राजनीति
सपा प्रमुख अखिलेश यादव का सवाल, आतंकी हमलों को रोकने के लिए क्या कर रही सरकार?
Akhilesh Yadav’s
लखनऊ, 28 जुलाई। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने सोमवार को पहलगाम आतंकी हमले, भारत की विदेश नीति और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए आतंकवाद, विदेश नीति की असफलता और शासन में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
चिंदबरम के बयान पर अखिलेश ने पत्रकारों से बातचीत में पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सरकार से जवाब मांगा और कहा कि इस हमले में शामिल आतंकियों की सटीक जानकारी जनता को नहीं दी गई।
दरअसल, चिदंबरम ने एक इंटरव्यू में पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सवाल उठाए कि क्या हमले में शामिल आतंकी वाकई पाकिस्तान से आए थे? क्या इस बात के सबूत हैं? उन्होंने यह भी कहा कि हमले में घरेलू आतंकी भी हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बार-बार आतंकी घटनाएं होना सरकार की नाकामी को दर्शाता है। अखिलेश ने पूछा, “पिछले हमलों में शहीद हुए जवानों के बारे में भी पूरी जानकारी क्यों नहीं दी गई? आतंकवाद को रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है?”
अखिलेश ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय सेना की बहादुरी की सराहना की और कहा, “हम सेना के साहस और पराक्रम को सलाम करते हैं। अगर उन्हें और मौका मिलता, तो शायद पीओके भी हमारे पास होता।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने कहा था कि पाकिस्तान के साथ सभी रिश्ते खत्म हो जाएंगे, लेकिन एशिया कप में दोनों देशों के बीच फिर से क्रिकेट मैच होने पर अखिलेश ने विदेश नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा, “हमारी विदेश नीति असफल रही है। भारत का सम्मान कई देश करते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर कोई हमारे साथ खड़ा नहीं होता।”
उन्होंने चीन के साथ व्यापार पर भी सवाल उठाए और कहा, “भारत चीन को इतना व्यापार दे रहा है, फिर भी हमारी सीमाओं पर खतरा बरकरार है। सरकार को 10 साल का कार्यक्रम बनाना चाहिए, जिसमें चीन का सामान भारत में न आए। जैसे नोटबंदी और कोविड में थाली बजाने जैसे अभियान चले, वैसे ही स्वदेशी को बढ़ावा देने का अभियान शुरू हो।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए अखिलेश ने कहा, “सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड कोई उपलब्धि नहीं है। अगर काम न करने का रिकॉर्ड बनता, तो योगी जी पहले नंबर पर होते।”
उन्होंने डबल इंजन की सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा, “लखनऊ से दिल्ली तक कोई सुरंग खोद रहा है। लेकिन, जनता को इसका पता नहीं। विकास के नाम पर सिर्फ दिखावा हो रहा है।”
अखिलेश ने जनता से जागरूक रहने और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने की अपील की। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान से खतरा है, लेकिन असली खतरा चीन से है। सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने चाहिए।”
पहलगाम हमले और आतंकवाद के मुद्दे पर अखिलेश ने कहा कि सरकार को पारदर्शिता दिखानी होगी। जनता को सच जानने का हक है। आतंकी हमलों को रोकने और जवानों की शहादत पर स्पष्ट जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने क्यों उठाया पाकिस्तान के ‘डीप स्टेट’ का मुद्दा? नफरत की फैक्ट्री चलाने का आरोप

संयुक्त राष्ट्र, 9 जून: पाकिस्तान अपनी डीप स्टेट सत्ता और संसाधनों पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए अपने नागरिकों के मन में भारत के प्रति नफरत के बीज बो रहा है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद एक संगठित नफरत की फैक्ट्री चला रहा है, जो धार्मिक शब्दावली का इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह कर रहा है। साथ ही सुरक्षा परिषद में आतंकवादी संगठनों का नाम लेकर भारत ने वैश्विक समुदाय पर दबाव बनाने की कोशिश की कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंड न अपनाए जाएं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सोमवार को भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा, ”अपनी असफलताओं के लिए पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है और दुनिया को गुमराह करने की यह कोशिश असफल साबित होगी।”
पी. हरीश ने पाकिस्तान द्वारा अपने देश के भीतर सक्रिय कुछ समूहों को “फितना अल हिंदुस्तान” कहे जाने की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक शब्दावली की आड़ में फैलाया जा रहा सरकारी दुष्प्रचार बताया।
‘फितना’ एक अरबी धार्मिक शब्द है, जिसका अर्थ ‘विद्रोह’ या ‘मूर्तिपूजा’ भी हो सकता है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा, पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान देश के राजनीतिक और आर्थिक संकटों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए भारत विरोधी माहौल तैयार करते हैं। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान की “डीप स्टेट” अपने नागरिकों को लगातार भारत के खिलाफ उकसाकर सत्ता पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।
उन्होंने ‘डीप स्टेट’ का उल्लेख पाकिस्तान की सेना की ओर इशारा करते हुए किया, जिसने पिछले साल संवैधानिक संशोधनों के जरिए राजनीति पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।
उन्होंने कहा, ”27वें संवैधानिक संशोधन के जरिए सेना द्वारा किया गया वास्तविक तख्तापलट इसका सबसे हालिया उदाहरण है।”
यह संशोधन नवंबर में किया गया था, जिसके बाद सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को लगभग कानून से ऊपर की स्थिति मिल गई और सरकार पर उनका नियंत्रण और मजबूत हो गया।
अफगानिस्तान पर सुरक्षा परिषद की चर्चा के दौरान हरिश ने पाकिस्तान द्वारा सुविधायुक्त आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
अफगानिस्तान पर आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ समन्वित वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। भारत ने कहा कि आईएसआईएल (इस्लामिक स्टेट), अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और इनके सहयोगी संगठनों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए।
लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए उस हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें एक पर्यटन स्थल पर 24 हिंदू और एक ईसाई की मौत हुई थी।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा-पार गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र सरकार के अहम कैबिनेट फैसले में पहले से वंचित किसानों के लिए कर्ज माफी को मंजूरी दी गई

