व्यापार
सेंसेक्स 1,068 अंक गिरकर बंद; एथ्रोंपिक के दावों से आईटी शेयरों में भारी बिकवाली
मुंबई, 24 फरवरी : भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार के कारोबारी सत्र में बड़ी बिकवाली हुई। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,068.74 अंक या 1.28 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 82,225.92 और निफ्टी 288.35 अंक या 1.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,424.65 पर बंद हुआ।
बाजार में गिरावट की वजह एआई कंपनी एथ्रोंपिक के दावों के कारण आईटी शेयरों में भारी बिकवाली को माना जा रहा है। दिन के दौरान निफ्टी आईटी 4.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ सूचकांकों में टॉप लूजर था।
एथ्रोंपिक ने कहा कि उसने अपने क्लाउडे कोट के लिए एक नया टूल पेश किया है, जो कोबोल कोड को मॉडर्न बनाने में मदद करेगा। इससे माना जा रहा है कि सॉफ्टवेयर सर्विसेज की मांग कम हो सकती है।
इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी 2.54 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 1.46 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 1.31 प्रतिशत, निफ्टी कंजप्शन 0.86 प्रतिशत और निफ्टी इन्फ्रा 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ।
निफ्टी मेटल 0.93 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 0.78 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 0.70 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.56 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में बिकवाली धीमी रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 189.30 अंक या 0.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,066.35 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 93.30 अंक या 0.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 16,958.65 पर था।
सेंसेक्स पैक में एनटीपीसी, एचयूएल, टाटा स्टील, पावर ग्रिड, टाइटन, एक्सिस बैंक और सन फार्मा टॉप गेनर्स थे। टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इटरनल, इन्फोसिस, टीसीएस, एलएंडटी, ट्रेंट, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और बीईएल टॉप लूजर्स थे।
एसबीआई सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरेवेटिव्स रिसर्च प्रमुख सुदीप शाह ने कहा कि निफ्टी की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई थी और सत्र के दौरान कमजोरी बढ़ी और इसने 25,328 का इंट्र-डे लो बनाया। दिन के अंत में यह 1.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,425 पर बंद हुआ।
उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए 25,370 से लेकर 25,350 का स्तर सपोर्ट जोन है। अगर निफ्टी इस स्तर को तोड़ता है तो यह 25,150 और 24,950 के स्तर तक भी जा सकता है। तेजी की स्थिति में 25,600-25,650 रुकावट का स्तर है।
व्यापार
मजबूत वैश्विक संकेतों से हरे निशान में खुला शेयर बाजार, आईटी स्टॉक्स में तेजी

मुंबई, 25 फरवरी : मजबूत वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ खुला। सुबह 9:20 पर सेंसेक्स 478 अंक या 0.58 प्रतिशत की तेजी के साथ 82,751और निफ्टी 147 अंक या 0.58 प्रतिशत की मजबूती के साथ 25,570 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी भरने का काम आईटी शेयर कर रहे थे। निफ्टी आईटी सूचकांकों में टॉप गेनर था। वहीं, निफ्टी मेटल, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑयलएंडगैस, निफ्टी पीएसई, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी एनर्जी के साथ करीब सभी सूचकांक हरे निशान में थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी बनी हुई है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 235 अंक या 0.43 प्रतिशत की तेजी के साथ 59,307 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 98 अंक या 0.59 प्रतिशत की मजबूती के साथ 17,058 पर था।
सेंसेक्स पैक में टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टीसीएस, पावर ग्रिड, इंडिगो, टाटा स्टील, एनटीपीसी, एलएंडटी, सन फार्मा, अदाणी पोर्ट्स, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बीईएल गेनर्स थे। एसबीआई, बजाज फाइनेंस और एशियन पेंट्स लूजर्स थे।
बाजार का रुझान भी सकारात्मक बना हुआ है। गिरने वाले शेयरों की अपेक्षा बढ़ने वाले शेयरों की संख्या अधिक है।
ज्यादातर वैश्विक बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। शंघाई, टोक्यो, हांगकांग, बैंकॉक, जकार्ता और सोल हरे निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को हरे निशान में बंद हुए थे।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, शेयर बाजार में तेजी की वजह एफआईआई की ओर से बिकवाली का कम होना है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने मंगलवार को केवल 102.53 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,161.22 करोड़ रुपए की खरीदारी की थी।
सोने और चांदी में तेजी देखने को मिल रही है। खबर लिखे जाने तक सोना 0.44 प्रतिशत की तेजी के साथ 5,199 डॉलर प्रति औंस और चांदी दो प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 89 डॉलर प्रति औंस पर थी।
अंतरराष्ट्रीय
राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर अमेरिका लगा सकता है नया टैरिफ, भारत के निर्यात पर पड़ सकता है असर

