राजनीति
पालक मंत्री वितरण में भाजपा का मास्टरस्ट्रोक; पश्चिम महाराष्ट्र से राष्ट्रवादी बाहर, सहयोगी दलों को राहत
मुंबई प्रतिनिधि : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लगभग दो महीने बाद राज्य में पालक मंत्री पदों का वितरण घोषित किया गया। भाजपा ने इस वितरण में सबसे बड़ा हिस्सा हासिल करते हुए 16 जिलों की जिम्मेदारी संभाली है। एकनाथ शिंदे गुट को 9 जिलों का प्रभार मिला, जबकि अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को केवल 7 जिलों का प्रभार मिला। इस रणनीति के तहत भाजपा ने पश्चिम महाराष्ट्र से राष्ट्रवादी का लगभग सफाया कर दिया है।
पश्चिम महाराष्ट्र का राजनीतिक समीकरण बदला :
पश्चिम महाराष्ट्र को राष्ट्रवादी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। लेकिन इस बार भाजपा और शिंदे गुट ने इस क्षेत्र में मजबूत स्थिति बना ली है। पुणे को छोड़कर सांगली, सातारा, सोलापुर और कोल्हापुर जिलों की पालक मंत्री पद की जिम्मेदारी भाजपा-शिवसेना गठबंधन को सौंपी गई है।
- सांगली में चंद्रकांत पाटील (भाजपा)
- सातारा में शंभूराज देसाई (शिवसेना)
- सोलापुर में जयकुमार गोरे (भाजपा)
- कोल्हापुर में प्रकाश आबिटकर (शिवसेना)
इसके अलावा, कोल्हापुर में सहपालक मंत्री के रूप में भाजपा की माधुरी मिसाल को नियुक्त किया गया है।
राष्ट्रवादी की घटती ताकत
अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी ने पश्चिम महाराष्ट्र में 11 विधायक चुने हैं। हालांकि, पुणे जिले के पालक मंत्री पद को छोड़कर इस क्षेत्र में राष्ट्रवादी को कोई अन्य जिम्मेदारी नहीं दी गई। पहले, पश्चिम महाराष्ट्र के अधिकांश पालक मंत्री पद राष्ट्रवादी के पास होते थे। लेकिन इस बार भाजपा ने राष्ट्रवादी को किनारे करते हुए अपने सहयोगी दलों को प्राथमिकता दी।
भाजपा की रणनीतिक चाल
पालक मंत्री पदों के वितरण से भाजपा ने पश्चिम महाराष्ट्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया है। यह रणनीति शिवसेना-भाजपा गठबंधन को मजबूत करने और राष्ट्रवादी के प्रभाव को कम करने के लिए बनाई गई है। इस निर्णय से राष्ट्रवादी के कार्यकर्ताओं में असंतोष है, और पार्टी के विस्तार पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
भविष्य के राजनीतिक परिणाम
पालक मंत्री पदों के इस वितरण ने पश्चिम महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। भाजपा-शिवसेना गठबंधन की नई ताकत और राष्ट्रवादी की कमजोर होती स्थिति आगामी चुनावों पर क्या असर डालेगी, इस पर सभी की नजर है।
राष्ट्रीय समाचार
पश्चिम एशिया तनाव के बीच मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, सेंसेक्स में 130 अंकों की बढ़त

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों के चलते हफ्ते के तीसरे कारोबारी सत्र बुधवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। शुरुआती तेजी के बाद दिन भर के उतार-चढ़ाव के बाद प्रमुख बेंचमार्कों निफ्टी और सेंसेक्स में 0.17 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली।
बाजार बंद होने के समय सेंसेक्स 130.49 अंक या 0.17 प्रतिशत बढ़कर 77,185.43 पर था, तो वहीं निफ्टी50 26.45 अंक या 0.11 प्रतिशत बढ़कर 24,078.50 पर पहुंच गया।
दिन के कारोबार में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 77,054.94 से 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,192.76 पर खुला और एक समय यह 591.33 अंकों या 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,646.27 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।
वहीं निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,052.05 से 0.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,085.85 पर खुला और दिन के कारोबार के दौरान यह 168.3 अंक यानी 0.69 प्रतिशत की उछाल के साथ 24,220.35 के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया था।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स मं 0.28 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.67 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली।
वहीं, सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत की तेजी आई। इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.73 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.69 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.63 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली। इसके साथ ही निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी ऑटो में भी तेजी दर्ज की गई।
इसके विपरीत, निफ्टी मेटल में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी आईटी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मीडिया और निफ्टी रियल्टी में भी कमजोरी रही।
निफ्टी 50 इंडेक्स में अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल, एचडीएफसी लाइफ, श्रीराम फाइनेंस, आयशर मोटर्स, और एसबीआई के शेयर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे, जबकि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, एलएंडटी, जेएसडब्ल्यू स्टील और इंफोसिस के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
इस बीच, मार्केट एक्सपर्ट सुनील शाह ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “कल हमने देखा कि तेल की कीमतों में तेजी की वजह से सेंसेक्स 500 से ज्यादा अंक गिर गया था। आज यह ‘गैप अप’ के साथ खुला है और अभी जब मैं आपसे बात कर रहा हूं, तो ट्रेडिंग के पहले घंटे में ही सेंसेक्स 400 अंक ऊपर है। यह पॉज़िटिव है, लेकिन यह ज्यादातर एक ‘टेक्निकल बाउंस-बैक’ जैसा लग रहा है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 85-86 के लेवल के आसपास ही हैं। बेशक, यह उस समय की तुलना में बेहतर है जब कीमतें 112 डॉलर से भी ऊपर चली गई थीं। ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमतें 70 के नीचे आती हैं और पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो घरेलू बाजार को और सपोर्ट मिलेगा और बाजार फिर से रिकवरी कर सकता है।”
