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Tuesday,01-September-2026
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राजनीति

आरजीएफ के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं : कांग्रेस

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Rajiv-Gandhi-Foundation

गांधी परिवार के राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा कानूनी प्रावधानों के कथित उल्लंघन की जांच के लिए केंद्र द्वारा एक अंतर-मंत्रालयी समिति गठित करने के बाद कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि आरजीएफ के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, आप कोई भी तंत्र और यंत्र अपना लीजिए, राजीव गांधी फाउंडेशन (आरजीएफ) के पास कुछ छुपाने को नहीं है।

उन्होंने कहा कि आरजीएफ के पास डरने की कोई बात नहीं है और हम यहां कानून का पालन करने वाले व्यक्तियों के रूप में हैं।

अभिषेक मनु सिंघवी ने केंद्र सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि यहां दो तरह का कानून है। सरकार को जो पूछना है, वह पूछ सकती है, लेकिन विवेकानंद फाउंडेशन, इंडिया फाउंडेशन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के प्रवासी मित्रों को भी काफी पैसा मिला है, ऐसे में इन पर नजर क्यों नहीं पड़ती है।

सिंघवी ने कहा कि आरजीएफ को दबाया नहीं जा सकता, वह एनजीओ के रूप में अपना काम जारी रखेगा और वह ट्रक भरकर कागजात सौंपने के लिए तैयार है।

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बुधवार को ट्वीट किया कि गृह मंत्रालय की गठित समिति धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), आयकर अधिनियम और विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) जैसे प्रावधानों के इन फाउंडेशनों द्वारा किए गए कथित उल्लंघन की जांच में समन्वय करेगी।

अधिकारी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय का एक विशेष निदेशक समिति का प्रमुख होगा।

राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना 21 जून 1991 को हुई थी। यह फाउंडेशन कई मुद्दों पर काम करता है, जिसमें साक्षरता, स्वास्थ्य, दिव्यांगता, वंचितों के सशक्तीकरण, आजीविका और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन शामिल हैं। इसके वर्तमान फोकस क्षेत्र शिक्षा, दिव्यांगता और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन हैं।

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, राजीव गांधी फाउंडेशन की चेयरपर्सन हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम बोर्ड के सदस्य हैं।

राष्ट्रीय समाचार

भारतीय शेयर बाजार कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सपाट खुला; सेंसेक्स 76,900 के करीब

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कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को सपाट खुला। इस दौरान सेंसेक्स 25 अंक की मामूली कमजोरी के साथ 76,920 और निफ्टी 29 अंक या 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,037 पर था।

शुरुआती कारोबार में बाजार को सहारा एफएमसीजी, कंजप्शन और मेटल स्टॉक्स से मिल रहा था। सूचकांकों में निफ्टी मेटल और निफ्टी एफएमसीजी टॉप गेनर्स थे। इसके अलावा, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी ऑटो हरे निशान में थे।

इसके अलावा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा, निफ्टी आईटी, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक लाल निशान में थे।

लार्जकैप के साथ स्मॉलकैप भी करीब सपाट थे। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 20 अंक या 0.11 प्रतिशत की गिरावट के कारण 19,910 पर था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 545 अंक या 0.85 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 63,666 पर था।

सेंसेक्स पैक में आईटीसी, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, कोटक महिंद्रा बैंक, इन्फोसिस, एशियन पेंट्स, ट्रेंट, एमएंडएम, टेक महिंद्रा और अल्ट्राटेक सीमेंट्स गेनर्स थे। इंडिगो, बजाज फिनसर्व, एसबीआई, एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस, इटनरल, टीसीएस, सन फार्मा, एचडीएफसी बैंक, पावर ग्रिड, बीईएल, मारुति सुजुकी, एलएंडटी, एचयूएल, एनटीपीसी और टाइटन लूजर्स थे।

