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Saturday,24-October-2026
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राजनीति

सहारनपुर मस्जिद गिराने का मामला: 200-250 साल पुराना कुआं मिलने से नया विवाद

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लखनऊ: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में गिराई गई मस्जिद वाली जगह पर मलबा हटाने के दौरान लगभग 20 फुट गहरा कुआं मिला। इसके एक दिन बाद, मंगलवार को एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। रविवार को मलबे के नीचे मिली इस संरचना की उम्र, बनावट और संभावित ऐतिहासिक महत्व का पता लगाने के लिए सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम ने जांच की।

संरचना की जांच के लिए लखनऊ से सहारनपुर पहुंचे एएसआई के असिस्टेंट आर्कियोलॉजिकल ऑफिसर मनोज कुमार यादव ने मौके का मुआयना किया और कहा कि वहां मिली चीजें इसके ऐतिहासिक स्वरूप को समझने में मदद करेंगी।

यादव के अनुसार, यह संरचना उत्तर और मध्य गंगा घाटी में मध्यकाल के आखिरी दौर की वास्तुकला जैसी दिखती है। कुआं लखौरी ईंटों और चूना-सुर्खी से बनाया गया है, जो पहले के समय की इमारतों में आम तौर पर इस्तेमाल होते थे।

मौके पर देखी गई ईंटों, निर्माण के तरीके और तकनीकों के आधार पर अधिकारियों का अनुमान है कि यह संरचना लगभग 200 से 250 साल पुरानी हो सकती है।

हालांकि, यादव ने कहा कि पक्की जानकारी के लिए और जांच की ज़रूरत होगी, क्योंकि संरचना के अंदर मलबे के कारण पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो पाई है और स्पष्ट ऐतिहासिक सबूतों की अभी भी जांच की जा रही है।

इस खोज के बाद यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि क्या इस संरचना का शाहजहां के दौर से कोई संबंध हो सकता है या क्या यह अतीत में किसी मंदिर या किसी अन्य धार्मिक स्थल का हिस्सा रही होगी। हालांकि, यादव ने पर्याप्त पुरातात्विक सबूतों के बिना ऐसे ऐतिहासिक निष्कर्ष निकालने के खिलाफ आगाह किया और कहा कि संरचना के सही इतिहास का पता लगाने के लिए मिली सामग्री की जांच करनी होगी।

इस बीच, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा: “हम उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगे। चूंकि मामला अदालत में है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। अदालतें हमेशा विकल्प खुला रखती हैं। हम उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि समाजवादी पार्टी को उस जगह पर कुआं मिलने पर ध्यान देना चाहिए जहां मस्जिद थी और तोड़फोड़ पर सवाल उठाने से पहले संरचना से जुड़ी परिस्थितियों पर विचार करना चाहिए। मीडिया से बात करते हुए कश्यप ने कहा, “अखिलेश यादव को मस्जिद गिराए जाने के बाद की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए। जिस जगह पर मस्जिद बनी थी, वहां एक कुआं मिला है। ऐतिहासिक रूप से कुएं लोगों को पानी मुहैया कराने के सबसे पुराने तरीकों में से एक रहे हैं। उस कुएं को पाटकर उसके ऊपर मस्जिद बनाई गई थी, और वह मस्जिद ज़बरदस्ती बनाई गई थी। कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए इसे गिराए जाने पर अब अखिलेश यादव को सवाल नहीं उठाना चाहिए।”

कश्यप ने आगे कहा कि मस्जिद को कानूनी प्रक्रिया के तहत गिराया गया था और तर्क दिया कि कुएं के मिलने से इस जगह को लेकर चल रहे विवाद के बारे में और जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि इस मामले को मस्जिद गिराने से पहले हुई कानूनी कार्यवाही से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।

मंत्री ओ.पी. राजभर ने भी इस नई जानकारी पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि उस जगह पर हो रही घटनाओं से और भी बातें सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा, “अब यह पक्का हो गया है कि मस्जिद को कोर्ट के आदेश के बाद गिराया गया था। अब जब कुएं की जांच हो रही है, तो नई बातें सामने आ रही हैं।”

राष्ट्रीय समाचार

राष्ट्रपति ने केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम की शक्तियां सौंपीं

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सभी केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों और प्रशासकों को राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 के तहत अपने-अपने क्षेत्रों में शक्तियों का प्रयोग करने और कार्यों का निर्वहन करने का अधिकार सौंपा है।

गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना के माध्यम से राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 के तहत कार्यों के निर्वहन के लिए शक्तियों के प्रत्यायोजन की घोषणा की है। ये शक्तियां दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी, चंडीगढ़, लद्दाख और लक्षद्वीप के उपराज्यपालों और प्रशासकों को सौंपी गई हैं।

