राजनीति
भारत में ओमिक्रॉन मामलों में तेज वृद्धि, कुल 4,033 केस सामने आए
भारत में बीते 24 घंटे कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के 410 नए मामले सामने आए, जिससे मामलों की कुल संख्या बढ़कर 4,033 हो गई है। इसी के साथ अब तक 1,552 लोग ठीक हुए हैं। ये जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार सुबह साझा किए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, ओमिक्रॉन वेरिएंट अब तक 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैल चुका है। महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन के बीते 24 घंटों में 207 मामले सामने आए, जिससे मामलों की संख्या बढ़कर 1,216 हो गई है। महाराष्ट्र ओमिक्रॉन से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है। जबकि 454 मरीजों को छुट्टी दे दी गई है।
हालांकि, राजस्थान ने कुल 529 ओमिक्रॉन के मामले आने के साथ ही उसने दिल्ली को पीछे छोड़ दिया, जिनमें से 305 को अब तक छुट्टी दे दी गई है। दिल्ली में ओमिक्रॉन के 513 मामले हैं। इनमें से 57 को अब तक अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है।
दिल्ली के बाद कर्नाटक में ओमिक्रॉन के 441 मामले है। केरल में अब तक 333 ओमिक्रॉन के मामले सामने आए हैं।
अन्य राज्यों में, गुजरात में अब तक 236 मामले सामने आए हैं, जबकि तमिलनाडु में 185 मामले दर्ज किए गए। तेलंगाना और हरियाणा में भी 123 ओमिक्रॉन के मामले सामने आए हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, हाल ही में चुनाव होने वाले उत्तर प्रदेश में ओमिक्रॉन के 113 मामले सामने आए हैं। हालांकि मामलों की संख्या ओडिशा में 74 और आंध्र प्रदेश में 28 हो गई है। पंजाब और पश्चिम बंगाल में 27-27 मामले हैं और गोवा में 19 ओमिक्रॉन के मामले हैं। मध्य प्रदेश में बीते 24 घंटों में ओमिक्रॉन का एक मामला सामने आया है, जिससे संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
हालांकि, असम में 9 और उत्तराखंड में 8 ओमिक्रॉन के मामले हैं। मेघालय में अब तक ओमिक्रॉन के 4 मामले हैं। चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में अब तक 3-3 मामले और पुडुचेरी में 2 मामले सामने आए हैं।
इस बीच, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख, मणिपुर और छत्तीसगढ़ में ओमिक्रॉन का एक-एक मामला सामने आया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ओमान में ईरान और खाड़ी देशों के बीच होने वाली बैठक टली, नई तारीख पर बनी सहमति

ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद अल बुसैदी ने रविवार को बताया कि ओमान के शहर सलालाह में सोमवार को होने वाली ईरान और खाड़ी देशों की बैठक को फिलहाल टाल दिया गया है।
अल बुसैदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सभी पक्षों के बीच सहमति बनाए रखने के हित में कल सलालाह में होने वाली क्षेत्रीय बैठक को स्थगित कर दिया गया है।”
उन्होंने कहा कि हम अपने क्षेत्र में स्थिरता और लंबे समय तक सहयोग को बढ़ावा देने वाले संवाद के लिए प्रतिबद्ध हैं।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए को दिए एक इंटरव्यू में ईरान के विदेश मंत्रालय में फारस की खाड़ी मामलों के महानिदेशक मोहम्मद अली बाक ने भी बैठक टलने की पुष्टि की।
उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रीय देशों के अनुरोध पर और ईरान तथा ओमान के संयुक्त फैसले के आधार पर इस बैठक को किसी दूसरी तारीख के लिए स्थगित किया गया है। अधिकारी ने कहा कि बैठक के लिए सही समय तय करने और जरूरी तैयारियों तथा समन्वय को सुनिश्चित करने के लिए ईरान लगातार ओमान के साथ बातचीत कर रहा है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने शुक्रवार को बताया था कि खाड़ी तटवर्ती देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक सोमवार को ओमान में होने वाली थी। इस बैठक में क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की जानी थी, जिनमें होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित समुद्री मार्ग तय करने को लेकर ईरान और ओमान के बीच चल रही बातचीत भी शामिल थी।
