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सर्बिया संसदीय चुनाव: छात्र आंदोलन ने पलटी बाजी, अलेक्जेंडर वुसिच ने स्वीकारी हार

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राष्ट्रपति पद छोड़कर संसदीय चुनाव के जरिए सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहे अलेक्जेंडर वुसिच ने रविवार को अपनी हार स्वीकार कर ली। शुरुआती चुनावी अनुमानों के मुताबिक, छात्र समर्थित उम्मीदवारों के गठबंधन को संसद में बहुमत मिलने की संभावना है। यह चुनाव वुसिच की सर्बियाई प्रोग्रेसिव पार्टी (एसएनएस) और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकले छात्र समूह के बीच मुकाबले के रूप में देखा गया।

पोलिंग एजेंसियों इप्सोस और सीईएसआईडी (सीईएसआईडी) द्वारा जारी शुरुआती अनुमानों के अनुसार, “स्टूडेंट लिस्ट — स्टूडेंट्स विन” को 52 प्रतिशत वोट मिले हैं। यह आंकड़ा वुसिच के नेतृत्व वाले गठबंधन “अलेक्जेंडर वुसिच — यूनाइटेड सर्बिया” से काफी आगे है, जिसे 39.3 प्रतिशत वोट मिले हैं।

सिंहुआ न्यूज एजेंसी ने बताया कि वुसिच ने बेलग्रेड में अपनी पार्टी के मुख्यालय में समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि शुरुआती नतीजों के आधार पर यह स्पष्ट है कि उनकी पार्टी चुनाव हार गई है और ‘स्टूडेंट लिस्ट’ ने जीत हासिल की है। उन्होंने अनुमान जताया कि छात्र समर्थित सूची को संसद की 250 सीटों में से 135 से 140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि उनकी पार्टी को लगभग 105 सीटें मिलने की उम्मीद है।

वुसिच ने कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूं कि स्ट्रैटिफाइड सैंपल (स्तरीकृत नमूने) के आधार पर यह साफ है कि हम ये चुनाव हार गए हैं। स्टूडेंट लिस्ट जीत गया है। उनके पास 135 से 140 सीटें होंगी, और हमारे पास लगभग 105 सीटें होंगी।”

वुसिच के अनुमानों के अनुसार, छात्रों के समर्थन वाली सूची को लगभग 22 लाख (2.2 मिलियन) वोट मिले, जबकि उनके गठबंधन को लगभग 17.2 लाख (1.72 मिलियन) वोट मिले।

‘स्टूडेंट लिस्ट’ के मुख्यालय में जीत का जश्न शुरू होते ही, प्रमुख उम्मीदवार रादोमिर साइचिक (बेलग्रेड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और सर्बियाई एकेडमी ऑफ साइंसेज एंड आर्ट्स के सदस्य) ने इसे सर्बियाई नागरिकों के लिए एक ऐतिहासिक जीत करार दिया।

साइचिक ने कहा, “आज रात लोगों की आवाज सुनी गई है।” उन्होंने बताया कि शुरुआती नतीजों से पता चलता है कि ‘स्टूडेंट लिस्ट’ सभी मतदान केंद्रों पर स्पष्ट रूप से आगे चल रही है।

उन्होंने कहा, “यह डर पर साहस की जीत है, उदासीनता पर उम्मीद की जीत है, और इस विश्वास की जीत है कि सर्बिया के विचार अलग हो सकते हैं और उसे अलग होना ही चाहिए… यह जीत किसी एक व्यक्ति की निजी उपलब्धि नहीं है, बल्कि हम सबकी है।”

इस बात पर जोर देते हुए कि जनता के चुनावी फैसले का “हर हाल में सम्मान किया जाना चाहिए,” साइचिक ने अपने समर्थकों से शांति और गरिमा के साथ जश्न मनाने की अपील की। ​​उन्होंने नागरिकों से यह भी कहा कि वे किसी उकसावे में न आएं और न ही किसी तरह के विवाद में पड़ें।

