राजनीति
राजस्थान बीजेपी में मचा जबरदस्त घमासान
पूर्व सीएम वसुंधरा राजे और उनके अनुयायियों की कल्पना की उड़ान अचानक उतरती दिख रही है क्योंकि भगवा ब्रिगेड का केंद्रीय नेतृत्व रेगिस्तानी राज्य में उनके खेमे के पंख काटने में व्यस्त है।
कहानी तीन राज्यों में उपचुनाव प्रचार के दौरान उनके पोस्टर हटाने के साथ शुरू हुई, तब उनके पोस्टर राज्य पार्टी मुख्यालय से हटा दिए गए थे। हाल ही में उनके खेमे के एक पूर्व मंत्री रोहिताश्व शर्मा को पार्टी के कामकाज के खिलाफ बोलने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उन्हें 15 दिन में जवाब देने की चेतावनी दी गई है अन्यथा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आरएसएस के नेता सतीश पूनिया को बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से राजे महीनों से पार्टी मुख्यालय से दूरी बनाए हुई हैं।
तब से, उनके खेमे के पार्टी कार्यकर्ता पार्टी के खिलाफ बोल रहे थे और राज्य भाजपा संगठन के समानांतर इकाई चला रहे थे।
हाल ही में, इस खेमे ने दावा किया कि राजस्थान में “राजे बीजेपी है और बीजेपी राजे है।”
यह बयान राज्य के पार्टी नेताओं को रास नहीं आया और फिर दोतरफा युद्ध शुरू हो गया।
पूनिया और विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने पलटवार करते हुए कहा कि कोई भी नेता पार्टी से ऊंचा नहीं होता और पार्टी का अनुशासन पहले आता है।
हालांकि, राजे के अनुयायी नहीं रुके और लगातार हमला करते रहे, जिसके कारण केंद्रीय नेताओं को हस्तक्षेप करने के लिए जयपुर जाना पड़ा।
प्रदेश पार्टी प्रभारी अरुण सिंह ने जयपुर आकर बागी नेताओं को पार्टी अनुशासन का पालन करने या संगीत का सामना करने के लिए तैयार रहने की खुलेआम चेतावनी दी।
उन्होंने कहा, पार्टी के नेताओं को अनुशासन में रहना चाहिए और एक बयान जारी करने से पहले दो बार सोचना चाहिए कि क्या इससे पार्टी को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी या उसकी संभावनाओं में सेंध लगेगी। सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को पार्टी के संवैधानिक मानदंडों का पालन करना चाहिए और अनुशासन में रहना चाहिए या अन्यथा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
इस चेतावनी के तुरंत बाद प्रदेश पार्टी नेतृत्व ने राजे खेमे से भाजपा के वरिष्ठ नेता रोहिताश्व शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
शर्मा ने अलवर में हुई एक बैठक में मीडिया से कहा था कि भाजपा कार्यकर्ता जमीन पर काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने कार्यालयों तक सीमित हैं, जिसके कारण वह दो उपचुनाव हार गई।
हालांकि, पूनिया ने उनके दावे का खंडन किया और कहा, “कोविड महामारी के दौरान भाजपा के 600 कार्यकर्ताओं ने जमीन पर काम करते हुए अपनी जान गंवाई। इस तरह के बयान उन कार्यकर्ताओं के प्रति अनादर दिखाते हैं जिन्होंने जमीन पर अपना बलिदान दिया।”
इस बीच शर्मा ने पार्टी के अनुशासन का पालन नहीं किया और दावा किया कि राजे उनकी नेता हैं और पार्टी उनकी मां है और कोई भी उनकी मां से बेटे को अलग नहीं कर सकता है।
उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली में अपनी लड़ाई लड़ूंगा और भूख हड़ताल करूंगा।
दोनों ओर से घमासान में कोई कमी नहीं दिख रही, लेकिन पार्टी ने फिर से चेतावनी दी है कि पार्टी लाइन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ और कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने शिशुपाल की 99 गलतियों को माफ कर दिया लेकिन उनकी 100वीं गलती को माफ नहीं किया गया, इसलिए यहां भी 100वीं गलती माफ नहीं की जाएगी।
इस बीच, राज्य में जिस बात ने हंगामा खड़ा कर दिया है, वह है अरुण सिंह का यह बयान कि संसदीय बोर्ड सीएम के चेहरे पर फैसला लेगा।
राजे के अनुयायी महीनों से सोशल मीडिया पर उन्हें 2023 के चुनावों के लिए मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, पार्टी कार्यकर्ताओं ने आईएएनएस को बताया, “राजे और उनके अनुयायी सफेद हाथियों की तरह हैं, जो कुछ भी योगदान नहीं दे रहे हैं, लेकिन पार्टी की संभावनाओं को सेंध लगा रहे हैं, इसलिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जरूरी है।”
