अंतरराष्ट्रीय
पीएम मोदी ने आईईडब्ल्यू 2026 का उद्घाटन किया, भारत-यूरोपीय संघ के फ्री ट्रे़ड एग्रीमेंट को सराहा
PM MODI
नई दिल्ली, 27 जनवरी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडिया एनर्जी वीक (आईईडब्ल्यू) 2026 कॉन्क्लेव के चौथे एडिशन का वर्चुअली उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को सभी डील्स की जननी और दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का एक बेहतरीन उदाहरण बताया।
उद्घाटन के बाद प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आप सभी एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी पर चर्चा करने के लिए भारत आए हैं, मैं सभी का स्वागत करता हूं। इंडिया एनर्जी वीक (आईईडब्ल्यू) बहुत कम समय में बातचीत और एक्शन के लिए एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म बन गया है। उन्होंने आगे कहा कि आज भारत एनर्जी सेक्टर के लिए अपार अवसरों की भूमि बन गया है।
इस बात पर जोर देते हुए कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसका मतलब है कि यहां एनर्जी प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ग्लोबल मांग को पूरा करने के लिए बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। आज हम पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के लिए दुनिया के टॉप पांच देशों में से हैं। हमारा एक्सपोर्ट 150 से ज्यादा देशों तक पहुंचता है। भारत की क्षमता आपके लिए बहुत उपयोगी होगी, इसीलिए एनर्जी वीक जैसा प्लेटफॉर्म हमारी पार्टनरशिप को बढ़ावा देने के लिए एक बेहतरीन जगह है।
पीएम मोदी ने कहा कि वह एक बड़े डेवलपमेंट का जिक्र करना चाहेंगे, जिसमें भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच एक बहुत महत्वपूर्ण समझौते के लगभग पूरा होने की बात कही।
उन्होंने भारत-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के बारे में बात करते हुए कहा कि दुनिया इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रही है। इस समझौते ने भारत के 140 करोड़ लोगों और यूरोपियन देशों के करोड़ों लोगों के लिए ज़बरदस्त अवसर लाए हैं।
भारत और ईयू ने एक ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत पूरी कर ली है, जिसे व्यापार बढ़ाने और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस डील की घोषणा आज बाद में होने वाली है।
प्रधानमंत्री ने एफटीए को दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तालमेल का एक बेहतरीन उदाहरण बताया, जो उनके अनुसार, दुनिया की कुल जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत और दुनिया के कुल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि यह समझौता न सिर्फ व्यापार को मजबूत करता है, बल्कि लोकतंत्र और कानून के शासन के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है। इसके अलावा, ईयू के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ब्रिटेन और ईएफटीए के साथ हुए समझौतों को भी पूरा करेगा। इससे व्यापार और ग्लोबल सप्लाई चेन दोनों मजबूत होंगे। मैं इसके लिए भारत के युवाओं और देश के सभी नागरिकों को बधाई देता हूं।
उन्होंने टेक्सटाइल, रत्न और आभूषण, चमड़ा और फुटवियर जैसे सेक्टर और हर दूसरे सेक्टर से जुड़े सभी लोगों को भी बधाई दी।
उन्होंने कहा कि यह ट्रेड डील न सिर्फ भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगी, बल्कि सर्विस से जुड़े सेक्टरों का भी ज्यादा विस्तार होगा। यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हर बिज़नेस और इन्वेस्टर के लिए भारत पर दुनिया का भरोसा और मजबूत करेगा। पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत हर सेक्टर में ग्लोबल पार्टनरशिप पर बड़े पैमाने पर काम कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा, “अगर मैं सिर्फ़ एनर्जी सेक्टर की बात करूं, तो यहां एनर्जी वैल्यू चेन से जुड़े अलग-अलग एरिया में बहुत ज्यादा इन्वेस्टमेंट की संभावना है। उदाहरण के लिए, एक्सप्लोरेशन सेक्टर को ही लें – भारत ने अपने एक्सप्लोरेशन सेक्टर को काफ़ी हद तक खोल दिया है। आप हमारे डीप सी एक्सप्लोरेशन मिशन के बारे में भी जानते हैं। हम इस दशक के आखिर तक अपने ऑयल और गैस सेक्टर में इन्वेस्टमेंट को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य एक्सप्लोरेशन एरिया को एक मिलियन स्क्वायर किलोमीटर तक बढ़ाना है। इसी विजन के तहत, 1.7 मिलियन स्क्वायर किलोमीटर से ज़्यादा के ब्लॉक पहले ही दिए जा चुके हैं। अंडमान और निकोबार बेसिन भी हमारा अगला हाइड्रोकार्बन हब बन रहा है। क्यों? क्योंकि हमने एक्सप्लोरेशन सेक्टर में बड़े सुधार किए हैं। ‘नो-गो’ एरिया को बहुत कम कर दिया गया है।
