अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका-ईरान तनाव का समाधान युद्ध से नहीं, सिर्फ कूटनीति से संभव: डॉ. मोहम्मद फतहली
नई दिल्ली, 5 जून: भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहली ने मिडिया को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिका-ईरान तनाव और बार-बार टूटते संघर्षविराम पर चर्चा की। उन्होंने क्षेत्रीय हालात, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और शांति को लेकर ईरान का पक्ष रखते हुए कहा कि उनका देश शांति, संवाद और कूटनीति में विश्वास रखता है।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़ते तनाव तथा कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर डॉ. फतहली ने कहा, “हम पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि हम युद्ध और शांति, दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार हैं। हम बातचीत और संवाद का स्वागत करते हैं। हमारा मानना है कि किसी भी विवाद या मतभेद का समाधान कूटनीति के माध्यम से निकाला जा सकता है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने कभी युद्ध या तनाव की शुरुआत नहीं की है और हमेशा शांतिपूर्ण तथा राजनीतिक समाधान पर जोर दिया है।”
उन्होंने दावा किया कि आठ अप्रैल को घोषित सीजफायर का हाल के दिनों में कई बार अमेरिकी सेनाओं की ओर से उल्लंघन किया गया। उनके अनुसार, इसी कारण ईरानी सेना ने आत्मरक्षा के अपने वैध अधिकार का उपयोग करते हुए जवाबी कार्रवाई की।
डॉ. फतहली ने कहा कि हम संघर्षविराम के प्रति अब भी प्रतिबद्ध हैं और बातचीत का रास्ता चुनते हैं, लेकिन हमारे देश की सुरक्षा और संप्रभुता हमारे लिए ‘रेड लाइन’ है। यदि हमारे देश पर कोई हमला या आक्रामकता होती है, तो उसका जवाब उसी स्तर पर और जरूरत पड़ने पर उससे भी अधिक कड़े तरीके से दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कूटनीति के लिए अभी भी अवसर मौजूद हैं और समझौता संभव है, बशर्ते दूसरा पक्ष भी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करे तथा किसी प्रकार की उकसावे वाली कार्रवाई या संघर्षविराम उल्लंघन से बचे।
सवाल: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में हाल ही में पारित उस प्रस्ताव को आप कैसे देखते हैं, जिसमें ईरान संघर्ष में राष्ट्रपति ट्रंप के अधिकारों को सीमित करने की बात कही गई है? क्या यह वॉशिंगटन में राजनीतिक विभाजन का संकेत है?
जवाब: यह सवाल कि क्या यह प्रस्ताव अमेरिका के भीतर किसी असहमति या राजनीतिक विभाजन को दर्शाता है, इसका जवाब अमेरिकी नेताओं और विश्लेषकों को देना चाहिए। हम अमेरिका के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करते।
हमारे लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि जो भी कदम तनाव कम करने, संघर्ष को बढ़ने से रोकने और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है, वह सकारात्मक और ध्यान देने योग्य है। इस दृष्टिकोण से हम इसे तनाव बढ़ने से रोकने और युद्ध दोबारा शुरू होने की आशंका को कम करने की दिशा में एक कदम मानते हैं।
ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा है और न ही वह युद्ध चाहता है। हम हमेशा कहते आए हैं कि मौजूदा विवादों का समाधान धमकी या बल प्रयोग से नहीं, बल्कि बातचीत, आपसी सम्मान और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के पालन से होना चाहिए। हर देश में विदेश नीति को लेकर अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है, अमेरिका में भी ऐसा है। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि जो लोग कूटनीति, संयम और शांतिपूर्ण समाधान की बात करते हैं, उनकी भूमिका ज्यादा प्रभावी होनी चाहिए ताकि संकट न बढ़े। हम अब भी मानते हैं कि मौजूदा समस्याओं का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर और रचनात्मक संवाद से ही निकलेगा।
सवाल: कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमले के आरोपों पर ईरान की क्या प्रतिक्रिया है?
