राष्ट्रीय समाचार
हमारी पार्टी विचारों का सम्मान करती है : भाजपा नेता अजीत गोपछड़े
मुंबई, 6 सितंबर। भाजपा नेता अजीत गोपछड़े ने शनिवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी आदर्शों वाली पार्टी है। हम मतों का आदर करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि पार्टी में शामिल सभी नेता आदर्शों का पालन करें, उससे परे जाने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं करें।
उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी का सिद्धांत ही सेवा है। हम लोग एक-दूसरे की सेवा करने और उन्हें ऊंचा उठाने की कोशिश में विश्वास करते हैं। हम हमारी पार्टी में जल्द ही सेवा पखवाड़ा भी शुरू करने जा रहे हैं। इससे हम अपनी पार्टी में शामिल अन्य नेताओं की उन्नति के बारे में विचार करेंगे। जल्द ही हम लोग यहां पर ‘क्रीडा उत्सव’ भी शुरू करेंगे। ऐसा करके हम लोग देश में एक स्वस्थ राजनीतिक माहौल तैयार करने की कोशिश करेंगे। हम लोग आगामी दिनों में देशभर में एक सेवा पखवाड़े की शुरुआत करेंगे।
भाजपा नेता ने कहा कि हम लोग ना सिर्फ सेवा पर लेक्चर देते हैं, बल्कि उसे जमीन पर उतारने की भी कोशिश करते हैं। मान लीजिए, अभी कई राज्य बाढ़ से प्रभावित हैं। हम लोग इन प्रभावित राज्यों में रिलीफ कैंप स्थापित कर रहे हैं। ऐसा करके हम लोग प्रभावितों तक मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हो।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि जो राज्य मौजूदा समय में बाढ़ से प्रभावित नहीं हैं, हम वहां पर सांसद खेलकूद महोत्सव का भी आयोजन कर रहे हैं। इसके अलावा, हम प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए वैक्सीनेशन की भी शुरुआत कर रहे हैं। यह सभी काम पिछले लंबे समय से कर रहे हैं। यह हमारी पार्टी का संस्कार है, जिसे हम हर कीमत पर धरातल पर उतारकर रहेंगे।
साथ ही, उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की ओर से आरक्षण पर लिए गए फैसले की तारीफ की। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रयासों के परिणामस्वरूप ही यह सुनिश्चित हो पाया है कि मराठा समुदाय के लोगों को भी आरक्षण मिले। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि इस आरक्षण को लेकर मराठा और ओबीसी समुदाय के बीच किसी भी प्रकार का मतभेद पैदा नहीं हो सके।
भाजपा नेता ने कहा कि अब तक जितने भी मुख्यमंत्री रहे, सभी ने आरक्षण को लेकर सिर्फ आश्वासन ही दिया। किसी ने भी किसी भी प्रकार का सराहनीय कदम नहीं उठाया। लेकिन, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तारीफ की जानी चाहिए कि उन्होंने ना सिर्फ मराठा समुदाय के लोगों को आरक्षण दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि इसे लेकर राज्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति नहीं पैदा हो।
राजनीति
सुषमा स्वराज की पुण्यतिथि पर बंसुरी स्वराज ने लिखा, “समय आगे बढ़ता रहता है पर कुछ खालीपन कभी नहीं भरता”

भाजपा सांसद बंसुरी स्वराज ने गुरुवार को अपनी मां सुषमा स्वराज को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि समय आगे बढ़ता रहता है लेकिन कुछ रिक्त स्थान कभी नहीं भर पाते।
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मां सुषमा स्वराज। समय आगे बढ़ता रहता है, लेकिन कुछ खालीपन कभी नहीं भरते। आपकी यादें, आपकी शिक्षाएं और आपने मुझमें जो मूल्य स्थापित किए हैं, वे हर कदम पर मेरा मार्गदर्शन करते हैं। आपकी सातवीं पुण्यतिथि पर आपको मेरी सादर श्रद्धांजलि। ओम शांति।”
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भारत की सबसे सम्मानित राजनीतिक नेताओं में से एक हैं, जिन्हें उनकी विशिष्ट सार्वजनिक सेवा, सशक्त भाषण कला और शासन के प्रति दयालु दृष्टिकोण के लिए याद किया जाता है।
14 फरवरी, 1952 को हरियाणा के अंबाला में जन्मीं स्वराज ने पंजाब विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और कम उम्र से ही छात्र राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लेने लगीं। उन्होंने जनता पार्टी से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और 1977 में हरियाणा विधानसभा के लिए चुनी गईं, जहां वे राज्य सरकार में सबसे कम उम्र की मंत्रिमंडल मंत्रियों में से एक बनीं।
उन्होंने 1984 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ज्वाइन किया और धीरे-धीरे पार्टी में आगे बढ़ते हुए कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक और संसदीय पदों पर आसीन हुईं। अपने करियर के दौरान, उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा दोनों की सदस्य के रूप में कार्य किया और सूचना एवं प्रसारण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और संसदीय कार्य सहित कई महत्वपूर्ण मंत्री पद संभाले थे।
1998 में, स्वराज ने दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनकर इतिहास रच दिया, हालांकि उनका कार्यकाल संक्षिप्त ही रहा। बाद में वे भाजपा की सबसे प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं में से एक बनकर उभरीं और 2009 से 2014 तक लोकसभा में विपक्ष की नेता रहीं।
उनका सबसे उल्लेखनीय कार्यकाल 2014 से 2019 के बीच रहा, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में भारत की विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। इस दौरान, उन्होंने विदेश मंत्रालय को अधिक सुलभ बनाने के लिए व्यापक प्रशंसा अर्जित की और अक्सर विदेशों में कठिनाइयों का सामना कर रहे भारतीयों की सहायता के लिए सोशल मीडिया का उपयोग किया। उनकी त्वरित प्रतिक्रियाओं और नागरिक केंद्रित कूटनीति ने भारत की वैश्विक छवि को बढ़ाया और उन्हें सभी राजनीतिक दलों के बीच प्रशंसा प्राप्त हुई।
