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Friday,24-July-2026
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राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत-रोमानिया व्‍यापार मंच को किया संबोधित, इंडिया-ईयू एफटीए के क्रियान्वयन पर दिया जोर

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 24 जुलाई को बुखारेस्ट में भारत-रोमानिया व्‍यापार मंच को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में रोमानिया के राष्ट्रपति निकुसोर डैन, रोमानिया सरकार के सदस्यगण, भारत और रोमानिया के बिजनेस लीडर्स और दोनों देशों के उद्योग संघों के प्रतिनिधि उपस्‍थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि यूरोप के प्रमुख संपर्क बिंदु पर स्थित रोमानिया अपनी रणनीतिक स्थिति, अत्‍यन्‍त कुशल मानव संसाधन, उन्नत औद्योगिक क्षमता और यूरोपीय संघ के साथ सुदृढ़ एकीकरण के कारण भारत का एक स्वाभाविक और महत्त्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। रोमानिया न केवल निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण स्‍थान है बल्कि यह वृहत्‍तर यूरोपीय बाजार का प्रवेश द्वार भी है।

उन्होंने कहा कि इस मंच पर बड़ी संख्या में भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी, रोमानिया में विद्यमान अवसरों के प्रति भारतीय उद्योगों के बढ़ते विश्‍वास और रोमानियाई व्यवसायों के साथ स्थायी साझेदारी बनाने की उनकी इच्छा को व्‍यक्‍त करती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापार और आर्थिक सहयोग भारत और यूरोपीय संघ की समकालीन साझेदारी का प्रमुख आधार हैं। लगभग दो अरब लोगों के संयुक्त बाजार और लगभग 25 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त अर्थव्यवस्था के साथ, भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण आर्थिक साझेदारियों में से एक है। इसका उद्देश्य व्यापारिक एकीकरण को और गहरा करना, निवेश के प्रवाह में तेजी लाना तथा सशक्‍त एवं विविधतापूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं का निर्माण करना है।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एफटीए का शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन अत्यंत महत्त्वपूर्ण होगा। इससे कारोबार के लिए विश्‍वसनीय परिवेश तैयार होगा, मूल्य शृंखलाओं का एकीकरण मजबूत होगा तथा दोनों पक्षों के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्टअप और नवाचारकर्ताओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत विश्‍व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। ‘विकसित भारत 2047’ का हमारा संकल्प, स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का है। इस यात्रा से अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, निवेश और प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत कर व्यवस्था को सरल बनाकर और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) जैसी पहलों के माध्यम से पारदर्शी, विश्‍वसनीय और निवेशकों के अनुकूल कारोबारी वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कदम उठा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत और रोमानिया के बीच ऊर्जा सुरक्षा और ग्रीन ट्रांजिशन (पर्यावरण-अनुकूल परिवर्तन) के क्षेत्र में सहयोग की बहुत गुंजाइश है। रसायन और उर्वरक उद्योग में रोमानिया की क्षमताओं को देखते हुए इस क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं। भारत का विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तेजी से बढ़ता स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और सूचना प्रौद्योगिकी में नेतृत्व, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, साइबर-सिक्योरिटी, रिसर्च और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में रोमानिया की खूबियों के साथ मिलकर काम कर सकता है।

भारत की राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी कंपनियों के लिए ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में भी सहयोग के अवसर हैं, जिनमें पोर्ट, रेलवे, हाईवे, लॉजिस्टिक्स पार्क और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट शामिल हैं। हम फार्मास्यूटिकल्स, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्रों में भी सहयोग को और मजबूत कर सकते हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्‍वास जाहिर किया कि भारत और रोमानिया के कारोबारी समुदाय इन नए अवसरों का फायदा उठाएंगे और उन्हें सफल वाणिज्‍यिक साझेदारियों में बदलेंगे। उन्होंने रोमानियाई कंपनियों से भारत की विकास यात्रा में सक्रिय रूप से शामिल होने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि हमारे कारोबार सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाएं बना सकते हैं, रोजगार पैदा कर सकते हैं, नवाचार को बढ़ावा दे सकते हैं और हमारे लोगों के लिए दीर्घस्‍थायी समृद्धि ला सकते हैं।

