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Wednesday,27-May-2026
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एनपीएस के तहत वित्त वर्ष 2025 में प्राइवेट सेक्टर सब्सक्राइबर्स की संख्या 12 लाख के पार

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नई दिल्ली, 23 अप्रैल। भारत सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत 2024-25 के दौरान प्राइवेट सेक्टर सब्सक्राइबर्स की संख्या 12 लाख से अधिक दर्ज की गई है। मार्च 2025 तक कुल सब्सक्राइबर्स की संख्या 165 लाख हो गई है, जो कि एक बड़ी उपलब्धि को दिखाता है।

वित्त मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, सितंबर 2024 में शुरू की गई ‘एनपीएस वात्सल्य’ योजना के तहत 1 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स को रजिस्टर किया गया है। यह योजना विशेष रूप से नाबालिगों के लिए डिजाइन की गई है।

एनपीएस और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) दोनों के लिए एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 2024-25 के दौरान 23 प्रतिशत बढ़कर मार्च 2025 के अंत तक 14.43 लाख करोड़ रुपये हो गया।

पीएफआरडीए के अध्यक्ष दीपक मोहंती ने इस महीने की शुरुआत में कहा कि एनपीएस भारत के पेंशन क्षेत्र की आधारशिला के रूप में उभरा है, जिसमें 14.4 लाख करोड़ रुपये का संचित कोष है और एनपीएस और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) के तहत रजिस्टर्ड सब्सक्राइबर्स की कुल संख्या 8.4 करोड़ है।

मोहंती ने कहा कि पेंशन सिस्टम का ध्यान कवरेज को बढ़ाने, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए पेंशन-समावेशी समाज बनाने पर बना हुआ है।

उन्होंने आगे कहा कि ‘सभी के लिए पेंशन’ एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बननी चाहिए। वृद्ध आबादी के लिए एक सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए इसमें नीतिगत कार्रवाई की जरूरत है।

1 अप्रैल से लागू यूनिफाइड पेंशन स्कीम से 23 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इस स्कीम के तहत कम से कम 25 साल की सेवा वाले केंद्र सरकार के कर्मचारी रिटायरमेंट से पहले पिछले 12 महीनों के अपने औसत मूल वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर एक निश्चित पेंशन के लिए पात्र हैं।

सरकार ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अधिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए यूपीएस की शुरुआत की। यह स्कीम खासकर उन लोगों के लिए लाई गई है, जो बाजार से जुड़ी पेंशन के बजाय एक स्थिर और अनुमानित आय पसंद करते हैं।

जिन कर्मचारियों ने 10 साल से अधिक लेकिन 25 साल से कम समय तक सेवा की है, उन्हें प्रति माह न्यूनतम 10,000 रुपये की पेंशन मिलेगी।

पेंशनभोगी की मृत्यु के मामले में, उनके परिवार को पारिवारिक पेंशन के रूप में अंतिम पेंशन का 60 प्रतिशत मिलेगा।

वर्तमान में एनपीएस के तहत आने वाले केंद्र सरकार के कर्मचारियों के पास यूपीएस में स्विच करने का विकल्प होगा।

इस योजना को हाइब्रिड मॉडल के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) और एनपीएस दोनों की विशेषताएं शामिल हैं।

राष्ट्रीय समाचार

नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई ने की कार्रवाई, दो और आरोपी गिरफ्तार

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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार लोगों की कुल संख्या बढ़कर 13 हो गई है।

सीबीआई के अनुसार, लातूर निवासी डॉक्टर मनोज शिरुरे को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि उन्होंने आरोपी कोचिंग सेंटर संचालक के बेटे समेत तीन छात्रों को आरोपी पी.वी. कुलकर्णी से रसायन विज्ञान का प्रश्नपत्र दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

इस मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी की पहचान तेजस हर्षदकुमार शाह के रूप में हुई है। वह पुणे स्थित डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल अकादमी में भौतिकी के फैकल्टी सदस्य हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, उन्हें नीट-यूजी 2026 परीक्षा का लीक हुआ भौतिकी का प्रश्नपत्र पहले से गिरफ्तार आरोपी मनीषा हवलदार से मिला था।

सीबीआई ने बताया कि मामले में साजिश की पूरी कड़ी और अन्य आरोपियों की भूमिका का पता लगाने के लिए जांच लगातार जारी है। एजेंसी अब तक देशभर में 49 स्थानों पर तलाशी अभियान चला चुकी है। इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। जब्त सामग्री की विस्तृत जांच की जा रही है।

सीबीआई ने यह मामला 12 मई को शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज किया था। शिकायत में नीट-यूजी 2026 परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की बात कही गई थी।

मामला दर्ज होने के बाद सीबीआई ने विशेष जांच दल गठित किए और देश के कई राज्यों में एक साथ छापेमारी की। जांच के दौरान कई संदिग्धों से पूछताछ भी की गई। अब तक इस मामले में दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर से 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

सीबीआई के मुताबिक, जांच में यह पता चला है कि परीक्षा से पहले रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भौतिक विज्ञान के प्रश्नपत्र प्रसारित किए गए थे। एजेंसी अब प्रश्नपत्र लीक के असली स्रोत और पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई है।

सीबीआई ने कहा है कि वह इस मामले की व्यापक, निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से जांच करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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राष्ट्रीय समाचार

