राजनीति
‘घर-घर राशन’ स्कीम लागू नहीं होने दे रहा राशन माफिया : केजरीवाल
राशन माफिया के तार बहुत ऊपर तक जुड़े हैं। राशन माफिया को खत्म करने के लिए दिल्ली सरकार घर-घर राशन पहुंचाने की स्कीम लागू करना चाहती है। दिल्ली में यह योजना अगले हफ्ते से लागू होने वाली थी। यह योजना लागू हो जाती तो राशन माफिया खत्म हो जाता। हालांकि योजना लागू होने से ठीक एक हफ्ते पहले इसे खारिज करवा दिया गया। रविवार को यह वक्तव्य दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, “लोगों को लगने लगा है कि इस मुसीबत के समय में भी केंद्र सरकार सबसे लड़ रही है। केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी से लड़ रही है। महाराष्ट्र सरकार से लड़ रही है। लक्ष्यद्वीप में लड़ रही है। दिल्ली सरकार से लड़ रही है।”
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने केंद्र सरकार से पूछा कि आप हमसे क्यों लड़ रहे हैं। हम सब भारतवासी हैं यदि हम आपस में लड़ेंगे तो फिर कोरोना से कैसे जीतेंगे। हमें आपस में नहीं सबको मिलकर कोरोना से लड़ना है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “गरीबों को उनका राशन नहीं मिलता था। उनका राशन चोरी हो जाता था। तब हमने गरीबों तक राशन पहुंचाने के लिए लड़ाई लड़ी और हम पर 7 बार बार हमले किए गए। पिछले 75 साल से जनता राशन माफिया की शिकार हो रही है। अगले हफ्ते से दिल्ली में घर-घर राशन की स्कीम शुरू होनी थी। यह क्रांतिकारी योजना थी लेकिन केंद्र सरकार ने यह योजना रुकवा दी है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी स्कीम यह कहकर खारिज की गई है कि हमनें केंद्र सरकार से इस योजना के लिए मंजूरी नहीं ली। लेकिन यह गलत है एक नहीं 5 बार केंद्र सरकार से इस योजना के लिए मंजूरी मांगी है।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुताबिक कानूनन इस योजना को लागू करने के लिए हमें केंद्र से अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। लेकिन हम कोई विवाद नहीं चाहते, इसलिए हमने एक नहीं पांच पांच बार मंजूरी ली।
दिल्ली सरकार ने कहा कि हमने इस योजना का नाम मुख्यमंत्री घर घर राशन योजना रखा था। केंद्र को इस पर आपत्ति थी तो हमने इस योजना से ‘मुख्यमंत्री’ शब्द हटा दिया। हमने केंद्र सरकार की सभी शर्तो को मान लिया फिर भी इस स्कीम को नामंजूर कर दिया गया।
केजरीवाल ने केंद्र सरकार से पूछा है कि यदि देश में पिज्जा, बर्गर, स्मार्टफोन, कपड़ों आदि की होम डिलीवरी हो सकती है तो फिर गरीबों को राशन की होम डिलीवरी क्यों नहीं होनी चाहिए। यह बात सारा देश जानना चाहता है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से कहा कि आपने कहा कि राशन दुकान वालों ने घर घर राशन की योजना के खिलाफ हाईकोर्ट में केस दर्ज कर रखा है। हाईकोर्ट ने राशन दुकानदारों की अपील पर अभी तक इस योजना के खिलाफ स्टे नहीं दिया नहीं दिया, फिर भी क्यों केंद्र और उपराज्यपाल ने इस योजना को रोक दिया।
दिल्ली सरकार के मुताबिक कोर्ट में केंद्र सरकार ने अपना जवाब दाखिल करते हुए हमारी इस योजना के खिलाफ एक भी आपत्ति नहीं दी है। जब कोर्ट में हमारी योजना को लेकर केंद्र सरकार को कोई आपत्ति नहीं है फिर कोर्ट के बाहर इस योजना को क्यों खारिज किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कई ऐसे लोग हैं जो कोरोना के माहौल में राशन की दुकान पर राशन लेने नहीं जाते। वहां भीड़ लगने के कारण लोगों को संक्रमित होने का खतरा रहता है। वहीं कई घरों में खाने का राशन नहीं है। हम एक एक घर में राशन पहुंचाना चाहते थे तो आखिर ऐसे में केंद्र सरकार को क्या आपत्ति है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में यदि उनके अभिभावकों को राशन की लाइनों में लगना पड़ा और संक्रमण बच्चों तक पहुंच जाए तो क्या होगा। वहीं कितने ऐसे बुजुर्ग हैं जो राशन की दुकानों पर नहीं जा सकते। कितनी ऐसी गर्भवती महिलाएं हैं जो राशन की दुकानों पर नहीं जा सकती। हम ऐसे लोगों की मदद करना चाहते हैं।
महाराष्ट्र
कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन में अशांति फैलाने की साजिश का पर्दाफाश, महाराष्ट्र साइबर ऑपरेशन, गुमराह करने में 500 से ज्यादा अकाउंट शामिल

