राजनीति
प्रत्येक भारतीय का ध्यान रखती है हमारी सरकार: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार को प्रत्येक भारतीय का ध्यान रखने और उनके लिए चिंतित रहने वाली सरकार बताते हुए अपनी सरकार की 8 साल की उपलब्धियों को गिनाया है। प्रधानमंत्री ने अपने 8 वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों की एक सीरीज की तस्वीर को ट्विटर पर शेयर करते हुए सीमा पार आतंकवाद के जवाब में किए गए सर्जिकल एवं एयर स्ट्राइक, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने, टीकाकरण अभियान की ऐतिहासिक कामयाबी, कोविड के दौरान विदेशों में फंसे 1.83 करोड़ भारतीयों की स्वदेश वापसी, रूस-यूक्रेन की लड़ाई की वजह से फंसे 22500 से ज्यादा भारतीयों की सुरक्षित वापसी, आतंकी हमलों में 52 प्रतिशत की कमी , नक्सली हमलों में 41 प्रतिशत की कमी , रक्षा निर्यात में 6 गुना बढ़ोतरी और दुनिया के कई देशों के साथ ऐतिहासिक व्यापार सौदों पर किए गए हस्ताक्षर को सरकार की बड़ी उपलब्धि करार दिया है। प्रधानमंत्री ने ‘8 साल के सुशासन’ की मुख्य बातों को बताने के लिए पिछले 8 वर्षों के दौरान देश के शासन में किए गए विभिन्न पहलों और सुधारों के बारे में अपनी वेबसाइट नरेंद्रमोदी डॉट इन और माईगॉव से लेख और ट्वीट थ्रेड को शेयर किया है। आपको बता दें कि, ये लेख और ट्वीट थ्रेड – आत्मनिर्भर भारत के विभिन्न आयामों, शासन का लोक-केंद्रित और मानवीय ²ष्टिकोण, रक्षा क्षेत्र के सुधार और गरीब-समर्थक शासन को बढ़ावा देने के प्रयासों से संबंधित हैं।
प्रधानमंत्री ने सिलसिलेवार तरीके से कई ट्वीट करते हुए सरकार के ²ष्टिकोण, कामकाज की रणनीति और 8 साल की उपलब्धियों को बताने का प्रयास किया है।
आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में हासिल की गई कामयाबी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा, 130 करोड़ भारतीयों ने फैसला किया है कि वे भारत को आत्मानिर्भर बनाएंगे। आत्मनिर्भरता पर हमारा जोर, वैश्विक समृद्धि में योगदान करने की ²ष्टि से प्रेरित है।
उन्होंने अपने अगले ट्वीट में कहा, हमारी सरकार एक ऐसी सरकार है, जो प्रत्येक भारतीय का ध्यान रखती है और उसके लिए चिंतित रहती है। हम लोक-केंद्रित और मानवीय ²ष्टिकोण से प्रेरित हैं।
सबका साथ सबका विकास के मूल मंत्र की बात करते हुए पीएम मोदी ने अपने अगले ट्वीट में कहा, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र से प्रेरित होकर हमारी सरकार ने लोक-समर्थक शासन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए हैं, जो गरीबों, युवाओं, किसानों, महिलाओं और वंचित समुदाय की मदद करते हैं।
राजनीति
अखिलेश का दावा, एसआईआर पर चुनाव आयोग में ही मतभेद, बताया- लोकतंत्र के लिए घातक

चुनावी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर सामने आए मतभेद ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों और आदेशों को अपनी जानकारी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए हैं। इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े किए और सर्वोच्च न्यायालय से मामले में स्वत: संज्ञान लेने की अपील की।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और खतरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले।”
ज्ञात हो कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब 10 महीनों के दौरान तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग के भीतर ही एसआईआर से जुड़े कई अहम फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठते रहे। ये आपत्तियां आयोग के दो चुनाव आयुक्तों-सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज कराई गईं। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की देशव्यापी प्रक्रिया तीनों चुनाव आयुक्तों की निगरानी में चल रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई। इनमें एक ही दिन चार बार आपत्ति दर्ज किए जाने का भी उल्लेख है। दोनों चुनाव आयुक्तों का कहना था कि संबंधित फैसले या आदेश उनकी जानकारी अथवा सहमति के बिना लिए या जारी किए गए। इन आपत्तियों का दायरा निर्वाचन आयोग के उन महत्वपूर्ण कार्यों से जुड़ा है, जिनका सीधा संबंध मतदाता के अधिकार और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से है।
इनमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाना और हटाए गए नामों को दोबारा बहाल करना, एसआईआर के दौरान नाम बहाल किए जाने के आदेशों के खिलाफ अपील की प्रक्रिया तथा पूरी मतदाता सूची के डेटा की कस्टडी और सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन मामलों में दर्ज आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त को भी भेजी गई थीं।
राष्ट्रीय समाचार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को सोशल मीडिया पर अदालती दस्तावेज पोस्ट करने के खिलाफ चेतावनी दी

