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Monday,26-October-2026
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व्यापार

टाटा समूह कर्नाटक में 2,300 करोड़ रुपये का करेगा निवेश

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राज्य सरकार ने ऐलान किया कि टाटा समूह की कंपनियां एयर इंडिया और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड कर्नाटक परियोजना के अंतर्गत प्रदेश में 1,650 लोगों को रोजगार देने के मकसद से 2,300 करोड़ निवेश करने का ऐलान किया है।

समझौता ज्ञापन के मुताबिक, एयर इंडिया बेंगलुरु हवाई अड्डे पर विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल के लिए एयर इंडिया एक केंद्र स्थापित करेगी। इस परियोजना में लगभग 1,300 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है जो 1,200 लोगों के लिए रोजगार पैदा करेगा।

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, जो यूरोपीय दिग्गज एयरबस के विमानों के लिए दरवाजे बनाती है। राज्य में विनिर्माण और अनुसंधान एवं विकास सुविधाएं स्थापित करेगी। कंपनी बेंगलुरु एयरपोर्ट के पास और कोलार में तीन परियोजनाओं में निवेश करेगी, जिसमें कुल 1,030 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इनमें यात्री से मालवाहक विमान रूपांतरण सुविधा (420 करोड़ रुपये), बंदूक निर्माण सुविधा (310 करोड़ रुपये) और कर्नाटक में एयरोस्पेस और रक्षा अनुसंधान और विकास (300 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इन परियोजनाओं से 450 लोगों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और राज्य के बड़े और मध्यम उद्योग मंत्री एमबी पाटिल यहां इस संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में उपस्थित थे।

मंजूरी और हस्तक्षेप के मामले में सरकार से सुव्यवस्थित समर्थन की आवश्यकता होती है, पाटिल ने परियोजनाओं की ग्राउंडिंग से संबंधित किसी भी चुनौती को हल करने में समर्थन का आश्वासन दिया।

कर्नाटक उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव एस सेल्वाकुमार और एयर इंडिया के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी निपुण अग्रवाल और टीएएसएल के सीईओ सुकरन सिंह ने समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया।

इस मौके पर कर्नाटक सरकार के मुख्य सचिव, रजनीश गोयल; मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव एल.के. अतीक; उद्योग विभाग के आयुक्त गुंजन कृष्णा; इस अवसर पर एयर इंडिया के शीर्ष अधिकारी मनन चौहान, कार्तिकेय भट्ट, अतुल शुक्ला, टीएएसएल के शीर्ष अधिकारी गुरु दत्तात्रेय, अर्जुन मेन, बेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रबंध निदेशक हरि मरार, सीओओ सात्यकी रघुनाथ और सीएफओ भास्कर रवींद्र उपस्थित थे।

कर्नाटक के लिए टाटा की योजना समूह द्वारा तेलंगाना में 15,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा के बाद आई है। टाटा समूह ने गुजरात में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट स्थापित करने की भी योजना तैयार की है।

मोदी सरकार की आत्मनिर्भर नीति के तहत राज्यों में निवेश बढ़ रहा है, जिसने आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है, इसके तहत भारतीय कंपनियों और उच्च तकनीक वाली विदेशी फर्मों के बीच अधिक सहयोग हो रहा है। इससे देश में अधिक एफडीआई प्रवाह भी हुआ है।

राष्ट्रीय समाचार

केंद्र ने ‘रिलीफ’ योजना की अवधि बढ़ाई, खाड़ी क्षेत्र में निर्यात को मिलेगी सुरक्षा

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केंद्र सरकार के तहत आने वाले वाणिज्य विभाग ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण निर्यात को जोखिम सुरक्षा प्रदान करने के लिए ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ (ईपीएम) के तहत चलाई जा रही ‘रिलीफ (निर्यात सुविधा के लिए लचीलापन एवं लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप)’ योजना के घटक-II की समयसीमा 31 मार्च, 2027 तक बढ़ा दी है। यह जानकारी सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।

यह विस्तार पश्चिम एशिया में लगातार जारी भू-राजनीतिक व्यवधानों और खाड़ी क्षेत्र एवं आसपास के इलाकों में समुद्री लॉजिस्टिक्स पर उनके प्रभाव को देखते हुए किया गया है।

