महाराष्ट्र
सुप्रीम कोर्ट ने खरी-खरी सुनाई, कैसे पकड़ी गई एकनाथ शिंदे की चालाकी!
महाराष्ट्र के सियासी संकट से उपजे सवालों पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के सामने अयोग्यता से लेकर फ्लोर टेस्ट, और असली शिवसेना को मान्यता देने संबंधित दलीलें रखते हुए चुनाव आयोग की कार्रवाई को चुनौती दी गई। बुधवार को सुनवाई के दौरान उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल थे, जबकि शिंदे गुट की ओर से हरीश साल्वे दलील दे रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के सामने कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर कोई राजनीतिक पार्टी दो-तिहाई की संख्या से चाहे तो दूसरी पार्टी में विलय हो सकता है या दूसरी नई पार्टी बना सकता है, क्योंकि 10वीं अनुसूचि में यही प्रावधान है। वहीं शिंदे गुट की ओर से साल्वे ने कहा कि यह पार्टी के भीतर के लोकतंत्र का मसला है, क्योंकि हम असंतुष्ट हैं और सीएम बदलना चाहते हैं। पार्टी में लोकतंत्र होना जरूरी है और कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले आप ही आए थे और अब दखल न देने की बात कह रहे हैं।
चीफ जस्टिस ने कपिल सिब्बल की दलील पर सवाल किया, ‘आपकी दलील यह है कि बीजेपी में या तो दो-तिहाई की संख्या के साथ विलय कर लें या नई पार्टी बनाएं?’ इस पर सिब्बल का जवाब था कि संभव तो यही है। सिब्बल ने कहा कि बागियों यानी शिंदे खेमे के नेताओं ने पार्टी विप का उल्लंघन किया है। ऐसे में वह 10वीं अनुसूची के तहत ये अयोग्य हैं। सिब्बल ने कहा कि शिंदे गुट का कहना है कि वह मूल शिवसेना है, लेकिन ऐसा कैसे संभव हो सकता है। 10वीं अनुसूची इसकी इजाजत नहीं देता है। 10वीं अनुसूची बहुमत के संदर्भ में मान्यता नहीं देता है। इस तरह देखा जाए तो अगर शिंदे गुट अयोग्य है तो फिर वह चुनाव आयोग के सामने मान्यता के लिए नहीं जा सकता है। अगर वह अयोग्य ठहराए जाते हैं तो फिर उनका स्पीकर का चुनाव अवैध है, उनका सीएम पद पर चुना जाना अवैध है। इस तरह देखा जाए तो राज्यपाल का फैसला भी अवैध है।
मामले की सुनवाई के दौरान शिंदे गुट की ओर से हरीश साल्वे ने दलील दी कि तथ्यात्मक विरोधाभास है। जब पार्टी छोड़ी जाती है तब अयोग्यता और दल-बदल कानून सामने आता है। यहां ऐसा नहीं है और कोई भी अयोग्य नहीं है। अगर हमारा सीएम हमसे मिलना नहीं चाहता है? अगर हम शिवसेना के सदस्य हैं और सीएम हटाना चाहते हैं तो यह सब पार्टी के भीतर का मामला है। पार्टी के भीतर के लोकतंत्र का मसला है, क्योंकि हम असंतुष्ट हैं और सीएम बदलना चाहते हैं। पार्टी में लोकतंत्र होना जरूरी है और कोर्ट को इस मामले में दखल नहीं देना चाहिए।
चीफ जस्टिस ने कहा कि पहले आपकी ओर से अर्जी दाखिल की गई और डिप्टी स्पीकर की कार्रवाई को 10 दिन के लिए टाल दिया गया। उन्होंने कहा, ‘आप पहले आए थे। सही गलत क्या हुआ हम नहीं जाना चाहते, लेकिन आप अब कह रहे हैं कि हम इस मामले को तय नहीं कर सकते?’ चीफ जस्टिस ने साल्वे से कहा कि आपने जो कुछ मुद्दे लिखकर दिए हैं उससे साफ नहीं है कि मुद्दा क्या है। आप दोबारा इसे पेश करें।’ साल्वे ने कहा कि वह गुरुवार की सुबह दोबारा पेश करेंगे। साल्वे ने कहा कि यहां पार्टी के नेता पर विवाद था पार्टी में कोई विभाजन नहीं है। इस दौरान शिंदे गुट की ओर से महेश जेठमलानी ने कहा कि नई सरकार इसलिए बनी क्योंकि सीएम ने फ्लोर टेस्ट से पहले इस्तीफा दे दिया क्योंकि वह जानते थे कि वह बहुमत में नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई को गुरुवार के लिए टाल दिया है। कोर्ट ने कहा था कि शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट की ओर से दल-बदल मामला, अयोग्यता मामला और विलय मामले से लेकर फ्लोर टेस्ट से संबंधित मामले उठाए गए हैं। इनमें कई संवैधानिक सवाल उठाया गया है, जिन पर बड़ी बेंच विचार कर सकती है।