इंडो पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा पर क्वाड की बड़ी योजना, ‘सहयोग से मजबूत होगी सप्लाई चेन’

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क्वाड देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त बयान जारी किया है। इस बयान में कहा गया है कि इन देशों का साझा लक्ष्य एक ही है, और वह ऊर्जा की आपूर्ति को सुरक्षित, स्थिर और बिना रुकावट के बनाए रखना है।

मंगलवार को नई दिल्ली में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त बयान जारी किया। क्वाड देशों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में किसी भी तरह की बाधा का सबसे अधिक प्रभाव इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर पड़ता है, इसलिए इस क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

बयान में कहा गया है कि चारों देश मिलकर एनर्जी मार्केट को स्थिर, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए काम करेंगे। इसके साथ ही तेल, गैस और अन्य जरूरी संसाधनों की सप्लाई चेन को मजबूत और विविध बनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम हो सके।

समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को भी इस समूह ने महत्वपूर्ण बताया है। इसमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि होर्मुज स्ट्रेट समेत दुनिया भर में जहाजों की आवाजाही बेरोक-टोक के जारी रहे जिससे वैश्विक व्यापार सामान्य रूप से चलता रहे। विशेष रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर स्वतंत्र और सुरक्षित आवागमन को बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

छोटे द्वीपीय और विकासशील देशों की ऊर्जा जरूरतों को विशेष रूप से ध्यान में रखने पर जोर दिया गया है। इन देशों का मानना है कि वे ऊर्जा संकट के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। क्वाड देश आपातकालीन परिस्थितियों में एक-दूसरे और क्षेत्रीय साझेदारों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करेंगे।

बयान के अनुसार, क्षेत्रीय स्तर पर चल रही अलग-अलग पहलें ऊर्जा और संसाधनों की सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इनमें जापान की पीओडब्ल्यूआरआर पहल शामिल है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा और संसाधन प्रबंधन को अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाना है। इसी तरह भारत दक्षिण एशिया के देशों को ऊर्जा सुरक्षा में सहयोग दे रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया दक्षिण-पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और व्यवस्था मजबूत करने में मदद कर रहा है।

ऑस्ट्रेलिया ने इसके लिए 2 अरब डॉलर की निवेश योजना भी शुरू की है। इसके अलावा आसियान देशों के बिजली नेटवर्क को मजबूत करने पर भी काम चल रहा है। साथ ही प्रशांत द्वीप देशों में विकास परियोजनाओं के लिए निवेश और सहायता भी दी जा रही है, ताकि वहां ऊर्जा और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाया जा सके।

नई पहल और भविष्य की योजना पर भी जोर दिया गया है। क्वाड देशों ने “क्वाड इनिशिएटिव ऑन इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी” नामक एक नई पहल शुरू करने की बात कही है। जिसके तहत तकनीक, नीति, ऊर्जा प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय बाजार विश्लेषण और आपात प्रतिक्रिया अभ्यास जैसे क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा।

इसके साथ ही एक “क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम” भी स्थापित किया जाएगा, जहां ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नियमित चर्चा और समन्वय किया जाएगा।

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महत्वपूर्ण खनिजों और और दुर्लभ मृदा तत्वों की सप्लाई के लिए भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक समझौता

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भारत और अमेरिका ने मंगलवार को एक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका मकसद महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। ये वही जरूरी पदार्थ हैं जो सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल और हाईटेक रक्षा उपकरण बनाने में इस्तेमाल होते हैं।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया में चीन के इन अहम संसाधनों पर दबदबे को लेकर चिंता बढ़ रही है। माना जाता है कि इससे चीन को वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करने की ताकत मिल जाती है।

यह समझौता क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुआ, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो मौजूद थे।

इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, “आज हम भारत-अमेरिका के बीच एक ऐसा फ्रेमवर्क साइन कर रहे हैं, जिसका मकसद क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स की सप्लाई को सुरक्षित करना है। हमने इस पर क्वाड बैठक में भी चर्चा की है। चाहे हम इसे दो देशों के बीच करें, क्वाड के जरिए करें या समान सोच वाले देशों के बड़े समूह के तौर पर, समय की जरूरत को देखते हुए यह जरूरी और अहम है।”

उन्होंने बताया कि इस फ्रेमवर्क का मकसद पूरे सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाना है, जिसमें खनन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और इससे जुड़े निवेश शामिल हैं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह समझौता इसलिए किया गया है, क्योंकि भारत और अमेरिका का साझा रणनीतिक हित है। उनका कहना है कि मजबूत और इनोवेशन पर आधारित अर्थव्यवस्थाएं ऐसी चीजों पर निर्भर नहीं रह सकतीं, जो सिर्फ एक ही देश या एक ही स्रोत से मिलती हों। वरना वह देश इसे दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में भारत यात्रा के दौरान उन्होंने कई बार भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर बात की है। यह समझौता उसी साझेदारी का एक ठोस उदाहरण है।

रुबियो ने यह भी बताया कि इस समझौते की नींव 4 फरवरी को रखी गई थी, जब भारत ने वॉशिंगटन डीसी में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स फोरम’ में हिस्सा लिया था।

उन्होंने भारत द्वारा ‘पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन’ पर हस्ताक्षर करने का भी जिक्र किया। यह अमेरिका के नेतृत्व में बना एक समूह है, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार करना है।

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