इस पहल के ‘घटक-II’ का उद्देश्य निर्धारित क्षेत्रों में आगामी खेपों के लिए निर्यातकों को भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) का बीमा कवर लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत 95 प्रतिशत जोखिम कवरेज प्रदान किया जाता है।

यह लाभ 16 मार्च, 2026 या उसके बाद ली गई व्यक्तिगत पॉलिसियों और समग्र कारोबार (होल टर्नओवर) पॉलिसियों पर उपलब्ध है। इस घटक के तहत पात्र निर्यातकों को निर्धारित पात्रता अवधि के दौरान बीमा प्रीमियम में व्यवधान से पहले के स्तर की तुलना में होने वाली बढ़ोतरी से सुरक्षा प्रदान की जाती है।

इस योजना के तहत कवर की जाने वाली माल श्रेणियों में पूर्ण कंटेनर लोड (एफसीएल), आंशिक कंटेनर लोड (एलसीएल) और रेफ्रिजरेटेड यानी तापमान नियंत्रित कंटेनर शामिल हैं। हालांकि, ऊर्जा से संबंधित खेपों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

बयान के अनुसार, रिलीफ पहल के तहत कवरेज का लाभ लेने के इच्छुक निर्यातकों को ईसीजीसी के ग्राहक पोर्टल के माध्यम से दावे और सहायक दस्तावेज जमा करने होंगे। यूजर आईडी और पासवर्ड बनाने, निर्यातक के रूप में पंजीकरण पूरा करने एवं योजना के तहत दावे जमा करने के संबंध में मार्गदर्शन ईसीजीसी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध विशेष वीडियो ट्यूटोरियल के जरिए प्राप्त किया जा सकता है।

19 मार्च, 2026 को शुरू की गई रिलीफ योजना का उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र और व्यापक पश्चिम एशियाई समुद्री गलियारे में व्यवधानों के कारण असाधारण रूप से बढ़ती माल ढुलाई लागत, बीमा प्रीमियम में वृद्धि और युद्ध से जुड़े निर्यात जोखिमों का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों को सहायता प्रदान करना है।

मध्य पूर्व में तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ड्रोन और मिसाइल हमलों में जहाजों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट्स आई हैं। यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा तटीय क्षेत्र के बड़े हिस्से पर कब्जा करने के उद्देश्य से हमले शुरू किए जाने के बाद युद्ध का खतरा लाल सागर क्षेत्र तक भी फैल गया है।

बयान में कहा गया कि रिलीफ योजना की अवधि बढ़ाना निर्यात क्षेत्र की जोखिमों से निपटने की क्षमता मजबूत करने, व्यापार प्रवाह बनाए रखने और लगातार बनी हुई भू-राजनीतिक तथा समुद्री लॉजिस्टिक्स संबंधी अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निर्यातकों को समर्थन देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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व्यापार

ग्रोथ अनुमान घटाने से श्रीराम फाइनेंस के शेयरों में 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट, 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा स्टॉक

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सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को एनबीएफसी कंपनी श्रीराम फाइनेंस के शेयरों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। कंपनी द्वारा ऋण वृद्धि (लोन ग्रोथ) के अनुमान में कटौती और क्रेडिट लागत बढ़ने की आशंका जताने के बाद निवेशकों ने शेयर से दूरी बनाई, जिसके चलते यह निफ्टी का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला शेयर बन गया। दिन के कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर 6.33 प्रतिशत तक टूटकर 810.20 रुपए के इंट्रा-डे निचले स्तर पर पहुंच गया। दोपहर करीब 12:10 बजे यह स्टॉक 5.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 821.20 रुपए पर कारोबार करता नजर आया।

शेयर में गिरावट ऐसे समय आई है जब कंपनी ने दूसरी तिमाही में उम्मीद से बेहतर मुनाफा दर्ज किया है। हालांकि निवेशकों का ध्यान कंपनी के भविष्य के आउटलुक पर रहा। श्रीराम फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) वृद्धि अनुमान को 18 प्रतिशत से घटाकर 15-17 प्रतिशत कर दिया है। कंपनी ने इसके पीछे कमजोर मानसून, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कर्जदारों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को प्रमुख कारण बताया है।

विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी की परिसंपत्ति गुणवत्ता (एसेट क्वालिटी) को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। वैश्विक ब्रोकरेज जैफरीज के अनुसार महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में दबाव के कारण अगले एक-दो तिमाहियों तक क्रेडिट लागत ऊंची बनी रह सकती है।

