Connect with us
Friday,05-June-2026
ताज़ा खबर

व्यापार

साप्ताहिक कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी करीब 1.5 प्रतिशत गिरे, वैश्विक तनाव से निवेशकों में बढ़ी सतर्कता

Published

on

SHARE MARKET

मुंबई, 28 फरवरी : वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार इस हफ्ते कमजोरी के साथ बंद हुआ।

वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता के चलते निवेशक सतर्क रहे। हालांकि, भारत के ताजा जीडीपी आंकड़ों में मजबूत वृद्धि दिखी, फिर भी बाजार की धारणा कमजोर रही।

पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई। व्यापक बाजार भी दबाव में रहे, जहां निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1 प्रतिशत से अधिक टूटे।

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को सेंसेक्स 961.42 अंक यानी 1.17 प्रतिशत गिरकर 81,287.19 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 317.90 अंक यानी 1.25 प्रतिशत गिरकर 25,178.65 पर बंद हुआ और 25,200 के स्तर से नीचे फिसल गया।

ज्यादातर सेक्टरों में बिकवाली का दबाव रहा, जबकि आईटी और मीडिया शेयर हरे निशान में बंद होने में सफल रहे।

बाजार में कमजोरी का मुख्य कारण नकारात्मक वैश्विक संकेत और जारी भू-राजनीतिक चिंताएं रहीं, जिससे निवेशकों की भागीदारी सीमित रही।

सेक्टरवार बात करें तो ऑटो, बैंकिंग, एफएमसीजी, मेटल और रियल्टी शेयरों में 1 से 2 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। वहीं आईटी, मीडिया और कंज्यूमर ड्यूरेबल शेयरों ने कुछ मजबूती दिखाई।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी अपने हालिया ट्रेडिंग रेंज से नीचे निकल गया है, जो निकट अवधि में करेक्शन के संकेत देता है।

एक विश्लेषक ने कहा, “अब 25,400 का स्तर इमीडिएट रेजिस्टेंस के रूप में काम कर सकता है, जबकि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।”

विशेषज्ञ के अनुसार, बैंक निफ्टी में भी मुनाफावसूली देखी गई और इसमें नकारात्मक पैटर्न बना है। 60,000-60,200 का स्तर तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि अल्पावधि में बैंक निफ्टी 60,000 से 61,750 के दायरे में कारोबार कर सकता है। इस रेंज से बाहर निकलने पर अगली दिशा तय होगी।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के वेल्थ मैनेजमेंट (रिसर्च) प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, आने वाले सत्रों में भारतीय बाजार सतर्क रुख के साथ सीमित दायरे में रह सकते हैं।

उन्होंने कहा कि घरेलू आर्थिक मजबूती और कुछ सेक्टरों की ताकत से बाजार को सहारा मिल सकता है, लेकिन संस्थागत निवेश प्रवाह और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे।

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत में ठोस नतीजा नहीं निकलने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है।

हालांकि दोनों देशों ने अगले सप्ताह फिर बातचीत करने के संकेत दिए हैं, लेकिन अमेरिका के अगले कदम और उसके ऊर्जा बाजार व क्षेत्रीय स्थिरता पर असर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे बाजारों में सतर्कता का माहौल है।

व्यापार

मारुति सुजुकी इंडिया बायोगैस प्रोजेक्ट्स में 150 करोड़ रुपए का निवेश करेगी, ग्रीन एनर्जी को मिलेगा बढ़ावा

Published

on

नई दिल्ली, 5 जून: देश की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने शुक्रवार को दो बड़े बायोगैस प्रोजेक्ट्स में कुल 150 करोड़ रुपए निवेश करने का ऐलान किया। इसके जरिए कंपनी की कोशिश देश में सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग और क्लीन एनर्जी इकोसिस्टम अपनाने को बढ़ावा देना है।

कंपनी ने कहा कि वह हरियाणा के खरखोदा स्थित अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में 10 टन प्रति दिन की क्षमता वाला एक नया बायोगैस प्लांट स्थापित करेगी।

इस प्रोजेक्ट के चालू वित्त वर्ष में शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा, मारुति सुजुकी ने मानेसर स्थित अपने मौजूदा बायोगैस प्लांट की क्षमता को 0.2 टन प्रति दिन से बढ़ाकर 0.7 टन प्रति दिन कर दिया है।

कार निर्माता कंपनी ने कहा कि ये पहल सरकार के ‘बेस्ट से वेल्थ’ मिशन के अनुरूप हैं और इनका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और अपने सभी परिचालनों में रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस को बढ़ावा देना है।

