राजनीति
पीएम मोदी देंगे सिक्किम, बंगाल, बिहार और यूपी को सौगात, 29 और 30 मई को करेंगे दौरा
नई दिल्ली, 28 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 और 30 मई को सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। पीएम मोदी सबसे पहले ‘सिक्किम@50: जहां प्रगति उद्देश्य से मिलती है और प्रकृति विकास को पोषित करती है’ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल दौरे पर सिटी गैस वितरण परियोजना की आधारशिला रखेंगे। वहीं, बिहार दौरे पर 48,520 करोड़ रुपए से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और यूपी दौरे पर लगभग 20,900 करोड़ रुपए की कई परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे।
दरअसल, 29 मई को प्रधानमंत्री मोदी सिक्किम का दौरा करेंगे, जहां वे सुबह करीब 11 बजे सिक्किम के 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सिक्किम@50: जहां प्रगति उद्देश्य से मिलती है और प्रकृति विकास को पोषित करती है’ कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। सिक्किम सरकार ने “सुनाउलो, समृद्ध और समर्थ सिक्किम” थीम के तहत पूरे साल चलने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला की योजना बनाई है, जो सिक्किम की सांस्कृतिक समृद्धि, परंपरा, प्राकृतिक सुंदरता और इतिहास को दर्शाती है।
पीएम मोदी सिक्किम में कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे और उनका उद्घाटन करेंगे। इनमें नमची जिले में 750 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाला 500 बिस्तरों का नया जिला अस्पताल, गंगटोक जिले के संगखोला में अटल अमृत उद्यान में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके अलावा, प्रधानमंत्री राज्य के 50 वर्ष पूरे होने पर स्मारक सिक्का, स्मृति सिक्का और डाक टिकट भी जारी करेंगे।
सिक्किम के बाद प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम बंगाल दौरे पर जाएंगे, जहां वह दोपहर करीब 2:15 बजे अलीपुरद्वार और कूचबिहार जिलों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इस परियोजना की लागत 1 हजार 10 करोड़ रुपए से अधिक है और इसका उद्देश्य 2.5 लाख से अधिक घरों को पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी), 100 से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों को गैस आपूर्ति, तथा लगभग 19 सीएनजी स्टेशनों के माध्यम से वाहनों के लिए कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) उपलब्ध कराना है।
सिक्किम और पश्चिम बंगाल दौरे के बाद पीएम मोदी बिहार जाएंगे। वह 29 मई को शाम करीब 5:45 बजे पटना एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। ये टर्मिनल भवन करीब 1200 करोड़ रुपए की लागत से बना है। इसके अलावा, पीएम मोदी 1,410 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बन रहे बिहटा एयरपोर्ट के नए सिविल एन्क्लेव की आधारशिला भी रखेंगे।
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी 30 मई को सुबह करीब 11 बजे बिहार के काराकाट में 48,520 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और राष्ट्र को समर्पित करेंगे। वे यहां एक सार्वजनिक समारोह को भी संबोधित करेंगे। इसके अलावा, पीएम मोदी औरंगाबाद जिले में 29,930 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली नबीनगर सुपर थर्मल पावर परियोजना, चरण-II (3×800 मेगावाट) की आधारशिला रखेंगे, जिसका उद्देश्य बिहार और पूर्वी भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री एनएच-119ए के पटना-आरा-सासाराम खंड को चार लेन का बनाने, वाराणसी-रांची-कोलकाता राजमार्ग (एनएच-319बी) और रामनगर-कच्ची दरगाह खंड (एनएच-119डी) को छह लेन का बनाने और बक्सर और भरौली के बीच एक नए गंगा पुल के निर्माण सहित विभिन्न सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। साथ ही, प्रधानमंत्री सोन नगर-मोहम्मद गंज के बीच 1330 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली तीसरी रेल लाइन को राष्ट्र को समर्पित करेंगे।
बिहार के बाद पीएम मोदी उत्तर प्रदेश के कानपुर के दौरे पर रहेंगे, जहां वह कानपुर नगर में लगभग 20,900 करोड़ रुपए की लागत वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। इनमें कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के चुन्नीगंज मेट्रो स्टेशन से कानपुर सेंट्रल मेट्रो स्टेशन खंड का उद्घाटन भी शामिल हैं, जिसकी लागत 2,120 करोड़ रुपए आई है। इसमें 14 स्टेशन शामिल होंगे, जिनमें पांच नए भूमिगत स्टेशन होंगे, जो शहर के प्रमुख स्थलों और वाणिज्यिक केंद्रों को मेट्रो नेटवर्क में एकीकृत करेंगे। इसके अतिरिक्त, वे जीटी रोड के सड़क चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य का भी उद्घाटन करेंगे।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी गौतमबुद्ध नगर के यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सेक्टर 28 में 220 केवी सबस्टेशन की आधारशिला रखेंगे। वह ग्रेटर नोएडा में इकोटेक-8 और इकोटेक-10 में 320 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाले 132 केवी सबस्टेशनों का भी उद्घाटन करेंगे। साथ ही, प्रधानमंत्री कानपुर में 8,300 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली 660 मेगावाट की पनकी थर्मल पावर एक्सटेंशन परियोजना का उद्घाटन करेंगे।
