राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में आधार को लेकर पीआईएल, केवल छह साल तक के बच्चों का आधार बनाने की मांग
नई दिल्ली, 9 अप्रैल : सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की है। जिसमें उन्होंने मांग की है कि भारत में आधार बनवाने की प्रक्रिया केवल छह साल तक के बच्चों तक ही सीमित हो। उनका कहना है कि अब बड़ों का आधार बनाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि भारत में पहले ही 144 करोड़ यानी 99 प्रतिशत लोगों के आधार बन चुके हैं।
याचिका में यह भी बताया गया है कि अब जो बड़ों का आधार बन रहा है, उसका फायदा कुछ विदेशी लोग उठा रहे हैं। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और रोहिंग्या घुसपैठिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर जाकर पैसे देकर फर्जी आधार बनवा रहे हैं। इसके चलते देश में फर्जी दस्तावेजों की संख्या बढ़ रही है और यह सुरक्षा व जनसंख्या संतुलन के लिए भी खतरा है।
अश्विनी उपाध्याय ने यह भी कहा कि छह साल से ऊपर के लोगों के आधार के लिए अब तहसीलदार या एसडीएम के ऑफिस में ही आवेदन किया जाए। इससे सभी फर्जी आधार बनाने वालों पर नियंत्रण रखा जा सकेगा। पहले भारत में आधार केवल तहसील पर बनता था, लेकिन अब सीएससी पर आधार बनवाने से इस प्रक्रिया में ढील और घुसपैठियों का फायदा हुआ है।
इसके अलावा, याचिका में मांग की गई है कि सीएससी या तहसील में जहां भी आधार बनता है, वहां स्पष्ट रूप से डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाए। बोर्ड पर लिखा होना चाहिए कि फर्जी आधार बनाना और बनवाना गंभीर अपराध है और पकड़े जाने पर पांच साल की सजा हो सकती है। यह नियम राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और जन्म प्रमाण पत्र जैसे अन्य दस्तावेजों पर भी लागू किया जाए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि आधार, राशन कार्ड या अन्य दस्तावेज के लिए आवेदन करते समय व्यक्ति से एक अंडरटेकिंग ली जाए। इसमें व्यक्ति को लिखित रूप से कहना होगा कि उसने जो जानकारी दी है वह सही है और वह जानता है कि फर्जी दस्तावेज बनाना गंभीर अपराध है। इससे भविष्य में धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आएगी।
अश्विनी उपाध्याय ने यह भी मांग की है कि फर्जी दस्तावेज बनाने वालों को कॉन्करेंट सजा नहीं, बल्कि लगातार सजा दी जाए। भारत में वर्तमान में कनकरेन्ट सजा होती है, मतलब एक साथ सभी धाराओं की सजा शुरू हो जाती है और कुल सजा कम हो जाती है। उन्होंने सुझाव दिया है कि अगर पांच धाराएं हों, तो एक पूरी होने के बाद दूसरी शुरू हो, ताकि सजा का प्रभाव और डर लोगों में हो।
उनका तर्क है कि फर्जी दस्तावेज जैसे आधार, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, जन्म प्रमाण पत्र आदि से देश की आंतरिक सुरक्षा, संस्कृति, भाईचारा और जनसंख्या संतुलन पर खतरा है। इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से तुरंत कार्रवाई की मांग की है कि छह साल से बड़े बच्चों का आधार बनाना रोका जाए। केवल उन बच्चों का आधार बने जिनके माता-पिता या दादा-दादी का आधार पहले से मौजूद हो। इससे फर्जीवाड़ा रोकने और देश की सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिलेगी।
याचिका में कहा गया है कि अब केवल छह साल तक के बच्चों का ही आधार बने और बाकी सभी वयस्कों के लिए तहसील या एसडीएम ऑफिस में ही प्रक्रिया हो। इससे फर्जी आधार की समस्या कम होगी और देश में सुरक्षा, कानून-व्यवस्था मजबूत बनेगी।
राष्ट्रीय
मध्य प्रदेश में दुर्लभ कछुए के अंतरराष्ट्रीय तस्कर रहेंगे जेल में

