राजनीति
पीएम मोदी ने नए मंत्रिमंडल के साथ काम शुरू किया, तकनीकी संस्थानों के निदेशकों के साथ की चर्चा
केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल के एक दिन बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों के नए बैच के साथ काम करना शुरू कर दिया है। इस बीच, उन्होंने गुरुवार को आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी मद्रास, आईआईटी कानपुर और आईआईएससी बैंगलोर जैसे केंद्रीय वित्त पोषित तकनीकी संस्थानों के निदेशकों के साथ भी बातचीत की।
इस वर्चुअल बातचीत में नए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भी हिस्सा लिया। इस बातचीत में 100 से अधिक संस्थानों के प्रमुख प्रधानमंत्री के साथ शामिल हुए।
प्रधानमंत्री ने कोविड के कारण पैदा हुई चुनौतियों का सामना करने की दिशा में इन संस्थानों द्वारा किए गए अनुसंधान एवं विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने तुरंत प्रौद्योगिकी समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में युवा इनोवेटर्स के प्रयासों की भी सराहना की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते परिवेश और उभरती चुनौतियों के साथ तालमेल रखने के लिए उच्चशिक्षा और तकनीकी शिक्षा को अपनाने की जरूरत है। इसके लिए संस्थानों को देश और समाज की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुसार वैकल्पिक और नवाचारी मॉडल विकसित करने तथा नयापन लाने और स्वयं का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमारे उच्च शिक्षण और तकनीकी संस्थानों को चौथी औद्योगिक क्रांति को ध्यान में रखते हुए युवाओं को लगातार व्यवधानों और परिवर्तन के लिए तैयार करने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने ऐसे शिक्षा मॉडल की दिशा में प्रगति करने की आवश्यकता पर जोर दिया जो लचीले, निर्बाध और शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षण के अवसर प्रदान करने में सक्षम हों। उन्होंने कहा कि पहुंच, सामथ्र्य, समानता और गुणवत्ता ऐसे शैक्षिक मॉडलों के प्रमुख मूल्य होने चाहिए।
प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में आए सुधार की सराहना करते हुए इस बात पर जोर दिया कि उच्च शिक्षा का डिजिटलीकरण जीईआर को बढ़ाने में एक बड़ी भूमिका निभा सकता है। इससे छात्रों को अच्छी गुणवत्ता और सस्ती शिक्षा तक आसान पहुंच उपलब्ध होगी।
प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन स्नातक और मास्टर डिग्री कार्यक्रमों जैसे डिजिटलीकरण को बढ़ाने के लिए संस्थानों द्वारा की गई विभिन्न पहलों की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि हमें भारतीय भाषाओं में प्रौद्योगिकीय शिक्षा का इकोसिस्टम विकसित करने और वैश्विक पत्रिकाओं का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद करने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले 25 वर्षों में जब हम स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने का आयोजन करेंगे । आत्मनिर्भर भारत अभियान, भारत के सपनों और आकांक्षाओं का आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि आगामी दशक में प्रौद्योगिकीय और अनुसंधान एवं विकास संस्थान प्रमुख भूमिका निभाएंगे। इस दशक को इंडियाज टेकेड भी कहा जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, रक्षा और साइबर प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भविष्य के समाधान विकसित करने पर ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि उच्च शिक्षण संस्थानों में अच्छी गुणवत्ता का बुनियादी ढांचा उपलब्ध होना चाहिए, ताकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्मार्ट वियरेबल, ऑगमेंटेड रियलिटी सिस्टम और डिजिटल असिस्टेंट से जुड़े उत्पाद की आम आदमी तक पहुंच सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि हमें सस्ती, व्यक्तिगत और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संचालित शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए।
बातचीत के दौरान आईआईएससी बैंगलोर के प्रोफेसर गोविंदन रंगराजन, आईआईटी बंबई के प्रोफेसर सुभासिस चौधरी, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर भास्कर राममूर्ति और आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अभय करंदीकर ने प्रधानमंत्री को प्रस्तुतियां दीं और उन्हें चल रही विभिन्न परियोजनाओं, शैक्षणिक कार्यों और देश में किए जा रहे नए शोध से भी अवगत कराया।
प्रधानमंत्री मोदी को कोविड से संबंधित अनुसंधान के बारे में भी अवगत कराया गया, जिसमें परीक्षण के लिए नई तकनीक विकसित करना, कोविड वैक्सीन के विकास प्रयास विकास, स्वदेशी ऑक्सीजन कंस्ट्रेंटर्स, ऑक्सीजन जनरेटर, कैंसर सेल थेरेपी, मॉड्यूलर अस्पताल, हॉटस्पॉट पूवार्नुमान, वेंटिलेटर, रोबोटिक्स, ड्रोन, ऑनलाइन शिक्षा, बैटरी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र भी शामिल हैं।