रविवार को हुए मतदान से सर्बिया की संसद (जो एक-सदनीय है) की सभी 250 सीटों के नतीजे तय हुए, जिनमें बहुमत के लिए 126 सीटों की जरूरत थी।

करीब 64.5 लाख मतदाता 8,392 मतदान केंद्रों पर वोट डालने के पात्र थे, और इस चुनाव में 18 चुनावी सूचियां (पार्टियां/गठबंधन) मैदान में थीं। मतदान केंद्र रात 8 बजे (1900 जीएमटी) बंद हो गए, हालांकि जो मतदाता उस समय तक कतार में लग चुके थे, उन्हें वोट डालने की अनुमति दी गई।

यह नतीजा सर्बिया की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है, जहां 2012 से वुसिच और उनकी पार्टी एसएनएस का दबदबा रहा है। संसदीय चुनाव में हिस्सा लेने के लिए वुसिच ने 27 सितंबर को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था, और अब दिसंबर के अंत तक नए राष्ट्रपति के लिए चुनाव होना जरूरी है।

इस चुनाव की पृष्ठभूमि नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन पर हुई एक दर्दनाक दुर्घटना से जुड़ी है। स्टेशन पर कंक्रीट की छतरी गिरने से 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जो धीरे-धीरे सरकार के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने निर्माण कार्य में कथित लापरवाही, भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी को लेकर सवाल उठाए।

समय के साथ आंदोलन को छात्रों के अलावा समाज के अन्य वर्गों का भी समर्थन मिलने लगा। छात्र समूह ने संसद की सभी 250 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची तैयार की, जिसमें शिक्षाविदों, खिलाड़ियों और किसानों सहित अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को शामिल किया गया। आंदोलन का उद्देश्य भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने, अर्थव्यवस्था में सुधार और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने का था।

अपनी हार स्वीकार करते वुसिच ने कहा कि उन्होंने आधिकारिक नतीजे आने से पहले ही अनुमानित परिणामों की घोषणा करने का फैसला किया, ताकि उनके समर्थकों को किसी तरह की अनिश्चितता न रहे और उन दावों को भी गलत साबित किया जा सके जिनमें कहा जा रहा था कि वे अपनी चुनावी हार मानने से इनकार कर देंगे।

उन्होंने अपने गुट की संभावित हार के लिए विरोध प्रदर्शनों को मिल रहे विदेशी समर्थन को जिम्मेदार ठहराया और इस नतीजे को “एक क्रांति की पुष्टि” करार दिया।

वुसिच ने अपने समर्थकों का धन्यवाद किया और वादा किया कि उनका राजनीतिक आंदोलन एकजुट रहेगा और विपक्ष में रहकर अपना काम जारी रखेगा।

ये अनुमान 2012 में सत्ता में आने के बाद से एसएनएस के लिए सबसे बड़ा चुनावी झटका हैं। साथ ही, ये नतीजे छात्रों के समर्थन वाले इस आंदोलन को ऐसी स्थिति में लाते हैं जहां वे संसद में अकेले अपने दम पर बहुमत हासिल कर सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय समाचार

ब्रिक्स संसदीय मंच से वैश्विक व्यवस्था को दिशा देने में संसद की भूमिका पर जोर, ओम बिरला ने बताई अहमियत

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच से संसद की जिम्मेदारी और उसकी अहमियत पर बात की। संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि इस वर्ष ब्रिक्स संसदीय मंच की स्थापना के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। संगठन का तेजी से विस्तार हो रहा है और इसके साथ ही वैश्विक घटनाक्रमों को प्रभावित करने की इसकी क्षमता भी बढ़ रही है।

