राजनीति
मध्य प्रदेश में खाद के जमाखारों व कालाबाजारी करने वालों पर लगेगा रासुका: कृषि मंत्री
मध्य प्रदेश में खाद का अवैध भंडारण और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत की कार्रवाई की जाएगी। यह बात सोमवार को राज्य के कृषि मंत्री कमल पटेल ने कही है। कृषि मंत्री पटेल ने कहा कि खरीफ फ सलों को ²ष्टिगत रखते हुए उर्वरक आपूर्ति की लगातार समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है वे सुनिश्चित करें कि पूरे प्रदेश में किसानों को किसी भी तरह से खाद, यूरिया की उपलब्धता में परेशानी न हो।
उन्होंने बताया कि अधिकारियों को उर्वरक के अवैध भंडारण करने वालों के विरूद्घ सख्त कार्यवाही करने के साफ निर्देश दिए गए हैं।
कांग्रेस की सरकार माफि या की सरकार थी, भाजपा की सरकार किसानों की सरकार है, कांग्रेस के समय एक भी जमाखोर के खिलाफ प्रकरण दर्ज नहीं हुआ जबकि अब राज्य में यूरिया के अवैध भंडारण पर एफआईआर दर्ज हो रही हैं।
उन्होनें आगे कहा कि उर्वरक के अवैध भंडारण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों को धोखा देने वालों के खिलाफ रासुका के तहत प्रकरण दर्ज होगा। किसानों के लिए खाद का पर्याप्त इंतजाम किया जा रहा है, पिछली बार के मुकाबले 30 प्रतिशत यूरिया और 50 प्रतिशत डीएपी अधिक दिया जा चुका है। एक लाख मीट्रिक टन यूरिया के खेप जल्द पहुंचने वाली है। कुल मिलाकर खाद की मांग बनी रहने तक आपूर्ति में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
सीजफायर के कुछ घंटों बाद ही इजरायल ने लेबनान पर किया हमला , 5 की मौत

दक्षिण लेबनान में इजरायली हमले जारी है। हालिया हमले में 5 लोगों की मौत हो गई है। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी (एनएनए) ने शनिवार को बताया कि, हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच युद्धविराम लागू होने के 24 घंटों के भीतर ही दक्षिणी लेबनानी शहर सज्द के निकट स्थित जबल अल-रफी क्षेत्र पर एयर स्ट्राइक की गई।
एक दिन पहले ही दोनों के बीच सीजफायर पर सहमति बनी थी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, युद्धविराम शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4:00 बजे से प्रभावी हुआ।
इस बीच, हिज्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने शुक्रवार को कहा कि यदि संगठन पर हमला किया गया तो वह हथियारों के बल पर इजरायल का मुकाबला करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौत की धमकियां उनके सदस्यों को डराने में सफल नहीं होंगी।
अल-मनार टीवी चैनल पर प्रसारित अपने संबोधन में कासिम ने कहा, “हिज्बुल्लाह को खत्म करने और कब्जे को स्थायी बनाने की परियोजना विफल हो चुकी है, और इजरायल हमारी जमीन के अंतिम हिस्से तक से पीछे हटेंगे।”
उन्होंने कहा कि लेबनान इस समय “सबसे खतरनाक दौर” और देश के भविष्य को निशाना बनाने वाली “अमेरिकी-इजरायली अभियान” का सामना कर रहा है। कासिम ने आरोप लगाया कि लेबनान की राजनीतिक सत्ता के खिलाफ इजरायल नया आंदोलन खड़ा करना चाहता है और संघर्ष से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में भी बाधाएं पैदा कर रहा है।
कासिम ने यह भी कहा कि हिज्बुल्लाह के हथियार केवल इजरायल के खिलाफ इस्तेमाल के लिए हैं और उन्होंने इजरायल से लेबनान की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपील की।
उनकी यह टिप्पणी उस समय आई जब शुक्रवार को युद्धविराम लागू होने के कुछ ही समय बाद इजरायली हवाई हमले में सज्द के निकट जबल अल-रफी क्षेत्र को निशाना बनाया गया।
इससे पहले दिन में, हिज्बुल्लाह के संसदीय गुट “लॉयल्टी टू द रेजिस्टेंस” के सदस्य इब्राहिम अल-मूसावी ने कहा था कि यदि इजरायल भी समझौते की शर्तों का पालन करता है, तो हिज्बुल्लाह युद्धविराम समझौते का सम्मान करता रहेगा।
