अंतरराष्ट्रीय
सेंसेक्स 171 अंक फिसलकर बंद हुआ, 11,278 पर निफ्टी
कमजोर कारोबारी रुझानों के बीच बुधवार को सेंसेक्स 171 अंक फिसल कर 38,194 पर बंद हुआ और निफ्टी बीते सत्र से 39 अंक नीचे 11,278 पर ठहरा। विदेशी बाजारों से भी उत्साहवर्धक संकेत नहीं मिलने से घरेलू शेयर बाजार में निवेशकों का रुझान कमजोर रहा। सेंसेक्स पिछले सत्र से 171.43 अंकों यानी 0.45 फीसदी की गिरावट के साथ 38,193.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी बीते सत्र से 39.35 अंकों यानी 0.35 फीसदी की गिरावट के साथ 11,278 पर बंद हुआ।
बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों पर आधारित प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 376.79 अंकों की गिरावट के साथ 37,988.56 पर खुला और 37,935.26 तक लुढ़का, जबकि दिनभर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स का ऊपरी स्तर 38,252.67 रहा।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों पर आधारित प्रमुख संवेदी सूचकांक निफ्टी 98.75 अंकों की गिरावट के साथ 11,218.60 पर खुला और 11,185.15 तक लुढ़का, जबकि दिनभर के कारोबार के दौरान निफ्टी का ऊपरी स्तर 11,298.15 रहा।
बीएसई मिडकैप सूचकांक पिछले सत्र से 40.05 अंकों यानी 0.28 फीसदी की गिरावट के साथ 14,442.73 पर बंद हुआ और स्मॉलकैप सूचकांक 135.54 अंकों यानी 0.94 फीसदी की गिरावट के साथ 14,301.99 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 12 शेयरों में तेजी रही, जबकि 18 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए।
सेंसेक्स के सबसे ज्यादा तेजी वाले पांच शेयरों में टाटा स्टील (3.04 फीसदी), रिलायंस (2.57 फीसदी), सन फार्मा (1.40 फीसदी), भारती एयरटेल (1.33 फीसदी) और नेस्ले इंडिया (1.10 फीसदी) शामिल हैं।
जबकि सेंसेक्स के सबसे ज्यादा गिरावट वाले पांच शेयरों में एसबीआईएन (4.46 फीसदी), बजाज फिनसर्व (3.29 फीसदी), एक्सिस बैंक (2.94 फीसदी), ओएनजीसी (2.42 फीसदी) और आईटीसी (2.23 फीसदी) शामिल हैं।
बीएसई के 19 सेक्टरों में सात सेक्टरों में तेजी रही, जबकि 12 सेक्टरों के सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।
बीएसई के सबसे ज्यादा तेजी वाले वाले पांच सेक्टरों में ऊर्जा (1.78 फीसदी), धातु (1.26 फीसदी), हेल्थकेयर (1.09 फीसदी), टेलीकॉम (0.62 फीसदी) और आधारभूत सामग्री (0.43 फीसदी) शामिल रहे।
बीएसई के सबसे ज्यादा गिरावट वाले वाले पांच सेक्टरों के सूचकांकों में बैंक इंडेक्स (2.14 फीसदी), वित्त (1.74 फीसदी), रियल्टी (1.50 फीसदी), आईटी (0.89 फीसदी) और औद्योगिक (0.67 फीसदी) शामिल रहे।
व्यापार
सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे हफ्ते तेजी, डॉलर की कमजोरी से बढ़ी मांग

सोने की कीमतों में इस हफ्ते 1.65 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे लगातार तीसरे हफ्ते इसमें तेजी बनी रही। सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की बढ़ती मांग, अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और अमेरिका-ईरान के बीच चल रही सीजफायर बातचीत ने इस तेजी को समर्थन दिया।
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को एमसीएक्स पर सोने के जून फ्यूचर्स में 0.02 प्रतिशत की हल्की बढ़त रही, जबकि चांदी के मई फ्यूचर्स में 0.01 प्रतिशत की मामूली तेजी देखी गई।
शुक्रवार को सोने के फ्यूचर्स 1,52,690 रुपए प्रति 10 ग्राम पर और चांदी के फ्यूचर्स 2,43,300 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार करते नजर आए।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के आंकड़ों के अनुसार, 999 प्यूरिटी वाले सोने का भाव शुक्रवार को 1,50,327 रुपए प्रति 10 ग्राम रहा, जो सोमवार के 1,47,891 रुपए के स्तर से ज्यादा है। वहीं 999 प्यूरिटी वाली चांदी की कीमत शुक्रवार को 2,39,934 रुपए प्रति किलोग्राम रही, जो पिछले सोमवार के 2,31,028 रुपए से ज्यादा है।
