व्यापार
सोना ने बनाया नया रिकॉर्ड, एमसीएक्स पर 52000 रुपये के करीब भाव
सोना ने पिछला सारा रिकॉर्ड तोड़ दिया है। वैश्विक बाजार में बुलियन में आई उछाल के बाद घरेलू वायदा बाजार में सोने का भाव सोमवार को नई फिर ऊंचाई पर चली गई। एमसीएक्स पर सोना 51,833 रुपये प्रति 10 ग्राम तक उछला और जल्द ही 52 हजारी बनने के करीब है। वहीं, वैश्विक बाजार में सोना 1944 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया जोकि एक नया रिकॉर्ड है। कमोडिटी बाजार विश्लेषक बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले को लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर बनी चिंता से निवेशकों का रुझान निवेश के सुरक्षित साधन की तरफ है, इसलिए महंगी धातु के दाम में उछाल आया है।
देश के सबसे बड़े वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अगस्त वायदा अनुबंध में पूर्वान्ह 10.40 बजे पिछले सत्र की क्लोजिंग से 735 रुपये यानी 1.44 फीसदी की तेजी के साथ 51,770 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार चल रहा था जबकि इससे पहले सोने का भाव 51,833 रुपये प्रति 10 ग्राम तक उछला जोकि अब तक का रिकॉर्ड स्तर है।
एमसीएक्स पर चांदी के के सितंबर अनुबंध में 3,357 रुपये यानी 5.48 फीसदी की तेजी के साथ 64,580 रुपये प्रति किलो पर कारोबार चल रहा था जबकि इससे पहले चांदी का भाव एमसीएक्स पर कारोबार के दौरान 64,849 रुपये प्रति किलो तक उछला।
अंतर्राष्ट्रीय वायदा बाजार कॉमेक्स पर सोने के अगस्त वायदा अनुबंध में सोमवार को पिछले सत्र से 31.35 डॉलर यानी 1.65 फीसदी की तेजी के साथ 1928.85 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार चल रहा था जबकि इससे पहले सोने का भाव 1937.60 डॉलर प्रति औंस तक उछला जोकि कॉमेक्स पर सोने के वायदा भाव का एक नया रिकॉर्ड है।
इससे पहले कॉमेक्स पर सोने का भाव छह सितंबर 2011 में 1911.60 डॉलर प्रति औंस तक उछला था।
वहीं, सोने का हाजिर भाव वैश्विक बाजार में 1944.57 डॉलर प्रति औंस तक उछला जोकि एक नया रिकॉर्ड है क्योंकि इससे पहले अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने के हाजिर भाव का रिकॉर्ड स्तर 1,921.17 डॉलर प्रति औंस था। इस प्रकार, कोरोना काल में सोने ने अब तक सारा रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
कॉमेक्स पर चांदी के सितंबर अनुबंध में पिछले सत्र से मुकाबले 1.5 डॉलर यानी 6.56 फीसदी की तेजी के साथ 24.35 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार चल रहा था जबकि इससे पहले चांदी का भाव कॉमेक्स पर कारोबार के दौरान 24.510 डॉलर प्रति औंस तक उछला।
एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसीडेंट अनुज गुप्ता ने बताया कि डॉलर में आई कमजोरी से सोने को सपोर्ट मिला है। दुनिया की छह प्रमुख मुद्रा के मुकाबले डॉलर की ताकत का सूचक डॉलर इंडेक्स 18 मई को 100.43 पर था जोकि फिसलकर 93.85 पर आ गया है। बीते सात सत्रों से डॉलर इंडेक्स में कमजोरी बनी हुई है।
केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने बताया कि कोरोना के गहराते प्रकोप के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर को लेकर चिंता बनी हुई है और शेयर बाजार में भी अस्थिरता का माहौल है जिससे निवेशकों का रुझान बहरहाल निवेश के सुरक्षित साधन की तरफ है यही कारण है कि महंगी धातुओं के दाम में लगातार तेजी का रुख बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस संक्रमण के मामलों में भारी इजाफा होना होने से बाजार में चिंता का माहौल है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, बुलियन को बहरहाल कोरोना के कहर और अमेरिका-चीन के बीच तकरार से पैदा हुए भूराजनीतिक तनाव से सपोर्ट मिल रहा है।
व्यापार
भारत समुद्री क्षेत्र में अपनी वैश्विक स्थिति को कर रहा मजबूत

नई दिल्ली, 29 नवंबर: पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भारत को अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ), लंदन की परिषद में कैटेगरी बी में दोबारा निर्वाचित किया गया है। इस कैटेगरी में अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में रुचि रखने वाले कुल 10 देशों को शामिल किया गया है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, 28 नवंबर को आईएमओ सभा के 34वें सेशन में हुए इलेक्शन में 169 वैलिड वोट्स में से 154 वोट मिले हैं, जो कि इस कैटेगरी में सबसे अधिक है।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस अवसर को भारत के मैरीटाम सेक्टर के लिए गर्व का पल बताया।
उन्होंने कहा, “भारत के मैरीटाम सेक्टर के लिए गर्व का क्षण! अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में सबसे अधिक रुचि रखने वाले देशों की कैटेगरी में भारत को सबसे अधिक मतों के साथ 2026-27 द्विवार्षिक अवधि के लिए आईएमओ परिषद में पुनः निर्वाचित किया गया है।”
उन्होंने आगे कहा, “यह शानदार जनादेश पीएम मोदी के सुरक्षित, संरक्षित और हरित समुद्री क्षेत्र के दृष्टिकोण में ग्लोबल कम्युनिटी के विश्वास की पुष्टि करता है।”
मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, “आईएमओ परिषद में तीन कैटेगरी में 40 निर्वाचित सदस्य होते हैं और यह सभा के सत्रों के बीच आईएमओ के कार्यकारी निकाय के रूप में कार्य करती है। सभा के दौरान, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कई देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और आईएमओ अधिकारियों के साथ आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की।”
भारत को मिले सबसे अधिक वोट ग्लोबल शिपिंग में भारत के नेतृत्व में ग्लोबल कम्युनिटी के दृढ़ विश्वास को दर्शाते हैं। यह पीएम मोदी के दृष्टिकोण के अंतर्गत भारत के समुद्री विकास एजेंडे की सफलता की भी पुष्टि करता है। यह परिणाम समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए भारत सरकार के निरंतर सुधारों और दूरदर्शी पहलों को और पुष्ट करता है।
यह उपलब्धि भारत समुद्री सप्ताह 2025 के सफल आयोजन के तुरंत बाद प्राप्त हुई है, जिसका उद्घाटन पीएम मोदी के द्वारा किया गया था और जिसमें 100 से अधिक देशों ने भाग लिया था।
व्यापार
भारतीय अर्थव्यवस्था की तूफानी रफ्तार, वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही

