राजनीति
असम का गमछा पहन कोविड का टीका लगवाने पहुंचे पीएम मोदी, पुडुचेरी और केरल की नर्स ने किया सहयोग
देश में 60 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एम्स पहुंचकर कोविड-19 वैक्सीन की पहली खुराक ली। पुडुचेरी की सिस्टर पी. निवेदा के निर्देशन में प्रधानमंत्री मोदी को भारत बायोटेक का कोवैक्सीन टीका लगाया गया। खास बात है कि प्रधानमंत्री मोदी असम का गमछा पहनकर टीका लगवाने पहुंचे थे। यह गमछा, असम की महिलाओं के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। कई मौकों पर प्रधानमंत्री मोदी को इसे पहने हुए देखा गया है। पुदुचेरी की नर्स सिस्टर पी निवेदा के निर्देशन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन लगवाई। वैक्सीन लगवाने में सहयोग करने वाली दूसरी नर्स केरल की रहीं। प्रधानमंत्री मोदी बिना किसी पूर्व निर्धारित रूट के सुबह-सुबह एम्स पहुंचे, ताकि किसी को दिक्कत न हो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6.25 मिनट पर कोरोना वैक्सीन का टीका लगवाया। आधे घंटे तक उन्हें निगरानी में रखा गया। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी सुबह सात बजे एम्स से अपने 7 लोक कल्याण मार्ग वापस लौटे।
वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा, “मैने एम्स में कोविड-19 वैक्सीन की पहली डोज ली। उल्लेखनीय है कि कैसे हमारे डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने कोविड-19 के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने के लिए तेज गति से काम किया। मैं लोगों से वैक्सीन लेने की अपील करता हूं। आइए, मिलकर हम भारत को कोविड 19 मुक्त बनाएं।”
राष्ट्रीय समाचार
भारत में डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से रोजगार में आएगा बड़ा उछाल, 2030 तक 1 लाख इंजीनियरों की होगी जरूरत: रिपोर्ट

भारत का तेजी से बढ़ता डेटा सेंटर उद्योग आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े रोजगार सृजक क्षेत्रों में शामिल हो सकता है। एक नई रिपोर्ट में मंगलवार को कहा गया कि वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में करीब 1 लाख कुशल पेशेवरों (स्किल्ड प्रोफेशनल्स) की आवश्यकता होगी।
एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की स्थापित डेटा सेंटर क्षमता मौजूदा लगभग 1.5 गीगावाट (जीडब्ल्यू) से बढ़कर दशक के अंत तक 6.5 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं, देश का डेटा सेंटर बाजार 22 अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में अब तक 126 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धताएं हो चुकी हैं। यही वजह है कि डेटा सेंटर उद्योग भारत के सबसे तेजी से बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में शामिल हो गया है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा संस्थान, उद्योग और नीति-निर्माता मिलकर भविष्य के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार नहीं करते हैं, तो कौशल की कमी (स्किल गैप) इस क्षेत्र की तेज रफ्तार वृद्धि में बड़ी बाधा बन सकती है।
एनएलबी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सचिन अलुग ने कहा कि भारत में डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार केवल एक बुनियादी ढांचा परियोजना नहीं, बल्कि देश के युवाओं के लिए राष्ट्र निर्माण का बड़ा अवसर है।
उन्होंने कहा, “भारत जिस तेजी से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उससे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड ऑपरेशंस, ऑटोमेशन, पावर सिस्टम और क्रिटिकल फैसिलिटी मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ पेशेवरों की नई पीढ़ी की मांग तेजी से बढ़ रही है।”
उन्होंने कहा कि यह केवल नौकरियां भरने का मामला नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देने वाले कुशल कार्यबल का निर्माण करना है।
रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को तेजी से अपनाने के कारण एआई इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग, क्लाउड ऑपरेशंस, प्लेटफॉर्म इंजीनियरिंग, डेवऑप्स, एमएलऑप्स और डेटा सेंटर ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग लगातार बढ़ रही है।
अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एआई-आधारित वर्कलोड भारत की कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा बन जाएगा। ऐसे में डेटा सेंटर उद्योग में प्रवेश करने वाले इंजीनियरों के लिए एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की समझ एक महत्वपूर्ण कौशल बनती जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में भी कई नई विशेषज्ञ भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। इनमें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेशंस इंजीनियर, लिक्विड कूलिंग इंजीनियर, एनर्जी ऑप्टिमाइजेशन स्पेशलिस्ट, क्रिटिकल फैसिलिटीज इंजीनियर और पावर सिस्टम एक्सपर्ट जैसे पद प्रमुख हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगली पीढ़ी के एआई-संचालित डेटा सेंटरों को उन्नत कूलिंग सिस्टम, बेहतर ऊर्जा प्रबंधन और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी, जिसके कारण इन विशेषज्ञों की मांग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
फिलिस्तीन के समर्थन में भारत ने दोहराई प्रतिबद्धता, दो राष्ट्र समाधान और यूएन में सदस्यता का किया समर्थन