2016 में किडनी स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का सामना करने के बावजूद, स्वराज जनसेवा के प्रति समर्पित रहीं। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव न लड़ने का फैसला किया और उसी वर्ष के अंत में सक्रिय राजनीति से विमुख हो गईं।
सुषमा स्वराज का निधन 6 अगस्त, 2019 को हृदयाघात के कारण हुआ। राष्ट्र के प्रति उनके अपार योगदान को मान्यता देते हुए, उन्हें 2020 में मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। उनकी विरासत राजनीतिक नेताओं और नागरिकों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
राष्ट्रीय समाचार
कुछ साल पेट्रोल-डीजल की गाड़ियां खरीदने से बचें, ई20 नीति पर केजरीवाल ने उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण पर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि सरकार पहले ई20 पेट्रोल लागू कर चुकी है और अब आगे चलकर इसमें 50 फीसदी तक इथेनॉल मिलाने की तैयारी कर रही है।
अरविंद केजरीवाल ने लिखा, “केंद्र सरकार का क्या प्लान है? पता चल रहा है कि पेट्रोल में 50 प्रतिशत से ज्यादा की मिलावट करेंगे। अभी बस माहौल शांत होने का इंतजार कर रहे हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सरकार ने ई0 और ई10 वाली पुरानी गाड़ियों में जबरदस्ती ई20 पेट्रोल डलवाकर उन्हें कबाड़ा किया। अब जो लोग नई ई20 गाड़ी खरीद रहे हैं, उनके साथ भी यही होगा। आज अगर आप ई20 गाड़ी खरीदते हैं तो सरकार कुछ दिन बाद उसमें जबरदस्ती ई50 पेट्रोल डालकर उसका कबाड़ा कर देगी।
केजरीवाल ने कहा कि सरकार जल्द ही डीजल में भी मिलावट करने वाली है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अभी कुछ वर्ष आप पेट्रोल और डीजल की नई गाड़ियां खरीदने से बचें।
केजरीवाल ने द ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट को भी रीपोस्ट किया। रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में ई20 पेट्रोल लागू होने के बाद पुरानी पेट्रोल गाड़ियों का बाजार करीब 1,000 करोड़ रुपए तक गिर गया है। डीलरों का कहना है कि खरीदार अब डीजल गाड़ियों और इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ शिफ्ट कर रहे हैं।
ई20 का मतलब है 20 फीसदी इथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल। सरकार का तर्क है कि इससे दो फायदे होंगे। पहला, गाड़ियों से निकलने वाला कार्बन कम होगा और दूसरा कच्चे तेल के आयात पर खर्च घटेगा, लेकिन इस नीति को लेकर बहस भी तेज है। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पुरानी गाड़ियां ई20 के साथ ठीक से चल पाएंगी। विशेषज्ञों का कहना है कि ई20 इस्तेमाल करने पर गाड़ी की माइलेज में 2 से 6 फीसदी तक कमी आ सकती है।
फिलहाल सरकार की तरफ से ई50 या डीजल में मिलावट को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन केजरीवाल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
राजनीति
गृहमंत्री अमित शाह सदन का सम्मान करें और सवालों का जवाब दें : सुखदेव भगत

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करते हुए भारतीय जनता पार्टी सरकार और आरएसएस को घेरा। सांसद ने गृहमंत्री से अपील की कि वे सदन का सम्मान करते हुए हाल ही हुए प्रमुख मुद्दों पर जनता को जवाब दें।
भाजपा द्वारा संसद की कार्यवाही न चलने देने का आरोप लगाए जाने पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत सिंह ने बातचीत में कहा, “देश जानना चाहता है कि अमित शाह सदन में कब आएंगे और जवाब देंगे। गृह मंत्री सदन का सम्मान करें और सवालों का समाधान करें। महत्वपूर्ण सदन चल रहा है लेकिन गृह मंत्री सदन से गायब हैं और अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। अमित शाह अपनी पार्टी के कार्यक्रम में शामिल होते हैं लेकिन देश की जनता को जवाब देने के लिए सदन में नहीं आ रहे हैं। इसलिए भारतीय जनता पार्टी को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए।”
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि आरएसएस इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रहा है। इस पर सुखदेव भगत ने कहा, “मेरा मानना है कि आरएसएस आज भी हीनभावना से ग्रस्त है। आजादी की लड़ाई में पूरे देश ने हिस्सा लिया था और समाज के हर वर्ग के लोगों ने अपने-अपने तरीके से ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। हालांकि, ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान आरएसएस अंग्रेजों के साथ खड़ा था। जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या हुई, तो आरएसएस से जुड़े लोग सीधे तौर पर उसमें शामिल पाए गए थे। उन्होंने हमारे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया है, कभी भी अपने मुख्यालय पर इसे नहीं फहराया और कभी भी संविधान को सच्चे मन से स्वीकार नहीं किया।”
तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के बयान पर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “निश्चित रूप से उदयनिधि स्टालिन के कद को देखते हुए हम उम्मीद करते हैं कि वे शब्दों के चयन में संयम बरतेंगे। दूसरी बात, उन्हें नैतिक मूल्यों का पालन करना चाहिए। खासकर महिलाओं पर अनुचित टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए क्योंकि ये राजनीतिक मर्यादा के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।”
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