TRUMP
वॉशिंगटन, 24 फरवरी : अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ को लेकर दिए फैसले के बाद अमेरिका कुछ नए उत्पादों पर भारी टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की तैयारी कर रहा है। इन उत्पादों में बड़ी बैटरियां, कास्ट आयरन, प्लास्टिक पाइप, इंडस्ट्रियल केमिकल, पावर ग्रिड और टेलीकॉम उपकरण जैसे सेक्टर शामिल हो सकते हैं।
अगर अमेरिका नए “राष्ट्रीय सुरक्षा” टैरिफ लगाता है, तो उसका असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, खासकर मेटल, केमिकल, औद्योगिक पुर्जों के निर्यात पर, क्योंकि ये चीजें ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा हैं।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये टैरिफ 1962 के ट्रेड कानून के एक प्रावधान सेक्शन 232 के तहत लगाए जा सकते हैं। यह प्रावधान राष्ट्रपति को “राष्ट्रीय सुरक्षा” के नाम पर आयात पर शुल्क लगाने की अनुमति देता है।
फाइनेंशियल डेली ने बताया कि ये नए ग्लोबल 15 फीसदी टैरिफ से अलग होंगे, जिसे ट्रंप ने पांच महीने तक लागू रखने का प्रस्ताव दिया है।
सेक्शन 232 का इस्तेमाल पहले स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर, कार और ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ लगाने के लिए किया जा चुका है। अभी यह साफ नहीं है कि नई जांच कब शुरू होगी और टैरिफ कब लागू होंगे।
सेक्शन 232 के तहत लंबी जांच की जरूरत होती है, हालांकि एक बार टैरिफ लागू होने के बाद ड्यूटी को एकतरफा बदला जा सकता है।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, “अमेरिका की नेशनल और इकोनॉमिक सिक्योरिटी की सुरक्षा प्रेसिडेंट ट्रंप के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है और एडमिनिस्ट्रेशन इसे पूरा करने के लिए हर कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के ज्यादातर टैरिफ को 6-3 से खत्म करने का फैसला सुनाया। मीडिया के अनुसार, फैसले में सेक्शन 232 टैरिफ पर बात नहीं की गई है।
ट्रंप सरकार के तहत ट्रेड पॉलिसी पर अमेरिकी कोर्ट और ट्रेडिंग पार्टनर बार-बार जांच कर रहे हैं। स्टील और एल्युमीनियम पर उनके पहले के टैरिफ ने भारत समेत कई देशों से बदले की कार्रवाई शुरू कर दी थी।
राष्ट्रीय
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8 प्रतिशत से ज्यादा रहने की उम्मीद: एसबीआई रिपोर्ट

GDP
नई दिल्ली, 24 फरवरी : एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8 से 8.1 प्रतिशत के बीच रह सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था ने मजबूत वृद्धि की रफ्तार बनाए रखी है।
उच्च-आवृत्ति (हाई-फ्रीक्वेंसी) गतिविधि के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहीं।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने कहा, “ग्रामीण खपत मजबूत बनी हुई है, जिसे कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। राजकोषीय प्रोत्साहन (फिस्कल स्टिम्युलस) के समर्थन से शहरी खपत में भी पिछले त्योहारी सीजन से लगातार सुधार देखा जा रहा है।”
पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें वृद्धि का मुख्य आधार घरेलू मांग है।
भारत अपनी जीडीपी का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर रहा है। नई सीरीज 27 फरवरी को जारी की जाएगी।
यह संशोधन और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार वर्ष को 2024 में अपडेट करने का उद्देश्य मौजूदा आर्थिक संरचना को बेहतर तरीके से दर्शाना है, जिसमें डिजिटल कॉमर्स और सेवाओं की बढ़ती भूमिका शामिल है।
इस बदलाव में अनौपचारिक क्षेत्र के बेहतर आकलन और जीएसटी जैसे नए डेटा स्रोतों को शामिल किया जाएगा, जिससे भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “महत्वपूर्ण पद्धतिगत बदलाव और नई डेटा सीरीज जारी होने के कारण संशोधन की सीमा का अनुमान लगाना कठिन है।”
नई पद्धति में जीएसटी रिकॉर्ड, ई-वाहन (वाहन पंजीकरण) और प्राकृतिक गैस खपत जैसी अधिक विस्तृत जानकारियों को शामिल किया जाएगा।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी के दूसरे अग्रिम अनुमान और पिछले तीन वित्त वर्षों के जीडीपी आंकड़े, साथ ही 2022-23 आधार वर्ष के अनुसार तिमाही जीडीपी अनुमान 27 फरवरी को जारी किए जाएंगे।
ताजा आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की संभावित जीडीपी लगभग 7 प्रतिशत आंकी गई है और वित्त वर्ष 2027 में इसके 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच बढ़ने का अनुमान है।
इस बीच, वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं से घिरी हुई है। 2025 और 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव, ऊंचे कर्ज और डिजिटलीकरण व डीकार्बोनाइजेशन जैसे संरचनात्मक बदलावों के कारण अन्य क्षेत्रों में वृद्धि असमान बनी रह सकती है।
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