंका है। पिछले साल, स्थानीय मछुआरा समुदायों ने कड़ा विरोध जताते हुए चेतावनी दी थी कि यह परियोजना मालवानी, मार्वे और चारकोप क्षेत्रों में मछली पकड़ने की गतिविधियों को बुरी तरह से बाधित करेगी, जिससे आजीविका खतरे में पड़ जाएगी और कई छोटे, पारंपरिक मछुआरों को अपना काम बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
राजनीति
चाहे मजार हो या कोई और अवैध निर्माण, होगा एक्शन: मुंबई डिप्टी मेयर संजय घाडी

मुंबई, 13 फरवरी : मुंबई के डिप्टी मेयर संजय घाडी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चाहे मजार हो या दूसरा कोई अवैध निर्माण, प्रशासन को कार्रवाई के लिए आदेश दिया जाएगा। उन्होंने अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों को भी मुंबई से बाहर करने का महायुति का वादा दोहराया है।
समाचार एजेंसी मीडिया से बात करते हुए डिप्टी मेयर संजय घाडी ने कहा, “चाहे वह ‘मजार’ हो या कोई और बिना इजाजत किया गया निर्माण, प्रशासन को उसके खिलाफ एक्शन लेने का आदेश देंगे।”
बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर उन्होंने कहा, “मेयर रितु तावडे ने अपने इंटरव्यू में पहले ही स्पष्ट किया था कि मुंबई शहर में बांग्लादेशी घुसपैठियों को हटाया जाना चाहिए। जल्द मुंबई पुलिस के बड़े अधिकारियों के साथ बीएमसी मेयर के नेतृत्व में बैठक होगी। इसके बाद अवैध रूप से रहने वाले बांग्लादेशियों पर एक्शन लिया जाएगा।”
एआईएमआईएम को लेकर भी संजय घाडी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “किसी को भी अपने धर्म के बारे में इस तरह से बात नहीं करनी चाहिए, न ही उन्हें जाति के आधार पर भेदभाव करना चाहिए। मुंबई सबकी है और हम सब मुंबई में एक साथ रहते हैं। यहां गुजराती, मराठी और उत्तर भारतीय हैं। सभी ने मुंबई को आर्थिक राजधानी बनाने में योगदान दिया है। चुनावों के वक्त राजनीति ठीक है, लेकिन सभी को चुनावों के बाद मुंबई में विकास के लिए काम करना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई का मुस्लिम समुदाय पहले कांग्रेस का समर्थन करता था। धीरे-धीरे वे दूर हो गए और लोकसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी के साथ रहने का फैसला किया। उसके बाद इस गठबंधन को भी छोड़ दिया और एआईएमआईएम में शामिल हो गए। नतीजतन, मुस्लिम-बहुल इलाकों से आठ कॉर्पोरेटर चुने गए हैं।
संजय घाडी ने आगे कहा, “हर नेता को हर चुनाव में कड़ी मेहनत करनी चाहिए। भारतीय जनता पार्टी व एकनाथ शिंदे और हमारी शिवसेना, हम सभी ने लगातार काम किया है और इसीलिए हम जीते हैं।”
‘वंदे मातरम’ को लेकर केंद्र सरकार की नई गाइडलाइंस पर संजय घाडी बोले, “अगर केंद्र सरकार या राज्य सरकार कोई कानून बनाती है व उसे नागरिकों के लिए लागू किया जाता है, तो उसका पालन होना चाहिए। लेकिन हम किसी धर्म का विरोध करके ऐसा नहीं करेंगे। हमें एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए।”
राजनीति
लोकसभा में विपक्ष ने किया हंगामा, सदन की कार्यवाही 9 मार्च तक के लिए स्थगित

LOKSABHA
नई दिल्ली, 13 फरवरी : लोकसभा में शुक्रवार को लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही 9 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके पहले कई मंत्रियों ने अपने मंत्रालय से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए।
शुक्रवार को सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही हंगामे के साथ शुरू हुई। विपक्षी सदस्यों ने सदन में नारे लगाए और जेफरी एपस्टीन के साथ कथित संबंध को लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के इस्तीफे की मांग करते हुए सदन के वेल तक पहुंच गए।
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कोडीन सिरप से हुई ‘कई मौतों’ पर केंद्र से सवाल किया और मांग की कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों में पीड़ितों को पांच-पांच लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए और दोषियों को पकड़ने के लिए सीबीआई जांच भी कराई जाए।
प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा कफ सिरप के सेवन से हुई मौतों से संबंधित प्रश्न का जवाब देने के लिए खड़े हुए थे। उन्होंने हंगामे के बीच कांग्रेस नेता के सवाल पर जवाब दिया कि कोई मौत ‘कोडीन’ से नहीं हुई है, तो मुआवजा देने का कोई सवाल नहीं उठता है।
इसके बाद भी कांग्रेस, टीएमसी और डीएमके समेत अन्य विपक्षी सदस्यों ने कार्यवाही को बाधित किया। पीठासीन अधिकारी संध्या राय ने विपक्षी सदस्यों से सदन को चलने देने का आग्रह किया, लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा। इसके चलते सदन की कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित की गई।
दोपहर बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई और कई मंत्रियों ने अपने मंत्रालय से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए। इसके बाद संध्या राय ने सदन को 9 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया।
लोकसभा की कार्यवाही से पहले विपक्षी सदस्यों ने एपस्टीन फाइलों को लेकर संसद परिसर में सदन के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया। कथित तौर पर हरदीप सिंह पुरी और जेफरी एपस्टीन के बीच बातचीत को लेकर कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने सरकार को घेरने के लिए मुद्दा उठाया। हालांकि, कांग्रेस के कथित दावों को केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने पूरी तरह से खारिज कर दिया।
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