राष्ट्रीय
कोरोना महामारी के बाद रिएल एस्टेट में बढ़ा टेक्नोलॉजी का चलन
देश का रियल एस्टेट क्षेत्र बहुत तेजी से प्रौद्योगिकी को अपना रहा है, जिससे कई मोर्चो पर लोगों को आसानी हो रही है। चाहे बात सही संपत्ति की तलाश की हो, या जटिल कागजी कार्रवाई करने की या फिर संपत्ति खरीदने के लिये ऋण लेने की। संपत्ति का पंजीकरण कराना हो या उसे किराये पर लेना, ऐसा कोई पहलू नहीं है, जो प्रौद्योगिकी से अछूता रह गया हो। रिएल एस्टेट की चरमर्राती पुरानी प्रणालियों को अब डिजिटल रूप दिया जा रहा है।
हाल ही में जारी ग्रांट थॉर्नटन के एक शोध से पता चलता है कि कोरोना महामारी ने नयी और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे ऑग्मेंटेड रिएलटी(एआर), वर्चुअल रिएलटी (वीआर), चैटबॉट्स, बिग डाटा, मार्केटिंग ऑटोमेशन, आईओटी आदि को रियल एस्टेट में तेजी से अपनाया जा रहा है। ग्रांट थॉर्नटन के एक विश्लेषक ने कहा है, रियल एस्टेट क्षेत्र में बहुत जरूरी तकनीकी परिवर्तन हो रहा है। इससे खरीदारों, विक्रेताओं और ब्रोकर्स सहित सभी हितधारकों के लिये लेनदेन का पूरा अनुभव बदल जायेगा।
खरीदार संपत्तियों को वर्चुअली देख पायेंगे और संपत्ति के इतिहास और इसके आसपास के बुनियादी ढांचे जैसे डाटा की जानकारी से भी लैस होंगे। अब जानकारी को डिजीटल किया जायेगा और पूरी पारदर्शिता के साथ उपलब्ध कराया जायेगा।
संपत्ति से स्थानीय बाजार कितनी दूर है, स्कूल, खेल परिसर, कॉलेज, मेट्रो स्टेशन, अस्पताल, वाई-फाई सेवा प्रदाता, इंटरनेट कनेक्टिविटी आदि जैसी चीजों की जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी। इसी तरह विक्रेताओं और ब्रोकर्स को बाजार के बारे में बेहतर जानकारी होगी, जिससे वे ग्राहक की प्राथमिकतायें जान पायेंगे तथा बिना देरी के सही खरीदार तक पहुंच पायेंगे।
ग्रांट थॉर्नटन के विश्लेषक ने कहा, रियल एस्टेट कंपनियां खोज, खरीद, बिक्री और आवास ऋण के हर पहलू में नये जमाने की डिजिटल तकनीकों का तेजी से उपयोग कर रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब संपत्ति के मूल्यों , निर्माण की गुणवत्ता आदि को देखते हुये चंद सेकंड में लाखों दस्तावेजों के माध्यम से डाटा आधारित निर्णय लेने में सक्षम बना सकता है।
कंपास इंडिया डेवलपमेंट सेंटर में वरिष्ठ निदेशक और एआई प्रमुख रुशी भट्ट के अनुसार वैश्विक रियल एस्टेट टेक कंपनियां जैसे कंपास, इंक. रियल एस्टेट संपत्ति की खरीद फरोख्त में एक बेहद सहज और सुव्यवस्थित अनुभव प्रदान करने के लिये एआई का लाभ उठाती हैं।
उन्होंने कहा,ऑनलाइन पंजीकरण, संपत्ति का वर्चुअल टूर और ऑटोमेशन जैसे नवाचारों को तीव्र गति से अपनाया जा रहा है। पहले रिएल एस्टेट पारंपरिक था लेकिन अब यह क्षेत्र धीरे-धीरे डिजिटल इकोसिस्टम को अपना रहा है।
रूशी के अनुसार, हाइपर-पर्सनलाइज्ड सॉल्यूशंस और निर्बाध संचालन की बढ़ती मांग कंपास को वैश्विक रियल एस्टेट क्षेत्र में क्रांति लाने में अग्रणी भूमिका निभाने में सक्षम बनाता है, जो नवीन प्रौद्योगिकी और अभूतपूर्व कनेक्टिविटी द्वारा संचालित है।
ऐसा कहा जा सकता है कि रिएल एस्टेट क्षेत्र में तकनीकी उपकरण पूर्वाग्रह को दूर कर रहे हैं, अनुमान को समीकरण से बाहर कर रहे हैं, पारदर्शिता का परिचय दे रहे हैं और पूरी लेनदेन प्रक्रिया को सुचारू बना रहे हैं। हाल के वर्षों में लोगों को रहने, गाड़ी चलाने, काम करने, छुट्टियां मनाने आदि के तरीकों में तेज बदलाव हुआ, जिसे स्मार्ट लीविंग कहा जाता है। रियल एस्टेट क्षेत्र में टेक्नोलॉली को अपनाने की रफ्तार भले ही धीमी रही है लेकिन सबके जीवन को आसान बनाने के लिये आखिरकार इस क्षेत्र में भी अब बदलाव आ गया है।