कंपनी के अनुसार, आगामी खरखोदा बायोगैस प्लांट पूरी क्षमता से चलने पर प्रति वर्ष लगभग 9,490 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा।

इस प्लांट से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की कुल गैस आवश्यकता का लगभग 20 प्रतिशत पूरा होने की उम्मीद है।

इन पहलों पर टिप्पणी करते हुए, प्रबंध निदेशक और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने कहा कि कंपनी जीवाश्म ईंधन की खपत और आयातित तेल पर निर्भरता को कम करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब दुनिया ऊर्जा के बढ़ते अनिश्चित परिदृश्य का सामना कर रही है, ऐसी पहल का महत्व और भी बढ़ जाता है।”

ताकेउची ने आगे कहा, “भारत के प्रधानमंत्री द्वारा जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के आह्वान के मद्देनजर, हमारे द्वारा बायोगैस प्रोजेक्ट को चालू करने का यह एक सही समय है। यह हमें कई अन्य चल रहे प्रयासों के साथ-साथ वर्तमान राष्ट्रीय प्राथमिकता में एक छोटा लेकिन सार्थक योगदान देने में सक्षम बनाता है।”

इस अतिरिक्त मानेसर में विस्तारित बायोगैस प्लांट से प्रति वर्ष लगभग 3.6 लाख मानक घन मीटर बायोगैस उत्पन्न होने का अनुमान है।

कंपनी का अनुमान है कि इस परियोजना से प्रति वर्ष लगभग 664 टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी।

मानेसर प्लांट में खाद्य अपशिष्ट, नेपियर घास और धान के भूसे का उपयोग कच्चे माल के रूप में किया जाता है और पशुओं के गोबर का उपयोग करके उत्पादन को और बढ़ाया जा सकता है।

Continue Reading

अंतरराष्ट्रीय

अमेरिका-ईरान तनाव का समाधान युद्ध से नहीं, सिर्फ कूटनीति से संभव: डॉ. मोहम्मद फतहली

Published

on

नई दिल्ली, 5 जून: भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहली ने मिडिया को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिका-ईरान तनाव और बार-बार टूटते संघर्षविराम पर चर्चा की। उन्होंने क्षेत्रीय हालात, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और शांति को लेकर ईरान का पक्ष रखते हुए कहा कि उनका देश शांति, संवाद और कूटनीति में विश्वास रखता है।

अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ते तनाव तथा कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर डॉ. फतहली ने कहा, “हम पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि हम युद्ध और शांति, दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार हैं। हम बातचीत और संवाद का स्वागत करते हैं। हमारा मानना है कि किसी भी विवाद या मतभेद का समाधान कूटनीति के माध्यम से निकाला जा सकता है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने कभी युद्ध या तनाव की शुरुआत नहीं की है और हमेशा शांतिपूर्ण तथा राजनीतिक समाधान पर जोर दिया है।”

उन्होंने दावा किया कि आठ अप्रैल को घोषित सीजफायर का हाल के दिनों में कई बार अमेरिकी सेनाओं की ओर से उल्लंघन किया गया। उनके अनुसार, इसी कारण ईरानी सेना ने आत्मरक्षा के अपने वैध अधिकार का उपयोग करते हुए जवाबी कार्रवाई की।

डॉ. फतहली ने कहा कि हम संघर्षविराम के प्रति अब भी प्रतिबद्ध हैं और बातचीत का रास्ता चुनते हैं, लेकिन हमारे देश की सुरक्षा और संप्रभुता हमारे लिए ‘रेड लाइन’ है। यदि हमारे देश पर कोई हमला या आक्रामकता होती है, तो उसका जवाब उसी स्तर पर और जरूरत पड़ने पर उससे भी अधिक कड़े तरीके से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कूटनीति के लिए अभी भी अवसर मौजूद हैं और समझौता संभव है, बशर्ते दूसरा पक्ष भी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे तथा किसी प्रकार की उकसावे वाली कार्रवाई या संघर्षविराम उल्लंघन से बचे।

सवाल: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में हाल ही में पारित उस प्रस्ताव को आप कैसे देखते हैं, जिसमें ईरान संघर्ष में राष्ट्रपति ट्रंप के अधिकारों को सीमित करने की बात कही गई है? क्या यह वॉशिंगटन में राजनीतिक विभाजन का संकेत है?

