राजनीति
सूचना मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘एससी/एसटी आरक्षण में कोई ‘क्रीमी लेयर’ प्रावधान नहीं है।’
नई दिल्ली: केंद्र ने शुक्रवार को कहा कि संविधान में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं है, जैसा कि बीआर अंबेडकर ने परिकल्पित किया था, कोटा के भीतर कोटा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कुछ दिनों बाद। कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए सूचना मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विस्तृत चर्चा हुई और कैबिनेट का मानना था कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार संविधान के प्रावधानों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
वैष्णव ने कहा, “संविधान के अनुसार, एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर का कोई प्रावधान नहीं है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रावधान संविधान के अनुरूप होना चाहिए।
यह पूछे जाने पर कि क्या यह मुद्दा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा उठाया गया था, वैष्णव ने कहा कि यह मंत्रिमंडल द्वारा सुविचारित विचार है।
विपक्ष से कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, ‘समाज को गुमराह न करें’
इससे पहले, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्ष से कहा कि वे एससी/एसटी आरक्षण से बाहर रखने के लिए क्रीमी लेयर बनाने पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की “टिप्पणियों” पर समाज को “गुमराह” न करें।
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों के उत्तर में मेघवाल ने कहा, “एससी/एसटी के उपवर्गीकरण में क्रीमी लेयर का संदर्भ सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की गई टिप्पणी है, न कि निर्णय का हिस्सा। सदस्य को समाज को गुमराह करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।”
भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले के बारे में
पिछले सप्ताह सर्वोच्च न्यायालय ने बहुमत के फैसले में कहा कि राज्यों को वंचित जातियों के उत्थान के लिए आरक्षित श्रेणी के अंदर उप-कोटा बनाने का अधिकार है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 6:1 बहुमत से माना कि राज्यों द्वारा एससी और एसटी के आगे उप-वर्गीकरण की अनुमति दी जा सकती है ताकि इन समूहों के भीतर अधिक पिछड़ी जातियों को कोटा प्रदान करना सुनिश्चित किया जा सके।
महाराष्ट्र
नगर निगम ने मूर्ति बनाने से लेकर उसकी डिलीवरी तक का रिकॉर्ड रखने के बारे में कोई निर्देश जारी नहीं किया है।

मुंबई; अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और दूसरे चैनलों पर ऐसी खबरें चल रही हैं कि गणेश की मूर्तियों के लिए ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ ज़रूरी कर दिया जाएगा और मूर्ति की यात्रा का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। (ऑर्गनाइज्ड ग्रुप) हालांकि, ये खबरें असल में गलत हैं क्योंकि मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) एडमिनिस्ट्रेशन ने ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया है।
बीएमसी ने गणेश उत्सव मंडलों और भक्तों से अपील की है कि ऐसी जानकारी पर विश्वास न करें।
बीएमसी ने एक टन से ज़्यादा वज़न वाली गणेश मूर्तियों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट ज़रूरी करने का न तो कोई फ़ैसला लिया है और न ही कोई निर्देश जारी किया है और न ही बनाने से लेकर डिलीवरी तक की पूरी जानकारी रिकॉर्ड करना ज़रूरी किया है। इसलिए, म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन साफ़ करता है कि लोग सोशल मीडिया पर चल रहे इस मामले से जुड़े मैसेज या रिपोर्ट पर भरोसा न करें।
इस बीच, गणेश उत्सव के मौके पर गणेश मूर्तियों के आने के दौरान सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाना चाहिए। म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन गणेश उत्सव मंडलों से अपील करता है कि मूर्तियों के आने के जुलूस की प्लानिंग करते समय वे पुलिस डिपार्टमेंट, ट्रैफिक डिपार्टमेंट और बीएमसी के साथ कोऑर्डिनेट करें। बीएमसी ने सभी गणेश उत्सव मंडलों से भी अपील की है कि वे संबंधित अधिकारियों के साथ कोऑर्डिनेट करें और ज़रूरी सावधानी बरतें ताकि त्योहार उत्साह, सुरक्षा और आसानी से मनाया जा सके।
महाराष्ट्र
ईद मिलाद-उन-नबी 2026: मुंबई में भव्य जश्न के साथ मनाया गया यह त्योहार; सीएम फडणवीस और नेताओं ने दीं शुभकामनाएं