महाराष्ट्र
मुंबई को बुनियादी सुविधाएं देना हमारी प्राथमिकता, समाजवादी पार्टी का चुनावी घोषणापत्र जारी, अबू आसिम आज़मी ने शहरी समस्याओं के समाधान का दावा किया

ABU ASIM AAZMI
मुंबई: समाजवादी पार्टी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) चुनाव के लिए अपना चुनावी मैनिफेस्टो जारी किया। पार्टी के महाराष्ट्र प्रेसिडेंट अबू आसिम आज़मी ने मुंबई के लोगों की बेसिक प्रॉब्लम को ध्यान में रखते हुए यह मैनिफेस्टो पेश किया। अबू आसिम आज़मी ने चुनावी मैनिफेस्टो में बेसिक सुविधाओं के साथ-साथ फ्री पानी सप्लाई का भी वादा किया है। मुंबई के हर परिवार को रोज़ाना 700 लीटर साफ और फ्री पीने का पानी देने का वादा किया गया है। एजुकेशन का स्टैंडर्ड बढ़ाने के लिए म्युनिसिपल स्कूलों की क्वालिटी सुधारने और हायर एजुकेशन के लिए जरूरतमंद स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप और फ्री फैसिलिटी देने का फैसला किया गया है। मेडिकल डिपार्टमेंट और हेल्थ डिपार्टमेंट में मुंबई के हर वार्ड में मॉडर्न मेडिकल फैसिलिटी, मोहल्ला क्लीनिक और फ्री दवाइयों का इंतज़ाम करना भी ज़रूरी बताया गया है। इसके अलावा, रोज़गार के बराबर मौके देने की कोशिशें भी की गई हैं। युवाओं के लिए रोज़गार के नए मौके बनाना और बेरोज़गारी खत्म करने के लिए खास प्रोजेक्ट बनाना भी चुनावी मैनिफेस्टो का हिस्सा है। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों के लिए बेहतर सुविधाएं, पक्के घर और शहर में गड्ढों से मुक्त सड़कें, BMC के कामकाज में ट्रांसपेरेंसी लाना और करप्शन खत्म करना भी चुनावी मैनिफेस्टो के मुख्य हिस्से हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में अबू आसिम आज़मी ने कहा कि समाजवादी पार्टी मुंबई के विकास और वहां के लोगों को उनके बुनियादी अधिकार दिलाने के लिए पूरी तरह तैयार है। हमारा मकसद सिर्फ वादे करना नहीं है, बल्कि मुंबई को एक बेहतर और खुशहाल शहर बनाना है।
महाराष्ट्र
अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता से बाहर हुई शिवसेना, भाजपा-कांग्रेस का अप्रत्याशित गठबंधन

BJP CONGRES
ठाणे: अंबरनाथ नगर परिषद की राजनीति में एक चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। हाल ही में संपन्न नगर परिषद चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने मिलकर गठबंधन बनाया, जिससे शिवसेना सत्ता से बाहर हो गई, जबकि वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।
चुनाव परिणामों में शिवसेना को सबसे अधिक सीटें मिलीं, लेकिन वह पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए भाजपा ने कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के साथ मिलकर बहुमत का आंकड़ा पार किया और नगर परिषद में नई सत्ताधारी व्यवस्था स्थापित की।
नए गठबंधन ने विकास और स्थिर प्रशासन को अपना प्रमुख उद्देश्य बताते हुए कहा कि स्थानीय निकायों में कामकाज को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि पारंपरिक राजनीतिक मतभेदों को। गठबंधन के तहत भाजपा को नगर परिषद में प्रमुख पद मिला, जबकि सहयोगी दलों को भी सत्ता में हिस्सेदारी दी गई।
इस घटनाक्रम पर शिवसेना ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे जनादेश के साथ विश्वासघात बताया और आरोप लगाया कि सत्ता के लिए वैचारिक मतभेदों को दरकिनार कर दिया गया है। शिवसेना नेताओं ने कहा कि पार्टी एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएगी और जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी स्थानीय निकायों में अब ऐसे गठबंधन आम होते जा रहे हैं, जहाँ सीटों का गणित और स्थानीय समीकरण राष्ट्रीय या राज्य स्तर की राजनीति से अलग दिशा तय करते हैं।
