अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका-ईरान तनाव का समाधान युद्ध से नहीं, सिर्फ कूटनीति से संभव: डॉ. मोहम्मद फतहली
नई दिल्ली, 5 जून: भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहली ने मिडिया को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिका-ईरान तनाव और बार-बार टूटते संघर्षविराम पर चर्चा की। उन्होंने क्षेत्रीय हालात, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और शांति को लेकर ईरान का पक्ष रखते हुए कहा कि उनका देश शांति, संवाद और कूटनीति में विश्वास रखता है।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ते तनाव तथा कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर डॉ. फतहली ने कहा, “हम पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि हम युद्ध और शांति, दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार हैं। हम बातचीत और संवाद का स्वागत करते हैं। हमारा मानना है कि किसी भी विवाद या मतभेद का समाधान कूटनीति के माध्यम से निकाला जा सकता है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने कभी युद्ध या तनाव की शुरुआत नहीं की है और हमेशा शांतिपूर्ण तथा राजनीतिक समाधान पर जोर दिया है।”
उन्होंने दावा किया कि आठ अप्रैल को घोषित सीजफायर का हाल के दिनों में कई बार अमेरिकी सेनाओं की ओर से उल्लंघन किया गया। उनके अनुसार, इसी कारण ईरानी सेना ने आत्मरक्षा के अपने वैध अधिकार का उपयोग करते हुए जवाबी कार्रवाई की।
डॉ. फतहली ने कहा कि हम संघर्षविराम के प्रति अब भी प्रतिबद्ध हैं और बातचीत का रास्ता चुनते हैं, लेकिन हमारे देश की सुरक्षा और संप्रभुता हमारे लिए ‘रेड लाइन’ है। यदि हमारे देश पर कोई हमला या आक्रामकता होती है, तो उसका जवाब उसी स्तर पर और जरूरत पड़ने पर उससे भी अधिक कड़े तरीके से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कूटनीति के लिए अभी भी अवसर मौजूद हैं और समझौता संभव है, बशर्ते दूसरा पक्ष भी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे तथा किसी प्रकार की उकसावे वाली कार्रवाई या संघर्षविराम उल्लंघन से बचे।
सवाल: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में हाल ही में पारित उस प्रस्ताव को आप कैसे देखते हैं, जिसमें ईरान संघर्ष में राष्ट्रपति ट्रंप के अधिकारों को सीमित करने की बात कही गई है? क्या यह वॉशिंगटन में राजनीतिक विभाजन का संकेत है?
जवाब: यह सवाल कि क्या यह प्रस्ताव अमेरिका के भीतर किसी असहमति या राजनीतिक विभाजन को दर्शाता है, इसका जवाब अमेरिकी नेताओं और विश्लेषकों को देना चाहिए। हम अमेरिका के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करते।
हमारे लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि जो भी कदम तनाव कम करने, संघर्ष को बढ़ने से रोकने और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है, वह सकारात्मक और ध्यान देने योग्य है। इस दृष्टिकोण से हम इसे तनाव बढ़ने से रोकने और युद्ध दोबारा शुरू होने की आशंका को कम करने की दिशा में एक कदम मानते हैं।
ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा है और न ही वह युद्ध चाहता है। हम हमेशा कहते आए हैं कि मौजूदा विवादों का समाधान धमकी या बल प्रयोग से नहीं, बल्कि बातचीत, आपसी सम्मान और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के पालन से होना चाहिए। हर देश में विदेश नीति को लेकर अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है, अमेरिका में भी ऐसा है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि जो लोग कूटनीति, संयम और शांतिपूर्ण समाधान की बात करते हैं, उनकी भूमिका ज्यादा प्रभावी होनी चाहिए ताकि संकट न बढ़े। हम अब भी मानते हैं कि मौजूदा समस्याओं का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर और रचनात्मक संवाद से ही निकलेगा।
सवाल: कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमले के आरोपों पर ईरान की क्या प्रतिक्रिया है?