साथ ही, प्रधानमंत्री आयुष्मान वय वंदना योजना, राष्ट्रीय आजीविका मिशन और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र और चेक भी वितरित करेंगे।
राष्ट्रीय समाचार
एमएलएस: 2-2 से ड्रॉ रहा इंटर मियामी और सैन डिएगो के बीच खेला गया मुकाबला, मेसी ने दागा एक गोल

एमएलएस रेगुलर सीजन में इंटर मियामी सीएफ और सैन डिएगो एफसी के बीच मुकाबला 2-2 की बराबरी पर खत्म हुआ। इंटर मियामी को इस मैच में एक अंक मिला। टीम के लिए कप्तान लियोनेल मेसी और स्टार स्ट्राइकर लुइस सुआरेज ने गोल किए।
मेहमान टीम सैन डिएगो एफसी ने मैच के 12वें मिनट में एंडर्स ड्रायर के गोल की मदद से बढ़त हासिल की। इसके बाद 24वें मिनट में लियोनेल मेसी ने इंटर मियामी की ओर से शानदार गोल दागते हुए स्कोर को 1-1 से बराबर कर दिया। मेसी की फ्री-किक सीधे गोल के ऊपरी बाएं कोने में गई और गोलकीपर उसे रोक नहीं पाया।
यह मेसी का इस सीजन का 20वां गोल रहा। वह एमएलएस 2026 गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे चल रहे हैं। इसके साथ ही मेसी एमएलएस इतिहास के केवल दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने लगातार तीन सीजन में 20 या उससे अधिक गोल किए हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि एलएएफसी के डेनिस बुआंगा ने 2023 से 2025 के बीच हासिल की थी।
मेसी के इस गोल ने गोल्डन बूट की रेस में उनकी बढ़त को और मजबूत कर दिया है; उनके नाम लीग में सबसे ज्यादा 33 गोल योगदान (गोल + असिस्ट) हैं और वह एमएलएस में गोल (20) और असिस्ट (13) के मामले में सबसे आगे हैं। हाफ टाइम तक स्कोर 1-1 रहा, जिसके बाद दूसरे हाफ में इंटर मियामी ने जीत हासिल करने के लिए लगातार 45 मिनट तक हमले जारी रखे।
मेजबान टीम की कोशिशों का फल उन्हें 74वें मिनट में मिला। डी पॉल ने बॉक्स के दाईं ओर सुआरेज को एक सटीक पास दिया, जहां उरुग्वे के दिग्गज फॉरवर्ड ने अपने दाहिने पैर से पहला शॉट लेते हुए गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचा दिया। यह इस रेगुलर सीजन में सुआरेज का 13वां गोल था, जबकि इस असिस्ट के साथ डी पॉल के असिस्ट की संख्या 12 हो गई।
सैन डिएगो ने 82वें मिनट में एक बार फिर स्कोर को 2-2 से बराबर कर दिया। मैच के आखिरी पलों में इंटर मियामी को हमले के कई मौके मिले, लेकिन 90+6वें मिनट में मैच के आखिरी प्ले के दौरान गोलकीपर सेंट क्लेयर ने सैन डिएगो के कीरन सार्जेंट के शॉट को रोककर टीम की हार को टाला। इसके बाद इंटर मियामी अपने अगले एमएलएस मुकाबले के लिए 28 सितंबर को ओहायो के कोलंबस शहर जाएगी। वहां टीम का सामना स्कॉट्समिरेकल-ग्रो फील्ड में कोलंबस क्रू से होगा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
बांग्लादेश के निर्यातकों पर बढ़ा लागत का दबाव, भारत-वियतनाम-चीन से मुकाबले में पिछड़ रहे: रिपोर्ट

ऊर्जा, वित्तपोषण और लॉजिस्टिक्स की बढ़ती लागत के कारण बांग्लादेश के निर्यातक भारत, वियतनाम और चीन जैसे क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बाजार हिस्सेदारी खो रहे हैं। बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती लागत का बोझ निर्यातकों के लिए उठाना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि वे इसका पूरा असर विदेशी खरीदारों पर नहीं डाल पा रहे हैं। इससे निर्यात ऑर्डर घटने और बाजार हिस्सेदारी कम होने का खतरा बढ़ गया है।
उद्योग के अनुमान के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में गैस और बिजली की कीमतों में वृद्धि, मजदूरी, ब्याज दरों और मुद्रा विनिमय दर में गिरावट के कारण उत्पादन लागत में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में बांग्लादेश का वस्तु निर्यात लगभग 5 प्रतिशत घटकर 47.74 अरब डॉलर रह गया। वहीं, इसी अवधि में वियतनाम का निर्यात 16.8 प्रतिशत और चीन का 5.5 प्रतिशत बढ़ा।
उद्योग जगत का कहना है कि कीमत में मामूली अंतर भी ऑर्डर प्रतिस्पर्धी देशों की ओर मोड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ ने भी निर्यातकों पर दबाव बढ़ा दिया है।
रिपोर्ट में एक उद्योग विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया है कि यदि बांग्लादेश का एफओबी (फ्री-ऑन-बोर्ड) मूल्य किसी प्रतिस्पर्धी देश से केवल 1-2 प्रतिशत अधिक हो, तो खरीदार ऑर्डर दूसरी जगह भेज सकते हैं।
बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के एक पूर्व निदेशक के अनुसार, 4 डॉलर कीमत वाले परिधान के 10 लाख पीस के ऑर्डर में केवल 1-2 प्रतिशत कीमत का अंतर 40,000 से 80,000 डॉलर तक का फर्क पैदा कर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में चटग्राम बंदरगाह की नई टैरिफ व्यवस्था के तहत सेवा शुल्क में औसतन 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई। वहीं, 20 फुट के कंटेनर का शुल्क 11,849 टका से बढ़कर 16,243 टका हो गया, जो करीब 37 प्रतिशत की वृद्धि है।
बांग्लादेश निटवेयर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष फजलि शमीम एहसान के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि बैंक पर्याप्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं या वित्तपोषण मंजूर करने में काफी समय लगा रहे हैं, जबकि सरकार लगातार समर्थन देने की अपील कर रही है।
राष्ट्रीय समाचार
एफडीआई के अगले चरण में सिर्फ निवेश नहीं, मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम पर होना चाहिए फोकस: एसोचैम

उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा सोमवार को जारी एक अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति का अगला चरण केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा माहौल बनाने पर केंद्रित होना चाहिए जहां निवेश टिकाऊ बने, उसका विस्तार हो और वह देश के आर्थिक एवं औद्योगिक तंत्र के साथ गहराई से जुड़ सके।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में भारत का एफडीआई परिदृश्य काफी बदल गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2000-01 में 4 अरब डॉलर रहे कुल एफडीआई प्रवाह बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 95 अरब डॉलर तक पहुंच गए हैं। इसी अवधि में एफडीआई इक्विटी निवेश 2 अरब डॉलर से बढ़कर 59 अरब डॉलर हो गया।
अध्ययन में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2000-01 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच भारत को कुल मिलाकर 1.16 ट्रिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ, जबकि एफडीआई इक्विटी निवेश 791 अरब डॉलर रहा। यह रुझान वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत के बढ़ते एकीकरण और एफडीआई नीति में क्रमिक उदारीकरण को दर्शाता है।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल मिंडा ने कहा कि भारत ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया है। अब अगला चरण निवेशकों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करना, संचालन करना और विस्तार करना अधिक आसान बनाने पर केंद्रित होना चाहिए। साथ ही ऐसे निवेशों से देश को मिलने वाले व्यापक आर्थिक लाभों को भी मजबूत करना जरूरी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि एफडीआई अब सेवाओं, विनिर्माण और उभरते क्षेत्रों में भारत के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सेवा क्षेत्र तथा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर में कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह का लगभग एक-तिहाई हिस्सा आया है। इसके अलावा ऑटोमोबाइल, फार्मास्युटिकल्स, रसायन, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), इलेक्ट्रॉनिक्स और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय निवेश हुआ है।
एसोचैम के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. एस.पी. शर्मा ने कहा कि एफडीआई केवल पूंजी ही नहीं लाता, बल्कि तकनीक, वैश्विक बाजारों तक पहुंच और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी नेटवर्क भी उपलब्ध कराता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि निवेश से देश में कितना मूल्य संवर्धन, रोजगार, निर्यात, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी विकसित होती है।
रिपोर्ट में एफडीआई को और प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें निवेशकों के लिए बेहतर आफ्टरकेयर व्यवस्था, सिंगल-विंडो मंजूरी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना, भूमि लागत कम करना, भूमि उपलब्धता बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स और उपयोगिता सेवाओं में सुधार, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा वित्त तक पहुंच को मजबूत करना शामिल है।
इसके अलावा, अध्ययन में प्रौद्योगिकी और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) आधारित निवेश को बढ़ावा देने, निवेश के लिए तैयार औद्योगिक अवसंरचना विकसित करने और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की भी सिफारिश की गई है।
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