राजनीति
केजरीवाल ने पीएम मोदी को कहा, धन्यवाद सर
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया है।
पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत पर केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से बधाई मिलने पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा किया।
दरअसल प्रधानमंत्री ने बृहस्पतिवार रात को ट्वीट करके आम आदमी पार्टी को बधाई दी थी। मोदी ने ट्वीट किया था, पंजाब चुनाव में जीत के लिए आम आदमी पार्टी को मेरी ओर से बधाई। पंजाब के कल्याण के लिए केन्द्र की ओर से हर संभव मदद का मैं आश्वासन देता हूं। प्रधानमंत्री ने इस ट्वीट के इसी ट्वीट प्रतिक्रिया में केजरीवाल ने जवाब में कहा, धन्यवाद सर।
हालांकि इस बीच मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली नगर निगम चुनाव टाले जाने को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर हमला भी बोल है उन्होंने कहा कि ये प्रजातंत्र के लिए अच्छे संकेत नहीं है। केंद्र सरकार चुनाव आयोग पर दबाव बना रही है।
गौरतलब है कि प्रचंड बहुमत हासिल की है। पंजाब के पूरे इतिहास में किसी एक पार्टी की ये सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है। इससे पहले 1992 में कांग्रेस ने 87 सीटें जीती थीं लेकिन 2022 में आप की ये जीत सिर्फ नंबर के लिहाज से बड़ी नहीं है बल्कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सुनामी में बड़े-बड़े सियासी दिग्गज धराशायी हो गए। मौजूदा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अपनी दोनों सीट से चुनाव हार गए। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिद्धू भी अपनी सीट नहीं बचा पाए तो दो पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और प्रकाश सिंह बादल को भी हार का सामना करना पड़ा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत और यूएई ने ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को और सुदृढ़ करने के तरीकों पर चर्चा की

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राज्य मंत्री और भारत के लिए विशेष दूत रीम अल हाशमी के साथ बैठक की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की गई और ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को और अधिक सुदृढ़ बनाने के तरीकों पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान, मिस्री और अल हाशमी ने पश्चिम एशिया घटनाक्रम और आपसी हित के वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बताया, “विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने यूएई की राज्य मंत्री और भारत के लिए विशेष दूत रीम अल हाशमी से मुलाकात की। उन्होंने भारत-यूएई संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ को और गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति और आपसी हित के वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।”
इससे पहले, भारत के राजदूत दीपक मित्तल ने आधिकारिक दौरे पर यूएई पहुंचे विक्रम मिस्री का स्वागत किया।
20 अक्टूबर को, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके यूएई समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने मुंबई में एक बैठक की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और व्यापक रणनीतिक तथा आर्थिक साझेदारी को बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत-यूएई संबंध, एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं। बैठक के दौरान विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्रालय (एमईए) में अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम महाजन और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
बाद में विदेश मंत्री ने एक्स पर लिखा, “यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ एक सार्थक बैठक हुई, जिसमें हमने अपने व्यापक संबंधों की विस्तृत समीक्षा की। हमारे सहयोग का दायरा और महत्वाकांक्षा व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों जैसे क्षेत्रों में साफ तौर पर दिखाई देती है। भारत-यूएई संबंध, एक ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के रूप में अपनी उम्मीदों पर खरे उतर रहे हैं।”
वहीं, यूएई के विदेश मंत्रालय ने भी ‘एक्स’ पर बैठक के बारे में जानकारी साझा की। लिखा, “महामहिम शेख अब्दुल्ला बिन जायद ने मुंबई में भारत के विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर के साथ एक विस्तृत बैठक की। इस दौरान उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और भारत के बीच व्यापक रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के नए अवसरों पर चर्चा की। साथ ही, दोनों देशों की विकास और समृद्धि की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का दायरा बढ़ाने पर भी बात हुई।”
शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान का यह भारत दौरा, विदेश मंत्री जयशंकर की हालिया यूएई यात्रा के बाद हुआ।
राष्ट्रीय समाचार
68,500 शिक्षक भर्ती: आरक्षण विसंगति पर अभ्यर्थियों का विधानसभा के सामने प्रदर्शन, पुलिस ने बसों से ईको गार्डन भेजा

उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती 2018 में आरक्षण विसंगति को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। पिछले 63 दिनों से ईको गार्डन में धरना दे रहे सैकड़ों अभ्यर्थियों ने सोमवार को विधानसभा के सामने प्रदर्शन कर सरकार से संशोधित परिणाम जारी करने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की। सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे अभ्यर्थियों ने सड़क पर बैठकर अपना विरोध जताया। बाद में पुलिस ने उन्हें जबरन हटाकर बसों से ईको गार्डन पहुंचा दिया। इस दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प हुई।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों के लिए समान अर्हता मानक अपनाए गए, जबकि ओबीसी वर्ग को आरक्षण का नियमानुसार लाभ नहीं दिया गया। उनका दावा है कि इससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपने अधिकारों से वंचित रह गए। इस मामले में उन्होंने बेसिक शिक्षा नियमावली, उत्तर प्रदेश आरक्षण नियमावली और एनसीटीई की गाइडलाइन की अनदेखी का आरोप लगाया है।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, उन्होंने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और विधान परिषद की सामाजिक न्याय एवं सद्भाव समिति के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। उनका दावा है कि इन संस्थाओं ने उनके पक्ष में संस्तुतियां और आदेश जारी किए हैं। उनकी मांग है कि ओबीसी अभ्यर्थियों को आरक्षित श्रेणी का लाभ देते हुए 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अर्हता के आधार पर परिणाम संशोधित किया जाए और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिले।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह और आशुतोष वर्मा ने बताया कि 10 सितंबर को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह मामला उठा था। बैठक में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाबो देवी, बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मंत्री ने अभ्यर्थियों की मांग मुख्यमंत्री के समक्ष रखने और शासन के निर्देशों से अवगत कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।
अभ्यर्थियों ने पिछले 63 दिनों में ‘दस्तक दो अभियान’ के तहत उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री ओमप्रकाश राजभर, डॉ. संजय निषाद, स्वतंत्र देव सिंह, आशीष पटेल, अनिल कुमार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपे। उनका कहना है कि आश्वासन के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
महिला अभ्यर्थी रंजना जायसवाल ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए अभ्यर्थी तमाम कठिनाइयों के बावजूद न्याय की उम्मीद में धरने पर डटे हैं। धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक और आरक्षण संबंधी अधिकारों तथा नियुक्ति के लिए है। अभ्यर्थियों ने आरक्षण विसंगति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की भी मांग की। उन्होंने कहा कि शासन से ठोस लिखित निर्णय मिलने तक उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा।
राष्ट्रीय समाचार
भारत का अक्टूबर में कोयला उत्पादन सालाना आधार पर 42 प्रतिशत बढ़कर 22.03 मिलियन टन रहा

सरकार ने सोमवार को बताया कि अक्टूबर में कैप्टिव और कमर्शियल खदानों से कोयले का उत्पादन 22.03 मिलियन टन (एमटी) रहा, जो अक्टूबर 2025 के 15.49 एमटी से अधिक है। यह सालाना आधार पर 42 प्रतिशत की वृद्धि है।
पिछले महीने कोयले की आपूर्ति सालाना आधार पर 36 प्रतिशत बढ़कर 21.11 एमटी रही, जो अक्टूबर 2025 के 15.48 एमटी से अधिक है।
कोयला मंत्रालय ने बताया कि इस क्षेत्र में सालाना आधार पर अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले साल की अप्रैल से अक्टूबर की अवधि की तुलना में, कोयला उत्पादन सालाना आधार पर 11.30 प्रतिशत बढ़कर 117.23 एमटी हो गया है, जो कि पहले 105.33 एमटी था। कोयले की आपूर्ति 111.95 एमटी से बढ़कर 124.86 एमटी हो गई है। यह खनन कार्यों में बनी निरंतर तेजी को दर्शाता है।
इस क्षेत्र को और बढ़ावा देते हुए, झारखंड की लोहारी कोयला खदान को अक्टूबर 2026 में खदान खोलने की अनुमति दी गई है। यह खदान कई वर्षों से चालू होने का इंतजार कर रही थी, और इसे मिली मंजूरी मंत्रालय के व्यापार करने में आसानी सुधारों के असर को दर्शाती है।
मंत्रालय ने बताया कि इसके साथ ही, चालू कैप्टिव और कमर्शियल कोयला खदानों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है।
इन खदानों से बढ़ता उत्पादन, आयातित कोयले पर निर्भरता को कम करने, सप्लाई-चेन को मजबूत बनाने और बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बचाने में मदद करेगा। साथ ही, यह औद्योगिक विकास के लिए जरूरी कच्चे माल के मामले में आत्मनिर्भरता बढ़ाकर, सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को भी आगे बढ़ाएगा।
मंत्रालय ने कहा, “ये उत्साहजनक नतीजे बेहतर परिचालन दक्षता, खनन उत्पादकता में वृद्धि और कैप्टिव तथा कमर्शियल कोयला खनन क्षेत्रों में खनन क्षमताओं के अधिक प्रभावी उपयोग को दर्शाते हैं।”
इसके अतिरिक्त, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम करने के प्रयासों के चलते, अगस्त 2026 में भारत का कोयला आयात पिछले साल के इसी महीने के 111.05 मिलियन टन से 5.83 प्रतिशत घटकर 104.57 मिलियन टन रह गया। इस महीने देश का कोयला आयात 6.48 एमटी कम हुआ, जो घरेलू स्तर पर कोयले की बेहतर उपलब्धता और सप्लाई-चेन को मजबूत करने के उपायों को दिखाता है।
मंत्रालय उत्पादन में वृद्धि बनाए रखने, आपूर्ति संबंधी बाधाओं को दूर करने और कोयले की उपलब्धता में सुधार करने पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगा। इसके लिए प्रगतिशील नीतियों, मजबूत नियामक निगरानी और सभी हितधारकों के निरंतर सहयोग का सहारा लिया जाएगा, ताकि देश की बढ़ती ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने में एक भरोसेमंद योगदान सुनिश्चित किया जा सके।
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