राष्ट्रीय
मुंबई पुलिस ने अंधेरी ईस्ट से लापता महिला को सुरक्षित बरामद किया

police
मुंबई, 18 मार्च : मुंबई की अंधेरी पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने एक 52 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ महिला को सुरक्षित बरामद कर लिया और उसे उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया है। महिला की वापसी से परिवारवालों ने राहत की सांस ली है।
दरअसल, मुंबई पुलिस के कमिश्नर देवेन भारती के निर्देश पर लापता महिलाओं और बच्चों का पता लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत अंधेरी पुलिस ने 15 दिन की कड़ी मेहनत के बाद 52 साल की रत्ना धर्मेंद्र यादव को खोज निकाला, जो कि पिछले कई दिनों से लापता थीं।
रत्ना अंधेरी ईस्ट के सैवादी इलाके से गायब हुई थीं। उनकी बेटी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और उसी के आधार पर लापता होने का मामला दर्ज किया गया। इसके बाद अंधेरी पुलिस ने उनकी खोजबीन के लिए एक स्पेशल अभियान चलाया।
पुलिस की टीम ने हर छोटे-बड़े रास्ते, कॉलोनी और आस-पड़ोस की जगहों पर छानबीन की। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच के सहारे पता चला कि रत्ना अस्थायी तौर पर चेंबूर के एक होमलेस शेल्टर में रह रही थीं।
जांच के दौरान पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि रत्ना मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं और बोल नहीं सकती थीं। ऐसे में उन्हें सुरक्षित ढंग से ढूंढना और वहां से लाना आसान काम नहीं था। पुलिस ने बहुत धैर्य और समझदारी से काम लिया और आखिरकार उन्हें सुरक्षित उनके परिवार के पास पहुंचा दिया।
उनकी बेटी और परिवार ने मुंबई पुलिस की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने जो मेहनत और लगन दिखाई, उससे उन्हें रत्ना की खोज में बहुत मदद मिली। इसके लिए उनका परिवार मुंबई पुलिस का आभारी है।
पुलिस का कहना है कि उनके द्वारा लापता महिलाओं और बच्चों का पता लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस की टीमें जल्द से जल्द लापता लोगों की खोज में लग जाती हैं। इस क्रम में रत्ना को भी सुरक्षित बरामद कर उनके परिवार को सौंप दिया गया।
राष्ट्रीय
ईरान में युद्ध लंबा चला तो बढ़ सकती हैं वैश्विक चुनौतियां, फिलहाल भारत पर कोई असर नहीं: एन चंद्रशेखरन

जमशेदपुर, 3 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान में युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ सकता है।
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा की 187वीं जयंती के अवसर पर जमशेदपुर पहुंचे थे। इस दौरान टाटा स्टील परिसर में आयोजित मुख्य समारोह में उन्होंने संस्थापक को श्रद्धांजलि अर्पित की और शहरवासियों को संस्थापक दिवस की शुभकामनाएं दीं।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट क्षेत्र से टाटा समूह को लाइमस्टोन सहित अन्य कच्चे माल का आयात होता है। समूह का कारोबार वैश्विक स्तर पर फैला हुआ है, ऐसे में किसी भी लंबे युद्ध का प्रभाव सप्लाई चेन, माल की डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और सस्टेनेबिलिटी पर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस युद्ध का टाटा समूह या भारत पर कोई सीधा असर नहीं पड़ा है।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि टाटा समूह के कर्मचारी विश्व भर में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज, होटल और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत हैं। ऐसे में सभी कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा समूह की सर्वोच्च प्राथमिकता है और कंपनी इस दिशा में सतर्कता के साथ आवश्यक कदम उठा रही है।
रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि नई इकाइयों की स्थापना और विस्तार योजनाओं के कारण रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले पांच-छह वर्षों में समूह के कर्मचारियों की संख्या लगभग 7 लाख तक थी, लेकिन अब बढ़कर 11 लाख तक पहुंच चुकी है। वहीं आने वाले 5-6 साल में इसे 15 लाख तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही महिला कर्मचारियों की भागीदारी 28-30 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
आईटी क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नई तकनीकों के आगमन से रोजगार को लेकर आशंकाएं स्वाभाविक हैं, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से स्टील, ऑटोमोबाइल, फाइनेंस और अन्य क्षेत्रों में नए अवसर उत्पन्न होंगे। इसका सकारात्मक लाभ टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को भी मिलेगा।
इस अवसर पर टाटा स्टील के सीईओ टी वी नरेन्द्रन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय
नए आधार वर्ष के साथ भारत की जीडीपी वृद्धि दर मजबूत बने रहने की उम्मीद

GDP
नई दिल्ली, 27 फरवरी : नई जीडीपी सीरीज (बेस ईयर 2022-23) शुक्रवार को जारी होने वाली है। इससे पहले सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) द्वारा गठित एक उप-समिति ने जीडीपी अनुमानों के लिए नई सीरीज में जीएसटी डेटा के अधिक उपयोग की सिफारिश की है।
उप-समिति की यह रिपोर्ट राष्ट्रीय खातों के बेस ईयर को वित्त वर्ष 2022-23 में संशोधित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसे एमओएसपीआई ने शुरू किया है।
2011-12 सीरीज में जीएसटी डेटा का उपयोग तिमाही राष्ट्रीय खातों और वार्षिक राष्ट्रीय खातों के कुछ क्षेत्रों में किया गया था।
भारत अब जीडीपी का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर रहा है। इसके साथ ही उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) का बेस भी 2024 में अपडेट किया जाएगा, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना को बेहतर तरीके से दिखाना है, जिसमें डिजिटल कारोबार और सेवा क्षेत्र की बढ़ती हिस्सेदारी शामिल है।
इस बदलाव में असंगठित क्षेत्र के बेहतर आकलन और जीएसटी जैसे नए डेटा स्रोतों का इस्तेमाल शामिल है। इसके अलावा ई-वाहन (वाहन पंजीकरण) और प्राकृतिक गैस की खपत से जुड़े आंकड़ों को भी शामिल किया जाएगा। नई पद्धति से भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।
पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें मुख्य योगदान घरेलू मांग का होगा।
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8 से 8.1 प्रतिशत के बीच रह सकती है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था ने मजबूत रफ्तार बनाए रखी है। अक्टूबर-दिसंबर 2025 (चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही) के उच्च-आवृत्ति आंकड़े भी आर्थिक गतिविधियों में मजबूती दिखाते हैं।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में प्रतिकूल बेस इफेक्ट के बावजूद जीडीपी वृद्धि दर 8.3 प्रतिशत तक रह सकती है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दूसरे अग्रिम जीडीपी अनुमान, पिछले तीन वित्त वर्षों के जीडीपी आंकड़े और नए बेस 2022-23 के अनुसार त्रैमासिक जीडीपी आंकड़े शुक्रवार को जारी किए जाएंगे।
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