ब्रुसेल्स में आयोजित फिलिस्तीन डोनर ग्रुप (पीडीजी) की दूसरी मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत ने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपना लगातार समर्थन दोहराया। साथ ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की सदस्यता के लिए फिलिस्तीन की सदस्यता का भी समर्थन किया।
विदेश मंत्रालय की सचिव (सीपीवी एंड ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन ने मीटिंग में भारत का प्रतिनिधित्व किया। यह मीटिंग यूरोपीय कमीशन और फिलिस्तीन अथॉरिटी ने मिलकर स्थानीय समयानुसार सोमवार को आयोजित की थी। मीटिंग में यूरोपीय संघ के सदस्य देशों, फिलिस्तीन और दूसरे जरूरी अंतरराष्ट्रीय साझेदारों और वित्तीय संस्थानों ने भी हिस्सा लिया।
बैठक के दौरान सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि भारत लंबे समय से फिलिस्तीनी लोगों का विश्वसनीय साझेदार रहा है। उन्होंने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति भारत के निरंतर समर्थन और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की सदस्यता के लिए फिलिस्तीन की दावेदारी के समर्थन को दोहराया।
विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, उन्होंने फिलिस्तीन के लोगों के लिए भारत की निरंतर विकासात्मक सहायता, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों और मानवीय मदद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की विकास परियोजनाएं फिलिस्तीन की आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित की जाती हैं और उनका मुख्य फोकस स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता निर्माण तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण पर है।
सचिव ने कहा कि भारत इस समय फिलिस्तीन में स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण और संस्थागत क्षमता निर्माण से जुड़े कई प्रमुख परियोजनाओं पर काम कर रहा है। उन्होंने पुनर्वास, स्वास्थ्य, शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर केंद्रित कई नई परियोजनाओं की भी घोषणा की।
ब्रुसेल्स प्रवास के दौरान सचिव ने संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) की सलाहकार आयोग की आने वाली अध्यक्षता की ओर से आयोजित एक बैठक में भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने एजेंसी और फिलिस्तीन में उसके मानवीय प्रयासों के प्रति भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा, “भारत फिलिस्तीन के लोगों की मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने में ठोस योगदान देने वाला एक प्रतिबद्ध साझेदार बना हुआ है।”
पिछले महीने भारत में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबू शावेश ने विश्वास जताया था कि भारत दो-राष्ट्र समाधान का मजबूत समर्थक है।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में अब्दुल्ला अबू शावेश ने कहा, “हमें पूरा विश्वास है कि भारत दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) का मजबूती से समर्थन करता है। संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तावों पर भारत लंबे समय से फिलिस्तीनी लोगों के पक्ष में मतदान करता रहा है। इसके साथ ही भारत जमीनी स्तर पर भी शांति प्रक्रिया में सक्रिय रूप से निवेश कर रहा है और फिलिस्तीन में कई विकास परियोजनाएं लागू कर चुका है।”
उन्होंने आगे कहा, “एक बेहद महत्वपूर्ण पहल जल्द शुरू होने वाली है। भारत फिलिस्तीन, खासकर वेस्ट बैंक में एक अस्पताल के निर्माण की अहम परियोजना पर काम शुरू करने जा रहा है।”
महाराष्ट्र
पुणे: राज्य में एटीएस का ऑपरेशन तेज़, युवाओं को देश विरोधी साज़िश में शामिल करने की साज़िश का पर्दाफ़ाश

मुंबई, महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) ने ऑपरेशन पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी को पकड़ने के लिए ऑपरेशन तेज कर दिया है। एटीएस ने गैंगस्टर की युवाओं को देश विरोधी गतिविधियों में शामिल करने की साजिश को नाकाम कर दिया है। अब तक उसने करीब 200 युवाओं से पूछताछ की है। ये युवा शहजाद भट्टी गैंग या उसके सोशल मीडिया चैनलों से जुड़े थे। एटीएस ने शहजाद भट्टी के सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़े 66 संदिग्ध युवाओं से भी पूछताछ की है। पुणे पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस स्टेशन और एटीएस ने एक जॉइंट ऑपरेशन के दौरान 66 युवाओं से पूछताछ की है। उनके सोशल मीडिया अकाउंट और दूसरे सोर्स भी कब्जे में ले लिए गए हैं। मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए हैं। एटीएस सूत्रों ने बताया कि शहजाद भट्टी गैंग सोशल मीडिया पर गलत जानकारी देकर युवाओं को गुमराह कर रहा है। इसके साथ ही, वह इन युवाओं को पैसे और दूसरी चीजों का लालच देकर अपने गैंग में शामिल होने के लिए बुला भी रहा है। एटीएस ने दावा किया है कि शहजाद भट्टी गैंग के कोऑर्डिनेटर से पूछताछ की गई है। जांच जारी है, और पूछताछ के बाद कई युवाओं को छोड़ा भी गया है। आज सुबह 7 बजे एटीएस ने एक ऑपरेशन किया जिसमें शहजाद भट्टी के कॉन्टैक्ट्स से पूछताछ की गई। अभी तक एटीएस ने इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया है, जबकि उन पर भी नज़र रखी जा रही है। फिलहाल पुलिस और एटीएस की टीमें उनसे पूछताछ कर रही हैं। वे इन युवाओं को बहला-फुसलाकर देश विरोधी कामों में इस्तेमाल करने की साज़िश में भी शामिल थे, इसलिए एटीएस हर पहलू की जांच कर रही है। इससे पहले एटीएस ने पूरे राज्य से 112 युवाओं से पूछताछ की थी और उससे पहले 57 युवाओं से भी पूछताछ की गई थी, एटीएस सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।
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