राजनीति

अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से पूछा सवाल, सबूत नहीं तो फास्ट ट्रैक कोर्ट का क्या मतलब

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लेते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि जांच एजेंसियां अदालत में पर्याप्त सबूत ही पेश नहीं करेंगी, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह आश्वासन केवल दिखावा साबित हो रहा है।

केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए संसद में कानून लाकर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का आश्वासन दिया था। लेकिन उनके अनुसार, इसी बीच वर्ष 2024 के नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा अदालत में कथित तौर पर यह कहे जाने से कि मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, सरकार के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

आप प्रमुख ने दावा किया कि वर्ष 2024 में नीट पेपर लीक के समय सरकार ने संजीव मुखिया को पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताया था और बड़े स्तर पर उसकी गिरफ्तारी को उपलब्धि के रूप में पेश किया गया था। हालांकि अब यदि सीबीआई अदालत में उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने की बात कह रही है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आखिर इस मामले का वास्तविक मास्टरमाइंड कौन है। उन्होंने सवाल किया कि यदि वही मास्टरमाइंड नहीं है, तो क्या सरकार यह मान रही है कि पेपर लीक हुआ ही नहीं?

केजरीवाल ने प्रधानमंत्री से पूछा कि यदि जांच एजेंसियां अदालत में मजबूत सबूत पेश नहीं करेंगी, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से भी कोई परिणाम नहीं निकलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल घोषणाएं कर रही है, जबकि वास्तविक कार्रवाई के स्तर पर गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देशभर के लाखों छात्र और उनके परिवार पेपर लीक जैसी घटनाओं से प्रभावित हुए हैं। कई छात्रों ने मानसिक तनाव झेला और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आईं। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए ठोस और प्रभावी व्यवस्था तैयार करना होनी चाहिए।

अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा कि देश में पहले से ही पॉक्सो और दुष्कर्म जैसे मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट संचालित हैं, लेकिन कई मामलों में वहां भी वर्षों तक सुनवाई चलती रहती है। उनका कहना था कि केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निष्पक्ष जांच, मजबूत साक्ष्य और दोषियों को सख्त सजा सुनिश्चित करना अधिक आवश्यक है।

केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यदि सरकार की मंशा वास्तव में पेपर लीक माफिया पर कार्रवाई करने की होती, तो जांच एजेंसियां अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश करतीं और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का प्रयास करतीं। उन्होंने केंद्र सरकार से पेपर लीक की घटनाओं पर पारदर्शी जांच कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

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राष्ट्रीय समाचार

नीट पेपर लीक केस: दिल्ली की अदालत ने आरोपी मनोज शिरुरे की जमानत याचिका को किया खारिज

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दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार मनोज शिरुरे की जमानत याचिका खारिज कर दी। इस मामले में सीबीआई ने मनोज शिरुरे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है।

स्पेशल जज (सीबीआई) अजय गुप्ता ने शुक्रवार को दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों पर विचार करने के बाद मनोज शिरुरे की जमानत अर्जी खारिज कर दी।

सीबीआई का आरोप है कि मनोज शिरुरे ने तीन छात्रों को केमिस्ट्री के प्रश्न हासिल कराने में अहम भूमिका निभाई थी। इन तीन छात्रों में एक आरोपी कोचिंग सेंटर संचालक का बेटा भी शामिल था। जांच एजेंसी के अनुसार, शिरुरे ने आरोपी पीवी कुलकर्णी से इन छात्रों को केमिस्ट्री के प्रश्न उपलब्ध कराने में मदद की थी।

सीबीआई ने इस मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और परीक्षा से पहले नीट-यूजी के प्रश्न-पत्र हासिल करने व उन्हें फैलाने में शामिल एक कथित नेटवर्क की जांच कर रही है। सीबीआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले उच्च शिक्षा विभाग से मिली लिखित शिकायत के आधार पर 12 मई को मामला दर्ज किया था।

