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Monday,23-May-2022

अपराध

पेगासस मामले में पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

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 पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया गया था या नहीं, यह स्पष्ट करने के लिए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने से केंद्र के इनकार के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कथित पेगासस जासूसी मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और हेमा कोहली के साथ ही प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत अगले कुछ दिनों में एक अंतरिम आदेश पारित करेगी।

केंद्र ने पीठ को सूचित किया कि विस्तृत हलफनामा दायर नहीं करने जा रहा है।

मेहता ने प्रस्तुत किया कि सरकार स्वतंत्र डोमेन विशेषज्ञों की तकनीकी समिति का गठन कर सकती है, जो याचिकाकर्ताओं के आरोपों की जांच कर सकती है कि उनके फोन पेगासस से प्रभावित थे या नहीं। केंद्र ने कहा कि यह समिति अपनी रिपोर्ट शीर्ष अदालत को सौंप सकती है।

शीर्ष अदालत ने 2019 में संसद में पूर्व इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री की प्रतिक्रिया की ओर इशारा किया। हालांकि, मेहता ने हाल ही में संसद के पटल पर भारत के रेल, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा दिए गए एक बयान पर प्रकाश डाला, जिसमें सरकार की स्थिति को स्पष्ट किया गया था।

विभिन्न याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, राकेश द्विवेदी, दिनेश द्विवेदी, श्याम दीवान और मीनाक्षी अरोड़ा ने इस मामले पर केंद्र के रुख पर आपत्ति जताई।

वरिष्ठ पत्रकार एन. राम का प्रतिनिधित्व कर रहे सिब्बल ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उसने पेगासस का इस्तेमाल किया या नहीं? सिब्बल ने कहा कि यह अविश्वसनीय है कि सरकार ने कहा कि वह अदालत को स्पाइवेयर के इस्तेमाल के बारे में नहीं बताएगी।

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, “हमने सोचा था कि सरकार जवाबी हलफनामा दायर करेगी और आगे की कार्रवाई तय करेगी। अब केवल अंतरिम आदेश पारित किए जाने वाले मुद्दे पर विचार किया जाना है।”

दीवान ने तर्क दिया कि कैबिनेट सचिव के स्तर पर एक विस्तृत हलफनामा दायर किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई बाहरी एजेंसी स्पाइवेयर का इस्तेमाल करती है तो सरकार को चिंतित होना चाहिए और अगर वह सरकारी एजेंसी है तो यह बिल्कुल असंवैधानिक है।

वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने इस मुद्दे की जांच के लिए सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ पैनल की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया।

मेहता ने प्रस्तुत किया, “कोई भी इनकार या विवाद नहीं कर रहा है। इसमें संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। हमें मूल मुद्दे पर जाना चाहिए। विशेषज्ञ पैनल को इसमें जाने दें।”

प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अदालत सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने वाली किसी भी जानकारी का खुलासा करने को लेकर उत्सुक नहीं है। पीठ ने कहा कि अगर सरकार को हलफनामा दाखिल करना होता है, तो उसे पता चल जाता है कि हम इस विषय पर कहां खड़े हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त या मौजूदा न्यायाधीश को जांच का नेतृत्व करना चाहिए और सरकार, जो एक गलत काम में लिप्त है, पर जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।

अपराध

जम्मू-कश्मीर में सरपंच की हत्या के आरोप में लश्कर के 3 आतंकी गिरफ्तार

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 जम्मू एवं कश्मीर के बारामूला जिले में पिछले महीने एक सरपंच की हत्या के आरोप में लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकवादियों और उनके साथियों को सोमवार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। बारामूला की पट्टन तहसील के गोशबुग गांव के सरपंच मंजूर अहमद बांगू की 15 अप्रैल को आतंकियों ने हत्या कर दी थी।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “गोशबुग के सरपंच मंजूर अहमद बांगू की हत्या के मामले में जांच के दौरान आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों में संलिप्तता के लिए विश्वसनीय सूत्रों से जानकारी मिलने के बाद तीन संदिग्धों- नूर मोहम्मद यातू, मोहम्मद रफीक पारे और आशिक हुसैन पारे को गिरफ्तार किया गया है। ये सभी गोशबुग पट्टन के निवासी हैं।”

अधिकारी ने कहा, “गिरफ्तार किए गए आतंकियों ने खुलासा किया है कि वे आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक ओजीडब्ल्यू मोहम्मद अफजल लोन के संपर्क में थे, जो इस समय न्यायिक हिरासत में है।”

पुलिस अधिकारी ने आगे कहा, “लोन ने अपने करीबी सहयोगी यातू को अपने क्षेत्र के दो लोगों को आतंकवादी रैंक में शामिल होने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उसने गोशबुग के निवासी मोहम्मद रफीक पारे और आशिक हुसैन पारे से संपर्क किया और उन्हें आतंकवादी रैंक में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।”

यातू ने अपने एक रिश्तेदार मेहराज-उद-दीन डार के साथ दोनों को व्यक्तिगत रूप से लोन से मिलने का निर्देश दिया था।

पुलिस के अनुसार, “तीनों ने लोन से मुलाकात की, जिसने उन्हें प्रेरित किया और लक्ष्य निर्धारित किए। उसने उन्हें अलग-अलग असाइनमेंट भी दिए।”

