राजनीति
नीतीश के लॉकडाउन के फैसले को तेजस्वी ने बताया ‘दिखावा’, लोजपा ने केन्द्र से मांगी सेना
बिहार में कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर 15 मई तक लॉकडाउन लगाने के फैसले के बाद अब इस पर राजनीति शुरू हो गई है। नीतीश कुमार सरकार के लॉकडाउन के फैसले को लेकर राजद के नेता तेजस्वी यादव ने दिखावा बताते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। दूसरी ओर, चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) ने बिहार में स्वास्थ्य सेवा सेना के हवाले करने की मांग की है। तेजस्वी यादव ने लॉकडाउन के फैसले को लेकर बिना किसी के नाम लिए सरकार पर कटाक्ष किया।
नीतीश कुमार ने जैसे ही ट्वीट कर लॉकडाउन लगाने की घोषणा की तेजस्वी ने अपने अधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर लिखा, ’15 दिन से समूचा विपक्ष लॉकडाउन करने की मांग कर रहा था, लेकिन ‘छोटे साहब’ अपने ‘बड़े साहब’ के आदेश का पालन कर रहे थे कि 2 मई तक लॉकडाउन नहीं करना है। अब जब गांव-गांव, टोला-टोला संक्रमण फैल गया तब दिखावा कर रहे है। इस संकट काल में तो निम्नस्तरीय नौटंकी और राजनीति से बाहर आइये, बाज आइए।’
इधर, सांसद चिराग पासवान की पार्टी लोजपा ने बिहार की स्वास्थ्य सेवा की जिम्मदारी सेना को सौंपने की मांग की है।
लोजपा ने एक बयान जारी कर कहा कि स्वास्थ्य सेवा की जिम्मेवारी सेना को सौंपा जाए। बिहार सरकार को स्वास्थ्य व्यवस्था पर शर्म आनी चाहिए। केंद्र सरकार बिहार में सेना को भेजे, क्योंकि बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है।
बिहार में कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामले को लेकर 5 मई से 15 मई तक लॉकडाउन लगाया गया है। बिहार सरकार ने इसको लेकर गाइडलाइन भी जारी दिया है।
राजनीति
बंगाल में मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठाने वाले को बर्दाश्त नहीं करेंगेः ओवैसी

पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए प्रचार करने पहुंचे पहुंचे एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को रानीगंज में दरगाह गोशे बंगला पर पहुंचकर चादर चढ़ाई। इसके बाद मीडिया से बातचीत करते आरक्षण बिल को लेकर सवाल उठाए और मीडिया के कई सवालों के जवाब दिए।
महिला आरक्षण बिल पर नरेंद्र मोदी ने सभी से समर्थन मांगा और इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बताया। इस सवाल पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “विधेयक क्या है? मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। कम से कम विधेयक की एक प्रति तो भेजनी चाहिए।”
हुमायूं कबीर ने टीएमसी और एआईएमआईएम पर समझौता करने का आरोप लगाया है। इस पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “कभी टीएमसी तो कभी हुमायूं हमें भाजपा की ‘बी टीम’ कहते हैं, लेकिन हम सिर्फ जनता की आवाज हैं और बंगाल में मुसलमानों की गरिमा पर सवाल उठाने वाले किसी को भी बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम यहां आए हैं और आते रहेंगे। हमारा लक्ष्य बंगाल में मुसलमानों के लिए राजनीतिक सशक्तीकरण और नेतृत्व सुनिश्चित करना है, क्योंकि तभी न्याय मिलेगा। अन्यथा, हम दमन झेलते रहेंगे। इसीलिए हम चुनाव लड़ रहे हैं और अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार में हिस्सा ले रहे हैं।”
ओवैसी ने इस बार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी और उम्मीदवारों के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जताई।
इसके पहले रविवार को दुर्गापुर में ओवैसी ने कहा कि ममता बनर्जी को पहले यह बताना चाहिए कि उन्होंने बंगाल में मुसलमानों की हालत क्यों इतनी खराब रखी और उन्हें राजनीतिक नेतृत्व क्यों नहीं दिया। पिछले 50-60 वर्षों से बंगाल में सेक्युलर सरकारें सत्ता में रही हैं, लेकिन मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय की शिक्षा, सामाजिक और आर्थिक स्थिति अभी भी बहुत खराब है। अल्पसंख्यकों को स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व चाहिए।
ओवैसी ने कहा कि सरकारी आंकड़े भी यही बताते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय, खासकर मुसलमानों की हालत बहुत खराब है। जब तक अल्पसंख्यकों के पास अपना स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व नहीं होगा, तब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा। हमारा प्रयास एक मजबूत मुस्लिम राजनीतिक एजेंसी बनाने का है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान का विश्वास हासिल करना ही अमेरिका के लिए मौजूदा स्थिति से निकलने का रास्ता: बाकेर कालिबाफ