राष्ट्रीय समाचार
कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए 62,500 करोड़ रुपए को दी मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने बुधवार को मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) को 62,500 करोड़ रुपए के बजट के साथ मंजूरी दी। इसके जरिए केंद्र की कोशिश मोबाइल के घरेलू उत्पादन एवं निर्यात को बढ़ाना और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देश की स्थिति को मजबूत करना है।
यह स्कीम वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक यानी पांच साल तक चलेगी। इसका मकसद आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाना और डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) में निवेश के जरिए भारतीय मोबाइल फोन ब्रांड के विकास को बढ़ावा देना है।
एमपीएमस के तहत, मैन्युफैक्चरर्स को भारत में बने मोबाइल फोन की योग्य बिक्री पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक की अलग-अलग दरों पर इंसेंटिव सपोर्ट मिलेगा।
इसके अलावा, यह स्कीम मुख्य पार्ट्स और सब-असेंबली की घरेलू सोर्सिंग से जुड़े 1.5 प्रतिशत तक का अतिरिक्त इंसेंटिव भी देती है।
घरेलू ब्रांड्स को बढ़ावा देने के लिए, मैन्युफैक्चरर्स प्रोडक्ट डिजाइन और आरएंडडी के लिए योग्य बिक्री पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त इंसेंटिव पाने के हकदार होंगे।
कैबिनेट के अनुसार, इस स्कीम की अवधि के दौरान लगभग 39 लाख करोड़ रुपए का कुल मोबाइल फोन प्रोडक्शन होने की उम्मीद है, साथ ही देश से हैंडसेट के निर्यात में भी काफी बढ़ोतरी होगी।
एमपीएमएस से लगभग 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होने का भी अनुमान है, जिससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा।
कैबिनेट ने कहा कि यह पहल सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ प्रोग्राम की सफलता पर आधारित है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2014-15 के बाद से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सात गुना और निर्यात में 11 गुना बढ़ोतरी हुई है।
भारत अब वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर है और देश में इस्तेमाल होने वाले 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन घरेलू स्तर पर ही बनाए जाते हैं।
सरकार ने कहा कि 2025 में स्मार्टफोन भारत की सबसे बड़ी निर्यात कैटेगरी बनकर उभरी है, जिन्होंने डीजल फ्यूल और कटे हुए हीरे जैसे पारंपरिक निर्यात कैटेगरी को पीछे छोड़ दिया।
इसके अलावा, यह नई स्कीम ‘बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम’ की जगह लेगी, जिसका कार्यकाल 31 मार्च को खत्म हो गया था।
सरकार ने कहा कि पीएलआई स्कीम ने भारत को मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट के लिए एक ग्लोबल हब के तौर पर स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत-यूके सीईटीए के लागू होने से स्थानीय सेवाओं और सामानों की मांग बढ़ेगी: फिक्की

फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने बुधवार को भारत-यूके सीईटीए के लागू होने का स्वागत करते हुए कहा कि यह अहम समझौता भारतीय इंडस्ट्री के लिए नए मौके खोलेगा, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाएगा और ग्लोबल वैल्यू चेन के साथ देश की भागीदारी को मजबूत करेगा।
इस समझौते के लागू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए, फिक्की के सेक्रेटरी जनरल अनंत स्वरूप ने कहा कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) से सामान और सेवाओं, दोनों ही क्षेत्रों में कारोबार के लिए नए मौके बनेंगे।
स्वरूप ने कहा, “भारत-यूके सीईटीए के लागू होने पर फिक्की की ओर से पीएम मोदी को बहुत-बहुत बधाई। यह समझौता भारतीय इंडस्ट्री के लिए सामान और सेवाओं, दोनों में नए मौके खोलेगा। इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और टैलेंट मोबिलिटी में सहयोग से भारतीय इंडस्ट्री की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।”
उन्होंने इस समझौते को भारत की मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) यात्रा में एक अहम पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि इससे ग्लोबल वैल्यू चेन में देश की भागीदारी बढ़ेगी और भारत व यूके, दोनों जगह इनोवेशन-बेस्ड ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा।
फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि यह अहम समझौता भारत की लगातार आर्थिक वृद्धि, वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता और इंटरनेशनल मार्केट के साथ गहरे जुड़ाव की आकांक्षाओं को मजबूत करके ‘विकसित भारत’ के विजन को पूरा करने में मदद करेगा।
गोयनका ने कहा, “जैसे-जैसे भारत एक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उच्च-गुणवत्ता वाली आर्थिक साझेदारियां व्यापार के अवसरों को बढ़ाने, औद्योगिक क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक व्यापार और निवेश नेटवर्क में देश की भागीदारी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।”
इंडस्ट्री बॉडी के अनुसार, यह समझौता आर्थिक जुड़ाव के प्रति एक दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाता है और भारत की अधिक समृद्धि, नवाचार और आर्थिक परिवर्तन की यात्रा का समर्थन करेगा।
भारत-यूके एफटीए बुधवार से लागू हो गया, जिससे भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात के लिए बिना किसी शुल्क के बाजार तक पहुंच मिली और इसमें द्विपक्षीय व्यापार मूल्य का लगभग 100 प्रतिशत हिस्सा शामिल है।
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