विश्लेषकों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सोना 3 प्रतिशत साप्ताहिक बढ़त के साथ 4,787.40 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर बंद हुआ। हालांकि 5,000 डॉलर के स्तर के आसपास इसे मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जिसके पार जाने पर तेज तेजी देखने को मिल सकती है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद डॉलर पर दबाव आया है, जिससे निवेशकों ने ब्याज दरों के भविष्य को लेकर नए सिरे से आकलन शुरू किया है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई कम होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना भी मजबूत हुई है।
कमोडिटी बाजार इस हफ्ते संतुलित लेकिन सतर्क माहौल में रहा, जहां कीमतों में स्थिरता के संकेत दिखे, हालांकि वैश्विक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। हाल की अस्थिरता के बाद कीमती धातुओं में स्थिरता के शुरुआती संकेत भी देखने को मिले हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, डॉलर-रुपया (यूएसडी/आईएनआर) की चाल आगे भी कीमतों को प्रभावित करेगी। हाल में रुपए की मजबूती ने घरेलू बाजार में कीमतों को कुछ हद तक संतुलन दिया है।
अगर डॉलर फिर से मजबूत होता है या वैश्विक जोखिम बढ़ता है, तो इसका असर कीमतों पर पड़ सकता है।
एमसीएक्स पर सोने के लिए 1,48,000 से 1,46,000 रुपए का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 1,54,000 से 1,55,000 रुपए के बीच रेजिस्टेंस है।
वहीं, चांदी के लिए 2,30,000 से 2,25,000 रुपए का सपोर्ट जोन बना हुआ है, जबकि गहरे स्तर पर 2,05,000 से 2,00,000 रुपए का सपोर्ट माना जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय
होर्मुज संकट के बीच 9वें हिंद महासागर सम्मेलन में एस जयशंकर ने एकजुटता के साथ सहयोग पर दिया जोर

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर चार दिवसीय दौरे पर दो देशों की यात्रा कर रहे हैं। चार दिवसीय दौरे के पहले चरण में विदेश मंत्री मॉरीशस पहुंचे हुए हैं। मॉरीशस में डॉ जयशंकर 9वें हिंद महासागर सम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने महासागर की अहमियत पर जोर दिया।
होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया में तनाव के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, “इस मुश्किल समय में, मिलकर काम करने का विचार छोटी-छोटी बातों से आगे बढ़कर साझा जिम्मेदारी के बड़े नजरिए को अपनाने की मांग करता है। हिंद महासागर अपनी सभी उम्मीदों और चुनौतियों के साथ, हमें यह दिखाने का मौका देता है कि इस तरह के सहयोग से असल में क्या हासिल हो सकता है। साथ मिलकर काम करके, हम एक आजाद, स्थिर और खुशहाल हिंद महासागर क्षेत्र सुनिश्चित कर सकते हैं। भारत इस कोशिश के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।”
विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने कहा, “भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के तौर पर काम किया है। चाहे मानवीय संकट हो या प्राकृतिक आपदाएं, हम तेजी और भरोसे के साथ आगे बढ़े हैं। चाहे श्रीलंका, मेडागास्कर या मोजाम्बिक में आपदा राहत ऑपरेशन हों या मॉरीशस या श्रीलंका के तटों पर तेल रिसाव पर प्रतिक्रिया देना हो, हम इस क्षेत्र के लिए हमेशा मौजूद रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि इसका एक हालिया उदाहरण पिछले साल श्रीलंका में आए विनाशकारी तूफान दित्वाह के बाद ‘ऑपरेशन सागरबंधु’ है। हमने न केवल तुरंत और बड़े पैमाने पर एचएडीआर ऑपरेशन किए, बल्कि राहत और पुनर्निर्माण के लिए 450 मिलियन डॉलर का पैकेज भी दिया।
इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन का हेडक्वार्टर मॉरीशस में है। भारत सतत विकास, कैपेसिटी बिल्डिंग और क्षेत्रीय इंटीग्रेशन को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस दौरान डॉ. एस. जयशंकर ने समुद्र में आ रही चुनौतियों और होर्मुज स्ट्रेट का भी जिक्र किया और कहा, “हमने कई कॉन्फ्रेंस में अपने समुद्री इलाके में गैर-पारंपरिक चुनौतियों पर चर्चा की है। लेकिन सच यह है कि हम इससे बच नहीं सकते। आज एक बड़ा संघर्ष चल रहा है जिसका असर हिंद महासागर के सभी देशों पर बहुत ज्यादा पड़ रहा है। इसके अलावा, कुछ ग्रे जोन गतिविधियां भी हैं जो पारंपरिक और गैर-पारंपरिक के बीच फैली हुई हैं।”