जवाब: यह सवाल कि क्या यह प्रस्ताव अमेरिका के भीतर किसी असहमति या राजनीतिक विभाजन को दर्शाता है, इसका जवाब अमेरिकी नेताओं और विश्लेषकों को देना चाहिए। हम अमेरिका के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करते।

हमारे लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि जो भी कदम तनाव कम करने, संघर्ष को बढ़ने से रोकने और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है, वह सकारात्मक और ध्यान देने योग्य है। इस दृष्टिकोण से हम इसे तनाव बढ़ने से रोकने और युद्ध दोबारा शुरू होने की आशंका को कम करने की दिशा में एक कदम मानते हैं।

ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा है और न ही वह युद्ध चाहता है। हम हमेशा कहते आए हैं कि मौजूदा विवादों का समाधान धमकी या बल प्रयोग से नहीं, बल्कि बातचीत, आपसी सम्मान और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के पालन से होना चाहिए। हर देश में विदेश नीति को लेकर अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है, अमेरिका में भी ऐसा है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि जो लोग कूटनीति, संयम और शांतिपूर्ण समाधान की बात करते हैं, उनकी भूमिका ज्यादा प्रभावी होनी चाहिए ताकि संकट न बढ़े। हम अब भी मानते हैं कि मौजूदा समस्याओं का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर और रचनात्मक संवाद से ही निकलेगा।

सवाल: कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमले के आरोपों पर ईरान की क्या प्रतिक्रिया है?

जवाब: कुवैत और बहरीन की तरफ से जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी नियमों और अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांत का खुला उल्लंघन हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 3314 के अनुसार, इन्हें ईरान के खिलाफ ‘आक्रामक कार्रवाई’ माना जाता है। इस प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई देश अपनी जमीन, समुद्री या हवाई क्षेत्र या वहां मौजूद सुविधाओं को किसी आक्रामक पक्ष को ईरान के खिलाफ हमले या सैन्य कार्रवाई के लिए इस्तेमाल करने देता है, तो वह भी आक्रामकता में शामिल माना जाता है।

हम अपने देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के अपने अधिकार के तहत हर जरूरी कदम उठाएंगे, जिसमें हमले की जगह और स्रोत को निशाना बनाना भी शामिल है। हालांकि हमारे सैन्य विशेषज्ञों की जांच और आकलन बताता है कि कुवैत एयरपोर्ट की तरफ कोई ईरानी मिसाइल नहीं दागी गई। एयरपोर्ट को जो नुकसान हुआ, वह संभवतः अमेरिका में बने ‘पैट्रियट’ डिफेंस सिस्टम की खराबी की वजह से हुआ, जिनकी इंटरसेप्टर मिसाइलें लक्ष्य को रोकने में असफल रहीं और टर्मिनल पर गिर गईं।

इसके अलावा, कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरानी ड्रोन हमलों और उनसे जुड़े प्रभावों के दावे जो किए जा रहे हैं, वे रात के समय हुए बताए जाते हैं। लेकिन जिन तस्वीरों और वीडियो को सबूत के तौर पर दिखाया जा रहा है, वे साफ तौर पर दिन के उजाले में लिए गए लगते हैं। इससे साफ होता है कि ये वीडियो असली घटनाओं से मेल नहीं खाते और बनावटी हैं। हमारा मकसद नागरिकों को नुकसान पहुंचाना नहीं है, लेकिन इस पूरी स्थिति के परिणामों की जिम्मेदारी अमेरिकी-जायोनिस्ट पक्ष और उनके सहयोगियों पर है, जो अपने इलाके और सुविधाएं उनके इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराते हैं।

सवाल: लेबनान और इजरायल के बीच संघर्ष का लेबनान की संप्रभुता और आंतरिक स्थिरता पर क्या असर पड़ता है?

जवाब: हमारी राय में, इजरायली शासन जो लेबनान में कर रहा है, वह साफ तौर पर लेबनान की राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन है और युद्ध अपराधों की श्रेणी में आता है। पिछले कई दशकों से इस शासन का रिकॉर्ड कब्जे, सैन्य हमलों, हत्याओं और आम नागरिकों की हत्या जैसी घटनाओं से भरा रहा है। हमारा मानना है कि यह शासन पश्चिम एशिया में अस्थिरता और असुरक्षा का मुख्य कारण है। गाजा में जो घटनाएं हुईं, उन्हें कोई नहीं भूल सकता, जहां 70,000 से ज्यादा निर्दोष लोग मारे गए। इनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे। दस लाख से ज्यादा लोग बेघर हुए और गाजा शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो गया।

