महाराष्ट्र
हाई कोर्ट ने पिछड़ेपन के आधार पर मुसलमानों को आरक्षण देने वाले जीआर को रद्द कर दिया था, अबू आसिम आज़मी ने इसे अन्याय बताया।
मुंबई 2014 में कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम रिज़र्वेशन लागू किया था लेकिन नोटिफिकेशन और ऑर्डिनेंस कभी कानून नहीं बन पाया। सरकार बदली, प्रोसेस पूरा नहीं हुआ और वह खुद ही रद्द हो गया। अब कई सालों बाद इस बेअसर ऑर्डिनेंस से जुड़े ऑर्डर को रद्द करने का ऐलान किया जा रहा है।
सीधा सवाल यह है कि जब कानून कभी लागू ही नहीं हुआ, तो आज इसे रद्द करने की रस्म क्यों? अगर मकसद सच में सोशल जस्टिस है, तो इस अधूरे काम को मज़बूत कानूनी आधार के साथ आगे बढ़ाना ज़रूरी था। इधर, भाजपा सरकार के मुस्लिम रिज़र्वेशन रद्द करने पर समाजवादी पार्टी के नेता और एमएलए अबू आसिम आज़मी ने इसे नाइंसाफ़ी बताया है और कहा है कि हाई कोर्ट ने मुसलमानों के पिछड़ेपन के आधार पर पांच परसेंट मुस्लिम रिज़र्वेशन को बनाए रखा था, लेकिन सरकार की नीयत साफ़ नहीं थी। जस्टिस सच्चर कमेटी और महमूद उर रहमान ने भी मुसलमानों की सोशियो-इकोनॉमिक मुश्किलों के आधार पर रिज़र्वेशन देने की सिफारिश की थी। भाजपा ने मराठा रिज़र्वेशन के लिए नोटिफिकेशन और जीआर जारी किया लेकिन मुस्लिम रिज़र्वेशन पर कोई फ़ैसला नहीं लिया और अब इसे रद्द कर दिया है। अगर रिज़र्वेशन लागू ही नहीं हुआ तो इसे कैसे रद्द कर दिया गया? महाराष्ट्र में, मुसलमानों के कई ऐसे तबके हैं जो पारंपरिक कामों में लगे हैं और आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं। संविधान के आर्टिकल 15(4) और 16(4) सरकार को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुसलमानों और तबकों के लिए खास इंतज़ाम करने का अधिकार देते हैं। अगर ज़रूरी हो, तो एसएबीसी के अंदर अंदरूनी बँटवारे (सब-कैटेगराइज़ेशन) के ज़रिए असल में पिछड़े तबकों को रिज़र्वेशन का फ़ायदा दिया जाना चाहिए और वह भी सही डेटा और सर्वे के आधार पर 50% की लिमिट के अंदर।
आज, सरकार से उम्मीद थी कि वह एक ठोस सर्वे, एक सोशियोलॉजिकल स्टडी या एक नई पॉलिसी की आउटलाइन पेश करेगी। लेकिन इसके बजाय, वह एक ऐसे ऑर्डिनेंस को रद्द करने की घोषणा कर रही है जो पहले ही बेअसर हो चुका है। मुद्दा झगड़ों का नहीं है। मुद्दा यह है कि क्या हम सामाजिक न्याय की अधूरी कहानी को पूरा करेंगे या सिर्फ़ औपचारिक घोषणाओं तक ही सीमित रहेंगे? सामाजिक न्याय कोई राजनीतिक खेल नहीं है। यह संविधान की भावना है। अबू आसिम आज़मी ने कहा कि रिज़र्वेशन का मुद्दा पहले से ही अधूरा था लेकिन अब भाजपा सरकार ने इस जीआर को रद्द कर दिया है जिसे उसने कभी ईमानदारी से लागू नहीं किया था। भाजपा सरकार ने मुसलमानों को रिज़र्वेशन देने पर कोई फ़ैसला नहीं लिया था, जबकि कांग्रेस ने मुसलमानों को खुश करने के लिए यह पॉलिसी ज़रूर लाई थी, लेकिन यह सिर्फ़ राजनीतिक नौटंकी साबित हुई और हाई कोर्ट ने पिछड़ेपन के आधार पर रिज़र्वेशन बनाए रखने का आदेश दिया था और कांग्रेस ने इस GR को मज़बूत करने के लिए कभी कोई कानून नहीं बनाया।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के दौंड में दो भाइयों गुंडागर्दी, 29 साल के व्यक्ति से मारपीट कर लूटा

महाराष्ट्र के पुणे के दौंड इलाके में एक 29 साल के व्यक्ति से मारपीट और लूटपाट की घटना सामने आई है। पुलिस ने इस मामले में दो भाइयों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित का नाम दिनेश भरत धनवे है। वहीं, आरोपियों की पहचान आदर्श अनिल जाधव और अमन अनिल जाधव के तौर पर हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता रेलवे ग्राउंड के पास खड़ा होकर फोन पर बात कर रहा था। उसी समय आरोपी उसके पास आए और पैसे की मांग करते हुए पूछा, “तुम हमारे इलाके में क्यों आए हो?”