उन्होंने कहा कि हम सबने देखा और महसूस किया कि पिछले कुछ सालों में जब लाल सागर में शिपिंग में रुकावट आई तो क्या हुआ। तो, कुल मिलाकर यह है कि चुनौतियों का दायरा और बड़ा और ज्यादा आसान हो गया है। और दुर्भाग्य से, यह और भी गंभीर हो गया है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
भारतीय विदेश मंत्री ने एकजुट होकर साझा कमिटमेंट और सहयोग पर जोर दिया और कहा, “हिंद महासागर का कोई भी अकेला देश, चाहे कितना भी काबिल क्यों न हो, अकेले समुद्री जगह को बचा और सुरक्षित नहीं रख सकता। मुश्किल चुनौतियों के लिए एक साझा कमिटमेंट की जरूरत होती है। ऐसा कमिटमेंट जो सहयोग और पारदर्शिता पर आधारित हो और सबसे बढ़कर, इंटरनेशनल कानून का सम्मान हो।”
उन्होंने कहा कि हमें हिंद महासागर को एक ग्लोबल कॉमन के तौर पर देखना चाहिए, जहां न सिर्फ फायदे साझा किए जाते हैं, बल्कि दूसरी जिम्मेदारियां भी शेयर की जाती हैं। हमारी कोशिशें मजबूत इंस्टीट्यूशनल नेटवर्क के जरिए आगे बढ़ाई जानी चाहिए। इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (आईएफसी-आईओआर) रियल-टाइम समुद्री जानकारी शेयर करने, पार्टनर देशों के बीच डोमेन अवेयरनेस और ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन को बढ़ाने में मदद करता है।
व्यापार
मध्यपूर्व में तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 918 अंक उछला

मुंबई, 10 अप्रैल : मध्यपूर्व में तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बड़ी तेजी के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 918.60 अंक या 1.20 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,550.25 और निफ्टी 275.50 अंक या 1.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,050.60 पर था।
बाजार में तेजी का नेतृत्व ऑटो स्टॉक्स ने किया। इस कारण सूचकांक में निफ्टी ऑटो 2.85 प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर था। निफ्टी रियल्टी 2.08 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 2.06 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 2.01 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.98 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.74 प्रतिशत और निफ्टी कंजप्शन 1.55 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ।
सूचकांकों में केवल निफ्टी आईटी ही 1.91 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 865.20 अंक या 1.52 प्रतिशत की तेजी के साथ 57,843.95 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 274.10 अंक या 1.65 प्रतिशत की मजबूती के साथ 16,840.10 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, एमएंडएम, इंडिगो, एसबीआई, एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, अदाणी पोर्ट्स, ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, एचयूएल, पावर ग्रिड, टाइटन, अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील, बीईएल और एनटीपीसी गेनर्स थे। सन फार्मा, इन्फोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक लूजर्स थे।
एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने कहा कि बाजार की शुरुआत गैपअप के साथ हुई थी। इसके बाद बाजार ने एक रेंज में कारोबार किया और 24,000 के ऊपर बंद होने में सफल रहा।
उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए रुकावट का स्तर 24,200 से लेकर 24,250 है। अगर यह स्तर पार होता है तो निफ्टी 24,400 और फिर 24,600 तक निकट अवधि में जा सकता है। गिरावट की स्थिति में सपोर्ट जोन 23,850 से लेकर 23,800 के बीच में है।
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