राजनीति
भारत में अब तक देखे गए म्यूटेंट पर असरदार हैं हमारे टीके : विशेषज्ञ
भारत के शीर्ष दो कोविड-19 विशेषज्ञों, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी. के. पॉल और एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि भारत में अब तक देखे गए म्यूटेंट पर हमारे टीके प्रभावी हैं। कोविड-19 टीकों के बारे में लोगों की विभिन्न शंकाओं को दूर करते हुए, इन विशेषज्ञों ने भारत में उपयोग किए जाने वाले दो टीकों (वैक्सीन) – सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के कोविशील्ड और भारत बायोटेक के कोवैक्सिन के बारे में लोगों की ओर से पूछे जाने वाले विभिन्न सवालों के जवाब दिए।
इन दो मेड इन इंडिया टीकों को इस साल आपातकालीन उपयोग के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) की मंजूरी मिली, जिसके बाद यहां 16 जनवरी से दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरूआत हुई।
पॉल और गुलेरिया दोनों ने सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों को झूठी और निराधार करार दिया, जिनमें कहा जा रहा है कि टीके लेने के बाद हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है या टीके लेने के बाद लोग मर जाते हैं। इन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों और दूरदराज के ब्लॉकों में कुछ लोगों में इस प्रकार की गलत धारणा है।
लोगों द्वारा सामान्य तौर पर पूछे जाने वाले सवाल, जैसे अगर मुझे कोविड संक्रमण हो गया है, तो कितने दिनों के बाद मैं टीका लगवा सकता हूं?
इस पर डॉ. गुलेरिया ने कहा, नवीनतम दिशानिर्देशों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिस व्यक्ति को कोविड-19 का संक्रमण हुआ है, वह ठीक होने के दिन से तीन महीने बाद टीका लगवा सकता है। ऐसा करने से शरीर को मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी और टीके का असर बेहतर होगा।
यह पूछे जाने पर कि क्या टीका लेने के बाद रक्त का थक्का बनना आम बात है, गुलेरिया ने कहा, यह पहले भी देखा गया है कि सर्जरी के बाद रक्त का थक्का बनना भारतीय आबादी में अमेरिका और यूरोपीय आबादी की तुलना में कम होता है। वैक्सीन प्रेरित थ्रोम्बोसिस या थ्रोम्बोसाइटोपेनिया नाम का यह दुष्प्रभाव भारत में बहुत दुर्लभ है, जो यूरोप की तुलना में बहुत कम अनुपात में पाया जाता है। इसलिए इससे डरने की जरूरत नहीं है। इसके लिए उपचार भी उपलब्ध हैं, जिन्हें जल्दी निदान होने पर अपनाया जा सकता है।
इस सवाल का जवाब देते हुए डॉ. पॉल ने कहा, इस जटिलता के कुछ मामले सामने आए हैं, खासकर एस्ट्रा-जेनेका वैक्सीन के संबंध में। यह जटिलता यूरोप में हुई, जहां यह जोखिम उनकी जीवनशैली, शरीर और आनुवंशिक संरचना के कारण उनकी युवा आबादी में कुछ हद तक मौजूद पायी गई। लेकिन, मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमने भारत में इन आंकड़ों की व्यवस्थित रूप से जांच की है और पाया है कि रक्त के थक्के जमने की ऐसी घटनाएं यहां लगभग नगण्य हैं – इतनी नगण्य कि किसी को इसके बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। यूरोपीय देशों में, ये जटिलताएं हमारे देश की तुलना में लगभग 30 गुना अधिक पाई गई है।
क्या एलर्जी वाले लोगों को टीका लगाया जा सकता है?, इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, पॉल ने कहा, अगर किसी को एलर्जी की गंभीर समस्या है, तो डॉक्टरी सलाह के बाद ही कोविड का टीका लगवाना चाहिए। हालांकि, अगर यह केवल मामूली एलर्जी – जैसे सामान्य सर्दी, त्वचा की एलर्जी आदि का सवाल है, तो टीका लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
इस पर डॉ. गुलेरिया ने कहा, एलर्जी की पहले से दवा लेने वालों को इन्हें रोकना नहीं चाहिए, टीका लगवाते समय नियमित रूप से दवा लेते रहना चाहिए। यह भी जानना महत्वपूर्ण है कि टीकाकरण के कारण उत्पन्न होने वाली एलर्जी के प्रबंधन के लिए सभी टीकाकरण स्थलों पर व्यवस्था की गई है। अत: हम सलाह देते हैं कि यदि आपको गंभीर एलर्जी हो, तो भी आप दवा लेते रहें और जाकर टीकाकरण लगवाएं।
राष्ट्रीय समाचार
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका, गुरुवार को सुनवाई की उम्मीद