भोपाल, 11 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में दुर्लभ कछुआ की तस्करी करने वाले आरोपी जेल में ही रहेंगे, क्योंकि सागर के अपर सत्र न्यायालय ने दोनों आरोपियों की अपील खारिज करते हुए सजा और अर्थ दंड को बरकरार रखा है। दरअसल, स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) ने अत्यंत दुर्लभ जलीय जीव रेड-क्राउंड रूफ कछुओं की अंतर्राष्ट्रीय तस्करी के मामले में शेखर दास और मोहम्मद सुल्तान को गिरफ्तार किया था, जिस पर उन्होंने अपील की थी।
इस अपील को विशेष न्यायालय द्वारा खारिज किया गया है। सजा एवं अर्थदंड को बरकरार रखा है। न्यायालय ने आरोपियों की अपील को निरस्त करते हुए उन दोनों को 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा भुगतने के लिए केंद्रीय जेल सागर भेजने के आदेश जारी किए हैं। दोनों आरोपियों पर 10-10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है।
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स और वन विभाग की संयुक्त टीम ने वर्ष 2017 में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य एवं उसके पारिस्थितिकी क्षेत्र से दुर्लभ लाल तिलकधारी कछुओं तथा पैंगोलिन शल्क की तस्करी का पर्दाफाश किया था। जांच में सामने आया कि आरोपी एक अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा थे, जो चंबल नदी से इन दुर्लभ कछुओं को एकत्र कर कोलकाता तथा भारत-बांग्लादेश सीमा के माध्यम से विदेशों में अवैध रूप से भेजता था। गिरोह द्वारा वन्यजीव तस्करी के साथ हवाला के जरिये अवैध वित्तीय लेनदेन का नेटवर्क भी संचालित किया जा रहा था।
स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्य प्रदेश द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, बयानों और जांच रिपोर्ट के आधार पर विशेष न्यायालय सागर ने 29 मार्च 2022 को दोनों आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधन 2022) के उल्लंघन का दोषी पाते हुए 3 वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसके विरुद्ध आरोपियों ने अपील की थी।
अपीलीय न्यायालय ने एसटीएसएफ द्वारा की गई विवेचना और प्रस्तुत साक्ष्यों को तथ्यपरक मानते हुए कहा कि विशेष न्यायालय के निर्णय में कोई वैधानिक त्रुटि नहीं है। अपीलीय न्यायालय ने दोनों आरोपियों की अपीलें निरस्त कर उन्हें सजा भुगतने के लिए केंद्रीय जेल सागर भेजने के आदेश जारी कर दिए हैं।
दुर्घटना
जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर चार वाहनों की टक्कर, 18 अमरनाथ यात्री हुए घायल

जम्मू, 13 जुलाई: रामबन जिले में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर सोमवार को भीषण सड़क हादसा हो गया। अधिकारियों ने बताया कि इस सड़क हादसे में अमरनाथ यात्रा के 18 यात्री घायल हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, रामबन के चंदरकोट में लंगर पॉइंट पर पहलगाम जा रहे काफिले में शामिल दो एसआरटीसी बसों, एक कार और एक प्राइवेट बस की टक्कर हो गई।
अधिकारियों के मुताबिक, पहले एसआरटीसी की बस (जेके 01वाई-1044) दूसरी एसआरटीसी (जेके 01 वाई-1052) बस से टकरा गई। टक्कर की वजह से दूसरी बस एक कार (जेके21के-8115) से जा टकराई और फिर उस कार ने एक प्राइवेट बस (जेके02 सीएल-5499) को टक्कर मार दी। 4 वाहनों में टक्कर के कारण 18 अमरनाथ यात्री घायल हो गए।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने सभी 18 घायल तीर्थयात्रियों को इलाज के लिए तुरंत रामबन के ज़िला अस्पताल पहुंचाया। अधिकारियों ने बताया कि सभी को मामूली चोटें आई हैं और उनकी हालत स्थिर है।
