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Sunday,28-June-2026
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राजनीति

वंशवाद की राजनीति से लोकतंत्र को खतरा’ पर RSS करेगा संगोष्ठी

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 राष्ट्रीय राजधानी में आरएसएस से जुड़े थिंक टैंक ‘रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी’ (आरएमपी) ‘लोकतांत्रिक शासन के लिए वंशवादी राजनीतिक दलों से खतरा’ पर सेमिनार आयोजित करने जा रही है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भाग लेंगे। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा 19 मई को एक दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन करेंगे। नड्डा के अलावा, आरएमपी अध्यक्ष देवेंद्र फडणवीस, वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी के साथ-साथ गैर-वंशवादी दलों जद (यू), अन्नाद्रमुक और एजीपी के प्रतिनिधि भी इस विषय पर अपने विचार साझा करेंगे।

केंद्रीय मंत्री आर.सी.पी. सिंह संभवत: जद (यू) का प्रतिनिधित्व करेंगे और तांबी दुरई अन्नाद्रमुक का प्रतिनिधित्व करेंगे।

भाजपा राज्य सभा सदस्य, विनय सहस्रबुद्धे ने कहा, “भारत में, 2,700 पंजीकृत और मान्यता प्राप्त दलों में से 50 प्रमुख राजनीतिक दलों में से कम से कम 4/5 वंशवाद आधारित हैं। यह घटना एक मतदाता के लिए उपलब्ध विकल्पों को गंभीरता से कम करती है क्योंकि यह प्रतिस्पर्धा के तत्व को प्रभावित करती है।”

उन्होंने कहा कि इस तरह के वंशवाद संचालित पार्टियों में मौजूदा तंत्र के तहत एक ही परिवार व्यावहारिक रूप से सब कुछ नियंत्रित करती है, पार्टी वित्त, पार्टी सदस्यता, उम्मीदवारी, गठबंधन और राजनीतिक भागीदारी के बारे में निर्णय भी यही लेते हैं। यह पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र के लिए मौत की घंटी का काम करता है।

उन्होंने कहा, “एक पार्टी जो अपने नेताओं के बेटों और बेटियों को उम्मीदवारी दे रही है वह एक अलग बात है और एक परिवार का पार्टी पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करना अलग बात है। बाद वाला लोकतंत्र के लिए सबसे हानिकारक है। कोई भविष्यवाणी कर सकता है कि परिवार के अमुख बच्चा का तीन दशक बाद पार्टी अध्यक्ष बनना निश्चित है और यह गंभीर रूप से आपत्तिजनक है।”

आरएमपी के महानिदेशक रवींद्र साठे ने कहा, “विचार-विमर्श के अंत में विकसित सिफारिशें भारत के चुनाव आयोग को प्रस्तुत की जाएंगी।”

राष्ट्रीय समाचार

देश की शीर्ष 10 में से छह कंपनियों का मार्केटकैप 88 हजार करोड़ रुपए से अधिक बढ़ा, आईसीआईसीआई बैंक टॉप गेनर रहा

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देश की शीर्ष 10 में से छह कंपनियों का मार्केटकैप बीते हफ्ते 88,678.1 करोड़ रुपए बढ़ा है। इसमें आईसीआईसीआई बैंक के बाजार पूंजीकरण में सबसे अधिक इजाफा हुआ है।

इसके अतिरिक्त, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फाइनेंस, एसबीआई और एलएंडटी के मार्केटकैप में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, भारती एयरटेल, एलआईसी, टीसीएस और एचयूएल के बाजार पूंजीकरण में गिरावट दर्ज की गई है।

आईसीआईसीआई बैंक के वैल्यूएशन में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई और इसका मार्केट कैप 29,588.75 करोड़ रुपए बढ़कर 9,95,610.74 करोड़ रुपए हो गया।

एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण 24,718.3 करोड़ रुपए बढ़कर 12,25,981.44 करोड़ रुपए हो गया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केटकैप 12,043.96 करोड़ रुपए बढ़कर 17,83,926.92 करोड़ रुपए हो गया है।

बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 11,580.28 करोड़ रुपए बढ़कर 6,10,081.53 करोड़ रुपए, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का बाजार पूंजीकरण 9,322.93 करोड़ रुपए बढ़कर 9,64,738 करोड़ रुपए और एलएंडटी का बाजार पूंजीकरण 1,423.88 करोड़ रुपए बढ़कर 5,80,550.83 करोड़ रुपए हो गया है।

दूसरी तरफ, भारती एयरटेल का मार्केटकैप 35,615.21 करोड़ रुपए घटकर 11,27,348.09 करोड़ रुपए, लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (एलआईसी) का मार्केटकैप 21,188.74 करोड़ रुपए कम होकर 5,35,537.56 करोड़ रुपए, टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का बाजार पूंजीकरण 11,143.71 करोड़ रुपए घटकर 7,58,206.42 करोड़ रुपए और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) का मार्केटकैप कम होकर 5,321.83 करोड़ रुपए घटकर 5,10,624.92 करोड़ रुपए हो गया है।