जवाब: कुवैत और बहरीन की तरफ से जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी नियमों और अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांत का खुला उल्लंघन हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 3314 के अनुसार, इन्हें ईरान के खिलाफ ‘आक्रामक कार्रवाई’ माना जाता है। इस प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई देश अपनी जमीन, समुद्री या हवाई क्षेत्र या वहां मौजूद सुविधाओं को किसी आक्रामक पक्ष को ईरान के खिलाफ हमले या सैन्य कार्रवाई के लिए इस्तेमाल करने देता है, तो वह भी आक्रामकता में शामिल माना जाता है।
हम अपने देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के अपने अधिकार के तहत हर जरूरी कदम उठाएंगे, जिसमें हमले की जगह और स्रोत को निशाना बनाना भी शामिल है। हालांकि हमारे सैन्य विशेषज्ञों की जांच और आकलन बताता है कि कुवैत एयरपोर्ट की तरफ कोई ईरानी मिसाइल नहीं दागी गई। एयरपोर्ट को जो नुकसान हुआ, वह संभवतः अमेरिका में बने ‘पैट्रियट’ डिफेंस सिस्टम की खराबी की वजह से हुआ, जिनकी इंटरसेप्टर मिसाइलें लक्ष्य को रोकने में असफल रहीं और टर्मिनल पर गिर गईं।
इसके अलावा, कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरानी ड्रोन हमलों और उनसे जुड़े प्रभावों के दावे जो किए जा रहे हैं, वे रात के समय हुए बताए जाते हैं। लेकिन जिन तस्वीरों और वीडियो को सबूत के तौर पर दिखाया जा रहा है, वे साफ तौर पर दिन के उजाले में लिए गए लगते हैं। इससे साफ होता है कि ये वीडियो असली घटनाओं से मेल नहीं खाते और बनावटी हैं। हमारा मकसद नागरिकों को नुकसान पहुंचाना नहीं है, लेकिन इस पूरी स्थिति के परिणामों की जिम्मेदारी अमेरिकी-जायोनिस्ट पक्ष और उनके सहयोगियों पर है, जो अपने इलाके और सुविधाएं उनके इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराते हैं।
सवाल: लेबनान और इजरायल के बीच संघर्ष का लेबनान की संप्रभुता और आंतरिक स्थिरता पर क्या असर पड़ता है?
जवाब: हमारी राय में, इजरायली शासन जो लेबनान में कर रहा है, वह साफ तौर पर लेबनान की राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन है और युद्ध अपराधों की श्रेणी में आता है। पिछले कई दशकों से इस शासन का रिकॉर्ड कब्जे, सैन्य हमलों, हत्याओं और आम नागरिकों की हत्या जैसी घटनाओं से भरा रहा है। हमारा मानना है कि यह शासन पश्चिम एशिया में अस्थिरता और असुरक्षा का मुख्य कारण है। गाजा में जो घटनाएं हुईं, उन्हें कोई नहीं भूल सकता, जहां 70,000 से ज्यादा निर्दोष लोग मारे गए। इनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे। दस लाख से ज्यादा लोग बेघर हुए और गाजा शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो गया।
आज भी यह शासन अलग-अलग बहानों के नाम पर लेबनान पर हमले जारी रखे हुए है, जिससे सिर्फ लेबनान ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। ये कदम अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और देशों की संप्रभुता के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ हैं। हम हमेशा से इस बात पर जोर देते आए हैं कि लेबनान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए। हमारा मानना है कि लेबनान की सुरक्षा वहां के लोगों और सरकार को खुद सुनिश्चित करनी चाहिए, और किसी भी देश को यह अधिकार नहीं है कि वह बलपूर्वक दूसरे देश पर अपना फैसला थोपे।
हमने यह भी कहा है कि लेबनान के खिलाफ चल रहे युद्ध को खत्म करना, क्षेत्र में शांति स्थापित करने के किसी भी समझौते का जरूरी हिस्सा होना चाहिए। हम किसी भी हाल में नागरिकों और निर्दोष लोगों की हत्या के खिलाफ हैं, चाहे उनका धर्म या राष्ट्रीयता कुछ भी हो। हमारा मानना है कि स्थायी शांति तभी संभव है जब हिंसा और अपराधों को रोका जाए।
सवाल: मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के समय में ईरान अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शांति और स्थिरता के बारे में क्या संदेश देना चाहता है?