GDP
नई दिल्ली, 28 नवंबर : भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर अवधि) में 8.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर हासिल की है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की विकास दर 5.6 प्रतिशत से काफी अधिक है। यह जानकारी सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को दी गई।
इससे वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में विकास दर 8 प्रतिशत की हो गई है, जो कि वित्त वर्ष 25 की पहली छमाही में 6.1 प्रतिशत थी।
मंत्रालय ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर अवधि में देश की नॉमिनल जीडीपी में 8.7 प्रतिशत की दर से इजाफा हुआ है।
सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि रियल जीडीपी वृद्धि दर के आठ प्रतिशत से ऊपर निकलने की वजह द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन था।
वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में द्वितीयक क्षेत्र की वृद्धि दर 8.1 प्रतिशत और तृतीयक क्षेत्र की वृद्धि दर 9.2 प्रतिशत रही है।
द्वितीयक क्षेत्र में शामिल मैन्युफैक्चरिंग की वृद्धि दर 9.1 प्रतिशत और कंस्ट्रक्शन की वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही है।
तृतीयक क्षेत्र में फाइनेंशियल, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज में 10.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, कृषि और उससे जुड़े हुए सेक्टर की विकास दर 3.5 प्रतिशत रही है। वहीं, इलेक्ट्रिसिटी, गैस, वाटर सप्लाई और अन्य यूटिलिटी सर्विसेज सेक्टर की वृद्धि दर 4.4 प्रतिशत रही है।
वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) में 7.9 प्रतिशत की बढ़त हुई है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसमें 6.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) में 2.7 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 4.3 प्रतिशत बढ़ा था।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया कि वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में निर्यात 5.6 प्रतिशत बढ़ा है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 3 प्रतिशत बढ़ा था।
चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर अवधि में आयात में 12.8 प्रतिशत की बढ़त हुई है,जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में एक प्रतिशत की दर से बढ़ा था।
व्यापार
भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 2025 में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान : मूडीज

नई दिल्ली, 28 नवंबर : भारत की दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी होने से पहले रेटिंग एजेंसी मूडीज ने शुक्रवार को कहा कि 2025 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 7 प्रतिशत रह सकती है और 2026 में इसके 6.4 प्रतिशत से बढ़ने का अनुमान है।
भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी की वजह घरेलू मांग में वृद्धि और अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत होना है।
मूडीज रेटिंग की ओर से जारी नोट में कहा गया कि भारत आने वाले समय में उभरते हुए बाजारों और एशिया प्रशांत क्षेत्र में ग्रोथ को लीड करेगा। 2025 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत और 2026 में 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने कहा कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में 2025 में औसत वृद्धि दर 3.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है और 2026 में यह 3.4 प्रतिशत रह सकती है।
रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, उभरते हुए बाजार रीजन में जीडीपी ग्रोथ को आगे बढ़ाएंगे और इन बाजारों की औसत वृद्धि दर 5.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
सितंबर में, मूडीज रेटिंग्स ने भारत की लॉन्ग टर्म लोकल और फॉरेन करेंसी इश्यूअर रेटिंग और लोकल करेंसी सीनियर अनसिक्योर्ड रेटिंग को बीएए3 पर बरकरार रखा। वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने भारत के लिए अपने दृष्टिकोण को भी स्थिर बनाए रखा है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर उच्च टैरिफ लगाने से निकट भविष्य में भारत की आर्थिक वृद्धि पर सीमित नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
रेटिंग एजेंसी ने कहा, “टैरिफ मध्यम से लंबी अवधि में संभावित विकास को बाधित कर सकता है, क्योंकि इससे भारत की उच्च मूल्यवर्धित निर्यात विनिर्माण क्षेत्र विकसित करने की महत्वाकांक्षाओं में बाधा आ सकती है।”
नोट के अनुसार, भारत की ऋण क्षमता, राजकोषीय पक्ष की दीर्घकालिक कमजोरियों से संतुलित है, जो बनी रहेंगी। मजबूत जीडीपी वृद्धि और क्रमिक राजकोषीय समेकन से सरकार के उच्च ऋण भार में बहुत ही कम क्रमिक कमी आएगी और यह कमजोर ऋण वहन क्षमता में वास्तविक सुधार लाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा, खासकर जब निजी उपभोग को बढ़ावा देने के हालिया राजकोषीय उपायों ने सरकार के राजस्व आधार को कमजोर कर दिया है।
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