इंडिया एनर्जी वीक के पिछले एडिशन के दौरान मिले सुझावों और फीडबैक के आधार पर पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने अपने कानूनों और नियमों में सुधार किए हैं। अगर आप भारत के एक्सप्लोरेशन सेक्टर में इन्वेस्ट करते हैं, तो आपकी कंपनी का प्रॉफिट बढ़ना तय है।
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, एनर्जी सेक्टर में भारत को बहुत ज्यादा फायदा पहुंचाने वाली एक और ताकत हमारी बड़ी रिफाइनिंग क्षमता है। उन्होंने कहा, “हम रिफाइनिंग क्षमता में दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं और जल्द ही नंबर एक होंगे। आज, भारत की रिफाइनिंग क्षमता लगभग 260 मिलियन टन है। इसे बढ़ाकर 300 मिलियन टन से ज्यादा करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।”
ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर उन्होंने कहा, “एलएनजी ट्रांसपोर्टेशन के लिए खास जहाजों की जरूरत होती है और हम उन्हें भारत में ही बनाने पर काम कर रहे हैं। हाल ही में भारत में जहाज निर्माण के लिए 70,000 करोड़ रुपए का एक प्रोग्राम शुरू किया गया है। साथ ही, देश के बंदरगाहों पर एलएनजी टर्मिनल बनाने में भी निवेश के कई मौके हैं। एलएनजी के लिए बड़ी पाइपलाइनों की भी जरूरत है।”
उन्होंने कहा कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क भारत के कई शहरों तक पहुंच गया है और सरकार दूसरे शहरों को भी तेज़ी से जोड़ रही है और इसे निवेश के लिए बहुत आकर्षक सेक्टर बताया। प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत की आबादी इतनी बड़ी है, और हमारी अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है। ऐसे भारत में पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स की मांग भी लगातार बढ़ने वाली है। इसलिए, हमें एक बहुत बड़े एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत होगी। और इसमें आपका निवेश भी आपको काफी ग्रोथ देगा। इन सबके अलावा, भारत में डाउनस्ट्रीम एक्टिविटीज़ में भी निवेश के कई मौके हैं।”
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत अब ‘रिफॉर्म्स एक्सप्रेस’ पर सवार है और हर सेक्टर में तेज़ी से सुधार लागू कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश घरेलू हाइड्रोकार्बन उत्पादन को बढ़ावा देने और ग्लोबल सहयोग के लिए एक पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल माहौल बनाने के लिए सुधार कर रहा है।
उन्होंने कहा, “भारत अब एनर्जी सिक्योरिटी से आगे बढ़कर एनर्जी इंडिपेंडेंस के मिशन पर काम कर रहा है… हमारा एनर्जी सेक्टर हमारी आकांक्षाओं के केंद्र में है। इसमें 500 बिलियन डॉलर के निवेश का मौका है। मैं आपको इस आह्वान के साथ आमंत्रित करता हूं — मेक इन इंडिया, इनोवेट इन इंडिया, स्केल विद इंडिया, इन्वेस्ट इन इंडिया।”
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, यूएई के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री सुल्तान अहमद अल जाबेर, कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन, साथ ही अफ्रीका, मध्य पूर्व, मध्य एशिया और ग्लोबल साउथ के उच्च पदस्थ मंत्री दक्षिण गोवा जिले के बेटुल गांव में उद्घाटन समारोह में मौजूद रहे। आईईडब्ल्यू का मकसद एनर्जी सिक्योरिटी को बढ़ाना, इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करना, और डीकार्बनाइजेशन के लिए असरदार, स्केलेबल तरीकों को बढ़ावा देना है, जिन्हें डेवलपमेंट के अलग-अलग स्टेज वाली इकॉनमी अपना सकती हैं।
इस तीन-दिवसीय इवेंट में अमेरिका, यूरोप, मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे, जो ग्लोबल एनर्जी डिप्लोमेसी में आईईडब्ल्यू के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है। आईईडब्ल्यू को उम्मीद है कि 120 से ज्यादा देशों से 75,000 से ज़्यादा एनर्जी प्रोफेशनल्स इसमें शामिल होंगे।
अंतरराष्ट्रीय
कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।
कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।
इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।
अंतरराष्ट्रीय
मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।
सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”
इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।
गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”
गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”
अंतरराष्ट्रीय
ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।
स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।
इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।
ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।
हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
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