ओम बिरला ने सदस्य देशों का स्वागत करते हुए कहा, “भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स को समाधानों का इको सिस्टम मानने की आवश्यकता पर बल दिया है। हमारी सफलता सिर्फ चर्चाओं पर नहीं बल्कि उसके परिणामों पर मापी जाएगी। हमें साझा एजेंडे को तैयार करने का संकल्प लेना चाहिए, हमारी राष्ट्रीय परिस्थितियां और दृष्टिकोण भिन्न हो सकते हैं लेकिन आक्षांए समान है। जो शांति, सुरक्षा, परस्पर सम्मान, समान अवसर और अपने नागरिकों के लिए बेहतर जीवन है।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे विश्वास है कि ब्रिक्स संसदीय मंच हमारी साझेदारी को सुदृढ़ करेगा। अधिक समावेशी और शांतिपूर्ण और सतत विश्व के निर्माण में सार्थक योगदान देगा।”

बिरला ने आगे कहा,”दुनिया की लगभग आधी आबादी और पृथ्वी के करीब एक-तिहाई भूभाग का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रिक्स देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका है।”

उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच भौगोलिक स्थिति, संस्कृति, भाषा और सामाजिक संरचना के स्तर पर भिन्नताएं हो सकती हैं, लेकिन साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता के प्रति समान जिम्मेदारी उन्हें एकजुट करती है।

जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा,” ब्रिक्स देशों की सामूहिक ताकत के साथ वैश्विक जिम्मेदारियां भी जुड़ी हुई हैं। ऐसे में सदस्य देशों के बीच सहयोग, संवाद और साझा उद्देश्यों के आधार पर आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है।”

लोकसभा स्पीकर ने कहा,” हमें साथ मिलकर संसदीय सहयोग के जरिए एक ऐसी कार्ययोजना का निर्माण करना होगा जिससे सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़े हमारी सामरिक शक्ति से वैश्विक संस्थाओं में सुधार हो।न्यायसंगत और मानवता के प्रति हमारी संस्थाएं ज्यादा उत्तरदायी हों।”

अपनी बातों को विराम देते हुए उन्होंने आगे कहा, “मुझे विश्वास है कि इस मंच पर होने वाले विचार विमर्श आपसी विश्वास और सहयोग को नई दिशा देंगे और जन केंद्रित विकास के हमारे साझे संकल्प को सुदृढ़ करेंगे। हम मिलकर संसदीय साझेदारी का निर्माण कर पाएंगे। हमारी जनता के सपनों को शांति, समृद्धि और सतत विकास के अवसर प्रदान करेगा। हमारी जनता के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करेगा।”

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राजनीति

ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बारे में जिलावार मांगी रिपोर्ट

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पश्चिम बंगाल में इस साल के अंत तक होने वाले सात शहरी निकाय चुनावों के मद्देनजर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के नेताओं को निर्देश दिया है कि वे स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की जिलावार विस्तृत सूची तैयार करें। इस सूची में उन लोगों को शामिल किया जाना है, जो तृणमूल कांग्रेस के उस गुट के प्रति निष्ठावान बने हुए हैं, जिसका नेतृत्व ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी कर रहे हैं।

तृणमूल के ममता बनर्जी गुट के एक नेता ने कहा, “एक बार जिला-वार सूचियां मिल जाने के बाद ममता बनर्जी अपनी पार्टी के राज्य नेतृत्व के साथ एक बैठक करेंगी और शहरी निकाय चुनावों के लिए नामों को अंतिम रूप देंगी। इस बैठक में चुनावों के लिए रणनीति भी तय की जाएगी।”

उन्होंने बताया कि नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं की ऐसी जिला-स्तरीय सूची तैयार करना, जो अभी भी उनके प्रति वफादार हैं, इसलिए भी जरूरी है ताकि इसे भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) को सौंपा जा सके। इससे ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न पर उनके गुट के अधिकार को साबित किया जा सकेगा।

नेता ने कहा, “हमने इस मामले में जिला-स्तरीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से शपथ-पत्र लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। हालांकि, राज्य सरकार पुलिस के जरिए हमारे जिला-स्तरीय नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दबाव डाल रही है कि वे ऐसे शपथ-पत्रों पर हस्ताक्षर करें, जिनमें वे ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के प्रति अपनी वफादारी की पुष्टि करें।”

पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र और मुर्शिदाबाद जिले के रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र में हाल ही में हुए उपचुनावों की तरह ही तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के गुट को आगामी सात शहरी निकाय चुनावों में नए नाम “ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” और नए चुनाव चिह्न “फुटबॉल खिलाड़ी” के साथ मैदान में उतरना होगा।

इसी तरह, ऋतब्रत के नेतृत्व वाले बागी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम से और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ना होगा।

कोलकाता नगर निगम (केएमसी) और हावड़ा नगर निगम (एचएमसी) सहित सात शहरी निकायों के लिए मतदान नवंबर के आखिरी हफ्ते में होने की संभावना है और नतीजे दिसंबर के पहले हफ्ते में घोषित किए जा सकते हैं।

हालांकि तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट कांग्रेस के साथ गठबंधन करके निकाय चुनाव लड़ना चाहता था लेकिन कांग्रेस की राज्य इकाई ने पहले ही इससे इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, ऋतब्रत के नेतृत्व वाले गुट ने साफ कर दिया है कि वे बिना किसी गठबंधन के अकेले ही निकाय चुनाव लड़ेंगे।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

हूती ने रियाद हवाई अड्डे पर ‘सटीक’ हमले का दावा किया

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हूती विद्रोहियों ने सोमवार को दावा किया कि उन्होंने एक बार फिर सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अहम सैन्य ठिकानों पर ‘सटीक’ हमला किया है।

हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने एक्स पोस्ट में कहा कि हूती बलों ने हवाई अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। इसके साथ ही उन्होंने देश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में कच्चे तेल के पंपिंग स्टेशनों पर कई ड्रोन हमले करने का भी दावा किया।

इसके कुछ देर बाद अगली पोस्ट में उन्होंने कहा, यमनी सशस्त्र बलों ने कई बैलिस्टिक मिसाइलों का उपयोग करते हुए दो अलग-अलग सैन्य अभियान चलाए। इन अभियानों में अदन गवर्नरेट के सलाह अल-दीन क्षेत्र और लाहिज गवर्नरेट के अल-वहात क्षेत्र में मौजूद सऊदी की सैन्य टुकड़ियों और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया गया। हमले बिल्कुल सटीक रहे, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें भारी नुकसान हुआ। साथ ही, उनके कई वाहन और हथियारों के गोदाम नष्ट हो गए और जलकर खाक हो गए।”

यह बयान तब आया, जब कुछ घंटे पहले ही सऊदी बलों ने घोषणा की थी कि उन्होंने हूती की ओर से रियाद की ओर दागी गई एक बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरस्पेट कर नष्ट कर दिया है। यमन में लड़ रहे सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि इसके जवाब में उन्होंने यमन की राजधानी सना में दो मिसाइल लॉन्च साइटों पर हमला किया।

हूती ने रविवार को किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ-साथ खमीस मुशैत में किंग खालिद एयरबेस और जाजान में एक नौसैनिक अड्डे पर भी हमले करने का दावा किया। हूती ने सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन पर आरोप लगाया कि उसने पिछले 24 घंटों में यमन पर कम से कम 56 हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में होदेइदाह, लाहिज, अमरान, सादा, अल-जौफ, ताइज और इब प्रांत शामिल हैं।

सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के हमलों में अब तक दो भारतीय नागरिक मारे गए हैं। 10-11 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक भारतीय की मौत हुई थी।

वहीं, 21 अक्टूबर को दम्माम एयरपोर्ट हमले में भी एक भारतीय की जान चली गई थी। दम्माम एयरपोर्ट हमले में दो अन्य भारतीय घायल हुए थे। इसके अलावा, शैबा ऑयल फील्ड में ड्रोन का मलबा गिरने से एक भारतीय घायल हुआ था।

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