राष्ट्रीय भाजपा उपाध्यक्ष के रूप में राजे पार्टी में क्या योगदान दे रही हैं, उन्होंने कहा, “यह आश्चर्य की बात है कि पार्टी ने उन्हें अपने कर्तव्यों को निभाने से मुक्त कर दिया है। ऐसे मामलों में, उनके जैसे वरिष्ठ नेताओं को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए पहल करना शुरू करना चाहिए। वे अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहते हैं। जो ऐसा नहीं करते वे गुमनामी में चले जाते हैं, यही राजनीति का नियम है।”
तो क्या बागी नेताओं के खिलाफ और कार्रवाई हो रही है और क्या उनके पंख और भी काटे जाएंगे?
इस पर पूनिया ने आईएएनएस को बताया कि रुको और देखो।
राजनीति
‘कोई हमें दबाव में नहीं ला सकता’, विपक्ष के मार्च पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने 12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक के नेताओं के विरोध मार्च के बाद अदालत परिसर और उसके आसपास राजनीतिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि कोई भी सुप्रीम कोर्ट पर दबाव नहीं बना सकता। अदालत ने इस घटनाक्रम से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया।
सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया की दलीलें सुनने के बाद नोटिस जारी किया। भाटिया ने कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट को भी किसी राजनीतिक जुलूस जैसी स्थिति का सामना करना पड़े।
इस पर सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, “कोई हमें दबाव में नहीं ला सकता।” पीठ ने कहा कि इस तरह के प्रयास कमजोर हैं और इन पर कोई ध्यान नहीं देता। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की, “हम हाथीदांत के टावरों में बैठकर काम नहीं कर रहे हैं। हमें पता है कि वे बाहर क्या बयान देते हैं और अदालत के अंदर क्या कहते हैं। हमें सब कुछ पता है।”
यह मामला चार अधिवक्ताओं की ओर से दायर याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के आसपास राजनीतिक जुलूसों और प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए एक समान व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। साथ ही, अदालत परिसरों के भीतर राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने का अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राजनीतिक लामबंदी को न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने या लंबित मामलों में अदालतों पर दबाव बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। याचिकाओं में 12 अक्टूबर की घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, आगंतुकों के रिकॉर्ड, प्रवेश और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है। इसके अलावा, संबंधित राजनीतिक नेताओं के आचरण की जांच करने और यदि मामला बनता है तो उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही पर विचार करने का अनुरोध किया गया है।
यह विवाद 12 अक्टूबर को इंडिया ब्लॉक के नेताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट की तरफ निकाले गए विरोध मार्च के बाद सामने आया। इस मार्च में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत विपक्षी नेता शामिल थे। उनका उद्देश्य मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर अपनी चिंताओं को सामने रखना था।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब सीजेआई सूर्यकांत ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया था, जिसमें उन्होंने मुलाकात कर एसआईआर के मुद्दे पर ज्ञापन सौंपने की इच्छा जताई थी। सीजेआई ने कहा था कि उनके पत्र में उठाए गए मुद्दे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित हैं।
