अंतरराष्ट्रीय समाचार
न्यूजीलैंड में डेल्टा वेरिएंट से जुड़े 33 नए मामले सामने आए
न्यूजीलैंड ने सोमवार को ऑकलैंड के सबसे बड़े शहर में कोविड -19 डेल्टा वेरिएंट के 33 नए मामलों की सूचना दी, जिससे देश के सामुदायिक प्रकोप में कुल मामलों की संख्या 955 हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान सामुदायिक मामलों में से 21 मामले अस्पताल में हैं, जिनमें चार मामले गहन देखभाल इकाइयों (आईसीयू) और उच्च निर्भरता इकाइयों (एचडीयू) में हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, ऑकलैंड ने 938 सामुदायिक मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से 17 राजधानी वेलिंगटन में दर्ज किए गए हैं।
ऐसे 928 मामले हैं जो स्पष्ट रूप से किसी अन्य मामले और उप-क्लस्टर से महामारी विज्ञान से जुड़े हुए हैं।
न्यूजीलैंड ने भी हाल ही में लौटने वालों में तीन नए मामले दर्ज किए।
बयान में कहा गया है कि ये मामले भारत और सर्बिया और मोंटेनेग्रो से आए हैं और ऑकलैंड और क्राइस्टचर्च में प्रबंधित अलगाव और क्वारंटीन सुविधाओं में बने हुए हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, महामारी की शुरूआत के बाद से न्यूजीलैंड में कुल पुष्टि मामलों की संख्या 27 मौतों के साथ 3,949 है।
ऑकलैंड के बाहर के इलाकों को रात 11.59 बजे से मंगलवार तक अलर्ट लेवल 2 पर ले जाया गया। जिसका अर्थ है कि व्यवसाय और स्कूल वापस सामान्य हो गए हैं, कुछ सेटिंग्स और सभाओं में मास्क अनिवार्य हैं, और उसमें 50 लोगों ही शामिल हो सकते हैं।
सरकार अपने अलर्ट स्तर के फैसलों की घोषणा सोमवार को बाद में करेगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत और रूस के रक्षा मंत्रियों की मुलाकात, अंतरराष्ट्रीय हालात व रक्षा सहयोग पर बात

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव के साथ मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद राजनाथ सिंह ने इस बातचीत को बेहतरीन और सार्थक बताया। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान मंगलवार को भारत और रूस के बीच यह अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। खास तौर पर रक्षा सहयोग, सैन्य तकनीक और संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। भारत और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत रक्षा संबंध रहे हैं।
भारतीय सशस्त्र बलों में उपयोग होने वाले कई प्रमुख सैन्य उपकरण और प्लेटफॉर्म रूस से जुड़े हैं। इसमें लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और मिसाइल प्रणाली जैसे अहम संसाधन शामिल हैं, जो भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाते हैं। दोनों देश रक्षा उत्पादन में सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति जताते रहे हैं। भारत में ही संयुक्त रूप से रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे देश की आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी और तकनीकी क्षमता में भी वृद्धि होगी।
दोनों पक्ष समय समय पर रक्षा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी करते हैं। तय समयसीमा में रक्षा परियोजनाओं को पूरा को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति है। माना जा रहा है कि सैन्य-तकनीकी सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए नए क्षेत्रों की पहचान पर भी यहां चर्चा हुई।
इससे पहले मंगलवार को ही रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के बीच एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई है। यह मुलाकात भी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के इतर आयोजित की गई। दोनों देशों के रक्षामंत्रियों ने यहां क्षेत्रीय सुरक्षा और आपसी सहयोग पर चर्चा की। राजनाथ सिंह यहां एससीओ के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ भी द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। वह किर्गिस्तान में रह रहे भारतीय समुदाय से भी मुलाकात करेंगे।
