राजनीति
यूपी में ओवैसी बोले, मुस्लिम खुद बनें नेता
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष के व सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यूपी में 60 सालों से मुस्लिम सिर्फ धर्म निरपेक्षता के नाम पर वोट दे रहे हैं। उसे मिला क्या है। उसे खुद नेता बनने की जरूरत है। ओवैसी यूपी के दौरे पर हैं और गुरुवार को वह बाराबंकी के कटरा मोहल्ले में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को अब जागरूक होना चाहिए और किसी के पीछे चलने के बजाय खुद को नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा की योगी और मोदी सरकार सेक्युलिजम को कमजोर करने का कार्य कर रही है। वजीरे आला धीरे-धीरे देश को हिन्दु राष्ट्र में तबदील करने की तैयारी कर रहे हैं। देश में मुसलमानों की मौतों का वीडियो बनाकर वायरल कर हमारी हिम्मत को कमजोर किया जा रहा है। बाराबंकी में जब रामसनेहीघाट में बनी 100 साल पुरानी मस्जिद को शहीद कर दिया गया। एक एसडीएम द्वारा यह गुस्ताखी इसलिए की गई कि उसे अजान अच्छी नहीं लगती थी। यह खेल मुख्यमंत्री योगी ने करवाया। बीच में भाजपा में बदलाव होना था, योगी को मुख्यमंत्री पद से हटाना था, तो उस बाबा ने एसडीएम को आगे कर मस्जिद को शहीद करवाकर सरगर्मी तेज कर दी। एसडीएम पर कार्रवाई करने के बजाए सीडीओ बना दिया गया।
उन्होंने सपा बसपा कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि इन पार्टियों ने कभी भी मुसलमानों के हक के लिए आवाज नहीं उठाई। इन लोगों ने मुसलमानों का वोट ले लिया है पर उनकी कभी परवाह नहीं की। इन पार्टियों ने नागरिकता संशोधन कानून और तीन तलाक का भी विरोध नहीं किया।
ओवैसी ने कहा कि आजादी के बाद से हमारा समाज वोट के लिए ही इस्तेमाल किया जाता रहा है। सपा, बसपा, कांग्रेस सभी ने हमारा उपयोग किया है। जिस जाति का नुमाइंदा नहीं होगा, किसी भी सरकार में उसकी नहीं सुनी जाएगी। उन्होंने कहा कि आप अपना नुमाइंदा चुनिए और मजलिस में अपनी ताकत को मजबूत करिए। हम आपकी आवाज बनकर हक की लड़ाई संसद से कानून तक लड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि वोट के बल पर अपने लोगों को जमीन और कुर्सी पर बैठाने की जुर्रत करिए। आप ताकतवर बन जाएंगे तो लोग आपके कदमों में गिड़गिड़ाएंगे। ओवैसी ने कहा सभी पार्टियां हमारी कौम का वोट लेकर सरकार बनाती हैं और हमारी कौम के बच्चों को जेल में डालकर सड़ाने का काम करती हैं। यूपी में एक मजबूत पार्टी के तौर पर उभरेंगे।
ओवैसी ने कहा कि हम केवल 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी नहीं कर रहे। हम प्रदेश में एक मजबूत पार्टी के तौर पर उभर कर सामने आएंगे।
राष्ट्रीय समाचार
राजस्थान: झालावाड़ में ब्रेक फेल होने पर बस ने कई लोगों कुचला, 4 की मौत (लीड-1)

राजस्थान के झालावाड़ जिले में हुई दुर्घटना में दो और लोगों की मौत हो गई है। इससे मरने वालों की संख्या बढ़कर चार पहुंच गई। सभी लोग पातले पीर की दरगाह पर जियारत के बाद वापस लौट रहे थे। इसी दौरान, एक निजी बस ने टक्कर मारी थी।
स्थानीय थाना अधिकारी बुद्धराम ने बताया कि कुछ लोग एक निजी बस से कोरटा जिला के रामगंजमंडी से झालावाड जिले के सारोला थाना क्षेत्र में स्थित पातला पीर दरगाह पर आए थे। एक बस की चपेट में आने से कुल 7 लोग घायल हुए थे। इनमें से चार लोगों की मौत हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि अन्य सभी घायलों का इलाज जारी है। शवों को भी कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस घटना को लेकर बस चालक को हिरासत में लिया गया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि लोगों से पूछताछ के दौरान पता चला कि बस के ब्रेक फेल हुए थे।