जब शिकायतकर्ता ने वहां से हटने से इनकार किया, तो आरोपियों ने उसका मोबाइल फोन तोड़ दिया और उसे थप्पड़ मारा, जिससे वह जमीन पर गिर गया। इसके बाद, आरोपी आदर्श जाधव ने धनवे पर हमला किया और लोहे की रॉड से उसकी पीठ, जांघ और सिर पर चोट पहुंचाई।
मारपीट के दौरान पीड़ित की पैंट की जेब से जबरन 3,500 रुपये निकाल लिए गए। इसके अलावा, जब शिकायतकर्ता ने अपने रिश्तेदारों को फोन किया, तो आरोपी ने अपने भाई अमन अनिल जाधव को मौके पर बुला लिया। दोनों ने मिलकर धनवे को अपशब्द कहे और जान से मारने की धमकी दी।
पीड़ित की शिकायत पर दौंड पुलिस स्टेशन में आदर्श और अनिल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की आगे की जांच चल रही है।
इससे पहले, मई में दौंड से मेडिकल फ्रॉड का एक मामला सामने आया था, जिसमें गैर-कानूनी तरीके से इलाज कर रहे एक फर्जी डॉक्टर को पकड़ा गया था।
पुलिस ने बताया कि उसके पास से दवाइयां, इंजेक्शन और 6.54 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आरोपी ओमप्रकाश बंसीलाल स्वर्णकार ने यवत के कसुरदी गांव के अखदेवस्ती इलाके में एक अवैध क्लिनिक शुरू किया था। उसके पास कोई वैध मेडिकल डिग्री, महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन या दवाएं बेचने का लाइसेंस नहीं था।
पुलिस द्वारा क्लिनिक पर छापा मारने के बाद इस अवैध काम का पता चला था। छापे के दौरान, वहां से अलग-अलग कंपनियों की एलोपैथिक दवाएं, इंजेक्शन, सिरिंज, बिना लेबल वाली संदिग्ध तरल पदार्थों से भरी बोतलें और नकदी बरामद की गई थी।
महाराष्ट्र
मुंबई में गणेश विसर्जन के दौरान दो गुटों में हुआ विवाद, 7 लोगों के खिलाफ केस दर्ज

मुंबई के मालवणी (मलाड) इलाके में गणपति विसर्जन के दौरान विवाद, मारपीट, गाली-गलौज और जुलूस में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मालवाणी पुलिस ने शिकायतकर्ता के आधार पर आदिल (24), सुनील शेख (25), गौस (22), अजगर (23), जाकिर (26), जुबेर (25) और हुसेन (24) के खिलाफ का मामला दर्ज कर इनकी तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार, 25 सितंबर की शाम करीब 7:15 बजे निरंकार नगर, एनटीसी स्कूल रोड, गेट नंबर 7, मालवणी, मालाड पश्चिम में गणपति विसर्जन के दौरान गणपति मंडप के प्रवेश द्वार के पास कोल्ड पायरो उपकरण लगाया गया था। इससे निकलने वाले कृत्रिम आग जैसे प्रभाव को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि इससे सामने स्थित दुकान में आग लग सकती है। इसी बात को लेकर आदिल, सुनील शेख, गौस, अजगर और जाकिर ने गणपति मंडल के कार्यकर्ताओं से विवाद करने लगे।
पुलिस के मुताबिक, जुबेर और हुसैन ने रोहित ठाकुर और सुशील महतो के साथ हाथापाई की। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अयान शेख नामक व्यक्ति हाथ में एक मटका लेकर आया और महिला कार्यकर्ताओं के सामने गाली-गलौज करते हुए मारपीट करने के लिए दौड़ा।