माना जा रहा है कि इस उच्चस्तरीय बातचीत के दौरान दोनों देशों के रक्षामंत्रियों ने एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति व क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर विचार विमर्श किया। साथ ही भारत-चीन के बीच संवाद को मजबूत करने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। वहीं सीमा क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और तनाव कम करने के लिए प्रभावी संचार तंत्र को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एससीओ जैसे मंच पर इस तरह की द्विपक्षीय वार्ताएं सदस्य देशों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ाती हैं। बिश्केक में हुई यह बैठकें भारत-रूस के रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
व्हाइट हाउस डिनर अटैक से पहले हमलावर ने परिवार से मांगी थी माफी, कैलिफोर्निया से खरीदे थे हथियार

व्हाइट हाउस के संवाददाता रात्रिभोज के दौरान फायरिंग मामले की जांच में एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने हथियारों के साथ आरोपी कोल टॉमस एलन को हिरासत में ले लिया था और उससे व्यापक पूछताछ जारी है। इस बीच अधिकारियों ने बताया है कि संदिग्ध बंदूकधारी राष्ट्रपति और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को निशाना बनाने वाला था और इसके लिए उसने बड़ी सावधानीपूर्वक साजिश रची थी।
अधिकारियों ने ये भी बताया कि आरोपी एलन जो करने जा रहा था, इस बारे में उसने हमले के कुछ समय पहले ही परिवार के सदस्यों और एक पूर्व नियोक्ता को ईमेल के माध्यम से जानकारी दी थी, जिसमें “माफी और स्पष्टीकरण शीर्षक वाला एक दस्तावेज संलग्न था।
ईमेल में एलन ने लिखा, “मैंने जो भी परेशानी पैदा की है, उसके लिए मैं तहे दिल से माफी मांगता हूं और साथ ही यह भी कहा कि वह जो करने वाला है उसके लिए उसे माफी की उम्मीद नहीं है। मेरे प्रतिनिधियों के कार्यों का मुझ पर प्रभाव पड़ता है और मैं अब अपराधों को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हूं।”
अमेरिकी अटॉर्नी जीनिन पिरो ने कहा कि लिखित दस्तावेज को देखने के बाद इसमें कोई संदेह नहीं है कि एलन ने राष्ट्रपति की हत्या की कोशिश की। एलन ने अपने संदेश में यह संकेत दिया गया था कि वह सीक्रेट सर्विस से जुड़े लोगों को केवल तभी निशाना बनाया जाएगा जब जरूरी हो।
होटल के कर्मचारी और मेहमान इसके निशाने पर नहीं होंगे। अगर बिलकुल जरूरी हुआ तो वह लगभग हर किसी को मार डालेगा। उसकी यह स्वीकारोक्ति खतरे की संभावित भयावहता को जाहिर करता है। जांचकर्ताओं ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ईमेल को हमले से पहले एक विशिष्ट समय पर भेजने के लिए शेड्यूल किया गया था।
इतना ही नहीं आरोपी ने इसके लिए कई जगहों की यात्रा की थी और हमले को अंजाम देने से पहले होटल के अंदर अपनी स्थिति का जायजा लिया था। अधिकारियों ने बताया कि कोल टॉमस एलन ने 25 अप्रैल के कार्यक्रम से काफी पहले ही तैयारी शुरू कर दी थी। वह राष्ट्रपति के तय आगमन पर नजर रख रहा था और उसी स्थान पर अपने आवास की व्यवस्था कर ली थी।
एक संघीय हलफनामे के अनुसार, एलन ने 6 अप्रैल को वाशिंगटन हिल्टन में 24 से 26 अप्रैल तक तीन रातों के लिए बुकिंग कराइए थी। यह बुकिंग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सार्वजनिक रूप से रात्रिभोज में शामिल होने की पुष्टि के हफ्तों बाद की गई थी। एलन ने 21 अप्रैल को लॉस एंजिल्स के पास स्थित अपने घर से ट्रेन से यात्रा शुरू की और 23 अप्रैल को शिकागो पहुंचा। इसके बाद वह वाशिंगटन डीसी के लिए रवाना हुए, जहां वे 24 अप्रैल को दोपहर लगभग 1 बजे पहुंचा।
दोपहर लगभग 3 बजे वह होटल पहुंचा और रातभर वहीं रुका रहा, उसने खुद को उसी इमारत के अंदर रखा, जहां वह हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम आयोजित होने वाला था। अधिकारियों ने बताया कि कोल टॉमस एलन को रात्रिभोज के कार्यक्रम और वरिष्ठ अमेरिकी नेताओं की उपस्थिति की जानकारी थी। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और मंत्रिमंडल के अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित यह कार्यक्रम होटल के कॉनकोर्स तल पर स्थित एक बैंक्वेट हॉल में रात लगभग 8 बजे शुरू हुआ।