जांच एजेंसी के अनुसार, पुणे की एजुकेशन कंसल्टेंट मनीषा वाघमारे ने उन छात्रों को इकट्ठा करने में बिचौलिए की भूमिका निभाई, जिन्होंने स्पेशल कोचिंग सेशन में शामिल होने के लिए लाखों रुपए दिए थे। इन सेशन में उन सवालों पर चर्चा की गई और उन्हें लिखवाया गया जो बाद में नीट-यूजी 2026 परीक्षा में आए थे।

वाघमारे ने उन उम्मीदवारों के लिए खास कोचिंग क्लास का इंतजाम किया था, जिन्हें एनटीए की ओर से नियुक्त सीनियर बॉटनी टीचर मनीषा मांढरे पढ़ाती थीं। मनीषा पर बायोलॉजी पेपर लीक मामले में मुख्य साजिशकर्ता (को-मास्टरमाइंड) होने का शक है, जबकि केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी को पेपर लीक नेटवर्क का कथित सरगना (किंगपिन) माना जा रहा है।

पुणे की एकेडमी में फिजिक्स पढ़ाने वाले तेजस हर्षद शाह पर आरोप है कि उन्हें सह-आरोपी मनीषा संजय हवलदार से लीक हुए फिजिक्स के सवाल मिले थे।

एफआईआर दर्ज होने के बाद खास टीमें बनाई गईं और देशभर में कई जगहों पर तलाशी ली गई। इस बीच, कथित गड़बड़ियों की चिंताओं के कारण मूल परीक्षा रद्द होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने 21 जून को नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की थी।

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मौसम

असम में बाढ़ : आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर चेतावनी जारी की

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असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने शुक्रवार को एक एडवाइजरी जारी कर लोगों से शिवसागर जिले में दिखौ नदी से दूर रहने को कहा, क्योंकि पानी का स्तर घटने के बावजूद अभी भी खतरनाक रूप से ऊंचा बना हुआ है।

अधिकारियों ने बताया कि यह चेतावनी तब जारी की गई जब सेंट्रल वॉटर कमीशन (सीडब्ल्यूसी) ने रिपोर्ट दी कि शुक्रवार सुबह शिवसागर में दिखौ नदी में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

सीडब्ल्यूसी के अनुसार, सुबह 9 बजे नदी का जलस्तर 94.26 मीटर था, जो 92.40 मीटर के खतरे के निशान से 1.86 मीटर ऊपर है। हालांकि जलस्तर कम होने लगा है, फिर भी यह गंभीर बाढ़ की श्रेणी में बना हुआ है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।

जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी एक एडवाइजरी में एएसडीएमए ने कहा, “असम के शिवसागर जिले में दिखौ नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे नदी से दूर रहें।”

अधिकारियों ने बताया कि यह चेतावनी शुक्रवार सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक लागू रहेगी और जिला प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

सीडब्ल्यूसी ने यह भी बताया कि भले ही नदी का जलस्तर 2 जुलाई, 2024 को दर्ज किए गए पिछले सबसे ऊंचे बाढ़ स्तर यानी 94.35 मीटर से 0.09 मीटर नीचे है, फिर भी यह नदी के किनारे बसे निचले इलाकों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।

अधिकारियों ने जोखिम वाले इलाकों में रहने वालों से अपील की है कि जब तक बाढ़ की स्थिति में सुधार न हो, वे मछली पकड़ने, नहाने या किसी अन्य गतिविधि के लिए नदी के पास न जाएं।

अधिकारियों ने कहा कि इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमें और जिला प्रशासन नदी की स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं। अगर जलस्तर फिर से बढ़ता है या नई बारिश से स्थिति बिगड़ती है, तो वे जरूरी कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

लोगों से यह भी कहा गया है कि वे आधिकारिक सलाह का पालन करें, अफवाहें न फैलाएं और बाढ़ से जुड़ी किसी भी इमरजेंसी की सूचना तुरंत स्थानीय प्रशासन या आपदा प्रबंधन अधिकारियों को दें।

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