मुंबई में बुधवार को ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिनारा मस्जिद समेत शहर के विभिन्न इलाकों में नमाज अदा की और विशेष दुआएं मांगीं।
इस मुबारक मौके पर एक स्थानीय निवासी ने दिन की अहमियत बताते हुए कहा, “यह अल्लाह की रहमत और बरकत का दिन है। अल्लाह तआला आज के इस पाक दिन हमारी तमाम परेशानियों को दूर करें। पूरी मुस्लिम कौम को अपनी हिफाजत में रखें और मुंबई शहर को हमेशा महफूज रखें। अल्लाह हमें बार-बार इस मुबारक दिन को देखने का मौका दे। दिनभर प्रमुख हस्तियों और मशहूर लोगों के आने की उम्मीद है। लोगों के बीच खाना बांटा जाएगा और जुलूस व विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।”
ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर लोगों को बधाई दी। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “मिलाद-उन-नबी की शुभकामनाएं। मुझे उम्मीद है कि यह अवसर हमारे बीच एकता और खुशियों को और बढ़ाएगा। दया और समाज के लिए योगदान की भावना हमेशा हमारा मार्गदर्शन करती रहे।”
कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी एक्स के जरिए अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी के लिए “शांति, खुशी, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य” की कामना की।
ईद मिलाद-उन-नबी के अवसर पर मुंबई की विभिन्न दरगाहों को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाया गया है, जिससे शहर में त्योहार का माहौल नजर आ रहा है। मुंबई की माहिम दरगाह से सामने आई तस्वीरों और वीडियो में दरगाह रंग-बिरंगी रोशनी से सजी दिखाई दी, जहां बड़ी संख्या में जायरीन और श्रद्धालु दुआ और इबादत के लिए पहुंचे।
ईद मिलाद-उन-नबी, जिसे मौलिद भी कहा जाता है, पैगंबर हजरत मुहम्मद के जन्मदिवस की याद में मनाया जाता है। इस अवसर को पारंपरिक रूप से इस्लामी चंद्र कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-अल-अव्वल की 12वीं तारीख को मनाया जाता है।
दुनियाभर में मुस्लिम समुदाय इस दिन पैगंबर मुहम्मद की जिंदगी, उनकी शिक्षाओं और उनके संदेश को याद करता है। इस दौरान रहमदिली, इंसानियत, न्याय और आपसी भाईचारे जैसे मूल्यों पर विशेष जोर दिया जाता है।
ईद मिलाद-उन-नबी के अवसर पर महाराष्ट्र के स्कूल और कॉलेजों में अवकाश घोषित किया गया है। वहीं, बैंक और कई कार्यालय भी बंद रहे, ताकि लोग इस पवित्र अवसर को धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मना सकें।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया मिलकर करेंगे ‘फ्रीडम एज’ सैन्य अभ्यास

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सैन्य कटौती का आदेश दे दक्षिण कोरिया के साथ जारी अभ्यास पर विराम लगा दिया था। इसी बीच त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास की खबर सामने आई है। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ इस साल की त्रिपक्षीय सैन्य कवायद ‘फ्रीडम एज’ आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। अमेरिकी प्रशांत कमान (पीएकॉम) ने बुधवार को इसकी पुष्टि की।
योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, पीएकॉम की प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कमांडर क्लो मॉर्गन ने कहा कि अमेरिकी कमान जापान के सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज और दक्षिण कोरियाई सशस्त्र बलों के साथ करीबी समन्वय में 2026 के फ्रीडम एज अभ्यास की तैयारी कर रही है।
उन्होंने इसे एक प्रमुख बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभ्यास बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य तीनों देशों के बीच साझा मूल्यों और सैन्य अंतर-संचालन क्षमता को मजबूत करना तथा रक्षा साझेदारी को और गहरा करना है, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।
हालांकि, अमेरिकी कमान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस साल का अभ्यास पिछले आयोजनों की तरह ही बड़े पैमाने पर होगा या नहीं। फ्रीडम एज का आयोजन इससे पहले जून और नवंबर 2024 तथा सितंबर 2025 में किया जा चुका है। पिछले अभ्यास दक्षिण कोरिया के दक्षिणी द्वीप जेजू के आसपास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुए थे।
इस अभ्यास को लेकर खास दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश के बाद अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने अपने प्रमुख संयुक्त सैन्य अभ्यास उल्ची फ्रीडम शील्ड (यूएफएस) का आकार और अवधि कम कर दी है। यह अभ्यास 17 से 27 अगस्त तक होना था, लेकिन इसे लगभग आधा कर दिया गया और कुछ फील्ड ट्रेनिंग गतिविधियों में भी कटौती की गई।
ट्रंप ने संयुक्त सैन्य अभ्यासों को कम करने की मांग करते हुए कहा था कि ऐसे अभ्यास उत्तर कोरिया को “शत्रुतापूर्ण” संदेश दे सकते हैं। यह रुख ऐसे समय आया है जब उन्होंने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ फिर से बातचीत शुरू करने की इच्छा जताई है।
इसके बावजूद फ्रीडम एज की तैयारी यह संकेत देती है कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया-जापान की त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी जारी है। यह अभ्यास अगस्त 2023 में कैंप डेविड शिखर सम्मेलन के दौरान तीनों देशों के नेताओं द्वारा सुरक्षा सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में किए गए फैसलों का एक प्रमुख परिणाम माना जाता है।
उत्तर कोरिया इन सैन्य अभ्यासों का लगातार विरोध करता रहा है। प्योंगयांग अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यासों को संभावित आक्रमण की तैयारी बताता है, जबकि तीनों देश इन्हें रक्षात्मक और क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत करने वाला अभ्यास बताते हैं। पिछले साल उत्तर कोरिया ने फ्रीडम एज को आक्रामक युद्धाभ्यास करार देते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।
फ्रीडम एज का इस साल आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका एक ओर उत्तर कोरिया के साथ संवाद की संभावना तलाश रहा है और दूसरी ओर दक्षिण कोरिया तथा जापान के साथ अपनी सुरक्षा साझेदारी को मजबूत बनाए रखना चाहता है।
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