अंबरनाथ नगर परिषद में बना यह नया सत्ता समीकरण महाराष्ट्र की नगर राजनीति में बदलते रुझानों की ओर इशारा करता है और आने वाले समय में अन्य नगर निकायों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
महाराष्ट्र
फुटपाथ से उठाकर विधायक बनाया, लेकिन पार्टी के लिए कुछ नहीं किया: अबू आसिम आज़मी का रईस शेख पर बड़ा हमला

मुंबई: (कमर अंसारी) समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र में अंदरूनी गुटबाज़ी अब खुलकर सामने आ गई है। महाराष्ट्र समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अबू आसिम आज़मी ने एक निजी यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में पार्टी के भिवंडी से विधायक रईस शेख पर तीखा हमला बोला है। आज़मी ने दावा किया कि उन्होंने रईस शेख को “फुटपाथ से उठाकर समाजवादी पार्टी की सीट पर विधायक बनाया”, लेकिन रईस शेख ने कभी भी पार्टी के हित में कोई काम नहीं किया।
अबू आसिम आज़मी ने आरोप लगाया कि रईस शेख लगातार समाजवादी पार्टी के खिलाफ काम कर रहे हैं और उन्हें नैतिकता के आधार पर खुद ही पार्टी से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि रईस शेख ने भिवंडी महानगरपालिका और मुंबई महानगरपालिका चुनावों के लिए उम्मीदवारों के इंटरव्यू खुद लिए और टिकट वितरण में भी दखल दिया। इतना ही नहीं, समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को हराने के लिए उनके सामने कांग्रेस के उम्मीदवार उतारे गए।
आज़मी के मुताबिक, जब पार्टी ने रईस शेख के भाई को टिकट देने से इनकार कर दिया, तो इसी नाराज़गी के चलते उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों के खिलाफ अपने समर्थकों को कांग्रेस की टिकट पर चुनाव मैदान में उतार दिया। अबू आसिम आज़मी ने यह भी आरोप लगाया कि रईस शेख परिवारवाद को बढ़ावा देना चाहते थे, जिसका पार्टी ने विरोध किया और इसी कारण टिकट देने से मना कर दिया गया।
दूसरी ओर, रईस शेख अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि वे वास्तव में किस पार्टी के साथ हैं। एक तरफ उनके समर्थन से कांग्रेस के उम्मीदवार चुनाव लड़ते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने समाजवादी पार्टी से औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है। अबू आसिम आज़मी ने कहा कि जल्द ही जनता के सामने रईस शेख का “दोहरा चेहरा” उजागर हो जाएगा। उन्होंने महानगरपालिका चुनावों के बाद रईस शेख के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं।
वहीं, रईस शेख का कहना है कि कई राजनीतिक पार्टियां उनकी अनुमति के बिना उनके फोटो का इस्तेमाल कर वोट हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि समाजवादी पार्टी के टिकट वितरण के किसी भी फैसले में वे शामिल नहीं थे और पार्टी ने उन्हें पहले ही साइडलाइन कर दिया था। रईस शेख के अनुसार, जो उम्मीदवार कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे हैं, उन्हें टिकट कांग्रेस पार्टी ने ही दिया है और इसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है।
इस पूरे विवाद के बीच समाजवादी पार्टी के मुस्लिम वोटर असमंजस की स्थिति में हैं। वे यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि रईस शेख के समर्थन से उतरे कांग्रेस उम्मीदवारों को वोट दें या समाजवादी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों को, क्योंकि इस चुनाव में यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि आखिर कौन किसके साथ है।
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