व्यापार
सेंसेक्स और निफ्टी एक प्रतिशत से अधिक बढ़े, आईटी और एफएमसीजी में तेजी
मुंबई, 23 मई। भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को तेजी देखने को मिली। दोपहर 2 बजे सेंसेक्स 859 अंक या 1.07 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,810 और निफ्टी 278 अंक या 1.13 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,887 पर था।
बाजार में तेजी का नेतृत्व आईटी और एफएमसीजी इंडेक्स की ओर से किया जा रहा है। खबर लिखे जाने तक निफ्टी एफएमसीजी 1.63 प्रतिशत से अधिक और निफ्टी आईटी 1.36 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था। इसके अलावा पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, मीडिया, एनर्जी और कमोडिटी इंडेक्स हरे निशान में थे। केवल फार्मा इंडेक्स में ही लाल निशान में कारोबार हो रहा था।
सेंसेक्स पैक में इटरनल (जोमैटो), आईटीसी, पावर ग्रिड, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, नेस्ले, अदाणी पोर्ट्स, इन्फोसिस, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, टाइटन, टीसीएस और एसबीआई टॉप गेनर्स थे। केवल एमएंडएम और सन फार्मा टॉप लूजर्स थे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा, “जब बाजार कमजोर होता है, तब भी फाइनेंशियल, टेलीकॉम, विमानन आदि जैसे घरेलू मांग आधारित क्षेत्र मजबूत होते हैं। यह इन क्षेत्रों में आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल और इंटरग्लोब एविएशन जैसे बड़े प्लेयर्स के शेयर की कीमतों में मजबूती से दिखाई देता है।”
एशियाई बाजारों में चीन, हांगकांग, बैंकॉक, सोल, जकार्ता और जापान हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।
अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र में डॉव जोन्स 1.35 अंक या 0.00 प्रतिशत की गिरावट के साथ 41,859.09 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 इंडेक्स 2.60 अंक या 0.04 प्रतिशत की गिरावट के साथ 5,842.01 पर बंद हुआ और नैस्डैक 53.09 अंक या 0.28 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,925.74 पर बंद हुआ।
संस्थागत मोर्चे पर, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुद्ध विक्रेता थे क्योंकि उन्होंने 22 मई को 5,045.36 करोड़ रुपए की इक्विटी बेची, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,715.00 करोड़ रुपए की इक्विटी खरीदी।
व्यापार
ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता पर उठे सवालों को तेल कंपनियों ने किया खारिज, कहा- जांच में नहीं मिली कोई गड़बड़ी

देश की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) ने शुक्रवार को ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर उठी चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि देश भर में की गई व्यापक जांच में ईंधन में नमी या क्लोराइड सम्मिश्रण का कोई प्रमाण नहीं मिला है। कंपनियों ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीएमएस) यानी ई20 की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के भीतर है और उपभोक्ताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
तेल कंपनियों ने एक साझा बयान में कहा कि हाल ही में कुछ मीडिया रिपोर्टों में ई20 पेट्रोल में नमी और क्लोराइड की मात्रा को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद पूरे आपूर्ति तंत्र (सप्लाई चेन) में अतिरिक्त और गहन परीक्षण अभियान चलाया गया। जांच के नतीजों में कहीं भी ईंधन के दूषित होने का प्रमाण नहीं मिला और सभी नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए।
कंपनियों ने कहा कि ईंधन की गुणवत्ता उनके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है। अगर किसी ऐसी समस्या की आशंका होती है जो वाहनों के प्रदर्शन या उपभोक्ताओं के भरोसे को प्रभावित कर सकती है, तो उसकी वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाती है और आवश्यक सुधारात्मक कदम तुरंत उठाए जाते हैं।
कंपनियों के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल के लिए क्लोराइड की मात्रा को लेकर कड़े मानक निर्धारित किए हैं। इनका पालन सुनिश्चित करने के लिए पूरी आपूर्ति शृंखला में उच्च स्तर की निगरानी व्यवस्था लागू की गई है।
कंपनियों ने आगे बताया कि क्लोराइड का परीक्षण देश भर में विभिन्न स्तरों पर किया जाता है, जिसमें रिफाइनरी, डिस्टिलरी, डिपो, टर्मिनल और पेट्रोल पंप शामिल हैं। इस बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईंधन की गुणवत्ता हर स्तर पर तय मानकों के अनुरूप बनी रहे।
इसके अलावा ईंधन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए सभी पेट्रोल पंपों पर प्रतिदिन 8 से 12 बार पानी की मिलावट और घनत्व की जांच की जाती है। कई स्थानों पर मोबाइल फ्यूल क्वालिटी टेस्टिंग लैब भी तैनात की गई हैं। साथ ही ईंधन के नमूनों की स्वतंत्र परीक्षण प्रयोगशालाओं में भी जांच कराई जाती है।
तेल कंपनियों ने कहा कि सप्लाई चेन के प्रत्येक स्तर पर लागू इस मजबूत और बहुस्तरीय परीक्षण प्रणाली ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत में ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप है।
तेल विपणन कंपनियों ने यह भी बताया कि देशभर की रिफाइनरियों से यादृच्छिक रूप से चुने गए 100 से अधिक अतिरिक्त पेट्रोल नमूनों की क्लोराइड जांच कराई गई। परीक्षण में सभी नमूनों में क्लोराइड का स्तर 1 पार्ट पर मिलियन (पीपीएम) या उससे कम पाया गया, जो निर्धारित सीमा के भीतर है।
कंपनियों के अनुसार, यह परिणाम दर्शाते हैं कि भारत की रिफाइनिंग और ईंधन वितरण प्रणाली में लागू गुणवत्ता नियंत्रण उपाय प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं और ई20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर सामने आई आशंकाओं का कोई आधार नहीं है।
तेल कंपनियों ने भरोसा जताया कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा इसकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर लगातार सख्त निगरानी रखी जा रही है।
व्यापार
जेके टायर का पहली तिमाही में मुनाफा 73 प्रतिशत घटकर 44 करोड़ रुपए रहा; शेयर करीब 6 प्रतिशत फिसले