विपक्षी नेताओं को दिए गए जवाब में सीजेआई ने स्पष्ट किया था कि लंबित मामलों पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाना शक्तियों के पृथक्करण के संवैधानिक सिद्धांत के विपरीत होगा। शक्तियों का पृथक्करण संविधान के मूल ढांचे का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि विपक्षी नेताओं के पत्र में उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पास प्रशासनिक अधिकार नहीं हैं, लेकिन नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित करने वाले मामलों की न्यायिक समीक्षा करना अदालत का दायित्व है।
सीजेआई ने विपक्षी नेताओं को स्थापित कानूनी प्रक्रिया के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की सलाह दी थी। साथ ही आश्वासन दिया था कि कानून के अनुरूप दायर याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी। इसके बाद राहुल गांधी ने घोषणा की थी कि इंडिया ब्लॉक के नेता औपचारिक याचिका के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे। उन्होंने संविधान और लोकतंत्र के समर्थन में नागरिकों से भी उनके अभियान में शामिल होने की अपील की थी।
इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के 12 अन्य नेताओं की ओर से दायर उस याचिका पर भी चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया, जिसमें एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने निर्देश दिया कि इस याचिका को विभिन्न राज्यों में एसआईआर की वैधता को चुनौती देने वाली पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया जाए।
पीठ ने कहा, “हम नोटिस जारी कर रहे हैं और मामले को पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ रहे हैं।” सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगली तारीख पर याचिकाकर्ताओं में से एक के आचरण के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। हालांकि, अदालत ने फिलहाल संबंधित याचिकाकर्ता की पहचान उजागर नहीं की।
पीठ ने कहा कि वह अगली सुनवाई पर एक याचिकाकर्ता से उसके आचरण के बारे में पूछना चाहेगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित याचिकाकर्ता के संबंध में नोटिस पर फिलहाल अस्थायी रूप से विचार किया जाएगा और यह उसके आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देने पर निर्भर करेगा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
जयशंकर और जॉर्जिया की विदेश मंत्री ने की मुलाकात, व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने पर हुई चर्चा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यूएई के अबू धाबी में आयोजित ‘रायसीना मिडिल ईस्ट’ कार्यक्रम के दौरान जॉर्जिया की विदेश मंत्री माका बोचोरिशविली से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने व्यापार, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “जॉर्जिया की विदेश मंत्री माका बोचोरिशविली से मिलकर खुशी हुई। व्यापार, पर्यटन और शिक्षा सहित हमारे संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। हमने कारोबार, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा की। साथ ही मौजूदा क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी बात हुई।”
दोनों नेताओं ने राजनीतिक संवाद को मजबूत बनाने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति समेत अन्य साझा हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
माका बोचोरिशविली ने भी ‘एक्स’ पर लिखा, “अबू धाबी में रायसीना मिडिल ईस्ट के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मिलकर खुशी हुई। हमने राजनीतिक संवाद को मजबूत करने, आर्थिक संबंधों को विस्तार देने और पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति तथा अन्य साझा हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।”
रायसीना मिडिल ईस्ट का दूसरा संस्करण 14-15 अक्टूबर को अबू धाबी में आयोजित किया जा रहा है। इसका आयोजन ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) ने यूएई के विदेश मंत्रालय और भारत के विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया है।