बीते हफ्ता शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव भरा रहा। इस दौरान सेंसेक्स 0.39 प्रतिशत बढ़कर 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,056 पर बंद हुआ।

भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होने वाला है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील, कच्चे तेल की कीमत, एफआईआई का रुझान और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से शेयर बाजार की चाल निर्धारित होगी।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अगले हफ्ते निवेशकों की निगाहें रहेंगी। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा था कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं।

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राष्ट्रीय समाचार

मार्केट आउटलुक: भारत-अमेरिका ट्रेड डील, कच्चे तेल की कीमत और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से तय होगी शेयर बाजार की चाल

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भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होने वाला है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील, कच्चे तेल की कीमत, एफआईआई का रुझान और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से शेयर बाजार की चाल निर्धारित होगी।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर अगले हफ्ते निवेशकों की निगाहें रहेंगी। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा था कि भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं।

उनका यह बयान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर से मुलाकात के बाद आया था। इस प्रस्तावित समझौते से दोनों देशों के व्यापारिक संबंध मजबूत होने की उम्मीद है।

अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। अमेरिका ने शुक्रवार को ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसकी वजह ईरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट पर मालवाहक जहाज को निशाना बनाना था। हालांकि, हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमत में बड़ी गिरावट देखने को मिली है और ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर के आसपास बना हुआ है।

घरेलू आर्थिक डेटा भी बाजार की चाल को प्रभावित करेगा। 29 जून को इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट का डेटा जारी होगा। 30 जून को मई का राजकोषीय घाटे और व्यापार संतुलन, 1 जुलाई को जीएसटी, ऑटो सेल्स एवं मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई और 2 जुलाई को सर्विसेज और कंपोजिट पीएमआई और विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े आएगा।

इस हफ्ते सेंसेक्स 0.39 प्रतिशत बढ़कर 77,100.47 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,056 पर बंद हुआ।

इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल की कम कीमतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश में सुधार के संकेतों के कारण इस हफ्ते भारतीय रुपया मजबूत हुआ। हालांकि, निवेशक यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और बदलाव की संभावना को लेकर सतर्क बने रहे, क्योंकि इससे ग्लोबल कैपिटल फ्लो पर असर पड़ सकता है।

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राजनीति

कांग्रेस नेतृत्व में अपने दम पर सरकार बनाने का जोश नहीं, अब तक जनादेश न आना राहुल की असफलता: शर्मिष्ठा मुखर्जी

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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान में अपने दम पर सरकार बनाने का जोश दिखाई नहीं देता है। इसके साथ ही, शर्मिष्ठा ने राहुल गांधी को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में 2029 के चुनावों को लेकर शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, “मैं राजनीतिक अटकलें बिल्कुल नहीं लगाना चाहूंगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटें जीती। राहुल गांधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की थी और उसका एक अच्छा परिणाम आया। दुर्भाग्य यह है कि राहुल गांधी कुछ कार्यक्रम करते हैं, मगर उसके बाद वह फिर गायब हो जाते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “राजनीति 24 घंटा और 365 दिनों का काम है। आप आएं और दो दिन बाद फिर कहीं चले जाएं। कुछ रैलियां करें और लोगों से मिलें, फिर गायब हो जाएं। इस तरह से राजनीति नहीं होती है। आम चुनावों के अलावा भी राज्यों के चुनाव होते हैं। आप सिर्फ गठबंधन करके जीत नहीं सकते हैं।”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी की बेटी ने यह भी कहा कि कांग्रेस को अपने संगठन को मजबूत करना बहुत जरूरी है। मैंने भी कांग्रेस में कुछ दिन काम किया है। मुझे लगता है कि कांग्रेस की सोच यही है कि गठबंधन करके सरकार बनाएं, लेकिन कांग्रेस को अपने संगठन को मजबूत करना चाहिए और अपने बलबूते सरकार बनानी चाहिए। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान में यह जोश दिखाई नहीं देता है।

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, “सिर्फ आप दूसरों की बदौलत जीतेंगे, यह मानसिकता मुझे ठीक नहीं लगती है। कांग्रेस को अपने दम पर मैदान में आना चाहिए और संगठन की अपनी रणनीति होनी चाहिए। दूसरे कंधों पर बंदूक रखकर चलाने वाली रणनीति सही नहीं है।”

इसी बीच, प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी की तुलना पर उन्होंने कहा, “मैं राहुल गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच कोई तुलना नहीं करना चाहूंगी, क्योंकि वह तुलना कहीं न कहीं गलत होगी। 2014 से राहुल गांधी कांग्रेस का चेहरा हैं। उनके नेतृत्व में कुछ राज्यों को छोड़कर कांग्रेस पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। इसलिए तुलना करना सही नहीं है।”

शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी एक लोकप्रिय नेता हैं और उनकी लोकप्रियता जनादेश से ही पता चलती है। राहुल गांधी वह जनादेश अपने और कांग्रेस पार्टी के लिए नहीं ला पा रहे हैं। यह उनकी एक बड़ी असफलता है।

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