आदेश में लिखा, “संविधान के अनुच्छेद 239 के खंड (1) के अनुसरण में, राष्ट्रपति एतद्द्वारा निर्देश देते हैं कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी, चंडीगढ़, लद्दाख और लक्षद्वीप के केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक (चाहे वे उपराज्यपाल या प्रशासक के रूप में जाने जाएं) राष्ट्रपति के नियंत्रण के अधीन रहते हुए और अगले आदेश तक, अपने-अपने केंद्र शासित प्रदेशों के भीतर राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 (21 ऑफ 2023) की धारा 29, 48 और 56 के तहत राज्य सरकार की शक्तियों का प्रयोग और कार्यों का निर्वहन करेंगे।”

राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 देश में दंत चिकित्सा पेशे को विनियमित करता है, गुणवत्तापूर्ण और किफायती दंत शिक्षा प्रदान करता है, और देश भर में उच्च गुणवत्ता वाली मौखिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को सुलभ बनाता है।

यह ऐतिहासिक कानून अपने नागरिकों के लिए उच्चतम स्तर की दंत चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय दंत आयोग अधिनियम, 2023 ने राष्ट्रीय दंत आयोग (एनडीसी) की स्थापना करके एक अभूतपूर्व नियामक ढांचा पेश किया, जिसने मौजूदा भारतीय दंत परिषद (डीसीआई) का स्थान लिया और दंत चिकित्सक विधेयक, 1948 को निरस्त कर दिया।

इस अधिनियम का उद्देश्य दंत चिकित्सा शिक्षा और पेशे के परिदृश्य में व्यापक सुधार करके इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाना है। अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं में राष्ट्रीय दंत आयोग और राज्य दंत परिषदों का गठन, तीन स्वायत्त बोर्डों का प्रावधान; आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और सचिव के लिए निश्चित कार्यकाल (पुनर्नियुक्ति की कोई संभावना नहीं); उद्योग सहयोग और तकनीकी नवाचार; ऑनलाइन राष्ट्रीय रजिस्टर और दंत सलाहकार परिषद; और योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया शामिल हैं।

यह अधिनियम राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, भारतीय फार्मेसी परिषद, भारतीय नर्सिंग परिषद, भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग, होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग और संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों के लिए राष्ट्रीय आयोग सहित संबंधित वैधानिक निकायों के साथ संयुक्त बैठकें आयोजित करने की सुविधा भी प्रदान करता है।

यह अधिनियम आयोग को निजी दंत चिकित्सालयों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में 50 प्रतिशत सीटों के लिए शुल्क निर्धारण के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का अधिकार भी देता है। यह अधिनियम दंत चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण नियामक सुधार लाने के लिए तैयार है। यह जनता के हितों की रक्षा के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यावसायिकता को बढ़ावा देता है।

किफायती मौखिक स्वास्थ्य देखभाल की उपलब्धता को बढ़ावा देकर और भारतीय दंत चिकित्सकों की वैश्विक स्तर पर रोजगार क्षमता को बढ़ाकर, आयोग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दंत चिकित्सा मानकों को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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अपराध

गुजरात राजमार्ग पर कार-ट्रक की टक्कर में दो की मौत, चार घायल

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गुजरात के पाटन जिले में राधनपुर-सामी राजमार्ग पर एक कार की ट्रक से आमने-सामने की टक्कर में एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत हो गई और दो नाबालिगों सहित चार अन्य घायल हो गए।

मृतकों की पहचान रंजीत मंगिलाल और उनकी मां जमनाबेन के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, टक्कर के बाद दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

यह परिवार द्वारका से पड़ोसी जिले बनासकांठा के भाभर की ओर जा रहा था, तभी यह हादसा हुआ।

उनकी कार विपरीत दिशा से आ रहे एक ट्रक से टकरा गई, जिससे कार में सवार चार अन्य लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि घायल परिवार के सदस्यों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

उनकी हालत के बारे में तत्काल अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज करने की प्रक्रिया में है और जांच आगे बढ़ने पर अधिक जानकारी सामने आएगी।

यह ताजा हादसा हाल के महीनों में राधनपुर क्षेत्र में हुई अन्य सड़क दुर्घटनाओं के बीच हुआ है।

6 सितंबर को, राजस्थान के खाटू श्याम तीर्थयात्रा से लौट रहे एक समूह को ले जा रही ईको कार राधनपुर-वराही राजमार्ग पर खड़ी एक ट्रक से टकरा गई, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए।

खबरों के अनुसार, यह दुर्घटना राधनपुर के पास राघवजी होटल के नजदीक हुई और घायलों को अस्पताल ले जाया गया।

पिछली दुर्घटना में ट्रक खड़ा था, जबकि आज की टक्कर में ट्रक विपरीत दिशा से आ रहा था।

इस ताजा आमने-सामने की टक्कर के कारणों की जानकारी तुरंत नहीं मिल पाई है। पुलिस अपनी जांच के तहत घटनाक्रम का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

पुलिस द्वारा जारी जानकारी में घायल चार लोगों (जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं) की पहचान और उन्हें भर्ती कराए गए अस्पताल का नाम तुरंत उपलब्ध नहीं कराया गया है।