इस समय जयशंकर आधिकारिक यात्रा पर यूएई में हैं। इस दौरान उन्होंने यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-यूएई संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक के बाद जयशंकर ने ‘एक्स’ पर लिखा, “यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ बेहद गर्मजोशी और सकारात्मक माहौल में मुलाकात हुई। हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी की भावना के तहत द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।”
जयशंकर बुधवार को अबू धाबी पहुंचे थे, जहां यूएई की अंतरराष्ट्रीय सहयोग राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी ने उनका स्वागत किया।
राष्ट्रीय समाचार
पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या की सीबीआई जांच की मांग, हाई कोर्ट में पीआईएल दायर

पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में अब सीबीआई जांच की मांग उठी है। इस संबंध में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। मानसा में दर्ज मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है, जिसकी निगरानी हाई कोर्ट करे।
वहीं, दूसरी ओर मानसा में परविंदर सिंह की मौत के बाद परिवार और लोगों के रोष को देखते हुए महिला इंस्पेक्टर बेअंत कौर थाना सिटी-1 को सस्पेंड कर दिया गया है।
याचिकाकर्ता ने आरोपी को मेडिकल स्टोर का ड्रग लाइसेंस देने, आपराधिक पृष्ठभूमि के बावजूद आर्म्स लाइसेंस देने, मृतक की कॉल पर लोकल पुलिस द्वारा असंवेदनशील कदम उठाए जाने, अस्पताल ले जाने में देरी करने और मृतक के परिवार और गवाहों की सुरक्षा के साथ राज्य में कानून-व्यवस्था बहाल करने की भी मांग की है।
याचिका के अनुसार, 45 वर्षीय परविंदर सिंह उर्फ झोटा पूर्व फ्रीस्टाइल कबड्डी खिलाड़ी था और मानसा का निवासी था। उसने ‘एंटी-ड्रग टास्क फोर्स’ बनाई थी और मेडिकल स्टोरों पर नशे की अवैध बिक्री का लाइव वीडियो बनाकर अपने फेसबुक पेज पर डालता था, जिसके करीब 63 हजार फॉलोअर्स थे।
जुलाई 2023 में उसने बठिंडा रोड, मानसा स्थित आरोपी अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर पर प्रतिबंधित नशीले कैप्सूल बेचने का आरोप लगाया था। उसकी शिकायत पर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज हुआ था और उसके खिलाफ भी क्रॉस-केस दर्ज कर हिरासत में लिया गया था। इस मामले में परविंदर सिंह झोटा को सितंबर 2023 में रिहा किया गया।
13 अक्टूबर को झोटा ने आरोपी के मेडिकल स्टोर से एक व्यक्ति को नशीले कैप्सूल खरीदकर निकलते हुए देखा। उसने वीडियो बनाना शुरू किया, आरोपी से सवाल पूछा और पुलिस को कॉल किया, लेकिन पुलिस नहीं आई। इसी दौरान आरोपी ने उस पर गोली चला दी। इस घटना में परविंदर सिंह झोटा के चार साथी कुलविंदर सिंह, गोबिंद सिंह, बलतेज सिंह और हैप्पी भी घायल हो गए। पिता की शिकायत के अनुसार आरोपी और उसके साथियों ने दिनदहाड़े उसके बेटे का पीछा कर गोली मारी।
फायरिंग के बाद भी पुलिस करीब 20-25 मिनट तक मौके पर नहीं पहुंची और गंभीर रूप से घायल परविंदर को तुरंत अस्पताल नहीं ले जाया गया। बाद में उसे सिविल अस्पताल मानसा ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
याचिका में ड्रग लाइसेंस पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रेस रिपोर्ट में ड्रग इंस्पेक्टर मानसा के बयान के हवाले से कहा गया है कि पिछले चार साल में आरोपी की दुकान पर करीब दस बार छापे पड़े, तीन बार लाइसेंस सस्पेंड किया गया, तीन बार नशीले पदार्थ बरामद किए गए और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत कार्रवाई की गई, फिर भी लाइसेंस रद्द नहीं किया गया।
घटना के बाद मानसा में 13 अक्टूबर को पूर्ण बंद रहा। प्रदर्शनकारियों ने बरनाला-सिरसा रोड पर टिंकोनी चौक जाम किया। 14 अक्टूबर को भीड़ ने आरोपी के मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी और फायर टेंडर को भी नुकसान पहुंचाया। वहीं, 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया।
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