ज्यादातर वैश्विक बाजारों में गिरावट के साथ कारोबार हो रहा था। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल लाल निशान में थे, जबकि जकार्ता हरे निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार सोमवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.70 प्रतिशत की गिरावट के साथ और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 0.12 प्रतिशत की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा था।

जानकारों ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और यूएस बॉन्ड यील्ड में भारी बढ़ोतरी जैसे वैश्विक दबाव बाजार पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। यूएस में 10-साल के बॉन्ड की यील्ड 4.77 प्रतिशत और 30-साल के बॉन्ड की यील्ड 5.24 प्रतिशत होना इक्विटी बाजार के लिए नकारात्मक है। ऐसे में सुरक्षित यूएस बॉन्ड की ओर पूंजी जा रही है। पिछले दो दिनों में एफआईआई के कैश मार्केट में 13,025 करोड़ रुपए की इक्विटी बेचने से भी इसकी पुष्टि होती है। इस दौरान निफ्टी के 23,000-25,000 की रेंज में कारोबार करने की उम्मीद है।

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राष्ट्रीय समाचार

जी-20 में भारत ने किया अमेरिका के ग्रोथ एजेंडे का समर्थन, सीतारमण बोलीं-वैश्विक असंतुलन दूर करना जरूरी

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भारत ने जी20 की अमेरिकी अध्यक्षता के तहत आर्थिक विकास, वैश्विक असंतुलन और वित्तीय साक्षरता पर फोकस का समर्थन किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ ‘सकारात्मक और रचनात्मक’ द्विपक्षीय बैठक के बाद यह बात कही।

आईएएनएस को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने कहा कि नई दिल्ली और वाशिंगटन अमेरिकी अध्यक्षता में चर्चा किए जा रहे मुख्य मुद्दों पर एक ही राय रखते हैं।

उन्होंने कहा, “अमेरिकी अध्यक्षता ने विकास को प्राथमिकता बताया है। इसने वैश्विक असंतुलन को एक चिंता के रूप में बताया है। अमेरिका ने वित्तीय साक्षरता को भी बहुत स्पष्ट रूप से उच्च महत्व दिया है, जो वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत प्रिय विषय है। तो इन सभी मुद्दों पर हम अमेरिका के साथ पूरी तरह से हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि जी20 सदस्य अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली चुनौतियों पर खुलकर चर्चा करें। उन्होंने कहा, “ये वो बिंदु हैं जिन पर हम भी निष्पक्ष, खुली चर्चा चाहते हैं। विकास जी20 के वित्तीय ट्रैक के लिए एक केंद्रीय बिंदु है। इसी तरह वैश्विक असंतुलन को भी सुलझाना होगा।”

वित्त मंत्री ने वाशिंगटन द्वारा तय की गई प्राथमिकताओं का स्वागत किया और कहा कि भारत एशविले में चल रही चर्चाओं में सक्रिय योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा, “मैं इन बिंदुओं को उठाने के लिए अमेरिकी अध्यक्षता की सराहना करती हूं, और आज हुई चर्चाओं में हमने योगदान दिया है।”

वित्त मंत्री सीतारमण ने दिन में आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत के लिए बेसेंट से मुलाकात भी की। उन्होंने कहा, “मैं यहां यह भी जोड़ना चाहती हूं कि आज वित्त मंत्री बेसेंट के साथ मेरी बहुत ही सकारात्मक, रचनात्मक द्विपक्षीय चर्चा हुई है।”

उन्होंने इंटरव्यू में बैठक का कोई खास विवरण नहीं दिया। हालांकि, उनके बयान से संकेत मिला कि जी-20 के वित्तीय ट्रैक में विकास को केंद्र में रखने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में असंतुलन को दूर करने की जरूरत पर भारत और अमेरिका के बीच व्यापक सहमति है।

वित्त मंत्री ने जी20 बैठक के दौरान पोलैंड, कतर, दक्षिण कोरिया और रूस के प्रतिनिधियों के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं।

