राजनीति
सुप्रीम कोर्ट का कफील खान मामले में दखल देने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत डॉ. कफील खान को रिहा करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। प्रधान न्यायाधीश एस.ए. बोबडे, न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना और वी. रामासुब्रमण्य की खंडपीठ ने कहा कि अदालत को इलाहाबाद के फैसले पर हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के 1 सितंबर के आदेश को चुनौती देने वाली उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “यह आदमी तीन महीने से बाहर है, और कुछ नहीं हुआ है।”
शीर्ष अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि जो लंबित आपराधिक मामले हैं वे अपने दम पर चलते रहेंगे।
पीठ ने कहा, “हम फैसले में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। लेकिन इससे चल रहे मामले प्रभावित नहीं होंगे।”
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बाद कफील खान आपराधिक मामलों में दोषमुक्त हो जाएंगे।
खंडपीठ ने इस पर कहा कि आपराधिक मामलों का फैसला सबूतों में दम रहने के आधार पर ही किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने एनएसए के तहत खान की गिरफ्तारी को रद्द कर दिया था और उनकी तत्काल रिहाई के निर्देश दिए थे, यह कहते हुए कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दिए गए उनके भाषण से नफरत या हिंसा को बढ़ावा नहीं मिलता, बल्कि इससे राष्ट्रीय एकता को बल मिलता है।
हाईकोर्ट ने कफील खान की मां नुजहत परवीन की याचिका स्वीकार करते हुए कहा था कि खान को हिरासत में लेने का डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का फैसला गलत था, क्योंकि मजिस्ट्रेट ने खान के भाषण का गलत मतलब निकाला और उनके असली मकसद को नजरअंदाज कर दिया।
खान 2017 में उस समय सुर्खियों में आए थे जब गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी के चलते कई बच्चों की मौत हो गई थी। खान को जिंदगी बचाने वाले डॉक्टर माना गया, क्योंकि उन्होंने आनन-फानन में कई सिलिंडरों की व्यवस्था की थी, लेकिन बाद में उन्हें अधिकारियों की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
खान को नौ अन्य डॉक्टरों के साथ बाद में जमानत पर रिहा किया गया था।
राष्ट्रीय समाचार
भारत और श्रीलंका की नौसेना का शक्ति प्रदर्शन, युद्धपोतों ने किया संयुक्त अभ्यास

भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने श्रीलंकाई नौसेना के साथ एक महत्वपूर्ण समुद्री अभ्यास भी किया है। इस नौसैनिक अभ्यास में भारत के तीन बड़े समुद्री जहाज शामिल हुए। नौसेना के आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता और भारतीय तटरक्षक जहाज आईसीजीएस सारथी इस अभियान का हिस्सा थे। इस दौरान दोनों नौसेनाओं ने समुद्र में समन्वित गतिविधियां कीं।
इससे एक-दूसरे के साथ तालमेल बढ़ाने और मिलकर समुद्री अभियान संचालित करने की क्षमता को मजबूत करने में मदद मिली। अभियान में शामिल यह भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन है।
नौसेना के मुताबिक, 29 अक्टूबर को श्रीलंका के कोलंबो से सफल दौरा पूरा कर पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन आगे रवाना हो गया। इस दौरान आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता और भारतीय तटरक्षक जहाज आईसीजीएस सारथी ने श्रीलंकाई नौसेना के साथ कई गतिविधियों में हिस्सा लिया। वापसी के दौरान तीनों जहाजों ने श्रीलंका नौसेना के जहाज एसएलएनएस विजयबाहु के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास किया।
कोलंबो में इस दौरे का मकसद सिर्फ नौसैनिक संबंधों को मजबूत करना ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के नौसैनिकों को एक-दूसरे के अनुभवों और कार्यप्रणाली से परिचित कराना भी था। प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के वरिष्ठ अधिकारी ने तीनों जहाजों के कमांडिंग अधिकारियों के साथ श्रीलंका नौसेना के पश्चिमी नौसैनिक क्षेत्र के कमांडर से मुलाकात की। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और समुद्री साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं ने त्रिंकोमाली स्थित नौसेना एवं समुद्री अकादमी का दौरा किया। यहां उन्होंने श्रीलंका नौसेना के प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत की और अपने अनुभव साझा किए। वहीं, श्रीलंका नौसेना के प्रशिक्षु भी भारतीय जहाजों पर पहुंचे। उन्होंने जहाजों पर उपलब्ध प्रशिक्षण सुविधाओं और वहां होने वाली गतिविधियों को करीब से देखा। इस तरह दोनों देशों के भावी नौसैनिक अधिकारियों को एक-दूसरे की प्रशिक्षण व्यवस्था और कामकाज समझने का अवसर मिला।
समुद्री सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी इस दौरे का हिस्सा रहा। भारतीय नौसेना के जवानों ने कोलंबो में समुद्र तट की सफाई के अभियान में हिस्सा लिया। इसके अलावा, तीनों जहाजों को स्थानीय लोगों और श्रीलंका में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों के लिए खोला गया। लोगों को जहाजों पर पहुंचकर नौसैनिकों से बातचीत करने और भारतीय नौसेना की प्रशिक्षण एवं परिचालन गतिविधियों को करीब से जानने का मौका मिला। कोलंबो से विदाई के समय संयुक्त समुद्री अभ्यास हुआ। यह इस दौरे का अहम पड़ाव रहा।
भारतीय जहाजों और श्रीलंका के एसएलएनएस विजयबाहु ने पैसेक्स अभ्यास में हिस्सा लिया। यह दौरा भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी का एक और उदाहरण बना। साथ ही, दोनों देशों ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, आपसी सहयोग और नौसैनिक क्षमता निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। नौसेना के मुताबिक यह भारत की महासागर परिकल्पना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को साझा प्रयासों से आगे बढ़ाना है।
राष्ट्रीय समाचार
ईएसआईसी ने 31 दिसंबर तक बढ़ाई एमनेस्टी स्कीम की अवधि, कोर्ट के बाहर सुलझ सकेंगे विवाद