जवाब: कुवैत और बहरीन की तरफ से जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, वे अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी नियमों और अच्छे पड़ोसी संबंधों के सिद्धांत का खुला उल्लंघन हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 3314 के अनुसार, इन्हें ईरान के खिलाफ ‘आक्रामक कार्रवाई’ माना जाता है। इस प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई देश अपनी जमीन, समुद्री या हवाई क्षेत्र या वहां मौजूद सुविधाओं को किसी आक्रामक पक्ष को ईरान के खिलाफ हमले या सैन्य कार्रवाई के लिए इस्तेमाल करने देता है, तो वह भी आक्रामकता में शामिल माना जाता है।
हम अपने देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के अपने अधिकार के तहत हर जरूरी कदम उठाएंगे, जिसमें हमले की जगह और स्रोत को निशाना बनाना भी शामिल है। हालांकि हमारे सैन्य विशेषज्ञों की जांच और आकलन बताता है कि कुवैत एयरपोर्ट की तरफ कोई ईरानी मिसाइल नहीं दागी गई। एयरपोर्ट को जो नुकसान हुआ, वह संभवतः अमेरिका में बने ‘पैट्रियट’ डिफेंस सिस्टम की खराबी की वजह से हुआ, जिनकी इंटरसेप्टर मिसाइलें लक्ष्य को रोकने में असफल रहीं और टर्मिनल पर गिर गईं।
इसके अलावा, कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरानी ड्रोन हमलों और उनसे जुड़े प्रभावों के दावे जो किए जा रहे हैं, वे रात के समय हुए बताए जाते हैं। लेकिन जिन तस्वीरों और वीडियो को सबूत के तौर पर दिखाया जा रहा है, वे साफ तौर पर दिन के उजाले में लिए गए लगते हैं। इससे साफ होता है कि ये वीडियो असली घटनाओं से मेल नहीं खाते और बनावटी हैं। हमारा मकसद नागरिकों को नुकसान पहुंचाना नहीं है, लेकिन इस पूरी स्थिति के परिणामों की जिम्मेदारी अमेरिकी-जायोनिस्ट पक्ष और उनके सहयोगियों पर है, जो अपने इलाके और सुविधाएं उनके इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराते हैं।
सवाल: लेबनान और इजरायल के बीच संघर्ष का लेबनान की संप्रभुता और आंतरिक स्थिरता पर क्या असर पड़ता है?
जवाब: हमारी राय में, इजरायली शासन जो लेबनान में कर रहा है, वह साफ तौर पर लेबनान की राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन है और युद्ध अपराधों की श्रेणी में आता है। पिछले कई दशकों से इस शासन का रिकॉर्ड कब्जे, सैन्य हमलों, हत्याओं और आम नागरिकों की हत्या जैसी घटनाओं से भरा रहा है। हमारा मानना है कि यह शासन पश्चिम एशिया में अस्थिरता और असुरक्षा का मुख्य कारण है। गाजा में जो घटनाएं हुईं, उन्हें कोई नहीं भूल सकता, जहां 70,000 से ज्यादा निर्दोष लोग मारे गए। इनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे। दस लाख से ज्यादा लोग बेघर हुए और गाजा शहर लगभग पूरी तरह तबाह हो गया।
आज भी यह शासन अलग-अलग बहानों के नाम पर लेबनान पर हमले जारी रखे हुए है, जिससे सिर्फ लेबनान ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। ये कदम अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और देशों की संप्रभुता के सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ हैं। हम हमेशा से इस बात पर जोर देते आए हैं कि लेबनान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए। हमारा मानना है कि लेबनान की सुरक्षा वहां के लोगों और सरकार को खुद सुनिश्चित करनी चाहिए, और किसी भी देश को यह अधिकार नहीं है कि वह बलपूर्वक दूसरे देश पर अपना फैसला थोपे।
हमने यह भी कहा है कि लेबनान के खिलाफ चल रहे युद्ध को खत्म करना, क्षेत्र में शांति स्थापित करने के किसी भी समझौते का जरूरी हिस्सा होना चाहिए। हम किसी भी हाल में नागरिकों और निर्दोष लोगों की हत्या के खिलाफ हैं, चाहे उनका धर्म या राष्ट्रीयता कुछ भी हो। हमारा मानना है कि स्थायी शांति तभी संभव है जब हिंसा और अपराधों को रोका जाए।
सवाल: मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के समय में ईरान अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शांति और स्थिरता के बारे में क्या संदेश देना चाहता है?