वहीं घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि बढ़ते स्लिपेज और राइट-ऑफ यह संकेत देते हैं कि कई क्षेत्रों में सूखा जैसी परिस्थितियों का असर उधारकर्ताओं की भुगतान क्षमता पर पड़ा है। हालांकि संस्था का मानना है कि कुल मिलाकर कंपनी की एसेट क्वालिटी अभी भी अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है।

ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “कंपनी के तिमाही नतीजे मिश्रित रहे। उच्च नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एनआईएम) और कम परिचालन खर्च के कारण प्री-प्रोविजन ऑपरेटिंग प्रॉफिट (पीपीओपी) अनुमान से बेहतर रहा, लेकिन अधिक क्रेडिट लागत के कारण अंतिम मुनाफा उम्मीदों के अनुरूप रहा। एयूएम में 17 प्रतिशत की सालाना वृद्धि भी अनुमान से बेहतर रही।”

इसी तरह, जेएम फाइनेंशियल ने भी शुरुआती डिफॉल्ट मामलों में बढ़ोतरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय दबाव को प्रमुख चिंता बताया है। ब्रोकरेज के अनुसार, सूखा जैसी परिस्थितियों के कारण एसेट क्वालिटी संकेतकों में गिरावट देखने को मिल रही है, जो आने वाले समय में चुनौती बनी रह सकती है।

हालांकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि हालिया इक्विटी निवेश और कंपनी की क्रेडिट रेटिंग का एएए स्तर तक सुधरना भविष्य में मार्जिन पर दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकता है।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, श्रीराम फाइनेंस के शेयर में पिछले एक महीने के दौरान करीब 14 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। बीएसई पर शेयर का 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 1,153.65 रुपए और न्यूनतम स्तर 710.40 रुपए दर्ज किया गया है। कंपनी के आउटलुक को लेकर बढ़ी चिंताओं के कारण फिलहाल निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।

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व्यापार

मार्केट आउटलुक: फेड बैठक, तिमाही नतीजों और कच्चे तेल से तय होगी शेयर बाजार की चाल

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भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। इस दौरान फेड बैठक, तिमाही नतीजों, कच्चे तेल की कीमते औरअमेरिका-ईरान तनाव बाजार की चाल निर्धारित करेंगे।

ब्याज दरों की समीक्षा के लिए अमेरिकी फेड की बैठक 27-28 अक्टूबर होगी। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक स्तर पर अस्थिरता से कारण महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है। इस बैठक के फैसलों का ऐलान 28 अक्टूबर को किया जाएगा, जिस पर दुनियाभर के निवेशकों की निगाहें टिकी हुई हैं।

इसके अलावा, अमेरिका-ईरान तनाव भी बाजार के लिए काफी अहम होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान पर नई एयर स्ट्राक्स को लेकर बयान दे चुके हैं। इससे कच्चे तेल भी ऊपरी स्तरों पर बना हुआ हैं। अगले हफ्ते बाजार में यह फैक्टर्स अहम भूमिका निभाएंगे।

इसके अलावा, 26-30 अक्टूबर के कारोबारी सत्र में कई बड़ी कंपनियां नतीजे जारी करेंगी। इंडियन ओवरसीज बैंक, महाराष्ट्र बैंक, मैनकाइंड, पेटीएम, एनडीटीवी, टाटा कंज्यूमर, एसीसी, बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, जेएसडब्ल्यू सीमेंट, जेएसडब्ल्यू इन्फ्रा, एलएंडटी, सेल, टाटा कैपिटल, अदाणी एटरप्राइजेज और अदाणी पोर्ट्स जैसी कंपनियां शामिल हैं।

भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता हफ्ता काफी नुकसान वाला रहा। इस दौरान व्यापक बाजार में गिरावट देखने को मिली।

19-23 अक्टूबर के कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 1,605.44 अंक या 2.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,123.83 और निफ्टी 546.15 अंक या 2.36 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,600.00 पर था।

लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में अधिक बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 3,329.10 अंक या 5.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55,800.65 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1,390.35 अंक या 7.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,739.45 पर था।

सूचकांकों में सबसे ज्यादा गिरावट डिफेंस में देखी गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस 7.05 प्रतिशत की कमजोरी के साथ टॉप लूजर था। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 6.42 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 5.40 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 5.15 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 5.04 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 4.62 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 4.34 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई 3.91 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

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