प्रधानमंत्री को उन नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों, विशेष रूप से ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के बारे में भी बताया गया, जो अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी की बदलती प्रकृति के अनुसार विकसित किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय समाचार
एलआईसी-एचएफएल भर्ती 2026: मैनेजमेंट ट्रेनी के 50 पदों के लिए आवेदन जारी, 12 नवंबर अंतिम तिथि

लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (एलआईसी-एचएफएल) में नौकरी करने की इच्छा रखने वालों के लिए यह एक शानदार अवसर है। एलआईसी-एचएफएल ने मैनेजमेंट ट्रेनी- मार्केटिंग और सेल्स – फ्रेशर के कुल 50 पदों पर रिक्तियों की घोषणा की है।
एलआईसी-एचएफएल की ओर से मैनेजमेंट ट्रेनी- मार्केटिंग और सेल्स पोस्ट के लिए जारी 50 रिक्तियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया जारी है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 12 नवंबर तक तय की गई है। ऐसे में जो पात्र और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों पर नियुक्त होने के लिए एप्लीकेशन फॉर्म भरना चाहते हैं, वे एलआईसी-एचएफएल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर सकते हैं।
अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त कैंडिडेट्स के पास बातचीत करने की क्षमता और स्थानीय भाषा में अच्छी पकड़, बिजनेस डेवलपमेंट, क्लाइंट रिलेशनशिप, क्लाइंट रिलेशनशिप मैनेजमेंट (सीआरएम), इफेक्टिव कम्युनिकेशन और फील्ड सेल्स का कौशल होना भी जरूरी है। वहीं, सेल्स और बातचीत (नेगोशिएशन) में एक वर्ष का अनुभव वाले को प्राथमिकता दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की जांच के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग, दस्तावेज सत्यापन, आदि के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स को ट्रेनिंग अवधि के दौरान 40,000 से 50,000 रुपए के बीच स्टाइपेंड प्रतिमाह दिया जाएगा। वहीं, स्थायी होने के बाद उम्मीदवारों की कॉस्ट-टू-कंपनी (सीटीसी) 14 लाख रुपए से अधिक प्रतिवर्ष होगी।
कैंडिडेट्स ध्यान दें कि मैनेजमेंट ट्रेनी (मार्केटिंग और सेल्स), कस्टमर बनाने, चैनल डेवलप करने, बिल्डर्स के साथ संबंध बनाने और मार्केट का विस्तार करने के जरिए बिजनेस की ग्रोथ में मदद करेगा। इस रोल में हाउसिंग फाइनेंस सेल्स, डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट, अंडरराइटिंग, कस्टमर रिलेशनशिप मैनेजमेंट और मार्केट डेवलपमेंट का प्रैक्टिकल अनुभव मिलेगा, जिससे ट्रेनी भविष्य में ऑर्गनाइजेशन में मैनेजर की जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार हो सकेगा।
एलआईसी-एचएफएल की ओर से यह एक वर्ष का ट्रेनिंग प्रोग्राम है और इसके बाद उम्मीदवारों को तय शर्तों के आधार पर नौकरी में शामिल किया जा सकता है। सर्विस बॉन्ड की शर्तों के अनुसार उम्मीदवारों को जॉइनिंग की तारीख से कम से कम 2 वर्ष तक कंपनी में काम करना होगा।
कैंडिडेटेस को भर्ती से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए एलआईसी-एचएफएल की आधिकारिक वेबसाइट को चेक करने की सलाह दी जाती है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत की आर्थिक मजबूती को घरेलू मांग और आकांक्षाओं से मिल रहा सपोर्ट : वित्त मंत्री सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को लोगों की आकांक्षाओं और देश के बड़े घरेलू बाजार में मांग से सहारा मिल रहा है। साथ ही, सरकार वित्तीय समावेश, सामाजिक सुरक्षा, कौशल विकास और वित्तीय अनुशासन पर फोकस कर रही है।
देश की आर्थिक राजधानी में एचएसबीसी इंडिया के ‘फर्दरिंग फाइनेंशियल इंक्लूजन’ कार्यक्रम में, सीईओ हितेंद्र दवे के साथ बातचीत के दौरान, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि मध्यम वर्ग के विस्तार से लोगों की खरीदारी की क्षमता बढ़ी है और इससे घरेलू मांग को भी समर्थन मिला है।
वित्तीय सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार के लिए सभी के लिए बीमा सुरक्षा एक उच्च प्राथमिकता बनी हुई है।
उन्होंने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) जैसी योजनाओं का जिक्र किया, जो किफायती प्रीमियम पर बीमा सुरक्षा प्रदान करती हैं। इसके साथ ही उन्होंने अटल पेंशन योजना का भी जिक्र किया, जो नागरिकों को पेंशन कवरेज देती है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2047 तक ‘सभी के लिए बीमा’ हासिल करना है और वह पूरे देश में बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए काम कर रही है।
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि प्रति परिवार 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करने वाली आयुष्मान भारत जैसी पहलों ने लोगों को अपनी संपत्ति या जायदाद बेचे बिना इलाज कराने में सक्षम बनाया है। उनके अनुसार, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के विस्तार से भी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर हुई है।