जेके टायर एंड इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए। कंपनी के मुनाफे में 73 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसकी वजह पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच कच्चे माल की बढ़ी लागत बढ़ना है।
टायर निर्माता कंपनी ने वित्त वर्ष 27 की जून तिमाही में 44 करोड़ रुपए का समेकित शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में दर्ज 163 करोड़ रुपए के मुकाबले 73 प्रतिशत कम है।
कंपनी ने तिमाही के दौरान 11 करोड़ रुपए का एकमुश्त लाभ भी दर्ज किया, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 12.6 करोड़ रुपए था। वहीं, अन्य आय घटकर 9.4 करोड़ रुपए रह गई, जो एक साल पहले 21.6 करोड़ रुपए थी।
हालांकि, परिचालन से राजस्व 2 प्रतिशत की मामूली सालाना वृद्धि के साथ 3,869 करोड़ रुपए से बढ़कर 3,946 करोड़ रुपए हो गया। प्रमुख क्षेत्रों में मजबूत घरेलू मांग ने इस वृद्धि को समर्थन दिया।
तिमाही के दौरान परिचालन प्रदर्शन दबाव में रहा। ईबीआईटीडीए सालाना आधार पर 36 प्रतिशत घटकर 258 करोड़ रुपए रह गया, जो एक साल पहले 403 करोड़ रुपए था। वहीं, ईबीआईटीडीए मार्जिन भी तेजी से घटकर 6.5 प्रतिशत रह गया, जो एक साल पहले 10.4 प्रतिशत था।
नतीजों की घोषणा के बाद कंपनी के शेयरों पर बिकवाली का दबाव देखा गया और शेयर 5.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ 389.45 रुपए पर कारोबार कर रहे थे।
कंपनी के प्रदर्शन पर चेयरमैन और प्रबंध निदेशक रघुपति सिंघानिया ने कहा कि तिमाही के दौरान कंपनी के कारोबार की गति स्थिर बनी रही। इसे बाजार के विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत मांग, ग्राहकों पर केंद्रित पहलों, उत्पादों की गुणवत्ता और अनुशासित क्रियान्वयन से समर्थन मिला।
तिमाही के दौरान घरेलू बिक्री मात्रा में सालाना आधार पर 25 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। रिप्लेसमेंट टायर की बिक्री मात्रा 12 प्रतिशत बढ़ी, जबकि ओईएम बिक्री मात्रा में 42 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि हुई। कंपनी ने मूल्यवर्धित प्रीमियम उत्पादों का योगदान भी अधिक दर्ज किया।
हालांकि, सिंघानिया ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे माल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई, जिससे सकल मार्जिन और परिचालन मार्जिन पर काफी असर पड़ा। उन्होंने कहा कि टायर उद्योग के कच्चे माल का करीब 70 प्रतिशत पेट्रोलियम आधारित है, जिससे यह क्षेत्र कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है।
राष्ट्रीय समाचार
कमजोर वैश्विक संकेतों से गिरावट के साथ खुला शेयर बाजार, फाइनेंशियल स्टॉक्स पर दबाव

भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ खुला। सुबह 9:28 पर सेंसेक्स 267 अंक या 0.34 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,686 और निफ्टी 34 अंक या 0.14 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,603 पर था।
शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव फाइनेंशियल स्टॉक्स में देखा जा रहा है। सूचकांकों में निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज टॉप लूजर्स था। निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी फार्मा और निफ्टी इन्फ्रा भी हरे निशान में थे। दूसरी तरफ निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी ऑयल एंड गैस लाल निशान में थे।
सेंसेक्स पैक में टीसीएस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस,एमएंडएम, एनटीपीसी, बीईएल, सन फार्मा, एसबीआई, एलएंडटी, पावर ग्रिड, टाइटन और आईटीसी हरे निशान में थे। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, इटरनल और अल्ट्राटेक सीमेंट लाल निशान में थे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हो रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 122 अंक या 0.19 प्रतिशत की मजबूती के साथ 63,446 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 38 अंक या 0.19 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 19,839 पर था।
जानकारों ने कहा, “मार्केट में स्थिरता आ रही है और यह धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहा है। निकट भविष्य में यह ट्रेंड जारी रहने की संभावना है, जिससे आगे ब्रेकआउट आ सकता है। पहली के नतीजों से कुछ अहम बातें सामने आई हैं, जिन्हें निवेशकों को ध्यान में रखना चाहिए, जिसमें पहली बात, फाइनेंशियल, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और टेलीकॉम जैसे सेक्टर की अधिकतर कंपनियों ने आय और मुनाफे में दोहरे अंकों की ग्रोथ दर्ज की है। इससे उनके स्टॉक की कीमतों को मजबूती मिली है। दूसरा, आईटी सेक्टर को धीमी ग्रोथ और एआई के असर को लेकर चिंताओं का सामना करना पड़ा रहा है। तीसरा, मेटल्स और ऑयल जैसी कमोडिटीज के मामले में मिली-जुली स्थिति रही है।”
ज्यादातर एशियाई बाजारों में भी मिलाजुला कारोबार हो रहा था। टोक्यो, बैंकॉक और सोल लाल निशान में थे। शंघाई, हांगकांग और जकार्ता हरे निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को लाल निशान में बंद हुआ था, जिसमें डाओ जोन्स 0.85 प्रतिशत की कमजोरी के साथ और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ सपाट बंद हुआ।
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