जवाब: ईरान एक ऐसा देश है, जिसकी सभ्यता सात हजार साल से भी ज्यादा पुरानी है। इतिहास में यह हमेशा से देशों के बीच शांति, साथ रहने और दोस्ती का संदेश देने वाला रहा है। हमारी ऐतिहासिक पहचान और संस्कृति दूसरे देशों के साथ बातचीत और सहयोग पर आधारित रही है। इतिहास यह दिखाता है कि पिछले तीन सौ वर्षों में ईरान ने किसी भी युद्ध की शुरुआत नहीं की है और हमेशा विवादों को सुलझाने के शांतिपूर्ण तरीकों का समर्थन किया है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सोच हमेशा बातचीत, कूटनीति और आपसी सम्मान पर आधारित रही है।
आज जब दुनिया अनेक चुनौतियों और अनिश्चितताओं का सामना कर रही है, तब ईरान का संदेश अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए स्पष्ट है। टिकाऊ शांति, स्थिरता और सुरक्षा तभी संभव है, जब देशों के अधिकारों का सम्मान किया जाए, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन हो और समानता के आधार पर खुला तथा सकारात्मक संवाद स्थापित किया जाए।
हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिका एक मजबूत और स्वतंत्र ईरान की हकीकत को स्वीकार करेगा, जिसकी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका है, और ईरानी लोगों के वैध अधिकारों को भी मान्यता देगा। ईरान हमेशा से आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर बातचीत और सहयोग के लिए तैयार रहा है। हमारा मानना है कि सभी देशों के लिए सुरक्षित और स्थिर भविष्य का निर्माण केवल कूटनीति और आपसी समझ के माध्यम से ही संभव है।
राष्ट्रीय समाचार
बिना परेशानी के आम लोगों को समय पर सेवाएं देना आयकर विभाग की जिम्मेदारी: निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि आयकर विभाग का काम केवल कर वसूलना नहीं, बल्कि आम लोगों को इधर-उधर दौड़ाए बिना उनके हित में काम करना है। साथ ही, बिना परेशानी के समय पर सेवाएं देना भी विभाग की जिम्मेदारी है।
देश की आर्थिक राजधानी में नरीमन पॉइंट पर आयकर विभाग की 13 मंजिल की नई इमारत ‘आयकर सिंधु’ के उद्धाटन के दौरान वित्त मंत्री ने सरकारी विभागों के “सुस्त” रवैये पर भी अपनी निराशा जाहिर की, जिसकी वजह से सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे या अतिक्रमण होते हैं और सभी अधिकारियों के कामकाज में ईमानदारी की जरूरत पर जोर दिया।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि जिस जमीन पर यह इमारत खड़ी है, वह 1973 से विभाग के पास थी, लेकिन उपयोग होने के कारण वहां अवैध कब्जे हो गए थे। साथ ही, अधिकारियों पर नाराजगी जाहिर करने हुए कहा कि सरकार संपत्तियों की सुरक्षा करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
वित्त मंत्री ने इमारत को बनाने में आने वाली मंजूरी संबंधी चुनौतियों का जिक्र करते हुए आगे कहा कि एक शक्तिशाली सरकारी विभाग को मंजूरी लेने में इतना समय और कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है तो आम आदमी को होने वाली परेशानियों का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
साथ ही, उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उन्हें लोगों की समस्याओं को समझना चाहिए और अनावश्यक देरी से बचना चाहिए।
सीतारमण ने स्पष्ट कहा कि वह अधिकारियों से नियम तोड़ने या आम नागरिकों के लिए कुछ हटकर करने को नहीं कह रही हैं, लेकिन उन्होंने अफसोस जताया कि इस देश में लोगों को अपना जायज हक पाने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ती है।
सीतारमण ने मुंबई और नवी मुंबई इलाकों में कई आयकर अधिकारियों के सरकारी आवास में न रहने के मुद्दे पर भी ध्यान केंद्रित करने का वादा किया। उन्होंने संकेत दिया कि उनमें से आधे अधिकारियों को यह सुविधा नहीं मिलती है और उन्हें काम पर जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
सीतारमण ने कहा कि वह इस काम के लिए सरकारी स्तर पर जमीन के ट्रांसफर को प्राथमिकता देंगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह जमीन के तेजी से ट्रांसफर में मदद करेंगी, जबकि बाकी काम – जैसे मंजूरी लेना, निर्माण कार्य, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के साथ काम करना और कॉन्ट्रैक्ट व टेंडर देना- आयकर अधिकारियों को ही करना होगा।
राष्ट्रीय समाचार
एआई साझेदारी पर दक्षिण कोरिया का बड़ा दांव, ‘ओपनएआई’ और ‘एनवीडिया’ से राष्ट्रपति ली ने मिलाया हाथ

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से सैन फ्रांसिस्को का दो दिवसीय दौरा संपन्न किया। इसके बाद वह दक्षिण अमेरिका के तीन देशों की यात्रा के अगले चरण के तहत ब्राजील के लिए रवाना हो गए।
शुक्रवार और शनिवार को सैन फ्रांसिस्को में अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति ली ने दुनिया की चार प्रमुख टेक कंपनियों के प्रमुखों से मुलाकात की। इनमें ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सैम ऑल्टमैन और एनवीडिया के सीईओ जेनसन हुआंग भी शामिल थे। इस दौरान उन्होंने एआई के क्षेत्र में दक्षिण कोरियाई कंपनियों और वैश्विक टेक कंपनियों के बीच साझेदारी मजबूत करने पर जोर दिया।
योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रपति ली की मौजूदगी में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में वैश्विक टेक कंपनियों और दक्षिण कोरिया के प्रमुख उद्योग समूहों ने 950 अरब डॉलर के संयुक्त सहयोग परियोजनाओं पर काम करने पर सहमति जताई।
इन परियोजनाओं में सबसे बड़ा समझौता एसके ग्रुप और एनवीडिया सहित अन्य कंपनियों के बीच हुआ, जिसके तहत एसके ग्रुप लंबे समय तक 750 अरब डॉलर मूल्य के हाई-परफॉर्मेंस सेमीकंडक्टर की आपूर्ति करेगा।
शनिवार को सिलिकॉन वैली में निवेश करने वाले वेंचर कैपिटल निवेशकों के साथ बैठक में राष्ट्रपति ली ने कहा कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका को अपने दशकों पुराने सुरक्षा गठबंधन से आगे बढ़ते हुए तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग का विस्तार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की विश्वस्तरीय वेंचर कैपिटल क्षमता और वैश्विक नेटवर्क यदि दक्षिण कोरिया की उन्नत तकनीक और मजबूत विनिर्माण क्षमता के साथ मिल जाएं, तो इससे सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी नई वैश्विक कंपनियां उभर सकती हैं, जो भविष्य में दुनिया का नेतृत्व करेंगी।
दक्षिण अमेरिका दौरे के तहत राष्ट्रपति ली रविवार से ब्राजील की चार दिवसीय राजकीय यात्रा शुरू करेंगे। इस दौरान सोमवार को राजधानी ब्रासीलिया में उनकी ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के साथ शिखर वार्ता होगी। मंगलवार को वह साओ पाउलो में एक कारोबारी गोलमेज बैठक में भी हिस्सा लेंगे।
ब्राजील के बाद राष्ट्रपति ली 1 अगस्त तक चिली और अर्जेंटीना का भी दौरा करेंगे। इस पूरे दौरे का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) में सहयोग को मजबूत करना है।
इसके बाद 2 अगस्त को वह जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में संक्षिप्त प्रवास करेंगे, जहां दक्षिण कोरियाई समुदाय के लोगों से मुलाकात के बाद अगले दिन स्वदेश लौटेंगे।
अंतरराष्ट्रीय
ब्रह्मोस से विक्रम-1 तक, ‘मन की बात’ में भारत की बढ़ती ताकत का जिक्र, जयशंकर ने साझा किए अहम बिंदु

मन की बात के 136वें एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर बार की तरह विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी उपलब्धियों और आम लोगों की बात की। कार्यक्रम में उन सफलताओं को भी रेखांकित किया गया, जिनमें भारतीय धुरंधरों ने विदेशों में देश का नाम रोशन किया या भारत की तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री के संबोधन के प्रमुख सात बिंदुओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया।
जयशंकर ने अपनी पोस्ट में सबसे पहले कारगिल विजय दिवस पर पीएम की कही बात का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “कारगिल विजय दिवस हर भारतीय को गर्व से भर देता है और यह देश के वीर जवानों के असाधारण साहस की याद दिलाता है। प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक साख का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया का भरोसा भारतीय रक्षा उपकरणों और तकनीक पर बढ़ रहा है। इसी क्रम में इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों को लेकर हुए महत्वपूर्ण समझौतों पर पीएम ने प्रकाश डाला।”
मन की बात में प्रधानमंत्री ने विक्रम-1 की सफलता से भी जनमानस को रूबरू कराया। इस पर जयशंकर ने कहा, “निजी क्षेत्र विकसित भारत के पहले रॉकेट ‘विक्रम-1’ के सफल प्रक्षेपण भी बड़ी उपलब्धि है जिसके बारे में पीएम ने बात की। अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला है।”
विदेश मंत्री की पोस्ट में ओलंपियाड में सफलता के झंडा गाड़ते भारतीय छात्रों का भी जिक्र है। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय दल ने विज्ञान ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन करते हुए भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित सभी प्रतियोगिताओं में पदक जीते।”
पीएम ने मन की बात में रोनाल्डो लैशराम पर भी खूबसूरत सी बात कही। जयशंकर ने अपनी पोस्ट में मणिपुर के एस्ट्रोफिजिसिस्ट रोनाल्डो लैशराम की उपलब्धि का भी उल्लेख किया।
रोनाल्डो जापान में काम करते हैं और उस टीम का हिस्सा रहे हैं जिसने विशाल युवा आकाशगंगा समूह की खोज की। उन्होंने इस खोज का नाम ‘लोकटक प्रोटो क्लस्टर’ रखा, जो मणिपुर की प्रसिद्ध लोकटक झील से प्रेरित है।
मन की बात में ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा ले रहे खिलाड़ियों को पीएम ने भारतीयों की ओर से शुभकामनाएं दीं। पोस्ट में एस जयशंकर ने इसका भी उल्लेख किया है।
प्रधानमंत्री ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक उपलब्धि का भी जिक्र किया। भारत ने पहली बार लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर महिला टेस्ट मैच जीतते हुए इंग्लैंड को 270 रन से हराया। वहीं, बैडमिंटन खिलाड़ी पी.वी. सिंधु के जापान ओपन जीतकर इतिहास रचने की उपलब्धि को भी सराहा गया।
-
दुर्घटना11 months agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