शनिवार को मीडिया से बात करते हुए बाघेई ने कहा था कि उम्मीद है इस बैठक में खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों के अलावा ईरान और इराक के विदेश मंत्री भी शामिल होंगे।
इस बीच, इराक ने रविवार को घोषणा की कि उसने पड़ोसी देश ईरान के साथ अपनी तीन प्रमुख सीमा चौकियों को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोलना शुरू कर दिया है। यह फैसला सुरक्षा बढ़ाने और सीमा पार आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए प्रशासनिक और तकनीकी समीक्षा के बाद लिया गया।
इराक के सिक्योरिटी मीडिया सेल (एसएमसी) ने एक बयान में कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के निर्देशों के तहत लिया गया है। इसके तहत शलामचेह, मंदाली और अल-शीब सीमा चौकियों की संगठनात्मक और तकनीकी व्यवस्था को बेहतर बनाया गया है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, अल-शीब और शलामचेह सीमा चौकियों से यात्रियों की आवाजाही रविवार सुबह 6 बजे से फिर शुरू हो गई है।
वहीं, शलामचेह पर व्यापारिक गतिविधियां सोमवार से शुरू होंगी, मंदाली पर मंगलवार से और अल-शीब पर गुरुवार से व्यापार दोबारा शुरू किया जाएगा।
एसएमसी ने यह भी स्पष्ट किया कि जुर्बातियाह और अल-मुंथिरिया सीमा चौकियों पर ईरान के साथ यात्रियों और व्यापार की आवाजाही पहले की तरह जारी है और ये चौकियां 24 घंटे काम कर रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच निवेश, व्यापार, औद्योगिक विकास और सहयोग बढ़ाने के अवसर: रामाफोसा

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच आर्थिक संबंधों के एक नए दौर की शुरुआत की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास निवेश, व्यापार, औद्योगिक विकास और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के बड़े अवसर हैं।
नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित दक्षिण अफ्रीका-भारत राउंडटेबल बैठक को संबोधित करते हुए रामाफोसा ने दोनों देशों के कारोबारियों से साझेदारी मजबूत करने और नीतिगत चर्चाओं को वास्तविक व्यावसायिक परियोजनाओं तथा दीर्घकालिक निवेश में बदलने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “हम अपने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के एक नए युग के लिए तैयार हैं।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी जरूरी है।
रामाफोसा ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, महत्वपूर्ण खनिज संसाधन, बुनियादी ढांचा, कृषि और डिजिटल नवाचार ऐसे क्षेत्र हैं जहां दोनों देश सहयोग को और आगे बढ़ा सकते हैं।
उनके अनुसार, दक्षिण अफ्रीका के खनिज संसाधन और भारत की विनिर्माण क्षमता मिलकर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी), बैटरियां और अन्य औद्योगिक उत्पादों के विकास के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने भारतीय कंपनियों को अपने देश की इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास परियोजनाओं में भाग लेने का भी निमंत्रण दिया।
उन्होंने बताया कि दक्षिण अफ्रीका ने 195 रणनीतिक परियोजनाओं की पहचान की है, जिनकी कुल कीमत 100 अरब डॉलर से अधिक है। इनमें परिवहन नेटवर्क, नवीकरणीय ऊर्जा, जल अवसंरचना और अस्पतालों से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। रामाफोसा ने डिजिटल अर्थव्यवस्था में बढ़ते सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने भारतीय बिजनेस सर्विसेज कंपनी ‘एटैन’ के केप टाउन स्थित नए केंद्र का जिक्र किया। यह कंपनी दक्षिण अफ्रीका में अपने कर्मचारियों की संख्या 1,500 से बढ़ाकर 2,000 से अधिक युवाओं तक पहुंचाने की योजना बना रही है।
उन्होंने विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, कौशल विकास संगठनों और व्यवसायों के बीच अधिक सहयोग की भी अपील की।