एक वकील ने मंगलवार को बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने ब्रिटेन में रहने वाले ‘भगोड़े आर्थिक अपराधी’ विजय माल्या को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई जारी रहने के दौरान अदालती दस्तावेज सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने की चेतावनी दी है।
वकील आशीष मेहता ने बताया कि कथित तौर पर ब्रिटेन में मौजूद भगोड़े व्यवसायी को हाई कोर्ट का यह निर्देश ईडी द्वारा माल्या को जांच एजेंसी के हलफनामे को अदालत द्वारा उस पर विचार किए बिना ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपलोड करने पर आपत्ति जताने के बाद आया है।
मामले की सुनवाई 13 अक्टूबर को तय करते हुए हाई कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को ईडी द्वारा किए गए खुलासों को ध्यान में रखते हुए एक नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
इससे पहले, माल्या ने फरवरी में हाई कोर्ट को बताया था कि वह यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि वह भारत कब लौटेंगे।
उन्होंने इंग्लैंड की अदालतों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का हवाला दिया, जिनके कारण वह देश छोड़ने में असमर्थ हैं।
उच्च न्यायालय माल्या द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।
एक याचिका में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) के तहत ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किए जाने को चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी याचिका में उन्हें औपचारिक रूप से भगोड़ा घोषित करने वाले अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है।
माल्या की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें याचिकाकर्ताओं की अनुपस्थिति में भी रिट याचिकाओं की सुनवाई हुई थी।
उन्होंने कहा कि माल्या के खिलाफ ब्रिटेन में प्रत्यर्पण की कार्यवाही चल रही है और उनके मुवक्किल को इसकी जानकारी है, लेकिन बाध्यकारी अदालती आदेशों के कारण वे ब्रिटेन नहीं छोड़ सकते।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने माल्या के अदालत में पेश होने के इरादे पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे ब्रिटेन के अदालती आदेशों पर भरोसा कर रहे हैं, जबकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन आदेशों को चुनौती दी गई है या नहीं।
अदालत ने संकेत दिया कि इस तरह के भरोसे को सर्वमान्य औचित्य नहीं माना जा सकता।
अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को माल्या के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने देसाई को सुनवाई के दौरान दिए गए सभी बयानों को रिकॉर्ड पर रखते हुए एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने को भी कहा, ताकि भारत सरकार तदनुसार जवाब दे सके।
राष्ट्रीय समाचार
स्पाइसजेट की वित्तीय और परिचालन स्थिति पर सरकार की कड़ी नजर, सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं: नागर विमानन मंत्री

केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि सरकार और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) स्पाइसजेट की वित्तीय और परिचालन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिस्थिति में यात्री सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।
स्पाइसजेट की स्थिति पर सरकार की निगरानी को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि डीजीसीए को एयरलाइन के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन दोनों की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके।
नायडू ने कहा कि नियामक लगातार स्पाइसजेट के प्रदर्शन की निगरानी कर रहा है और एयरलाइन के साथ नियमित संवाद बनाए हुए है। सरकार भी कंपनी के साथ बातचीत कर रही है और उसे अपनी परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, ताकि वह अपने कारोबार को स्थिर कर सके।
स्पाइसजेट पिछले कुछ समय से वित्तीय दबाव, घटते विमान बेड़े और घरेलू बाजार हिस्सेदारी में कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। एयरलाइन परिचालन क्षमता बहाल करने और वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटाने के प्रयास कर रही है।
मंत्री ने बताया कि स्पाइसजेट इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) के तहत वित्तीय सहायता की संभावनाएं भी तलाश रही है। हाल ही में सरकार ने इस योजना का विस्तार कर विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं।
इस महीने सरकार ने ईसीएलजीएस 5.0 को मंजूरी देते हुए विमानन क्षेत्र के लिए 5,000 करोड़ रुपए के लक्षित ऋण समर्थन की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य एयरलाइंस को वित्तीय दबाव कम करने में मदद करना है।
सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की ऊंची कीमतें, हवाई क्षेत्र संबंधी प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कमी जैसी वजहों से विमानन उद्योग दबाव में है।
इन चुनौतियों के बावजूद नागर विमानन मंत्री ने दोहराया कि सुरक्षा मानकों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मंत्रालय और डीजीसीए यह सुनिश्चित करने पर फोकस कर रहे हैं कि वित्तीय या परिचालन चुनौतियों का असर नियामकीय अनुपालन और यात्रियों की सुरक्षा पर न पड़े।
स्पाइसजेट के साथ सरकार का यह निरंतर संवाद ऐसे समय हो रहा है, जब एयरलाइन भारत के तेजी से बढ़ते विमानन बाजार में अपनी क्षमता बढ़ाने, वित्तीय स्थिति सुधारने और खोई हुई बाजार हिस्सेदारी वापस हासिल करने की कोशिश कर रही है।
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