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार कैबिनेट का फैसला राज्य सरकार की कैबिनेट मीटिंग आज (9 जून) मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई। इस कैबिनेट मीटिंग में अहम फैसले लिए गए। (महाराष्ट्र सरकार) कैबिनेट मीटिंग में किसानों के लिए एक अहम फैसला लिया गया है। जो किसान पिछली लोन माफी स्कीम से वंचित रह गए थे, उन्हें भी अब लोन माफी में शामिल कर लिया गया है। इसके लिए करीब 14,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं। 2017 और 2019 की लोन माफी में कई किसान शामिल नहीं थे। इन किसानों को लोन माफी का फायदा देने की बार-बार मांग हो रही थी। इसलिए, आज राज्य सरकार ने कैबिनेट मीटिंग में 2017 और 2019 की लोन माफी से वंचित रह गए 5 लाख से ज़्यादा किसानों के लिए एक अहम फैसला लिया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
पीएम मोदी के 12 साल के कार्यकाल में देश में क्या-क्या बदल गया, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गिनाईं उपलब्धियां

नई दिल्ली, 9 जून: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए मंगलवार को कहा कि विदेश मंत्रालय और भारत की विदेश नीति में पिछले 12 वर्षों में बदलाव आया है। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पहलों पर प्रकाश डाला।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक्स पर लिखा, “12 साल पहले नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। पिछले ‘सेवा के 12 साल’ में, विदेश मंत्रालय और भारत की विदेश नीति में बदलाव आया है। पासपोर्ट जारी करने और दस्तावेज के अटेस्टेशन को आम नागरिक के लिए एक आसान अनुभव बनाया गया है। विदेश में खुले दूतावासों और भारतीय समुदाय के लिए वेलफेयर फंड के ज्यादा इस्तेमाल के जरिए भारतीयों को पूरी मदद दी।”
उन्होंने कहा कि शिकायत सुलझाने और फीडबैक के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाए। मुश्किल हालात में लोगों को निकालने के जरिए असरदार तरीके से जवाब दिया। यूक्रेन, इजरायल, अफगानिस्तान और सूडान इसके कुछ उदाहरण हैं। भारतीयों को ग्लोबल वर्कप्लेस तक पहुंचने और ग्लोबल वर्कफोर्स का हिस्सा बनने में मदद की। अब तक 21 मोबिलिटी पार्टनरशिप की हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय व्यवसाय को विदेश में मार्केट एक्सेस दिलाने और एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद की। विकास परियोजनाओं के जरिए भारतीय प्रोडक्ट्स और सर्विसेज को नए मार्केट में एंट्री दिलाने में मदद की।
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, “विदेश में रहने वाले भारतीय स्टूडेंट्स के लिए कल्याणकारी उपाय शुरू किए। भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया और अन्य देशों में हमारी विरासत और परंपराओं के प्रति सम्मान और समझ को बढ़ावा दिया। विदेश में रहने और जाने वाले भारतीयों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 44 दूतावास और कॉन्सुलेट खोले। भारतीय डिप्लोमेसी देश के लिए 24/7 काम करती है। आज भारतीय ज्यादा विश्वास और गर्व के साथ विदेश यात्रा करते हैं।”
सोमवार को विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर का एक इंटरव्यू आने वाला है, जिसमें वह पीएम मोदी के नेतृत्व में विश्व कल्याण के 12 साल पर बात करेंगे। इस बातचीत में अंतरिक्ष अन्वेषण और ऊर्जा सुरक्षा से लेकर व्यापार, साइबर कैपेबिलिटी, राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति तक भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए बदलाव के बारे में गहरी चर्चा करेंगे।
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