वहीं, लेबनान के पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर ने बताया कि 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों में कुल 3,980 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12,001 लोग घायल हुए हैं।
राष्ट्रीय समाचार
मई में बीएफएसआई थीमैटिक फंड्स ने दिया सबसे बेहतर रिटर्न, एसआईपी निवेशकों का भरोसा बड़े शेयरों पर कायम: रिपोर्ट

बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा (बीएफएसआई) थीमैटिक फंड्स ने मई महीने में म्यूचुअल फंड निवेश जगत में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। इन फंड्स ने 5.5 प्रतिशत का रिटर्न दिया और इनमें 1,013 करोड़ रुपए का निवेश आया। इसका मुख्य कारण इन फंड्स में बड़ी संख्या में लार्ज-कैप शेयरों की मौजूदगी रही।
वैलम कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, मई महीने में एक दिलचस्प स्थिति देखने को मिली। माइक्रो-कैप फंड्स ने 5.7 प्रतिशत रिटर्न के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन इसके बावजूद इनमें निवेशकों की रुचि सीमित रही और इन फंड्स में अपेक्षाकृत कम निवेश आया, जबकि
रिपोर्ट के मुताबिक, स्मॉल-कैप फंड्स ने मई में 3.4 प्रतिशत का रिटर्न दिया और इनमें 2,229 करोड़ रुपए का निवेश आया। वहीं मिड-कैप फंड्स ने 1.6 प्रतिशत का रिटर्न दिया और इनमें 3,898 करोड़ रुपए का निवेश हुआ।
इसके विपरीत, लार्ज-कैप फंड्स ने मई महीने में केवल 1.5 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जो विभिन्न कैटेगरी में सबसे कम था। इसके बावजूद इन फंड्स में 8,565 करोड़ रुपए का निवेश आया, जो स्मॉल-कैप फंड्स के मुकाबले लगभग चार गुना और मिड-कैप फंड्स के मुकाबले दोगुने से भी अधिक है।
इसके अलावा, फ्लेक्सी-कैप फंड्स ने 2.1 प्रतिशत का रिटर्न दिया और इनमें 5,350 करोड़ रुपए का निवेश आया। वहीं, लार्ज एंड मिड-कैप फंड्स में 2,617 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जबकि इनका रिटर्न 1.9 प्रतिशत रहा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लार्ज-कैप और फ्लेक्सी-कैप इंडेक्स आधारित योजनाओं में निवेशकों द्वारा पहले से निर्धारित एसआईपी निर्देशों के कारण खुदरा निवेशकों का पैसा लगातार बाजार के सबसे बड़े और अधिक तरल (लिक्विड) शेयरों में जाता रहता है।
यही वजह है कि भले ही कुछ छोटे फंड्स बेहतर प्रदर्शन कर रहे हों, फिर भी लार्ज-कैप फंड्स में निवेश का प्रवाह लगातार बना हुआ है।
वर्तमान में 10.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) के साथ लार्ज-कैप फंड्स भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग की सबसे बड़ी श्रेणी बने हुए हैं।
मई में एसआईपी (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए कुल 30,954 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है।
देश में सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या बढ़कर 9.64 करोड़ हो गई है।
मई के अंत तक भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट 81.58 लाख करोड़ रुपए पर स्थिर रहा। इसके साथ ही इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लगातार 63वें महीने भी शुद्ध निवेश (नेट इनफ्लो) दर्ज किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मई में 32,963 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 82,165 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे, जिससे बाजार को मजबूत समर्थन मिला।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसयू बैंक) फंड्स ने मई में 6.9 प्रतिशत का रिटर्न दिया और इनमें 436 करोड़ रुपए का निवेश आया। वहीं प्राइवेट बैंक फंड्स ने 6.5 प्रतिशत का रिटर्न दिया और इनमें 329 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। दोनों श्रेणियों में कुल मिलाकर 765 करोड़ रुपए का निवेश आया।
ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स फंड्स ने मई में 4.4 प्रतिशत का रिटर्न दिया और इनमें 194 करोड़ रुपए का निवेश हुआ।
इसके अलावा, ऑटो फंड्स ने भी 4.2 प्रतिशत का मजबूत रिटर्न दर्ज किया, जिससे यह श्रेणी भी निवेशकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रही।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान 60 दिनों के अंदर अंतिम समझौते के लिए सहमत हो जाएगा : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि ईरान, मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने के 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के लिए सहमत हो जाएगा।
ट्रंप ने शुक्रवार को मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज में कहा कि अगर गुरुवार से शुरू होने वाले 60 दिनों के अंदर कोई समझौता नहीं होता है, तो “हम ऐसे कदम उठाएंगे जिनसे उन्हें खुशी नहीं होगी। लेकिन मुझे नहीं लगता कि नौबत वहां तक पहुंचेगी।”
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एमओयू में कहा गया है कि दोनों पक्ष अधिक से अधिक 60 दिनों में बातचीत करके अंतिम समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आपसी सहमति से इस समय-सीमा को बढ़ाया भी जा सकता है।
स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान बातचीत टाल दी गई और किसी भी पक्ष ने इसके लिए कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया। कई मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि लेबनान में इजरायल के हालिया हमलों के जवाब में ईरान बातचीत से पीछे हट गया।
इससे पहले शुक्रवार को ट्रंप ने एनबीसी न्यूज को बताया कि उन्होंने इजरायली नेताओं से बात की थी और उनसे हिज़्बुल्लाह के साथ युद्धविराम के लिए सहमत होने का आग्रह किया था।
ट्रंप ने फोन पर हुए इंटरव्यू में कहा, “यह एक अच्छी बात है। यह तो सोने पर सुहागा जैसा है।”
इस बीच, अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि अगले सप्ताह वॉशिंगटन डीसी में इजरायल और लेबनान के बीच बातचीत का एक नया दौर होगा।
इससे पहले, स्विट्जरलैंड के संघीय विदेश विभाग ने एक बयान में कहा, “अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच होने वाली बातचीत टाल दी गई है। स्विट्जरलैंड इन बातचीत में मदद करने के लिए तैयार है। बर्गेनस्टॉक में इससे जुड़ी तैयारी का काम जारी है। अभी और कोई जानकारी नहीं दी जा सकती।”
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को एक राजनीतिक रूपरेखा समझौते से आगे बढ़ाकर, उसे लागू करने, उसकी पुष्टि करने और नियमों के पालन से जुड़ी विस्तृत बातचीत की ओर ले जाने की योजना थी।
गुरुवार रात व्हाइट हाउस ने घोषणा की कि ईरान के साथ तकनीकी बातचीत के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की प्रस्तावित यात्रा टाल दी गई है। हालांकि, बातचीत की तैयारियां जारी हैं और दोनों पक्ष हाल ही में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन को लागू करने के उद्देश्य से चर्चा के अगले चरण को शुरू करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता ने गुरुवार देर रात कहा, “जैसा कि उपराष्ट्रपति ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, आगामी तकनीकी बातचीत की योजनाएं अभी अंतिम रूप नहीं ले पाई हैं और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सबसे पहले उपलब्ध अवसर पर रवाना होने के लिए तैयार है।”
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