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर क़ालिबाफ ने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए मौजूदा स्थिति से बाहर निकलने का एकमात्र तरीका यह है कि वह अपना निर्णय ले और ईरानी राष्ट्र का विश्वास हासिल करे।
उन्होंने यह टिप्पणी पाकिस्तान की अपनी यात्रा से ईरान लौटते समय पत्रकारों को संबोधित करते हुए की, जहां उन्होंने अपने साथ आए प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ शांति वार्ता में भाग लिया था।
क़ालिबाफ ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका ईरानी जनता का ऋणी है और उसे इसकी भरपाई के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।”
उन्होंने कहा, “अगर वे लड़ेंगे, तो हम भी लड़ेंगे और अगर वे तर्क के साथ आगे आते हैं, तो हम तर्क से जवाब देंगे। हम किसी भी धमकी के सामने झुकेंगे नहीं। वे हमारी इच्छाशक्ति को एक बार फिर परख सकते हैं और हम उन्हें और बड़ा सबक सिखाएंगे।”
क़ालिबाफ ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई वार्ता को “बहुत गहन, गंभीर और चुनौतीपूर्ण” बताया। उन्होंने कहा कि सक्षम विशेषज्ञों के सहयोग और व्यापक व विविध दृष्टिकोण के साथ, ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने देश की सद्भावना दिखाने के लिए “बेहतरीन पहल” तैयार कीं, “जिससे बातचीत में प्रगति हुई।”
उन्होंने जोर देकर कहा, “हमने शुरू से ही घोषणा की थी कि हमें अमेरिकियों पर भरोसा नहीं है। हमारे अविश्वास की दीवार 77 साल पुरानी है। यह ऐसे समय में है जब 12 महीनों से भी कम समय में उन्होंने बातचीत के दौरान दो बार हम पर हमला किया। इसलिए, उन्हें ही हमारा विश्वास जीतना होगा।”
क़ालिबाफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ हालिया धमकियों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी धमकियों का ईरानी जनता पर कोई असर नहीं पड़ता।
ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों ने शनिवार और रविवार तड़के इस्लामाबाद में लंबी बातचीत की। ये वार्ताएं किसी समझौते पर नहीं पहुंच सकीं। यह बातचीत 40 दिनों की लड़ाई के बाद बुधवार को ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद हुई थी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान ने बातचीत विफल होने के लिए यूएस को ठहराया दोषी, अमेरिका पर शर्तों को बदलने का लगाया आरोप

ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने एक संभावित समझौते को अंतिम चरण में आकर पटरी से उतार दिया। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के मुताबिक, बातचीत के दौरान अमेरिका ने ज्यादा से ज्यादा दबाव बनाने, बार-बार शर्तें बदलने (गोलपोस्ट शिफ्ट करने) और नाकाबंदी जैसी रणनीतियों का सहारा लिया, जिससे सहमति बनने की प्रक्रिया बाधित हो गई।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का दावा है कि प्रस्तावित “इस्लामाबाद समझौता” (एमओयू) लगभग तैयार था और दोनों पक्ष अंतिम सहमति के बेहद करीब थे।
उनका कहा है कि इन परिस्थितियों के चलते 21 घंटे तक चली गहन और मुश्किल बातचीत आखिरकार बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। तेहरान ने यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत के दौरान शर्तों में लगातार बदलाव न किए जाते, तो यह डील संभव हो सकती थी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान ने 47 सालों में वॉशिंगटन के साथ अपनी सबसे ऊंचे स्तर की सीधी बातचीत ईमानदारी और चल रहे झगड़े को खत्म करने में मदद करने के इरादे से की है। अराघची ने दुख जताया कि “कोई सबक नहीं मिला”।
अराघची ने एक्स पर लिखा, “47 सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर हुई गहरी बातचीत में, ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ अच्छी नीयत से बातचीत की। लेकिन जब ‘इस्लामाबाद एमओयू’ से बस कुछ इंच दूर थे, तो हमें गोलपोस्ट बदलने और ब्लॉकेड का सामना करना पड़ा। कोई सबक नहीं मिला। अच्छी नीयत से अच्छी नीयत पैदा होती है। दुश्मनी से दुश्मनी पैदा होती है।”
ईरानी विदेश मंत्री का यह कहना कि दोनों पक्ष एक समझौते को फाइनल करने से कुछ ही दूर थे, यह दिखाता है कि आखिरी स्टेज पर तनाव तेजी से बढ़ने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत सफलता के कितने करीब आ गई थी।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका के साथ डिप्लोमैटिक ब्रेकथ्रू की संभावना अभी भी है, बशर्ते वॉशिंगटन अपना नजरिया बदले। उन्होंने अमेरिका से “सर्वाधिकारवाद” को छोड़ने और ईरान के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की। ऐसा बदलाव एक समझौते का रास्ता बना सकता है। बता दें, सर्वाधिकारवाद एक ऐसी राजनीतिक प्रणाली है, जिसमें राज्य सार्वजनिक और निजी जीवन के हर पहलू पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने एक्स पर एक पोस्ट में बातचीत करने वाले डेलिगेशन के सदस्यों की सराहना करते हुए कहा, “अगर अमेरिकी सरकार अपना सर्वाधिकारवाद छोड़ दे और ईरानी देश के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते तक पहुंचने के रास्ते जरूर मिल जाएंगे।”
इस बीच, अमेरिका ने घोषणा की है कि वह 13 अप्रैल से ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी तरह से समुद्री नाकाबंदी लागू करना शुरू कर देगा।
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