दिल्ली में जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध-प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के दिल्ली पुलिस के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। वकील लक्ष्य सैनी और तुषार गुप्ता की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जंतर-मंतर लंबे समय से राजधानी में विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा है। याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होने की उम्मीद है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि लोगों को विरोध-प्रदर्शन के लिए शहर से दूर स्थित वैकल्पिक जगहों पर भेजा जाता है, तो आम नागरिकों के लिए अपनी आवाज उठाना और विरोध दर्ज कराना मुश्किल हो सकता है। इससे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार केवल कागजों तक सीमित होकर रह जाने का खतरा है।
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया था कि जंतर-मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया गया है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थलों की पहचान भी की है।
न्यायमूर्ति अमित महाजन की एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कहा था कि वैकल्पिक स्थलों की पहचान सुप्रीम कोर्ट के पिछले सप्ताह के आदेश के अनुरूप की गई है। उन्होंने दलील दी कि शीर्ष अदालत ने उपयुक्त स्थलों की पहचान कर उन्हें निर्धारित करने को कहा था और अधिकारियों ने उसी के अनुसार कार्रवाई की है।
दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली स्थित सीबीडी मैदान को प्रदर्शन के लिए नए निर्धारित स्थलों के रूप में पेश किया है।
यह मामला भारतीय युवा कांग्रेस (आईवाईसी) के अध्यक्ष उदय भानु चिब की उस याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन की अनुमति देने से दिल्ली पुलिस के इनकार को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान एएसजी चेतन शर्मा ने दलील दी कि जंतर-मंतर को निर्धारित धरना स्थल के रूप में डी-नोटिफाई किए जाने के बाद उदय भानु चिब की याचिका निष्फल हो गई है। हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि याचिका में उठाई गई अन्य मांगें अब भी विचारणीय हैं। उन्होंने इन मांगों पर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया।
दिल्ली पुलिस के वकील ने नोटिस जारी करने की मांग का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति महाजन ने याचिका में उठाई गई तीन प्रार्थनाओं पर नोटिस जारी किया।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले सक्षम अधिकारियों से राजधानी में शांतिपूर्ण और वैध विरोध-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थलों की पहचान करने और उन्हें निर्धारित करने पर विचार करने को कहा था। शीर्ष अदालत ने इन स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं और आवश्यक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया था।
राजनीति
सुप्रिया सुले ने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी पर जताई चिंता, केंद्र से रिहाई की मांग

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी तथा उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप कर दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की।
सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “जंतर-मंतर पर तिरंगा थामना कोई अपराध नहीं है। सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी और उन्हें तिहाड़ जेल भेजे जाने की खबर चिंताजनक है। मैं गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप करने और उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित करने का अनुरोध करती हूं।”
उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए। असहमति लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर भारतीय को बिना भय के अपनी आवाज उठाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर अतिक्रमण के मामले में बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। जानकारी के अनुसार, सौरव दास को तिहाड़ जेल नंबर-2 और आशुतोष रांका को जेल नंबर-4 में रखा गया है। वहीं, इसी मामले में गिरफ्तार किए गए अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
सीजेपी नेताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभिष्ट हेला ने बताया कि अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा है। उन्होंने दावा किया कि यह आदेश पर्याप्त न्यायिक विचार किए बिना पारित किया गया और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की गई।
अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने केवल आशंकाओं के आधार पर कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह मान लिया कि आरोपी कुछ कर सकते हैं और इसी आधार पर उन्हें पांच दिनों के लिए जेल भेज दिया गया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोगों को ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने और तिरंगा लहराने के लिए जेल भेजा जाना चिंताजनक है।
पुलिस के अनुसार, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर पुलिस बैरिकेड्स पार करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। तीनों नेता चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करने जा रहे थे। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।
दिल्ली पुलिस ने हाल ही में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान बनाए गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
सऊदी अरब में भारतीयों की तादाद ठीक-ठाक, दूतावास कर रहा हरसंभव मदद : विदेश मंत्रालय

भारत ने सऊदी अरब पर हो रहे मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के मुताबिक नागरिक या सार्वजनिक ठिकानों को निशाना बनाना किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं है। बिगड़ते हालात के भारतीय दूतावास की तरफ से अपने नागरिकों को पहुंचाई जा रही हरसंभव मदद का भी उल्लेख किया।
बुधवार को पाक्षिक प्रेस ब्रीफिंग में एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रियाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हुए हमले को लेकर कहा, “सऊदी अरब पर कई हमले हुए हैं। कल अरामको मुख्यालय पर भी हमला हुआ। हम सऊदी अरब में आम लोगों के बुनियादी ढांचे पर हुए ऐसे सभी हमलों की निंदा करते हैं। हमारा मानना है कि ये हमले तुरंत बंद होने चाहिए। ये बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं। हम सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की जनता और सरकार के साथ खड़े हैं, और हमें उम्मीद है कि इस इलाके में जल्द ही शांति और सामान्य स्थिति बहाल होगी।”
प्रवक्ता ने वहां रह रहे भारतीयों की मदद के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “सऊदी अरब में हमारा दूतावास भारतीय समुदाय के लगातार संपर्क में है और उनकी भलाई के लिए एडवाइजरी जारी की है। हवाई अड्डों पर हमलों के कारण उड़ानों के शेड्यूल पर असर पड़ा है, जिससे भारतीय एयरलाइंस, खासकर रियाद, दम्मम, मदीना और जेद्दा से आने-जाने वाली उड़ानें प्रभावित हुई हैं। लेकिन कुछ सऊदी एयरलाइंस आ जा रही हैं। दूतावास यात्रियों और फंसे हुए लोगों को ताजा जानकारी दे रहा है। कह सकते हैं कि विकल्प तो हैं लेकिन साथ में दिक्कतें भी मौजूद हैं।”
हवाई अड्डे हमले में पीड़ितों, भारतीय प्रवासियों और धार्मिक यात्रा को लेकर पूछे सवाल पर जायसवाल ने कहा, “10 अक्टूबर के हमले में 12 लोग घायल हुए थे, जिनमें से एक की दुर्भाग्य से मौत हो गई। परिवार की इच्छानुसार, दूतावास की मदद से रियाद में उनका अंतिम संस्कार किया गया। बाकी 11 घायलों में से तीन को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि आठ अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से चार आईसीयू में हैं। दूतावास के अधिकारी लगातार उनसे मिल रहे हैं और पीड़ित परिवारों के संपर्क में हैं। वहां भारतीय प्रवासियों और यात्रियों की संख्या ठीक-ठाक है और हम विदेश में अपने नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा की खातिर हर संभव मदद करने को तत्पर हैं।”
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