भारत सरकार ने गुरुवार को कहा कि उसने नई एमनेस्टी स्कीम 2025 की अवधि 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है, ताकि नियोक्ताओं और बीमित व्यक्तियों को लंबित मामले सुलझाने के लिए ज्यादा समय मिल सके।
विभिन्न हितधारकों के सुझावों की समीक्षा के बाद कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) ने इसकी समय सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। पहले यह योजना 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक थी, अब इसे मौजूदा नियमों और शर्तों पर तीन महीने और बढ़ाकर 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक कर दिया गया है।
नई एमनेस्टी स्कीम एक वन-टाइम विवाद समाधान पहल है, जिसका मकसद कोर्ट में लंबित मामलों के बैकलॉग को कम करना और पुराने ईएसआई एक्ट के तहत अनुपालन को बढ़ावा देना है।
यह योजना नियोक्ताओं को ईएसआईसी के साथ कानूनी विवादों को कोर्ट के बाहर सुलझाने के लिए एक व्यवस्थित तरीका देती है। ‘नई एमनेस्टी स्कीम, 2025’ विवाद समाधान का एक व्यावहारिक और नियोक्ता-अनुकूल रास्ता है और यह कारोबार करने में आसानी बढ़ाने के साथ-साथ ईएसआईसी से जुड़े नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के सरकार के बड़े लक्ष्य का भी समर्थन करती है।
इस स्कीम के तहत तदर्थ आकलन का निपटान वास्तविक अंशदान और ब्याज का भुगतान करके किया जा सकता है, इस पर कोई हर्जाना नहीं लगाया जाएगा। जिन मामलों में नियोक्ताओं ने पहले ही बकाया राशि का भुगतान कर दिया है, उनमें विवादित हर्जाने का 10 प्रतिशत भुगतान करने पर केस वापस ले लिए जाएंगे। साथ ही ईएसआईसी द्वारा रिकॉर्ड जमा न करने या देर से भुगतान के लिए दायर किए गए मामले, जिनका बाद में अनुपालन कर दिया गया था, वे भी कोर्ट की अनुमति से वापस ले लिए जाएंगे।
आधिकारिक बयान के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक दायर किए गए कोर्ट केस इस योजना के तहत पात्र हैं। इस स्कीम की अवधि बढ़ने से पात्र नियोक्ताओं और बीमित व्यक्तियों को इसका लाभ उठाने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
श्रम मंत्रालय ने कहा, “सभी संबंधित हितधारकों को सलाह दी जाती है कि वे 31 दिसंबर 2026 को बंद होने से पहले बढ़ाई गई इस अवधि का लाभ उठाएं।”
इस बीच केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया ने हाल ही में कहा था कि भारत कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के जरिए 25 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रहा है।
राष्ट्रीय समाचार
चक्रवात ‘अर्नब’ का असर कमजोर, फिर भी राजस्थान के कई जिलों में बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी

चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ कमजोर होकर दक्षिणी छत्तीसगढ़ के ऊपर एक ‘डिप्रेशन’ (निम्न दबाव का क्षेत्र) में बदल गया है और अगले 24 घंटों में इसके और कमजोर होने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि इस बीच, एक नए ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ (पश्चिमी विक्षोभ) के कारण पंजाब और आसपास के इलाकों में एक चक्रवाती परिसंचरण बना है, जिसका असर राजस्थान के कुछ हिस्सों के मौसम पर भी पड़ रहा है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, राजस्थान के कई जिलों में गुरुवार को आंधी-तूफान, तेज हवाएं और बारिश होने की संभावना है। जयपुर और भरतपुर संभाग के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश और ओलावृष्टि भी हो सकती है।
अगले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने की उम्मीद है, जिससे कई इलाकों में चल रही गर्मी से राहत मिलेगी।
जयपुर स्थित मौसम केंद्र के अनुसार, 29 अक्टूबर को भरतपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। साथ ही, आंधी-तूफान, 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
जयपुर और भरतपुर संभाग के उत्तरी हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है, और कुछ इलाकों में ओले भी गिर सकते हैं। अधिकतम तापमान में होने वाली इस गिरावट से प्रभावित क्षेत्रों के मौसम में काफी बदलाव देखने को मिल सकता है।
शुक्रवार, 30 अक्टूबर को पूर्वी राजस्थान के जयपुर, भरतपुर, उदयपुर, कोटा और अजमेर संभाग के कुछ हिस्सों में आंधी-तूफान और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है।
पश्चिमी राजस्थान में, जोधपुर और बीकानेर संभाग के कुछ इलाकों में गुरुवार और शुक्रवार को आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और आंधी-तूफान के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
हालांकि, ज्यादातर सीमावर्ती इलाकों के मुख्य रूप से सूखे रहने की उम्मीद है। आईएमडी ने 31 अक्टूबर को पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान जताया है। 1 नवंबर से राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से सूखा रहने की संभावना है।
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