उन्होंने कहा कि शासन में स्थिरता व्यवसायों को स्पष्टता और आत्मविश्वास देती है, जिससे निरंतर आर्थिक विकास में मदद मिलती है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने विश्व बैंक के उस अनुमान का जिक्र किया, जिसके अनुसार लगभग 50 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि लगातार किए गए नीतिगत प्रयासों और बुनियादी सेवाओं तक बेहतर पहुंच को दर्शाती है।
उन्होंने कहा, “स्कूलों तक पहुंच और स्कूली शिक्षा के बाद कौशल प्रशिक्षण ने गरीबी कम करने में मदद की है।”
भविष्य के रोजगार के अवसरों पर बात करते हुए, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि सरकार युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी नौकरियों के लिए जरूरी कौशल सिखाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
उनके अनुसार, एआई-केंद्रित प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योग की उम्मीदों और कार्यबल की क्षमताओं के बीच के अंतर को कम करने में मदद करेंगे।
इसके अलावा, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि पूंजीगत व्यय सरकार की विकास रणनीति का एक मुख्य स्तंभ बना हुआ है। उन्होंने राजकोषीय घाटे पर कड़ी नजर रखने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “सरकारी खर्च जिम्मेदारीपूर्ण होना चाहिए।”
राष्ट्रीय समाचार
दिवाली से पहले कीमती धातुओं में लौटी तेजी, सोना 0.50 प्रतिशत चढ़ा तो चांदी में 3,500 रुपए की उछाल

कई दिनों से लगातार गिरावट की मार झेल रहे सोने और चांदी के भाव में सप्ताह की शुरुआत के साथ तेजी लौटती दिखाई दी। धनतेरस और दिवाली से ठीक पहले कीमती धातुओं में आई इस रिकवरी ने ज्वेलरी खरीदारों और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालांकि कीमतें अभी भी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से काफी नीचे हैं, लेकिन सोमवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खरीदारी बढ़ने से सोने-चांदी के दाम मजबूत हुए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में सोमवार को सोने और चांदी दोनों में मजबूती देखने को मिली। सोना करीब 0.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ 3,911.60 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी का प्रदर्शन और बेहतर रहा, और इसके भाव 2.24 प्रतिशत चढ़कर 50.380 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गए।
विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह की तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की, जिससे कीमतों को समर्थन मिला।
वहीं, वैश्विक बाजारों की तेजी का असर भारतीय बाजार में भी देखने को मिला। घरेलू बाजार में सोना 1.39 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास, तो वहीं चांदी 1.82 लाख प्रति किलोग्राम के करीब कारोबार करती दिखाई दी।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना सोमवार को अपने पिछले बंद भाव 1,38,485 रुपए से 518 रुपए या 0.37 प्रतिशत चढ़कर 1,39,003 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं दिन के कारोबार में एक समय इसने 694 रुपए या 0.50 प्रतिशत उछलकर 1,39,179 रुपए प्रति 10 ग्राम के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
वहीं दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद भाव 1,79,132 रुपए से 1,962 रुपए यानी 1.09 प्रतिशत चढ़कर 1,81,094 रुपए पर खुला। वहीं दिन के कारोबार में एक समय इसने 3,569 रुपए यानी 1.99 प्रतिशत की उछाल के साथ 1,82,701 रुपए प्रति किलोग्राम का उच्चतम स्तर छुआ।
हालांकि सोमवार की तेजी ने राहत दी है, लेकिन सोना और चांदी अभी भी अपने रिकॉर्ड स्तरों से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। सोना अपने ऑल टाइम हाई से करीब 28 प्रतिशत तक नीचे है, जबकि चांदी में 40 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में होने वाले मिड-टर्म चुनाव, वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता और हालिया भारी गिरावट के बाद निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने से कीमती धातुओं को सहारा मिला है। वहीं पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेत भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं।
बाजार के जानकारों का कहना है कि मंगलवार को होने वाले अमेरिकी मिड-टर्म चुनावों से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। इसके अलावा हाल के दिनों में अमेरिकी शेयर बाजार में आई भारी गिरावट ने भी सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग को बढ़ाया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में सोने-चांदी की दिशा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, डॉलर इंडेक्स, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की चाल से तय होगी। यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है तो कीमती धातुओं में और रिकवरी देखने को मिल सकती है।
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