फिलहाल, मृतकों की पहचान जायरीन अब्दुल हामिद, जायरीन रेहान, तालिब और अल्फेज के रूप में हुई है। वहीं, पत्रकारों से बात करते हुए एक घायल व्यक्ति ने कहा, “यह एक प्राइवेट बस थी। हो सकता है कि बस के ब्रेक फेल हो गए हों, लेकिन मुझे पक्का नहीं पता कि क्या हुआ। बस हम पर चढ़ गई।”
एक व्यक्ति ने बताया कि जियारत से लौटते समय सभी लोग अपनी बस में बैठने के लिए जा रहे थे। तभी अचानक दूसरी बस ने कई लोगों को कुचल दिया। इसमें 10 से 15 लोग घायल हुए। करीब 6-7 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि दूसरी बस के ब्रेक फेल हुए थे और वह कई लोगों को रौंदते हुए चली गई। कई लोगों को चोटें आईं। किसी के हाथ और किसी के पैर में चोट लगी।
राष्ट्रीय समाचार
बाजार की पाठशाला: डेट फंड्स क्या होते हैं, इनमें कैसे होता है निवेश? जानिए इनके फायदे और किन जोखिमों का रखना चाहिए ध्यान

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के बीच इक्विटी फंड काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन हर निवेशक ज्यादा जोखिम लेकर शेयर बाजार में पैसा लगाना नहीं चाहता, ऐसे निवेशकों के लिए डेट फंड्स एक बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। अगर आप भी डेट फंड्स के बारे में विस्तार से समझना चाहते हैं कि ये क्या हैं, इनमें निवेश कैसे होता है और इनके फायदे-नुकसान क्या हैं, तो चलिए हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
दरअसल, डेट फंड म्यूचुअल फंड की ऐसी श्रेणी हैं, जो मुख्य रूप से बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियों, ट्रेजरी बिल, कॉरपोरेट डेट और अन्य निश्चित आय वाले साधनों में निवेश करते हैं, जिनका उद्देश्य निवेशकों के पैसे को अपेक्षाकृत स्थिर आय वाले साधनों में लगाकर रिटर्न हासिल करना होता है।
डेट फंड को आसान भाषा में समझें तो ये ऐसे म्यूचुअल फंड हैं, जिनमें आपका पैसा कंपनियों या सरकार द्वारा जारी किए गए डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता है। जब कोई कंपनी या सरकार बॉन्ड जारी करके पैसा जुटाती है, तो निवेशक को उस रकम पर ब्याज मिलता है। डेट फंड इसी तरह के कई साधनों में निवेश करके एक पोर्टफोलियो तैयार करते हैं।
डेट फंड की अलग-अलग श्रेणियां होती हैं। इनमें लिक्विड फंड, ओवरनाइट फंड, अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंड, शॉर्ट ड्यूरेशन फंड, मीडियम ड्यूरेशन फंड, कॉरपोरेट बॉन्ड फंड और गिल्ट फंड जैसी कैटेगरी शामिल हैं। हर कैटेगरी की अवधि, जोखिम और रिटर्न की संभावना अलग हो सकती है।
डेट फंड में निवेश करना म्यूचुअल फंड की अन्य योजनाओं की तरह ही आसान है। निवेशक किसी म्यूचुअल फंड कंपनी, म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म या निवेश ऐप के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार डेट फंड चुन सकता है। निवेश करने से पहले फंड की कैटेगरी, पोर्टफोलियो में शामिल प्रतिभूतियां, क्रेडिट क्वालिटी, औसत अवधि, खर्च अनुपात और जोखिम स्तर को समझना जरूरी है।
निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार एकमुश्त निवेश या एसआईपी के जरिए भी डेट फंड में पैसा लगा सकता है। हालांकि, डेट फंड चुनते समय केवल पिछले रिटर्न को देखकर फैसला करना सही नहीं है। निवेश का उद्देश्य और वह पैसा कितने समय के लिए निवेश करना है, इसके आधार पर फंड का चुनाव करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर डेट फंड को पूरी तरह सुरक्षित निवेश मान लिया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। डेट फंड में जोखिम इक्विटी फंड की तुलना में अलग प्रकार का होता है। इसमें मुख्य रूप से क्रेडिट रिस्क और ब्याज दर का जोखिम महत्वपूर्ण होते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, क्रेडिट रिस्क तब होता है जब फंड जिस कंपनी के बॉन्ड में निवेश करता है, उसकी वित्तीय स्थिति खराब हो जाए या वह ब्याज अथवा मूलधन चुकाने में समस्या का सामना करे। वहीं ब्याज दर बढ़ने पर लंबी अवधि वाले बॉन्ड की कीमत प्रभावित हो सकती है। इसलिए ब्याज दरों में बदलाव का असर डेट फंड के रिटर्न पर भी पड़ सकता है।
वहीं, डेट फंड के फायदे की बात करें तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक को अपने पोर्टफोलियो में स्थिर आय वाले साधनों का एक्सपोजर मिलता है। इक्विटी फंड की तुलना में इनमें आमतौर पर बाजार की तेज उतार-चढ़ाव वाली स्थितियों का असर कम होता है। इसी वजह से कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी के साथ डेट फंड का इस्तेमाल विविधीकरण के लिए करते हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डेट फंड उन निवेशकों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं जिनका निवेश लक्ष्य कुछ महीनों से लेकर कुछ वर्षों तक का है और जो अपने पैसे को सीधे किसी एक बॉन्ड या फिक्स्ड डिपॉजिट में लगाने के बजाय विभिन्न डेट इंस्ट्रूमेंट्स में फैलाना चाहते हैं। फंड मैनेजर अलग-अलग प्रतिभूतियों में निवेश करके जोखिम को फैलाने की कोशिश करता है।
यह कहना सही नहीं होगा कि डेट फंड हमेशा एफडी से ज्यादा रिटर्न देते हैं। बैंक एफडी में ब्याज दर पहले से तय होती है, जबकि डेट फंड का रिटर्न बाजार की परिस्थितियों, ब्याज दरों और फंड के पोर्टफोलियो पर निर्भर करता है। इसलिए डेट फंड में मिलने वाला रिटर्न निश्चित नहीं होता।
यही कारण है कि डेट फंड को गारंटीड रिटर्न वाला उत्पाद समझकर निवेश नहीं करना चाहिए। निवेश करने से पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित फंड किस तरह की प्रतिभूतियों में पैसा लगा रहा है और उसका जोखिम स्तर क्या है।
डेट फंड का एक महत्वपूर्ण नुकसान यह है कि इनमें रिटर्न की गारंटी नहीं होती। ब्याज दरों में बदलाव, बॉन्ड की क्रेडिट क्वालिटी में गिरावट या बाजार की परिस्थितियों के कारण फंड का एनएवी बढ़ या घट सकता है। कुछ डेट फंड में कम अवधि के बावजूद जोखिम हो सकता है, जबकि लंबी अवधि वाले डेट फंड ब्याज दरों में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
इसके अलावा, डेट फंड में निवेश करने पर फंड मैनेजमेंट और अन्य खर्चों का असर भी रिटर्न पर पड़ता है। इसलिए किसी भी फंड का चयन करते समय केवल उसका पिछला प्रदर्शन देखना पर्याप्त नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे निवेशक जो अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी की तुलना में अपेक्षाकृत कम उतार-चढ़ाव वाले निवेश को शामिल करना चाहते हैं, उनके लिए डेट फंड एक विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, सही फंड का चुनाव निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार होना चाहिए। छोटी अवधि के लक्ष्य के लिए अलग तरह के डेट फंड और लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए अलग कैटेगरी उपयुक्त हो सकती है।