अभी तक 10 घायलों की पहचान हुई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले कमलेश राजपूत के 23 वर्षीय बेटे हर्ष राजपूत, सुरेश गुप्ता के 18 वर्षीय बेटे विशाल गुप्ता, हीरा लाल शंकर के 23 वर्षीय बेटे पंकज सुवनकर, महाराष्ट्र के यवतमाल के जीवन मोवाडे के 29 वर्षीय बेटे सुहास जीवन मोवाडे, राजस्थान के गंगानगर के रतन के 45 वर्षीय बेटे भारत भूषण, शिव के 51 वर्षीय बेटे विनोद कुमार घायल हुए हैं। वहीं, राजस्थान के बीकानेर के सत्तासर के रतन, राजस्थान के विनोद बागला की 48 वर्षीय पत्नी किरण, पंजाब के अक्षय कुमार की 50 वर्षीय पत्नी सीमा रानी, राजस्थान के शिव रतन के 67 वर्षीय बेटे पवन कुमार और राजस्थान के जनता सिंघा के 41 वर्षीय बेटे गंगा सिन्हा भी हादसे में घायल हुए हैं। बाकी 8 घायलों की पहचान अभी नहीं हो पाई है।
हादसे के बाद जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक कुछ देर के लिए प्रभावित हुआ। पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और आगे की जांच चल रही है।
3 जुलाई को शुरू हुई श्री अमरनाथ यात्रा 57 दिनों के बाद 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के त्योहारों के साथ संपन्न होगी। इस साल की यात्रा शुरू होने के बाद से, कश्मीर हिमालय में समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा मंदिर में 2.45 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए हैं।
अपराध
कर्नाटक: ब्लैकमेल कर व्यापारी से 2.77 करोड़ रुपए वसूलने के आरोप में यूथ कांग्रेस नेता और उसका साथी गिरफ्तार

मंगलुरु, 9 जून: कर्नाटक के मंगलुरु में जबरन वसूली का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने एक प्रमुख व्यापारी को ब्लैकमेल करने और लगभग दो साल में 2.77 करोड़ रुपए वसूलने के आरोप में यूथ कांग्रेस के एक पदाधिकारी और उसके साथी को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान मंगलुरु यूथ कांग्रेस के महासचिव निजाम और जितेश के तौर पर हुई है। आरोप है कि जितेश ने पहले व्यापारी को अपने जाल में फंसाया और बाद में उसकी अश्लील तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल करके उसे ब्लैकमेल किया। पुलिस ने बताया कि जितेश ने शुरू में 35 लाख की मांग की और वीडियो को पीड़ित की पत्नी को दिखाने की धमकी दी। अपनी बदनामी के डर से व्यापारी ने चेक के जरिए यह रकम दे दी।
जब पैसों की मांग जारी रही तो व्यापारी ने मदद के लिए निजाम से संपर्क किया, हालांकि पुलिस का आरोप है कि निजाम ने मदद करने के बजाय जितेश का साथ दिया और जबरन वसूली के इस रैकेट में शामिल हो गया।
इसके बाद दोनों ने आत्महत्या की एक झूठी कहानी रची। निजाम ने मई 2024 में व्यापारी को बताया कि जितेश ने आत्महत्या कर ली है और सुसाइड नोट में पीड़ित का नाम लिखा है। कहानी को सच साबित करने के लिए आरोपियों ने जितेश की मौत और अंतिम संस्कार की तस्वीरें दिखाईं और व्यापारी को आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी दी।
गिरफ्तारी और सामाजिक बदनामी के डर से व्यापारी पैसे देता रहा। पुलिस ने बताया कि 2024 से 2026 के बीच पीड़ित से कुल 2.77 करोड़ रुपए वसूले गए। यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब जून 2026 में व्यापारी ने जितेश को मंगलुरु में जिंदा देखा। जिस व्यक्ति को वह मरा हुआ समझ रहा था, उसे जिंदा देखकर वह हैरान रह गया और उसने उरवा पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने निजाम और जितेश दोनों को गिरफ्तार कर लिया। मामले की और जानकारी के लिए आगे की जांच चल रही है। इस बीच गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर मंगलुरु और पूरे कर्नाटक के कई राजनीतिक नेताओं के साथ निजाम की तस्वीरें वायरल हो गई हैं।
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