अनंत चतुर्दशी के दिन शुक्रवार सुबह, लालबाग, परेल, गिरगांव और अन्य क्षेत्रों के पूजनीय गणपति प्रतिमाओं की विसर्जन यात्रा शुरू हुई। ढोल-ताशा, नासिक बाजा और बैंजो की थापों पर लाउडस्पीकर के साथ-साथ गुलाल उड़ाते हुए और भीलतू वाद्ययंत्रों (बीम) का प्रयोग करते हुए जुलूस रवाना हुआ। ‘लालबागचा राजा,’ ‘मुंबईचा राजा,’ ‘परेलचा राजा,’ ‘गिरगांवचा राजा,’ ‘गिरगांवचा महाराजा,’ ‘भगवान गणपति’ और गणेशोत्सव मंडलों की गणेश प्रतिमाएं सुबह की ध्वनि के साथ विसर्जन स्थलों की ओर रवाना हुईं। ‘लालबागचा राजा’ के दर्शन के लिए लालबाग बाजार के बाहर भक्तों की भारी भीड़ जमा थी। पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। भगदड़ से बचने के लिए ‘सड़क अवरोध’ लगाकर भीड़ को नियंत्रित किया गया।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के 265 तालुकों को सीएम फडणवीस ने किया सूखा घोषित, और सूखे से निपटने के कई उपायों की घोषणा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूखे से प्रभावित किसानों और नागरिकों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य के 358 तालुकों (तहसील) में से 265 में सूखा घोषित किया गया है। जिन 265 तालुकों में ‘ट्रिगर-1’ के मानक पूरे हुए हैं, उन्हें सूखा-प्रभावित घोषित किया गया है। इससे पता चलता है कि राज्य के लगभग 75 प्रतिशत तालुकों में अब सूखे जैसे हालात हैं।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने सूखे से निपटने के कई उपायों की घोषणा की है। इसके तहत लैंड रेवेन्यू में छूट, फसल लोन का रीस्ट्रक्चर, खेती से जुड़े लोन की रिकवरी पर रोक, खेती के पंपों के मौजूदा बिजली बिल में छूट (7.5 हॉर्सपावर कैपेसिटी वाले इलेक्ट्रिक पंपों का बिजली बिल पहले ही माफ है, अब उससे ज़्यादा कैपेसिटी वाले इलेक्ट्रिक पंपों को भी छूट), स्कूल-कॉलेज के छात्रों की परीक्षा शुल्क में छूट, एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम के तहत नियमों में ढील देकर अधिक से अधिक काम शुरू किए जाएंगे।
इसके अलावा, जहां जरूरी होगा वहां पीने के टैंकर पहुंचाए जाएंगे। किसानों के खेती के पंपों का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा, खेती पर निर्भर किसानों-खेती मजदूरों को अनाज मिलेगा, जानवरों के लिए चारे का इंतजाम, बड़े पैमाने पर पानी बचाने का काम किया जाएगा। पिछले आदेश के मुताबिक, पेयजल और जानवरों के लिए पानी की प्लानिंग जारी रहेगी। सभी डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को पंचनामा प्रक्रिया तुरंत पूरा करने के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही फसलों की हालत दिखाने वाली तस्वीरें और जीपीएस से डेटा इकट्ठा करने के आदेश जारी किए गए हैं।
इसके पहले 24 सितंबर वाशिम दौरे पर पहुंचे देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार जल्द ही प्रभावित इलाकों में गंभीर सूखा घोषित करने के लिए एक सरकारी आदेश (जीआर) जारी करेगी। साथ ही, खेती-किसानी के बढ़ते संकट से जूझ रहे राज्य में उन सभी पात्र किसानों को फसल कर्ज माफी का लाभ दिया जाएगा, जो पिछली योजनाओं में छूट गए थे।
सीएम ने गांव में किसानों को संबोधित करते हुए लोगों को भरोसा दिलाया था कि सरकारी तंत्र ग्रामीण राहत कार्यों को प्राथमिकता देगा। मुख्यमंत्री ने कहा था कि आर्थिक मदद के अलावा, राज्य प्रशासन पीने के पानी की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करने, मवेशियों के लिए चारा बांटने और फसल के नुकसान का आकलन (पंचनामा) तेजी से करने के लिए आपातकालीन उपाय कर रहा है।
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