आज भी यह शासन अलग-अलग बहानों के नाम पर लेबनान पर हमले जारी रखे हुए है, जिससे सिर्फ लेबनान ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। ये कदम अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और देशों की संप्रभुता के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ हैं। हम हमेशा से इस बात पर जोर देते आए हैं कि लेबनान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए। हमारा मानना है कि लेबनान की सुरक्षा वहां के लोगों और सरकार को खुद सुनिश्चित करनी चाहिए, और किसी भी देश को यह अधिकार नहीं है कि वह बलपूर्वक दूसरे देश पर अपना फैसला थोपे।

हमने यह भी कहा है कि लेबनान के खिलाफ चल रहे युद्ध को खत्म करना, क्षेत्र में शांति स्थापित करने के किसी भी समझौते का जरूरी हिस्सा होना चाहिए। हम किसी भी हाल में नागरिकों और निर्दोष लोगों की हत्या के खिलाफ हैं, चाहे उनका धर्म या राष्ट्रीयता कुछ भी हो। हमारा मानना है कि स्थायी शांति तभी संभव है जब हिंसा और अपराधों को रोका जाए।

सवाल: मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के समय में ईरान अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शांति और स्थिरता के बारे में क्या संदेश देना चाहता है?

जवाब: ईरान एक ऐसा देश है, जिसकी सभ्यता सात हजार साल से भी ज्यादा पुरानी है। इतिहास में यह हमेशा से देशों के बीच शांति, साथ रहने और दोस्ती का संदेश देने वाला रहा है। हमारी ऐतिहासिक पहचान और संस्कृति दूसरे देशों के साथ बातचीत और सहयोग पर आधारित रही है। इतिहास यह दिखाता है कि पिछले तीन सौ वर्षों में ईरान ने किसी भी युद्ध की शुरुआत नहीं की है और हमेशा विवादों को सुलझाने के शांतिपूर्ण तरीकों का समर्थन किया है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सोच हमेशा बातचीत, कूटनीति और आपसी सम्मान पर आधारित रही है।

आज जब दुनिया अनेक चुनौतियों और अनिश्चितताओं का सामना कर रही है, तब ईरान का संदेश अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए स्पष्ट है। टिकाऊ शांति, स्थिरता और सुरक्षा तभी संभव है, जब देशों के अधिकारों का सम्मान किया जाए, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन हो और समानता के आधार पर खुला तथा सकारात्मक संवाद स्थापित किया जाए।

हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिका एक मजबूत और स्वतंत्र ईरान की हकीकत को स्वीकार करेगा, जिसकी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका है, और ईरानी लोगों के वैध अधिकारों को भी मान्यता देगा। ईरान हमेशा से आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर बातचीत और सहयोग के लिए तैयार रहा है। हमारा मानना है कि सभी देशों के लिए सुरक्षित और स्थिर भविष्य का निर्माण केवल कूटनीति और आपसी समझ के माध्यम से ही संभव है।

Continue Reading

राष्ट्रीय

सीएम योगी का जन्मदिन : अमरोहा में मुस्लिम समाज के लोगों ने दी शुभकामनाएं, दिल्ली के कालकाजी मंदिर में पूजा

Published

on

नई दिल्ली/अमरोहा, 5 जून: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जन्मदिन के अवसर पर उत्तर प्रदेश और दिल्ली में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अमरोहा में मुस्लिम समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की दुआ की, जबकि दिल्ली के कालकाजी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना किया गया।

अमरोहा में आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिम समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए विशेष दुआएं की। इस दौरान प्रदेश में कानून व्यवस्था और विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए उनके कार्यकाल की सराहना भी की गई। लोगों ने कहा कि कानून व्यवस्था में सुधार और विकास योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंच रहा है, जिससे प्रदेश नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम में मौजूद समाजसेवी बब्बू मंसूरी ने कहा कि मुख्यमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और प्रदेश की निरंतर प्रगति के लिए दुआ की गई है। साथ ही देश में भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और शांति बनाए रखने की भी कामना की गई।

कार्यक्रम में शामिल लोगों ने मुख्यमंत्री के जन्मदिन को जनसेवा से जुड़े व्यक्ति के सम्मान का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक वातावरण और विभिन्न समुदायों के बीच सौहार्द बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वहीं राजधानी दिल्ली स्थित कालकाजी मंदिर में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए।

कालकाजी पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्र नाथ अवधूत ने बताया कि मुख्यमंत्री के 55वें जन्मदिवस के अवसर पर उनके स्वास्थ्य, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना करते हुए विशेष पूजा की गई। इस दौरान 51 किलो लड्डुओं का भोग भी लगाया गया, जिसे बाद में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया गया।