उन्होंने कहा, “पोलैंड, कतर, कोरिया, रूस के साथ भी मेरी बैठकें हुई हैं। ये सभी आज हुईं और बहुत ही सकारात्मक रहीं। सभी के हाथों में भारत के बारे में तथ्य थे और वे भारत के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने के लिए उत्सुक हैं।”

वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ चर्चाओं के बाद आगे और द्विपक्षीय आर्थिक बैठकें होंगी। दक्षिण कोरिया के साथ एक संवाद इस साल के अंत में होगा, जबकि कतर के साथ भी इसी साल संवाद होगा। उन्होंने कहा, “ऐसी कई गतिविधियां हैं जो हमने भारत और अर्थव्यवस्था और वित्त पर द्विपक्षीय जुड़ाव के लिए तय की हैं।”

जी20 बैठक में वित्त मंत्री की भागीदारी ऐसे समय में हो रही है जब भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने बताया कि मैन्युफैक्चरिंग में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि वित्तीय और पेशेवर सेवा क्षेत्र में 12.1 प्रतिशत का विस्तार हुआ है।

वित्त मंत्री ने इन आंकड़ों को वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक मजबूती का सबूत बताया। उन्होंने कहा कि जब भी नई चुनौतियां सामने आएंगी तो सरकार भारत को फायदेमंद स्थिति में लाने के लिए काम करेगी।

वित्त मंत्री सीतारमण ने अपनी विदेश यात्रा कनाडा से शुरू की थी, जहां उन्होंने कनाडा के वित्त मंत्री के साथ बातचीत की। इसके बाद वह फंडिंग एजेंसियों के साथ चर्चा के लिए शिकागो गईं और फिर जी20 बैठक के लिए एशविले पहुंचीं। यहां के कार्यक्रम पूरे करने के बाद वित्त मंत्री न्यूयॉर्क जाएंगी, जहां वह भारतीय बाजार में प्रवेश करने के इच्छुक निवेशकों से मिलेंगी।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

अमेरिकी राजदूत गोर किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जापारोव से मिले, साझेदारी बढ़ाने पर जताई प्रतिबद्धता

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अमेरिका ने किर्गिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा जताई है। अमेरिकी पक्ष ने सोमवार को बिश्केक में किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के कई नए अवसर मौजूद हैं।

अमेरिका के नई दिल्ली में राजदूत और दक्षिण और मध्य एशिया में राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रतिनिधि सर्जियो गोर ने कहा, “बिश्केक में किर्गिज गणराज्य के राष्ट्रपति झापारोव से मुलाकात की। हमारे पास दोनों देशों के लिए मिलकर काम करने के कई बेहतरीन अवसर हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका अगले महीने राष्ट्रपति जापारोव के स्वागत के लिए उत्सुक है। इस दौरान दोनों देश अपनी बढ़ती साझेदारी को और आगे ले जाने की दिशा में बातचीत करेंगे।

दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय सहयोग, निवेश, डिजिटल तकनीक और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई। जापारोव आने वाले समय में अमेरिका की यात्रा पर भी जाने वाले हैं।

इस मुलाकात को मध्य एशिया में अमेरिका की बढ़ती सक्रियता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका और किर्गिस्तान के बीच व्यापार, निवेश, सुरक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

अमेरिका शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) का सदस्य नहीं है। गोर के दौरे को आधिकारिक रूप से किर्गिजस्तान की स्वतंत्रता दिवस की 35वीं वर्षगांठ और विश्व नोमैड गेम्स के उद्घाटन से जोड़ा गया है।

पिछले साल तियानजिन में हुए एससीओ सम्मेलन के दौरान मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की एक साथ तस्वीरें अमेरिका में चर्चा का कारण बनी थीं। ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति और रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव के बीच पीएम मोदी की चीन यात्रा से वॉशिंगटन काफी असहज हो गया था।

विपक्ष और आलोचकों ने ट्रंप पर आरोप लगाया था कि उनकी नीतियों की वजह से भारत अमेरिका से दूर जा रहा है। ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर कहा था कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के पाले में खो दिया है।

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