पुलिस ने कहा, “कुछ दिनों के बाद लोन ने रफीक पारे और आशिक पारे के लिए डार के माध्यम से यातू को हथियार और गोला-बारूद (गोलियों के साथ दो पिस्तौल, दो हथगोले और दो मैगजीन) भेजे। राजनीति से जुड़े व्यक्तियों, विशेष रूप से सरपंचों को मारने के निर्देश के साथ यह हथियार भेजे गए थे।”

पुलिस ने कहा कि लोन और उसके तीन अन्य सहयोगियों को पल्हालन ग्रेनेड विस्फोट मामले में गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार, साजिशकर्ताओं ने लक्ष्य निर्धारित किया और अरपंच बंगू (मृतक) की सबसे पहले रेकी की और उसकी हत्या के लिए एक खास तरीख तय की गई।

पुलिस ने बताया, “उस विशेष दिन, आशिक पारे ने फेसबुक मैसेंजर के माध्यम से उमर लोन से बात की और उसे उस योजना के बारे में जानकारी दी, जिसे आतंकवादियों ने 15 अप्रैल को चंद्रहामा पट्टन के बागों में सरपंच की हत्या करके अंजाम दिया था।”

बयान में कहा गया है, “आगे की पूछताछ में यातू ने खुलासा किया कि उसने लोन को हथियार और गोला-बारूद दिया था। उसने बताया कि और हथियार और कुछ जिंदा राउंड अभी भी उसके पास बचे हुए हैं जो उसके घर में एक सीलबंद बॉक्स में रखे हुए हैं।”

पुलिस ने बताया कि इस मामले में अब तक तीन पिस्टल, दो ग्रेनेड, तीन मैगजीन और 32 गोलियां बरामद हुई हैं।

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अपराध

दिल्ली दंगों की साजिश का मामला : हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया

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दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक कपड़ा इकाई के मालिक मोहम्मद सलीम खान की जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया, जो कथित तौर पर 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक बड़े षड्यंत्र के मामले में शामिल है।

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ण की पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए इस पर आगे की सुनवाई 20 जुलाई को तय की है।

निचली अदालत में जमानत खारिज होने के बाद खान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

22 मार्च को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

दिल्ली पुलिस ने खान पर कड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) सहित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, जेएनयू के विद्वान और कार्यकर्ता खालिद और शरजील इमाम दिल्ली दंगों 2020 से जुड़े कथित बड़े षड्यंत्र के मामले में शामिल लगभग एक दर्जन लोगों में शामिल हैं।

फरवरी 2020 में राष्ट्रीय राजधानी में दंगे भड़क उठे थे, क्योंकि सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम) और सीएए समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों ने हिंसक रूप ले लिया और 50 से अधिक लोगों की जान चली गई और 700 से अधिक घायल हो गए थे।

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अपराध

कर्नाटक कपल आत्महत्या मामला: परिवारों का कहना है कि काश वे उनकी शादी करवा देते

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युवा जोड़े के माता-पिता और रिश्तेदारों ने कहा है कि अगर उन्हें उनकी योजनाओं के बारे में पता होता तो वे उन्हें शादी करने की अनुमति देते।

रविवार तड़के 23 वर्षीय यशवंत यादव वी. और ज्योति एम. के शव मिल थे। युगल ने इतना बड़ा कदम उठाने से पहले ही शादी कर ली थी और किराए की कार की पिछली सीट पर बैठकर पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली थी।

पुलिस ने कहा कि जले हुए शव एक आलिंगन में बंद पाए गए। घटना के बाद यशवंत यादव और ज्योति के माता-पिता ने कहा कि उन्हें युवक और युवती के प्रेम संबंध के बारे में पता नहीं था।

उनका कहना था कि अगर उन्हें पता होता तो वे उनकी शादी करा देते। उन्होंने अपने बच्चों को प्यार में पड़ने के बाद दुनिया का सामना नहीं करने के लिए दोषी ठहराया।

पुलिस ने कहा कि युगल ने अपने साथ लाए सभी पैसे खत्म करने के बाद यह कदम उठाया था। लड़की के रिश्तेदार सीनप्पा ने कहा कि लड़की बीकॉम ग्रेजुएट थी, लेकिन वह बहुत संवेदनशील थी और एक डरपोक व्यक्तित्व की थी।

अपने जीवन को समाप्त करने वाले व्यक्ति के पिता यशवंत राव ने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि उनका बेटा आत्महत्या कर सकता है। वह निर्दोष है। उसने माता-पिता को पीड़ा देने के लिए माफी मांगते हुए एक एसएमएस संदेश भेजा था। उसने संदेश में यह भी कहा था कि वह अकेले नहीं रह सकता और वह एक बुरा निर्णय ले रहा है।

राव ने कहा कि उनके परिवार में कोई भी महिला के बारे में नहीं जानता था। अगर उसने अपने प्रेम संबंध के बारे में बताया होता, तो उसकी शादी तय हो सकती थी, और उसे यह कदम उठाने से पहले फोन करना चाहिए था।

दंपति ने 18 मई को अपने-अपने घर छोड़ दिए थे। ज्योति ने अपने माता-पिता से कहा था कि वह एक साक्षात्कार में शामिल होगी और यशवंत ने अपने माता-पिता को सूचित किया था कि वह अपनी कक्षाओं में भाग लेने के लिए बाहर जाएगा। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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