लगभग 40 मिनट बाद एलन ने अपना काम शुरू किया। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लेंच ने कहा, “लगभग 8.40 बजे एलन होटल के टेरेस लेवल पर एक सुरक्षा चौकी के पास पहुंचा। अधिकारियों ने बताया कि वह एक लंबी बंदूक लेकर मैग्नेटोमीटर से होकर गुजरा। कुछ ही क्षणों बाद गोली चलने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। चेकपॉइंट पर तैनात एक सीक्रेट सर्विस अधिकारी को सीने में गोली लगी थी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने के कारण वह बच गया।
अधिकारी ने जवाबी फायरिंग की और इसके बाद एलन को तुरंत काबू कर लिया गया। ब्लेंच ने कहा कि यह हमला अचानक नहीं हुआ था, बल्कि वेल प्लांड था। जांचकर्ताओं ने बताया कि एलन के पास कई हथियार थे, जिनमें 12-गेज शॉटगन और 38 कैलिबर की पिस्तौल शामिल थी। एलन ने ये हथियार कैलिफोर्निया में खरीदे थे और वाशिंगटन पहुंचने से पहले उन्हें राज्य की सीमाओं के पार ले गया था।
अमेरिकी अटॉर्नी जीनिन पिरो ने कहा कि घटनाक्रम से स्पष्ट इरादा जाहिर होता है। उन्होंने कहा, वह पूरी तरह से सचेत था। उसने बैंक्वेट हॉल में घुसने का फैसला किया लेकिन कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने मुख्य कार्यक्रम में पहुंचने से पहले ही उसे रोक दिया। जांचकर्ताओं ने बताया कि संदिग्ध के होटल के कमरे, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और यात्रा इतिहास से अतिरिक्त सबूतों की समीक्षा की जा रही है। आरोपी की इस काम में किसी ने मदद की थी या नहीं, उसकी भी जांच की जा रही है।
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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से देश में निवेश बढ़ेगा, अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स को होगा फायदा

भारत-न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर सोमवार को साइन होंगे। न्यूजीलैंड की सरकार इसे एक पीढ़ी में एक बार आने वाला मौका बता रही है। वहीं, भारत को भी इस समझौते से काफी फायदा होगा। इससे देश में निवेश बढ़ेगा, साथ ही अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स के लिए ज्यादा मौके पैदा होंगे।
एफटीए के तहत न्यूजीलैंड ने अपनी 95 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर भारतीय निर्यात के लिए शुल्क में कमी की है। इससे न्यूजीलैंड में भारतीय उत्पादों के लिए बड़े स्तर पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस का रास्ता खुला है।
इस एफटीए के लागू होने के बाद भारत से अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स जैसे टेक्सटाइल, प्लास्टिक, लेदर और इंजीनियरिंग के उत्पाद जीरो ड्यूटी पर न्यूजीलैंड में प्रवेश कर पाएंगे, जिन पर फिलहाल औसत 2.3 प्रतिशत टैरिफ है।
इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने भारत में अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने का ऐलान किया है।
एफटीए से भारतीय पेशेवरों के लिए भी उच्च वेतन वाले रोजगार के अवसर खुलेंगे। समझौते के तहत कौशल युक्त भारतीय पेशेवरों को न्यूजीलैंड अस्थायी रोजगार वीजा देगा, जिसके तहत पेशेवर न्यूजीलैंड में तीन साल तक रहकर कार्य कर सकेंगे। हालांकि, यह कोटा 5,000 वीजा का निर्धारित किया गया है।
इससे आईटी, एजुकेशन, फाइनेंशियल सर्विसेज, पर्यटन, कंस्ट्रक्शन और अन्य बिजनेस सर्विसेज से जुड़े पेशेवरों को फायदा होगा।
इस एफटीए में आपसी हितों का ध्यान रखा गया है। इस वजह से इससे न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भी फायदा होगा।
भारत ने न्यूजीलैंड को अपनी करीब 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर छूट प्रदान की है, जिसमें से 54.11 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर छूट इस समझौते के लागू होने के पहले दिन से ही शुरू हो जाएगी। इसमें भेड़ों का मांस, ऊन, कोयला और वानिकी से जुड़े उत्पाद शामिल हैं।
भारत ने न्यूजीलैंड के सेब, किवीफ्रूट, शहद और अन्य उत्पादों को टैरिफ छूट में रखा है। हालांकि, इसके लिए कोटा और न्यूनतम आयात कीमत (एमआईपी) को निर्धारित किया गया है। साथ ही, इस समझौते के तहत कई समुद्री उत्पादों जैसे मसल्स और सैल्मन पर लगने वाला शुल्क सात साल की अवधि में समाप्त कर दिया जाएगा।
भारत सरकार ने किसानों और एमएसएमई के हितों का ध्यान रखते हुए डेयरी, पशु उत्पाद, सब्जियों और चीनी जैसे उत्पादों को इस एफटीए से बहार रखा है।
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