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राजनीति

सोनिया गांधी मेरी आदर्श नेता, उनकी बराबरी कोई नहीं कर सकता: संध्या सवलखे

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महाराष्ट्र प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष संध्या सवलखे ने सोनिया गांधी की किताब के विमोचन, सांसद प्रणति शिंदे की फेसबुक पोस्ट पर की गई अश्लील टिप्पणी, पुणे विधान परिषद चुनाव समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने सोनिया गांधी को अपना आदर्श बताते हुए उनके संघर्ष और महिलाओं के प्रति योगदान की सराहना की। वहीं, सांसद प्रणति शिंदे के खिलाफ की गई टिप्पणी के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर नाराजगी जताई और महाराष्ट्र सरकार से कार्रवाई की मांग की।

संध्या सवलखे ने सोनिया गांधी के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक समय उनके जीवन में भी काफी कठिनाइयां आई थीं और उन्होंने राजनीति छोड़ने का विचार किया था। उस दौरान वह सोनिया गांधी से मिलने गई थीं। इसके बाद सोनिया गांधी ने उन्हें एक ही दिन में दो बार बुलाकर समझाया था कि संघर्ष करने वाली महिलाएं ही राजनीति में टिकती हैं। उन्होंने इस दौरान इंदिरा गांधी का उदाहरण भी दिया था।

सवलखे ने कहा कि सोनिया गांधी की सभ्यता, संस्कार, व्यवहार और महिलाओं के लिए योगदान उन्हें एक आदर्श नेता बनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता सोनिया गांधी के बारे में लगातार टिप्पणी करते हैं, जबकि उनके संघर्ष और योगदान को समझने की जरूरत है।

उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी परिवार ने काफी कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। सवलखे ने सोनिया गांधी के व्यक्तिगत जीवन में आए दुखों का जिक्र करते हुए उनके साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी की बराबरी कोई नहीं कर सकता और उनका संघर्ष महिलाओं के लिए प्रेरणा है।

मुंबई में बीएमसी द्वारा पेड़ों की कटाई के मुद्दे पर सवलखे ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पक्ष की मंशा शहर को प्रदूषित करने वाली नीतियों को आगे बढ़ाने की है। उन्होंने कहा कि मुंबई में प्रदूषण की स्थिति इतनी खराब हो गई है कि घरों की खिड़कियां खोलने पर छोटे बच्चे खांसने लगते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले समय में पेड़ों की कटाई से स्थिति और बिगड़ सकती है। सवलखे ने कहा कि यदि पेड़ों को काटने का काम शुरू किया गया तो आम नागरिकों के साथ मिलकर इसका विरोध किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर लोग सड़कों पर उतरेंगे।

उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले पर ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि महंगाई के साथ-साथ लोगों के स्वास्थ्य का सवाल भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब लोगों की सेहत ही प्रभावित होगी तो आम परिवारों के लिए मुश्किलें और बढ़ेंगी। महिला कांग्रेस शहर को प्रदूषण से बचाने के लिए विरोध करेगी।

सांसद प्रणति शिंदे के फेसबुक पोस्ट पर की गई अश्लील टिप्पणी को लेकर सवलखे ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि टिप्पणी पढ़ने के बाद इस मामले में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की गई, लेकिन शुरुआत में प्राथमिकी दर्ज कराने में काफी परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि मैंने अपनी अधिवक्ता को चार दिन तक इस काम के लिए लगाया, लेकिन संबंधित अधिकारियों की ओर से मामला दर्ज करने में कठिनाई पैदा की गई। काफी प्रयासों के बाद प्राथमिकी दर्ज हुई, फिर भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

सवलखे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा कि यदि एक निर्वाचित महिला सांसद के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी होती है तो क्या महिला जनप्रतिनिधि सुरक्षित हैं? उन्होंने भाजपा सरकार पर पिछड़े वर्ग से आने वाली महिला नेताओं को निशाना बनाए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शाम तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती है तो महाराष्ट्र महिला कांग्रेस आंदोलन शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और जरूरत पड़ने पर संगठन कड़ा विरोध करेगा।

पुणे विधान परिषद चुनाव को लेकर सवलखे ने कहा कि शिक्षक मतदाता संघ का चुनाव पवित्र प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन भाजपा ने इसकी गरिमा बनाए नहीं रखी। उन्होंने वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। सवलखे ने कहा कि भाजपा का उम्मीदवार पार्टी का दुपट्टा पहनकर मतदान केंद्र के अंदर गया, जिसे उन्होंने अनुचित आचरण और गुंडागर्दी करार दिया। उन्होंने पिछले चुनावों का जिक्र करते हुए मशीन की पूजा किए जाने और मतदान के दौरान लोगों के अंदर जाकर वोटिंग संबंधी गतिविधियों की जानकारी देने के आरोप भी लगाए।

उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सवलखे ने कहा कि उन्हें सरकार की कार्रवाई का इंतजार रहेगा।

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