जवाब: ईरान एक ऐसा देश है, जिसकी सभ्यता सात हजार साल से भी ज्यादा पुरानी है। इतिहास में यह हमेशा से देशों के बीच शांति, साथ रहने और दोस्ती का संदेश देने वाला रहा है। हमारी ऐतिहासिक पहचान और संस्कृति दूसरे देशों के साथ बातचीत और सहयोग पर आधारित रही है। इतिहास यह दिखाता है कि पिछले तीन सौ वर्षों में ईरान ने किसी भी युद्ध की शुरुआत नहीं की है और हमेशा विवादों को सुलझाने के शांतिपूर्ण तरीकों का समर्थन किया है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सोच हमेशा बातचीत, कूटनीति और आपसी सम्मान पर आधारित रही है।
आज जब दुनिया अनेक चुनौतियों और अनिश्चितताओं का सामना कर रही है, तब ईरान का संदेश अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए स्पष्ट है। टिकाऊ शांति, स्थिरता और सुरक्षा तभी संभव है, जब देशों के अधिकारों का सम्मान किया जाए, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन हो और समानता के आधार पर खुला तथा सकारात्मक संवाद स्थापित किया जाए।
हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिका एक मजबूत और स्वतंत्र ईरान की हकीकत को स्वीकार करेगा, जिसकी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहम भूमिका है, और ईरानी लोगों के वैध अधिकारों को भी मान्यता देगा। ईरान हमेशा से आपसी सम्मान और साझा हितों के आधार पर बातचीत और सहयोग के लिए तैयार रहा है। हमारा मानना है कि सभी देशों के लिए सुरक्षित और स्थिर भविष्य का निर्माण केवल कूटनीति और आपसी समझ के माध्यम से ही संभव है।
व्यापार
भारत की जीडीपी वृद्धि दर वित्त वर्ष 2027 में 7 प्रतिशत तक रहने की उम्मीद: रिपोर्ट

भारत चालू वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5-7 प्रतिशत हासिल करने की राह पर है। इस दौरान मजबूत घरेलू मांग, बैंक ऋण में तेजी और आर्थिक गतिविधियों में सुधार के चलते नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर 11-12 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। यह जानकारी जेफरीज की ओर से जारी एक रिपोर्ट में दी गई है।
जेफरीज ने अपनी ताजा ‘ग्रीड एंड फियर’ रिपोर्ट में कहा कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन छह महीने पहले की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। इसकी वजह ऋण में व्यापक स्तर पर विस्तार और मांग से जुड़े संकेतकों में सुधार है।
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि जुलाई में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को दिए जाने वाले ऋण में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि उद्योग क्षेत्र को कर्ज 20 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र को ऋण 22.9 प्रतिशत और कॉरपोरेट ऋण में 21.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
रिपोर्ट में कहा गया, “कॉरपोरेट ऋण में तेजी यह भी संकेत देती है कि लंबे समय से प्रतीक्षित निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र की शुरुआत आखिरकार हो रही है।”
जेफरीज में इंडिया रिसर्च के प्रमुख महेश नंदूरकर ने कहा कि आय वृद्धि चालू वित्त वर्ष के 14 प्रतिशत से बढ़कर 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले वित्त वर्ष में 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में घरेलू मांग में लगातार बनी मजबूती की ओर भी इशारा किया गया है।
इसके अलावा, अगस्त में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अप्रैल-अगस्त के दौरान बिजली की मांग में वृद्धि बढ़कर 9.4 प्रतिशत हो गई। इसकी तुलना में जनवरी-मार्च की अवधि में बिजली मांग में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
वहीं, रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की एफसीएनआर (बी) पहल के तहत विदेशी मुद्रा का मजबूत प्रवाह देखने को मिला, जिसके तहत सरकार ने अनिवासी भारतीयों (एनआरआई) से उम्मीद से बेहतर 136 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा राशि जुटाई।
राजकोषीय मोर्चे पर ब्रोकरेज ने कहा कि सरकार के राजकोषीय समेकन के प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसके और कम होने की उम्मीद है।
व्यापार
सोने और चांदी का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ा, निवेशकों को फेड के फैसले का इंतजार

सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को तेजी देखने को मिली और दोनों कीमती धातुओं का दाम करीब 1.5 प्रतिशत तक बढ़ गया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,809 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,291 रुपए या 0.85 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,52,100 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।
दोपहर 12 बजे यह 953 रुपए या 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,51,762 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,51,450 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,52,100 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ है, यह दिखाता है कि खुलने के बाद सोना सीमित दायरे में बना हुआ है।
सोने के साथ चांदी में भी तेजी देखने को मिल रही है।
चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,32,118 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 3,667 रुपए या 1.57 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,35,785 रुपए प्रति किलो पर खुला।
फिलहाल यह 3,250 रुपए या 1.40 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,35,988 रुपए प्रति किलो पर था।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,34,540 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,35,988 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर बनाया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी में तेजी देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,366 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65 डॉलर प्रति औंस पर थी।
ब्याज दरों पर दो दिवसीय अमेरिकी फेड बैठक के फैसलों का ऐलान आज देर शाम किया जाएगा। यह ऐसे समय पर आ रहा है, जब मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत करीब चार महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है और यूएस बॉन्ड यील्ड भी 5 प्रतिशत के ऊपर जा चुकी है। इस कारण इस फैसले पर निवेशक करीब से निगाह रख रहे हैं।
व्यापार
भारत का आवासीय बाजार स्थिर, हाउसिंग प्राइस इंडेक्स पहली तिमाही में 3.6 प्रतिशत बढ़ा

भारत का हाउसिंग प्राइस इंडेक्स (एचपीआई) वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो पिछले साल की समान अवधि की वृद्धि के समान ही है। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में यह सालाना 4.5 प्रतिशत की दर से बढ़ा था। यह देश के स्थिर आवासीय बाजार को दिखाता है। यह जानकारी बुधवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में बताया गया कि तिमाही आधार पर एचपीआई वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 1.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है, जो कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में की वृद्धि दर 0.5 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, हाउसिंग क्रेडिट वृद्धि दर वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 11 प्रतिशत रही है।
रिपोर्ट में बताया गया कि हाउसिंग के क्षेत्र में महंगाई पर इनपुट लागत बढ़ने का असर हुआ है। ग्लोबल कमोडिटी की कीमतों और कंस्ट्रक्शन की लागत में बढ़ोतरी से घरों की कीमतें बढ़ीं।
पश्चिम एशिया में संघर्ष के असर से ग्लोबल ग्रोथ पर दबाव पड़ा, क्योंकि इससे कमोडिटी की कीमतें बढ़ीं और सप्लाई चेन में रुकावट आई। भारत में भी वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में महंगाई तेजी से बढ़ी और इसका असर अलग-अलग इंडस्ट्रीज पर देखा गया।
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एचपीआई की सालाना बढ़ोतरी में सबसे ज्यादा योगदान देने वाले शहरों में चंडीगढ़ (49.6 प्रतिशत), जयपुर (36.4 प्रतिशत), कानपुर (27.5 प्रतिशत), लखनऊ (17.7 प्रतिशत) और तिरुवनंतपुरम (16.3 प्रतिशत) शामिल थे।
चंडीगढ़ में कीमतों में बढ़ोतरी की वजह कलेक्टर रेट में हालिया बदलाव है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू हुआ है। इसके अलावा, नई जमीन की कमी ने भी हाल के समय में कीमतों को बढ़ाया है।
दिल्ली (-1.2 प्रतिशत), कोलकाता (-31.5 प्रतिशत), मुंबई (2.8 प्रतिशत) और हैदराबाद (-0.8 प्रतिशत) जैसे शहरों में वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के दौरान गिरावट आई है या बढ़ोतरी की रफ्तार बहुत धीमी रही है।
बेहतर कनेक्टिविटी और सर्विस-सेक्टर में रोजगार के बढ़ते मौकों की वजह से बड़े शहरों के बजाय टियर-2 शहर बाजार की मांग को आगे बढ़ा रहे हैं।
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