मुंबई: महाराष्ट्र साइबर सेल ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और देश भर में अशांति फैलाने की कॉकरोच जनता पार्टी की साजिश का पर्दाफाश किया है और 500 ऐसे हैंडल की पहचान की है जो देश के बाहर से एक्टिव और सक्रिय थे। इसमें पाकिस्तानी साजिश का भी पर्दाफाश हुआ है। साइबर सेल ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर गलत जानकारी, गलत सूचना अभियान और दुर्भावनापूर्ण कंटेंट फैलाने के मामले में कार्रवाई की है। इसमें 500 ऐसे अकाउंट की पहचान की गई है और उन्हें बंद करने के बाद बंद कर दिया गया है। ये अकाउंट देश में राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव पर बुरा असर डालने में सक्रिय थे। कॉकरोच जनता पार्टी सीजेपी से जुड़े देश भर में विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए, महाराष्ट्र साइबर ने एक ऑपरेशन के दौरान ऐसे अकाउंट की पहचान की है। उनके डेटा का अध्ययन किया गया और डीप फेक वीडियो की जांच में ऐसे वीडियो पाए गए जो एआई और अन्य तरीकों का इस्तेमाल करके बनाए गए थे। इसमें जनता के बीच अशांति फैलाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने की कोशिश शामिल है। असामाजिक तत्व सोशल मीडिया पर ऐसे अकाउंट के जरिए भ्रामक प्रचार कर रहे थे। निगरानी के दौरान, सोशल मीडिया के साथ-साथ एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब सहित अन्य स्रोतों से 429 अकाउंट और आपत्तिजनक कंटेंट हटाए गए, जिनमें भ्रामक कंटेंट था। करीब 100 अकाउंट ऐसे भी मिले जो एआई की मदद से गुमराह करने वाला कंटेंट पोस्ट कर रहे थे। इसमें 140 से ज़्यादा पोस्ट और प्रोफाइल शामिल हैं जो आर्टिफिशियल एआई से बनाए गए थे। एसपी अजय कुमार बंसल ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि गुमराह करने वाले पोस्ट और वीडियो अभी भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं, ऐसे में पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।
महाराष्ट्र
धार्मिक स्थलों के बारे में अहिल्या नगर नगर निगम द्वारा जारी नोटिस को तुरंत रोका जाए और कम से कम 2 से 3 महीने का समय दिया जाना चाहिए: अबू आसिम आज़मी

ABU AZMI
मुंबई: मुंबई के अहलिया नगर में धार्मिक जगहों को लेकर जो प्रस्ताव पास हुआ है, उसे तुरंत रोक देना चाहिए। क्योंकि यह प्रस्ताव रखा गया है कि अहलिया नगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की तरफ से धार्मिक जगहों को लेकर दिए गए 7 दिन के नोटिस के बाद तुरंत एक्शन लिया जाए, उसे रोका जाए और संबंधित संगठनों और नागरिकों को अपने डॉक्यूमेंट्स जमा करने के लिए कम से कम 2 से 3 महीने का समय दिया जाए। यह मांग समाजवादी पार्टी के मुंबई/महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आसिम आज़मी ने डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे को लिखे लेटर में की है। इस मुद्दे पर बोलते हुए अबू आसिम आज़मी ने कहा कि सिर्फ 7 दिनों की परमिशन देना न तो प्रैक्टिकल है और न ही सही। कई धार्मिक जगहें दशकों पुरानी हैं, और उनके डॉक्यूमेंट्स जमा करने और उनकी लीगल स्थिति साफ करने में समय लगता है। बिना सही मौका दिए कोई भी एक्शन लेना ठीक नहीं होगा। इस बारे में मैंने डिप्टी चीफ मिनिस्टर और शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे को लेटर लिखकर उनसे इस सेंसिटिव मामले में दखल देने की अपील की है और एडमिनिस्ट्रेशन को निर्देश दिया है कि वे पूरी जांच और लीगल एक्शन लिए बिना किसी भी धार्मिक जगह के खिलाफ जल्दबाजी में एक्शन न लें। सरकार और प्रशासन की यह ज़िम्मेदारी है कि वे कानूनी और अधिकृत धार्मिक जगहों की सुरक्षा पक्का करें और सभी समुदायों और वर्गों की भावनाओं का सम्मान करते हुए कानून के मुताबिक बिना भेदभाव के फ़ैसले लें। आज़मी ने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि सरकार मामले की गंभीरता को समझते हुए निष्पक्ष, संतुलित और संवेदनशील फ़ैसला लेगी जिससे सामाजिक सद्भाव और शांति कायम होगी।
राष्ट्रीय समाचार
बिहार बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों पर एके 47 से फायरिंग करने वाला पुलिसकर्मी निलंबित

बिहार बंद के दौरान 25 जुलाई को सिवान में हुए बवाल और पुलिस की ओर से एके-47 से फायरिंग के मामले में पुलिस मुख्यालय ने बड़ी कार्रवाई की है। फायरिंग करने वाले सिपाही अभिषेक पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। वहीं, कुछ पुलिसकर्मियों के बीच इस फैसले को लेकर नाराजगी की भी चर्चा है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर संबंधित सिपाही के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। मामले की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने घटना को गंभीर मानते हुए पहले ही संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की थी।
गौरतलब है कि 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान सिवान में प्रदर्शन के बीच हालात तनावपूर्ण हो गए थे। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई थी और स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आई। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा अत्याधुनिक हथियार एके-47 से फायरिंग की गई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने संबंधित सिपाही के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई की। अब पूरे घटनाक्रम की विभागीय जांच कराई जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फायरिंग निर्धारित मानकों और परिस्थितियों के अनुरूप की गई थी या नहीं।
उल्लेखनीय है कि बिहार बंद के दौरान शनिवार को सिवान शहर में प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जमकर हंगामा और पथराव किए गए थे। प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई पत्थरबाजी में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।
पुलिस का कहना था कि भीड़ को नियंत्रित करने और हालात सामान्य करने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी थी। हालांकि, एके-47 से की गई फायरिंग का वीडियो सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद संबंधित सिपाही को निलंबित कर दिया।
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