दोनों स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में लोगों ने मुख्यमंत्री के बेहतर स्वास्थ्य, लंबी आयु और देश-प्रदेश के विकास में उनकी निरंतर भूमिका की कामना की। साथ ही राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सौहार्द और देश की उन्नति के लिए भी प्रार्थनाएं की गईं।

Continue Reading
Advertisement
व्यापार1 hour ago

मारुति सुजुकी इंडिया बायोगैस प्रोजेक्ट्स में 150 करोड़ रुपए का निवेश करेगी, ग्रीन एनर्जी को मिलेगा बढ़ावा

अंतरराष्ट्रीय2 hours ago

अमेरिका-ईरान तनाव का समाधान युद्ध से नहीं, सिर्फ कूटनीति से संभव: डॉ. मोहम्मद फतहली

राष्ट्रीय3 hours ago

सीएम योगी का जन्मदिन : अमरोहा में मुस्लिम समाज के लोगों ने दी शुभकामनाएं, दिल्ली के कालकाजी मंदिर में पूजा

राष्ट्रीय4 hours ago

आरबीआई ने एनआरआई और ओसीआई के लिए बढ़ाई इक्विटी निवेश सीमा

महाराष्ट्र20 hours ago

मुंबई ED ने सलीम दोआला पर कार्रवाई करते हुए 1.3 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी फ्रीज की

महाराष्ट्र21 hours ago

महाराष्ट्र: नांदेड़ में एटीएस का ऑपरेशन, शहजाद भट्टी के समर्थकों से पूछताछ, परभणी से भी युवकों को हिरासत में लिया गया

राष्ट्रीय22 hours ago

आंधी-तूफान के बाद ग्रेटर नोएडा में जाम, विकास प्राधिकरण का विशाल बोर्ड गिरा (लीड -1)

महाराष्ट्र24 hours ago

यात्रियों का सामान न मिलने से मुंबई एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी, हज कमेटी की लापरवाही का नतीजा, एयरपोर्ट पर यात्रियों को सामान भेजने का आश्वासन

अंतरराष्ट्रीय1 day ago

इजरायल और लेबनान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में युद्धविराम पर बनी सहमति

अंतरराष्ट्रीय1 day ago

ट्रंप का बड़ा दावा-सप्ताह के अंत तक हो सकता है ईरान से समझौता, परमाणु सामग्री भी होगी नष्ट

राजनीति2 days ago

मालवीय नगर अग्निकांड: पीएम मोदी ने जताया शोक, मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपए मुआवजे की घोषणा

अपराध1 week ago

अग्रीपारा के हाई-प्रोफाइल घर में बड़े पैमाने पर एमडी ड्रग्स रैकेट का भंडाफोड़, आरोपियों की जांच, कथित बांग्लादेशी पर भी शक, 51 करोड़ रुपये की एमडी जब्त

महाराष्ट्र4 days ago

भाजपा सरकार मुसलमानों और विपक्ष को निशाना बना रही है, कानून से सज़ा देने के बजाय बुलडोज़र और एनकाउंटर चला रही है: अबू आसिम आज़मी

अंतरराष्ट्रीय4 days ago

अंतहीन प्रक्र‍िया की ओर बढ़ रहा ईरान-अमेरिका समझौता, दोनों देश नई शर्तों के साथ कर रहे संशोधन की तैयारी

व्यापार3 days ago

सोने की चमक बढ़ी, चांदी फिर से 2.65 लाख रुपए के पार

महाराष्ट्र3 weeks ago

हज कमेटी की लापरवाही से हज यात्रियों को परेशानी, 10,000 रुपये की अतिरिक्त वसूली, सीओ हज कमेटी ने आज़मी को ज़रूरी कार्रवाई का भरोसा दिया

अंतरराष्ट्रीय1 day ago

ट्रंप का बड़ा दावा-सप्ताह के अंत तक हो सकता है ईरान से समझौता, परमाणु सामग्री भी होगी नष्ट

अपराध1 day ago

मुंबई अपराध: कांदिवली के धनुरकरवाड़ी स्टेशन पर मेट्रो लिफ्ट में 17 वर्षीय लड़की से छेड़छाड़ करने वाला व्यक्ति पश्चिम बंगाल जा रही एक्सप्रेस ट्रेन से गिरफ्तार।

अंतरराष्ट्रीय1 day ago

इजरायल और लेबनान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता में युद्धविराम पर बनी सहमति

व्यापार1 day ago

डॉलर में कमजोरी और भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोने-चांदी की कीमतों में तेजी

रुझान