डेट फंड में पैसा लगाने से पहले क्रेडिट क्वालिटी, ब्याज दर का जोखिम, फंड की अवधि, पोर्टफोलियो में शामिल बॉन्ड, खर्च अनुपात और फंड की कैटेगरी को जरूर समझें। यह भी ध्यान रखें कि डेट फंड बैंक एफडी की तरह निश्चित रिटर्न या मूलधन की गारंटी नहीं देते।
राजनीति
बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर ‘वंदे मातरम’ के अपमान पर जताया दुख, बिना शर्त माफी की मांग

नई दिल्ली, 16 अगस्त: भाजपा विधायक और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के अपमान पर गहरा दुख जताया है।
नॉर्थ 24 परगना जिले के नैहाटी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चटर्जी ने अपने पत्र में मांग की कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की मशहूर रचना का पूरा वर्जन गाने से जुड़ी घटना के लिए भारत के नागरिकों और खासकर पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना शर्त माफी मांगी जाए।
सुमित्रो चटर्जी ने लिखा, “जब पूरा देश मातृभूमि की पूजा में लगा हुआ था, तब ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में हुई घटनाएं सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक गलती को बेशर्मी से दोहराना थीं।”
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस कार्यकर्ता वंदे मातरम का पूरा वर्जन गा रहे थे, तो सोनिया गांधी की “साफ दिख रही बेचैनी, नाराजगी और उसे रोकने की बार-बार की कोशिशों” से उन्हें बहुत दुख हुआ।
चटर्जी ने लिखा, “एक आम भारतीय नागरिक, एक देशभक्त और सबसे बढ़कर ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार का सीधा वंशज होने के नाते, मैं आज गहरे दुख, खालीपन और पीड़ा के साथ यह पत्र लिख रहा हूं।”
इस गीत के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए चटर्जी ने अरबिंदो का हवाला दिया और लिखा, ‘यह मंत्र दिया गया और एक ही दिन में पूरा देश देशभक्ति के धर्म में दीक्षित हो गया। अरबिंदो ने इसे सिर्फ एक मंत्र नहीं, बल्कि देशभक्ति का धर्म बताया था।
चटर्जी ने कहा कि इस मंत्र से प्रेरणा लेकर खुदीराम बोस समेत अनगिनत निडर क्रांतिकारियों ने हंसते-हंसते देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने लिखा, “आज स्वतंत्र भारत की धरती पर उसी मंत्र ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण पाठ के प्रति आपकी असहिष्णुता उन लाखों शहीदों के बलिदान का गंभीर अपमान प्रतीत होती है।”
उन्होंने आजादी की लड़ाई में ‘वंदे मातरम’ की भूमिका को भी याद किया और राष्ट्रवादी नेता बिपिन चंद्र पाल का जिक्र किया, जिन्होंने लिखा था कि बंगाल के बंटवारे के बाद यह गीत हर क्रांतिकारी की जुबान पर था। चटर्जी ने कहा कि ‘स्वदेशी’, ‘बहिष्कार’ और ‘वंदे मातरम’ आजादी की लड़ाई के जीते-जागते पर्याय बन गए थे।
भाजपा विधायक ने 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी द्वारा पूरे गीत को गाए जाने, 1909 में राजद्रोह के मुकदमे के दौरान बाल गंगाधर तिलक द्वारा समर्थकों को इसे गाते हुए सुनने और 1938 में उस्मानिया यूनिवर्सिटी में राष्ट्रवादी छात्र आंदोलन का भी जिक्र किया।
उन्होंने 1896 में कलकत्ता में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने का भी जिक्र किया और गीत के “जादुई शब्दों” तथा बाधाओं को तोड़ने और दिलों को छूने की उनकी ताकत के बारे में टैगोर की बातों को दोहराया।
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