रामाफोसा ने कहा कि मजबूत संस्थागत साझेदारी से नई क्षमताएं विकसित होंगी और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने कहा, “हमारे देशों के बीच साझेदारी की ताकत इस बात से नहीं मापी जाती कि हम कितने समझौतों पर हस्ताक्षर करते हैं, बल्कि इस बात से मापी जाती है कि हम मिलकर कितना वास्तविक प्रभाव पैदा करते हैं।”
दक्षिण अफ्रीका-भारत राउंडटेबल बैठक ऐसे समय में आयोजित हुई जब दुनिया भर के नेता ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली में एकत्र हुए थे। यह बैठक व्यापार जगत और नीति निर्माताओं के लिए निवेश, व्यापार और औद्योगिक सहयोग के नए अवसर तलाशने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई।
राष्ट्रीय समाचार
ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाना और आसान पेमेंट सिस्टम जरूरी: ईईपीसी इंडिया

देश की इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने वाली मुख्य संस्था ईईपीसी इंडिया ने ब्रिक्स देशों के बीच गैर-शुल्क बाधाओं (नॉन-टैरिफ बैरियर्स) को खत्म करने और आसान पेमेंट सिस्टम बनाने की मांग की है। उसने कहा है कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को नई गति देने के लिए नॉन-टैरिफ बैरियर्स को समाप्त करना और स्थानीय मुद्राओं में आसान पेमेंट सिस्टम विकसित करना बेहद आवश्यक है।
ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि भारतीय निर्यातकों के सामने आने वाली लगभग 75 प्रतिशत समस्याओं का समाधान गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने और राष्ट्रीय मुद्राओं में तेज एवं प्रभावी भुगतान व्यवस्था लागू करने से हो सकता है।
उन्होंने कहा, “एक्सपोर्टर्स को होने वाली लगभग 75 प्रतिशत समस्याओं को नॉन-टैरिफ बाधाओं को हटाकर और अलग-अलग देशों की अपनी करेंसी में आसान और कुशल पेमेंट सिस्टम अपनाकर हल किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच नॉन-टैरिफ बाधाओं पर समझौता करना समय की जरूरत है।
उन्होंने आगे कहा, “हम ब्रिक्स देशों के बीच नॉन-टैरिफ बाधाओं पर एक आम समझौता कर सकते हैं और कुछ स्टैंडर्ड्स पर सहमत हो सकते हैं। हालांकि हम इस पर कुछ समय से चर्चा कर रहे हैं, लेकिन अब इसे लागू करने का समय आ गया है।”
उन्होंने बताया कि यह एक आम बात है कि ज्यादातर देशों में नॉन-टैरिफ उपायों से एक्सपोर्ट की लागत टैरिफ की तुलना में ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए व्यापार करने वाले देशों के बीच रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।
ब्रिक्स समूह वर्तमान में वैश्विक व्यापार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में यदि सदस्य देश गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने और भुगतान प्रणालियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में सफल होते हैं, तो समूह की वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी और बढ़ सकती है।
भारत के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इंजीनियरिंग उत्पाद देश के सबसे बड़े निर्यात क्षेत्रों में से एक हैं। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) में इंजीनियरिंग निर्यात की हिस्सेदारी लगभग 27 प्रतिशत है।
ब्रिक्स देशों में ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के प्रमुख बाजार हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि ईईपीसी इंडिया भारत का प्रमुख व्यापार एवं निवेश प्रोत्साहन संगठन है। यह वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रायोजित (स्पॉन्सर्ड) है और भारतीय इंजीनियरिंग क्षेत्र को सेवाएं प्रदान करता है। मंत्रालय द्वारा इसे भारत में आदर्श ईपीसी के रूप में मान्यता प्राप्त है।
ईपीसी इंडिया पिछले 70 से अधिक वर्षों में भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात का प्रतीक रहा है। इस दौरान भारत 1950 के दशक में मात्र 10 मिलियन डॉलर के इंजीनियरिंग निर्यातक देश से बढ़कर 122.43 अरब डॉलर (अप्रैल 2025-मार्च 2026) का देश बन गया।
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